बागमती प्रदेश सरकार की सिफारिश के अनुसार, काठमांडू उपत्यका में न्यूनतम गाड़ी किराया 25.96 प्रतिशत से बढ़ाकर 23.93 रुपए करने की तैयारी है। प्रदेश यातायात मंत्रालय ने पेट्रोलियम पदार्थों से चलने वाली टैक्सी पर 12.39 प्रतिशत और मालवाहक वाहनों पर 26.79 प्रतिशत किराया वृद्धि की सिफारिश की है। इलेक्ट्रिक वाहनों का किराया 1 वैशाख 2079 को निर्धारित दर पर कायम रहेगा और किराया समायोजन के लिए प्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तैयारी चल रही है।
27 चैत्र, काठमांडू। बागमती प्रदेश में गाड़ी किराया बढ़ाने की तैयारी चल रही है। बागमती प्रदेश सरकार के श्रम, रोजगार तथा यातायात मंत्री जयराम थापा की उपस्थिति में हुई किराया निर्धारण/समायोजन सिफारिश समिति की बैठक ने काठमांडू उपत्यका में न्यूनतम किराया दर में 25.96 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की है। वर्तमान में उपत्यका में न्यूनतम किराया दर (0–5 किलोमीटर दूरी के लिए) 19 रुपए है, जो अब बढ़कर 23.93 रुपए हो जाएगा।
प्रदेश यातायात मंत्रालय की महाशाखा प्रमुख प्रविण श्रेष्ठ के अनुसार किराया दर बढ़ाने की सिफारिश की गई है। मुख्यमंत्री इन्द्रबहादुर बानियाँ काठमांडू में मौजूद हैं और किराया दर स्वीकृत करने की तैयारी चल रही है, इसकी जानकारी उनके निजी सचिव भक्त भंडारी ने दी है। आंतरिक मामले तथा कानून मंत्रालय के कानून उपसचिव भुवन न्यौपाने ने बताया कि किराया दर स्वीकृति के लिए प्रदेश राजपत्र में प्रकाशन की तैयारी मुख्यमंत्री कार्यालय से की जा रही है। इससे पहले काठमांडू में 7 भदौ 2080 को किराया समायोजन किया गया था।
नई सिफारिश के अनुसार, बागमती प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों से चलने वाली टैक्सी का किराया 12.39 प्रतिशत बढ़ेगा। काठमांडू उपत्यका के बाहर के यात्री वाहक सार्वजनिक वाहन में 17.35 प्रतिशत और मालवाहक वाहनों में 26.79 प्रतिशत किराया वृद्धि प्रस्तावित है। बागमती प्रदेश में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों का किराया 1 वैशाख 2079 को निर्धारित दर पर ही बना रहेगा। ईंधन मूल्य में व्यापक वृद्धि के साथ यातायात व्यवसायियों द्वारा किराया समायोजन के लिए लगातार दबाव बनाए जा रहे हैं। इसी आधार पर केंद्र सरकार ने इस सप्ताह लंबी दूरी के यातायात किराए भी बढ़ाए हैं।
२७ चैत्र, काठमाडौं। नव निर्वाचित प्रतिनिधि सभाके उपसभामुख रुबीकुमारी ठाकुर ने पद तथा गोपनीयता की शपथ ग्रहण की है। राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में सभामुख डोलप्रसाद अर्याल ने उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति रामसहाय प्रसाद यादव, राष्ट्रिय सभा अध्यक्ष नारायण दाहाल, प्रधानमन्त्री बालेन्द्र शाह सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारियों ने भाग लिया।
शुक्रवार सम्पन्न चुनाव में राप्रपाकी सरस्वती लामा को पराजित करते हुए रुबीकुमारी विजयी हुईं। उन्होंने इससे पहले श्रम संस्कृति पार्टी से संसद का प्रतिनिधित्व किया था। रुबीकुमारी को उनके दल श्रम संस्कृति के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल रास्वपा, नेपाली कांग्रेस और नेकपाले समर्थन दिया था। राप्रपा ने चुनाव एकल रूप से लड़ा था, जबकि नेकपा एमाले इस चुनाव में भाग नहीं लिया।
२७ चैत, काठमाडौँ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी चुनावी जीत में भूमिका निभाने वाले कुछ पत्रकारों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है। ट्रंप के पूर्व समर्थक टकर कार्लसन, मेगिन केली, कैंडिस ओवेन्स और एलेक्स जोन्स के साथ संबंधों में तनाव देखा गया है। ट्रम्प ने हाल ही में ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से इन पत्रकारों के खिलाफ आक्रामक टिप्पणियाँ की हैं, जिसमें उन्होंने उन्हें ‘पागल’ और ‘उपद्रवी’ बताया है। ये पत्रकार ट्रम्प के ‘मागा’ अभियान के प्रमुख स्तंभ माने जाते थे। लेकिन हाल ही में, उन्होंने ईरान से संबंधित युद्ध के मुद्दे पर ट्रम्प की आलोचना शुरू कर दी है।
पूर्व समर्थनकर्ताओं की आलोचना के बाद ट्रम्प ने अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इन पत्रकारों को अब टेलीविजन से हटा दिया गया है और वे अन्य टीवी कार्यक्रमों में काम पाने में असफल हो रहे हैं, साथ ही उन्होंने उनका उपहास भी किया। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ये पत्रकार केवल अपने पॉडकास्ट का प्रचार करने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने उन पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने के प्रयास की भी निंदा की। ट्रम्प की आलोचना के जवाब में ये पत्रकार सामूहिक विरोध में भी आए हैं।
इन्फोवार्स के संचालक एलेक्स जोन्स ने ट्रम्प की आलोचना करते हुए कहा कि रिपब्लिकन पार्टी को ट्रम्प के मोह को छोड़कर नया रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वे पहले ट्रम्प को जीताने में मदद करते थे, लेकिन अब ट्रम्प ने गलत दिशा पकड़ ली है, इसलिए बदलाव आवश्यक है। जोन्स ने ट्रम्प की स्वास्थ्य स्थिति पर भी प्रश्न उठाए और कहा, ‘हम कभी नहीं बदले हैं, ट्रम्प स्वयं बदल गए हैं।’ वहीं, पत्रकार टकर कार्लसन ने भी ईरान से संबंधित युद्ध के मुद्दे पर ट्रम्प की आलोचना की है। उन्होंने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने के सवाल पर ट्रम्प द्वारा ईरान को दिए गए अपमानजनक और धमकीपूर्ण भाषा की निंदा की।
२७ चैत, पोखरा। नेपाली कांग्रेस गण्डकी प्रदेश कार्यसमिति ने शुक्रवार पोखरा में ‘‘निर्वाचन समीक्षा तथा कांग्रेसको आगामी बाटो’’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में सभापति गगनकुमार थापा भी उपस्थित थे। लेकिन, पूरे कार्यक्रम के दौरान सभापति थापा का चेहरा न तो प्रसन्न दिखा और न ही कोई उत्साह प्रकट हुआ। समीक्षा कार्यक्रम में प्रदेश के जिला सभापति, प्रत्यक्ष एवं समानुपातिक उम्मीदवारों तथा केन्द्रीय पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। गगन ने सभी के विचार ध्यानपूर्वक सुने, फिर भी उनका उत्साह कम प्रतीत हुआ।
फागुन २१ को चुनाव से पहले माघ २३ को प्रदेश भेलामा भाग लेने पोखरा आए गगन की ‘‘भाषा’’ और ‘‘शरीर की भाषा’’ बिल्कुल अलग थी। चुनाव प्रचार के दौरान ‘‘अब कि बार, गगन सरकार’’ का नारा लगाकर कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए उन्होंने नया नारा दिया—‘‘अब की बार, सय पार’’। इस नारे को लेकर कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ताओं ने जोरशोर से इसे दोहराया। फागुन १५ को चुनावी सभा करने पोखरा आने पर भी गगन का उत्साह उन्नत ही था। उन्होंने कहा था, ‘‘कांग्रेस को मतदाताओं को बदलाव का एहसास दिलाना होगा, तभी जीत संभव है’’ और आगे कहा, ‘‘बदलाव का संदेश प्रत्येक गांव तक पहुंचाना होगा, नया कहा जाना चाहिए क्योंकि कांग्रेस ताजा, विशेष महाधिवेशन के बाद सबसे नई पार्टी है।’’
लेकिन, गगन द्वारा पोखरा से दिया गया ‘‘अबकी बार, सय पार’’ नारा चुनाव में कोई सफलता नहीं ला पाया, न तो सौ सीटों का आधा भी जीत हुई। बल्कि, कांग्रेस की सीट संख्या ३८ पर सिमित रही। बालेन्द्र शाह (बालेन) को भावी प्रधानमंत्री घोषित कर चुनाव लड़े राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) ने लगभग दो तिहाई सीटें जीतकर बालेन को प्रधानमंत्री बनाया। बालेन के आने तक गगन का चेहरे का भाव भी नहीं बदला। गण्डकी प्रदेश के १८ सीटों में से मुस्ताङ और मनाङ की दो सीटों को छोड़ कांग्रेस किसी भी स्थान से जीत नहीं पाए।
निर्वाचन के खराब परिणाम के बाद समीक्षा बैठक में आए गगन का उत्साह स्वाभाविक रूप से कम था। समीक्षा के दौरान विभिन्न नेताओं ने परिणामों का भिन्न-भिन्न प्रकार से विश्लेषण किया, और गगन सवालों के घेरे से बच नहीं पाए। कुछ नेताओं ने विशेष महाधिवेशन के कारण कांग्रेस सरकार में एकजुट न हो पाने और चुनाव में सकारात्मक संदेश न पहुंच पाने को कारण बताया, जबकि कईयों ने जनमत को ‘‘हुरी’’ बताकर कांग्रेस की चुनावी रणनीति को अप्रभावी करार दिया। समीक्षा के दौरान कुछ नेताओं ने गगन के खिलाफ चेतावनीपूर्ण भाषा भी इस्तेमाल की।
स्याङ्जा के सभापति राजु थापाले सभापति गगन से निवर्तमान सभापति शेरबहादुर देउवा की तरह अन्य नेताओं के साथ मिलकर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने याद दिलाया कि शुरुआत में उन्होंने कहा था कि वर्तमान सरकार और परिस्थिति कांग्रेस के पक्ष में नहीं है, इसलिए चुनाव में न जाना बेहतर होता। अब कांग्रेस को एकतावद्ध करने का विकल्प नहीं है, इसलिए गगन से इस पर ध्यान देने की गुजारिश की। उन्होंने कहा, ‘‘हिजो दाइयों ने प्रयास किया, अब आपको संभालकर आगे लेना है, ताकि हम फिर किसी और दाय के खिलाफ न उठें।’’
थापाले विशेष महाधिवेशन के कारण वोट बढ़ने या घटने का कोई असर नहीं होने की बात कही और कहा, ‘‘विशेष के कारण वोट न तो बढ़े हैं, न घटे हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति हमारे पक्ष में नहीं थी।’’ उन्होंने बताया कि विश्वव्यापी तरीके से पॉपुलिज्म का उदय हो रहा है और नेपाल में भी ऐसी ही स्थिति आई है।
समीक्षा कर रहे नेताओं की बातें सुनते हुए गगन अधिकतर समय सिर हिलाते हुए डायरी में नोट्स बना रहे थे। कभी-कभी वे वक्ताओं के जिक्र पर उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा से चर्चा भी कर रहे थे। हमेशा हँसमुख और कुशल दिखने वाले गगन के उत्साहहीन होने पर एक महिला नेता ने उनकी चिंता व्यक्त की तो गगन ने कहा कि वे चिन्तन में हैं।
गण्डकी के नेताओं की समीक्षा और चेतावनी सुनने के बाद गगन ने कहा कि वे चिन्तित नहीं, ‘चिन्तन’ की अवस्था में हैं। ‘‘चिन्ता और चिन्तन में बड़ा फर्क है। चिन्ता डर और प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है, वहीं चिन्तन आत्मसमीक्षा और विश्लेषण से संबंधित है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं थोड़ा अधिक चिन्तन में हूँ।’’
उन्होंने बताया कि ‘‘चिन्तन का प्रमुख भाग स्वयं और दूसरों को सुनना है। इस समय मैं कम बोलने और अधिक सुनने की नीति अपना रहा हूँ।’’
पूर्व में कांग्रेस प्रवक्ता देवराज चालिसे ने युद्ध और लड़ाई में फर्क बताते हुए चुनाव जीत-हार को लेकर निराश न होने का सुझाव दिया था। उसी भावना से सहमत होकर गगन ने बताया कि वे चुनाव के नतीजे को गलती की तरह नहीं, बल्कि संदेश के रूप में लेकर आगे बढ़ेंगे। ‘‘चिन्तन का मुख्य आधार खुद को और दूसरों को सुनना है, कम बोलना है, और मैं इसी अभियान में हूँ,’’ उन्होंने कहा।
आने वाले असोज के अंदर नियमित महाधिवेशन की योजना बताते हुए गगन ने कहा कि वे केंद्र में प्रमुख विपक्षी दल और प्रदेश तथा स्थानीय तह में सत्तारूढ़ के रूप में काम करने की शैली पर भी काम करेंगे। ‘‘पार्टी की जिम्मेदारी मेरी है, दल को सबसे अधिक लचीला होना चाहिए और सभी को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। मैं उस जिम्मेदारी को निभाऊंगा,’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब मैं सभी जगह जाऊंगा, संवाद करूंगा, और सभी को जोड़ने की कोशिश करूंगा।’’
आगामी प्रदेश और स्थानीय स्तर के चुनावों तक प्रथम पार्टी बनने का लक्ष्य है। उपसभापति विश्वप्रकाश शर्मा ने संसदीय दल के नेता के जल्द चयन की जानकारी दी। उन्होंने निवर्तमान सभापति देउवा से नेपाल लौट कर जांच में सहयोग करने का आग्रह भी किया।
विशेष महाधिवेशन के कार्यसमिति से संबंधित सर्वोच्च अदालत में मामला विचाराधीन है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय पक्ष में आने का दावा गगन ने किया है। महामंत्री प्रदीप पौडेल ने चुनावी शैली और प्रचार तकनीक में बदलाव पर बल देते हुए अब तकनीकी दक्षता और परिशुद्धता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।
सरकार ने पेंशन प्राप्त करने के लिए बैंक जाने की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए ई-पेंशन प्रमाणीकरण प्रणाली शुरू की है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने महालेखा नियंत्रक कार्यालय द्वारा विकसित इस प्रणाली के शुक्रवार को औपचारिक रूप से संचालन में आने की जानकारी दी। इस प्रणाली से 3,52,816 पेंशनधारकों के नवीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने और बैंक कमीशन को शून्य करने में मदद मिलेगी, मंत्रालय ने बताया।
27 चैत्र, काठमांडू। सरकार ने पेंशन प्राप्त करने के लिए बैंक दौड़ने की स्थिति को समाप्त कर दिया है। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने आज ई-पेंशन प्रमाणीकरण प्रणाली का शुभारंभ किया। इस प्रणाली के शुभारंभ के साथ लगभग 3,50,000 से अधिक पेंशनधारक पेंशन नवीकरण की जटिल प्रक्रिया और बैंक चयन की झंझट से मुक्त होंगे। सरकार को चुकाने वाला बैंक कमीशन भी शून्य होगा, मंत्रालय ने उल्लेख किया है।
अर्थ मंत्रालय के अनुसार अब सेवानिवृत्त व्यक्तियों को भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी, वे घर बैठे ही सेवा प्राप्त कर सकेंगे। भुगतान के लिए लगने वाला बैंक कमीशन का वार्षिक औसत लगभग 15 करोड़ रुपये घटने की उम्मीद है। नकद प्रवाह अनुमानित होने से कोष पर होने वाला दबाव भी प्रबंधित करना आसान होगा। पेंशन मैन्युअल रूप से गणना करने में होने वाली मानवीय त्रुटियाँ भी कम होंगी, मंत्रालय ने कहा। इस नई योजना से 3,52,816 सक्रिय और निष्क्रिय पेंशनधारक लाभान्वित होंगे।
पहले नए सेवानिवृत्त व्यक्तियों को बैंक चुनने के लिए पेंशन प्रबंधन कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होना पड़ता था। सेवानिवृत्त व्यक्तियों को बैंक जाकर हर वर्ष अपने खाते का नवीनीकरण कराना होता था। पेंशन राशि और कर की गणना मैन्युअल रूप से की जाती थी। समय पर नवीनीकरण न होने के कारण नकद प्रवाह की पूर्वधारणा करना कठिन होता था।
अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने पूर्वसभामुख कृष्णबहादुर महरा, उनके पुत्र राहुल सहित कुल 29 व्यक्तियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार से जुड़े मामले दर्ज किए हैं। अख्तियार का आरोप है कि पूर्वसभामुख महरा और उनके पुत्र राहुल ने बार-बार भन्सार कार्यालय से सम्पर्क कर भेप छूटाने का प्रयास किया और साथ ही सुन तस्करी में भी सांठगांठ की। साथ ही मुख्य भन्सार अधिकृत मुक्ति प्रसाद श्रेष्ठ पर सूटकेस की पुनः जांच और भौतिक परीक्षण न करने के कारण भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया गया है। यह जानकारी 27 चैत्र, काठमांडू की है।
अख्तियार ने आरोप लगाया है कि भन्सार कर्मचारियों ने भेप में छुपाए गए सोने की पहचान करने में विफलता दिखाई। सुन तस्करी में संलग्न अन्य लोगों पर भी मिलकर काम करने के आरोप लगे हैं। सुन तस्करी में शामिल लोगों के विरुद्ध पहले ही काठमांडू जिला अदालत में संपत्ति शोधन से संबंधित मुकदमा चल रहा था। इसी मामले में अख्तियार ने एक अन्य मामला भी दर्ज किया है।
घटना 10 पुष 2079 को त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई, जब चीनी यात्री ली हांग सुंग दो सूटकेस लेकर नेपाल पहुंचे। भन्सार जांच के दौरान इन सूटकेसों में 73 पैकेटों में कुल 730 इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट (भेप) पाई गई। भन्सार कर्मचारियों ने भेप का भौतिक परीक्षण करने के लिए जांच को रोक दिया और सामान नियंत्रण में ले लिया। हालांकि अख्तियार का आरोप है कि भन्सार कर्मचारियों ने रोकने के बाद पुनः जांच नहीं की।
अख्तियार के अनुसार, यह सामान प्रशासनिक भवन में रखा गया था जबकि इसे गोदाम में संरक्षित किया जाना चाहिए था। बरामद किए गए भेप व्यापारी उदयचन्दन श्रेष्ठ ने परीक्षण में धुआं न निकलने पर शक जताना चाहिए था, किन्तु भन्सार कर्मचारियों ने मिलकर मामला छुपाया, ऐसा अख्तियार दंड आयोग का दावा है। अख्तियार ने पूर्वसभामुख महरा और उनके पुत्र राहुल के साथ संबंधों में घोटाले की दुर्भावना देख कर मुकदमा दायर किया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोज़तबा खामेनी पूरी तरह स्वस्थ हैं, ऐसा उनके विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकिम इलाही ने दावा किया है। इलाही का कहना है कि खामेनी अभी अच्छी स्थिति में हैं और रोजाना विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों तथा अधिकारियों से मिलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने खामेनी द्वारा हस्ताक्षरित हाल के कागजात भी देखे हैं और जल्द ही खामेनी को सार्वजनिक रूप से राष्ट्र के नाम संबोधित करते हुए देखा जाएगा।
भारत के लिए खामेनी के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकिम इलाही ने ‘तास’ से बातचीत में सर्वोच्च नेता की सेहत को लेकर फैलाये जा रहे अटकलों का खंडन किया है। उन्होंने बताया कि खामेनी अच्छा स्वास्थ्य रखते हैं और अपने कार्यालय से दैनिक रूप से विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों और अधिकारियों से मुलाकात करते हैं। इलाही ने उम्मीद जताई कि सर्वोच्च नेता खामेनी जल्द ही देश के नाम एक सार्वजनिक संबोधन करेंगे।
सर्वोच्च नेता की सेहत को लेकर विभिन्न शंकाओं के बीच, प्रतिनिधि इलाही ने बताया कि उन्होंने खामेनी द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित दस्तावेज देखे हैं। उनके अनुसार, खामेनी ने हाल ही में अपने पिता और ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनी के निधन की 40वीं पुण्यतिथि पर एक विशेष विज्ञप्ति जारी की थी। इससे पहले, ‘द टाइम्स’ ने दावा किया था कि ईरानी सर्वोच्च नेता जीवित तो हैं लेकिन बेहद नाजुक स्थिति में हैं और शासन के किसी भी निर्णय को लेने में असमर्थ हैं।
२७ चैत, काठमांडू। श्रम संस्कृति पार्टी से निर्वाचित २५ वर्षीय सांसद रुबीकुमारी ठाकुर ने प्रतिनिधि सभा की उपसभामुख के रूप में इस्पीति हासिल की है।
शुक्रवार को सम्पन्न उपसभामुख चुनाव में उन्होंने २२९ सांसदों के मत प्राप्त किए, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी राप्रपा की सरस्वती लालम ने केवल ५ मत पाए।
रुबीकुमारी के पक्ष में श्रम संस्कृति पार्टी के साथ-साथ रास्वपा, नेपाली कांग्रेस और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने भी मतदान किया। वहीं, नेकपा एमाले के सांसद चुनाव में भाग नहीं ले सके।
निर्वाचन परिणाम की घोषणा के बाद सभी सांसदों ने रुबीकुमारी को बधाई दी। बधाई स्वीकार करते हुए रुबीकुमारी बहुत प्रसन्न दिखीं, और अन्य सांसद भी उत्साहित नजर आए।
उन्हें सांसद से उपसभामुख पद तक पहुँचाने में श्रम संस्कृति पार्टी की अध्यक्ष हर्कराज राई (साम्पाङ) की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो बधाई स्वीकार करते हुए रुबी के साथ खड़े होकर प्रसन्न दिखाई दिए।
सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले कर में 50 प्रतिशत की छूट दी है, लेकिन दो दिन बाद ही नेपाल आयल निगम ने ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी है।
नई कीमतों के अनुसार, पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 17 रुपये तथा डीजल/मट्टीतेल में 25 रुपये बढ़ाकर पेट्रोल 219 और डीजल 207 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना ने निगम और सरकार के इस कदम को ‘बड़ी साजिश और धोखाधड़ी’ करार देते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
27 चैत, काठमाण्डू। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले कर में 50 प्रतिशत की छूट दी, लेकिन दो दिन भी पूरे न हुए नेपाल आयल निगम ने ईंधन की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि कर दी।
24 चैत को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय घोषित करते हुए संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले करों में 50 प्रतिशत की छूट की जानकारी दी थी।
उन्होंने कहा, ‘सरकार पारदर्शी है, तथ्य छुपाती नहीं और जनता की दुर्दशा समझती है। सबसे अधिक कर लगने वाले शीर्षक से 50 प्रतिशत कटौती कर मूल्य नियंत्रण में सहायता की उम्मीद है।’
सरकार के इस निर्णय से उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में कमी और कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी।
लेकिन, मूल्य घटने की आशा रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए निगम ने विरोधाभासी कदम उठाते हुए आधी रात से लागू होने वाली कीमतों में भारी वृद्धि कर महंगाई का बोझ बढ़ा दिया।
इस निर्णय के बाद सरकार से जनता को संकट से राहत देने की उम्मीद थी, लेकिन उलट महंगाई बढ़ाने से उपभोक्ताओं में गुस्सा दिखा है।
नयी कीमतों के अनुसार, पेट्रोल में प्रति लीटर 17 रुपये और डीजल/मट्टीतेल में 25 रुपये का इजाफा किया गया है, जिससे पेट्रोल 219 रुपये प्रति लीटर और डीजल एवं मट्टीतेल 207 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं।
एलपी गैस की कीमत सिलेंडर प्रति 100 रुपये और आंतरिक हवाई ईंधन में 6 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिससे खाना पकाने वाले एलपी गैस की कीमत 2,010 रुपये प्रति सिलेंडर और हवाई ईंधन का दाम 257 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
नेपाल और भारत के बाज़ार की कीमतों की तुलना में बड़ा अंतर पाया गया है। शुक्रवार को नई दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94 रुपये 77 पैसे और डीजल 87 रुपये 67 पैसे थी, जबकि नेपाल में पेट्रोल 151 रुपये 63 पैसे और डीजल 140 रुपये 27 पैसे है।
यह दिखाता है कि नेपाल में पेट्रोल करीब 67 रुपये 37 पैसे और डीजल 66 रुपये 73 पैसे महंगा है।
नेपाल आयल निगम के प्रवक्ता मनोज ठाकुर ने कहा कि भारत के आंतरिक बाजार के मुकाबले नेपाल की कीमतें अलग हैं क्योंकि भारत की अपनी रिफाइनरी है जबकि नेपाल को तेल आयात करते समय अधिक लागत लगती है।
ठाकुर ने बताया कि निगम इंडियन आयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) से पेट्रोल के लिए प्रति लीटर 153 रुपये 78 पैसे और डीजल के लिए 242 रुपये 49 पैसे देता है। इसके बाद नेपाल सरकार के कस्टम, कर, परिवहन भाड़ा, प्रशासनिक खर्च और डीलर कमीशन जोड़ने पर पेट्रोल की कुल लागत लगभग 221 रुपये 32 पैसे और डीजल की 294 रुपये 99 पैसे पहुंच जाती है।
निगम की जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद भी कस्टम और पूर्वाधार कर आधे घटाए गए हैं, लेकिन घाटा कम नहीं होगा। कर कटौती के बावजूद निगम को पेट्रोल पर 16.65 रुपये, डीजल पर 109.50 रुपये और गैस पर 416 रुपये तक का घाटा हो रहा है और 15 दिनों में 10 अरब 21 करोड़ रुपए का घाटा सामने आ रहा है, इसलिए कीमतें बढ़ानी पड़ीं।
निगम ने कीमत बढ़ाने के बावजूद उस पर होने वाले मासिक 7 अरब से अधिक के घाटे के बीच उपभोक्ताओं से ईंधन कम उपयोग करने की अपील भी की है।
नेपाल आयल निगम पूर्णतया सरकारी स्वामित्व वाली संस्था है। सरकार ने कस्टम और पूर्वाधार करों में 50 प्रतिशत छूट देकर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। कुल मिलाकर राज्य को न तो लाभ होता है न ही नुकसान, लेकिन यह बोझ उपभोक्ताओं पर आ जाता है।
निगम यह दावा करता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की बढ़ी कीमतों के कारण स्वचालित मूल्य प्रणाली के तहत कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं, लेकिन सरकार की कर कटौती के बाद कीमतों में कमी नहीं हो पाती क्योंकि पुराना घाटा चुकाना बाकी रहता है। इससे मूल्य वृद्धि और कटौती में एक प्रकार की अन्यायाई स्थिति दिखती है।
उपभोक्ता मानते हैं कि ऐसी ‘स्वचालित’ प्रणाली केवल मूल्य वृद्धि के समय ही लागू होती है, कीमतों में कमी पर मैनुअल ब्रेक लगता है, जो सवाल उठाता है।
निगम के कार्यकारी निदेशक भट्ट का बयान
नेपाल आयल निगम के कार्यकारी निदेशक डॉ. चण्डिकाप्रसाद भट्ट ने कहा कि कर छूट के कारण संभावित बड़ी वृद्धि को रोका गया जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
डा. चण्डिकाप्रसाद भट्ट, कार्यकारी निदेशक, नेपाल आयल निगम
उन्होंने कहा, ‘अगर कर छूट नहीं दी जाती, तो डीजल की कीमत प्रति लीटर 70 से 75 रुपये तक बढ़ जाती। अब केवल 25 रुपये की वृद्धि होना उपभोक्ताओं के लिए राहत है।’
उन्होंने बताया कि निगम अब भी डीजल पर प्रति लीटर 95 रुपये के करीब घाटे में है और निगम वर्तमान में आर्थिक संकट में है। जल्द ही निगम 13 से 14 अरब रुपये का निवेश कर घाटे का प्रबंधन करने की योजना बना रहा है।
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना का आक्रोश
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता माधव तिमल्सिना ने निगम और सरकार के इस कदम को ‘बड़ी साजिश और धोखाधड़ी’ बताया। उन्होंने कहा कि कर छूट का नाटक करके असल में जनता का कलेजा काटा जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घट रही हैं तब निगम पुरानी और अधिक महंगी कीमतें दिखाकर आधी रात को कीमतें बढ़ा रहा है, यह धोखाधड़ी है।’
तिमल्सिना के अनुसार, निगम जब लाभ में था तो कर्मचारियों को बोनस भी देता था लेकिन अब घाटे के कारण पूरी जिम्मेदारी उपभोक्ताओं पर डालना गलत है।
माधव तिमल्सिना, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता
उन्होंने सवाल उठाया कि गैस उत्पादन से लेकर ढुलाई तक का काम निजी क्षेत्र का है, निगम केवल कागज पर हस्ताक्षर करता है, तो घाटे का बोझ जनता पर क्यों डाला जाता है? निगम की गैरजिम्मेदाराना खर्चों को सरकार करोड़ों की जमीन खरीदकर देती है, इसका भार उपभोक्ताओं को क्यों सहना पड़ता है?
जनता को कम तेल उपयोग करने की अपील के बीच मंत्री और अधिकारियों का अलग व्यवहार
तिमल्सिना ने कहा कि उपभोक्ताओं से ईंधन कम उपयोग करने को कहना अनुचित है क्योंकि मंत्रालय के सचिव और निगम के अधिकारी बेधड़क अकेले गाड़ी इस्तेमाल करते हैं।
उन्होंने बताया कि निगम में 20 निदेशक हैं जिन्हें 20 गाड़ियां चाहिए और कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग नहीं करते। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों से उपभोक्ताओं के हित में स्थायी योजना बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में जोर-जबर्दस्ती सिस्टम लागू किया जाना चाहिए, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और सार्वजनिक परिवहन के प्रबंधन की जरूरत है, मगर इसके बजाय कीमतें बढ़ाई गई हैं।
उन्होंने उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के सचिव और प्रतिस्पर्धा बाजार बोर्ड के अधिकारियों पर उपभोक्ता संरक्षण कानून की अनदेखी का भी आरोप लगाया।
माधव तिमल्सिना प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप और अवैध मूल्य वृद्धि वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आयल निगम की मूल्य वृद्धि उपभोक्ताओं की अनदेखी और पिछले घाटों का बोझ जनता पर डाले जाने का संकेत देती है।
पूर्व सचिव और प्रशासन विशेषज्ञ विमलप्रसाद वाग्ले ने निगम के मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी को उपभोक्ताओं की पीड़ा की वजह बताया है।
विमलप्रसाद वाग्ले, पूर्व सचिव एवं प्रशासन विशेषज्ञ
उनका कहना है कि सामान्यतः अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से प्रत्येक 15 दिन में नई कीमतें लागू होनी चाहिए, लेकिन निगम हर बार पुराने घाटे की भरपाई के कारण कीमतें नहीं घटाता।
उन्होंने बताया कि निगम ने पिछले वर्ष 32 अरब रुपये का घाटा सहा जो भरपाई में डेढ़ से दो साल लग गए। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को इस भार को सहन करना नहीं पड़ना चाहिए।
राज्य इस बड़े घाटे को सीधे नहीं झेल सकता, इसलिए निगम द्वारा इसे आमदनी से पूरा करना पड़ता है और परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को अधिक दबाव सहना पड़ता है, जिस पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।
सरकारी खर्च कटौती को ही समाधान बताया
पेट्रोलियम पदार्थों के कम उपयोग के लिए कीमतें बढ़ाना समस्या का समाधान नहीं है, वाग्ले ने कहा कि इससे परिवहन खर्च बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी, जिसका समग्र आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
वास्तविक समाधान के लिए उन्होंने सरकारी खर्चों में कटौती करने पर जोर दिया, खासकर सरकारी लाल नंबर वाले वाहनों को सफेद नंबरों में बदलना और अनावश्यक उपयोग रोकना आवश्यक बताया।
साथ ही उन्होंने तेल कूपन प्रणाली खत्म कर लाभार्थियों को नकद में धन उपलब्ध कराने का सुझाव दिया जिससे भ्रष्टाचार घटे और उपभोग नियंत्रित हो सके।
क्रास-सब्सिडी प्रणाली अपनाने का सुझाव
पेट्रोलियम मूल्य प्रबंधन के लिए उन्होंने क्रास-सब्सिडी मॉडल लागू करने की बात कही। सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले डीजल और मट्टीतेल पर सब्सिडी देने के लिए पेट्रोल और हवाई ईंधन से इकठ्ठा राजस्व का उपयोग करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, ‘पेट्रोल और हवाई ईंधन का उपयोग करने वाले वर्ग तुलनात्मक रूप से संपन्न हैं। उनसे अधिक राजस्व इकट्ठा कर डीजल पर सब्सिडी देकर परिवहन लागत कम की जा सकती है, जिससे महंगाई घटाने में मदद मिलेगी।’
उपभोक्ताओं को कम खपत करने से पहले सरकारी विभागों को मितव्ययिता अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत करना आवश्यक है, वाग्ले ने कहा।
सरकार के निर्णय को ‘अपरिपक्व और अविश्वसनीय’ बताया : अर्थशास्त्री डॉ. खनाल
अर्थशास्त्री डॉ. डिल्लीराज खनाल ने कहा कि सरकार द्वारा कर में कटौती के कुछ ही दिन बाद कीमत बढ़ाना सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
उन्होंने इस निर्णय को ‘अपरिपक्व और अविश्वसनीय’ कहा और कहा कि इसने सरकार की साख पर संकट ला दिया है। कर कम करने और निगम द्वारा कीमत बढ़ाने के विरोधाभास ने प्रक्रिया को विफलता की तरह दिखाया है।
डा. डिल्लीराज खनाल, अर्थशास्त्री
उन्होंने कहा, ‘अगर कल ही कीमत बढ़ाने की तैयारी थी तो आज कर क्यों घटाया गया? इससे सरकार के निर्णय प्रक्रिया में गंभीर भरोसा संकट पैदा हुआ है।’
डा. खनाल ने कहा कि आयल निगम पूर्णतया सरकारी स्वामित्व वाला संस्थान है, जो संकट के समय अपने घाटे को खुद उठाने के लिए जिम्मेदार है और यह जिम्मेदारी अटालनी नहीं चाहिए।
‘निगम 100 प्रतिशत सरकारी संस्था है, जब लाभ होता है तो मनमानी लाभांश बांटता है मगर नुकसान पर तुरंत उपभोक्ताओं पर बोझ डालता है, इससे सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल उठता है।’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कम होने के बाद भी नेपाल पर इसका प्रभाव दिखने में समय लग सकता है, लेकिन समग्र निर्णय प्रक्रिया अभी भी परिपक्व नहीं है, डॉ. खनाल बताते हैं।
अंततः, कर कटौती तो सकारात्मक है, लेकिन कीमत बढ़ जाने के कारण इसका अमल सरकार के निर्णय को निरर्थक बना देता है, उन्होंने कहा।
धनगढ़ी में इलाज के लिए सेती प्रादेशिक अस्पताल लाए गए लागूऔषध के आरोपी मुकेश राना को भारत जाते हुए गिरफ्तार किया गया है। राना को २४ चैत्र को १३ ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया गया था और गुरुवार शाम मिर्गी की वजह से अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया था। उपचार के दौरान पुलिस की निगरानी में राना लगभग पौने ९ बजे अस्पताल से फरार हो गए थे और पुलिस ने उनकी खोज तेज कर दी थी।
२७ चैत्र, धनगढ़ी। पुलिस ने सेती प्रादेशिक अस्पताल में इलाज के दौरान फरार हुए लागूऔषध के आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की निगरानी में रहने के दौरान शुक्रवार रात अस्पताल से भागे ३२ वर्षीय मुकेश राना जो धनगढ़ी उपमहानगरपालिका-७ मनहरे के निवासी हैं, उन्हें भारत की ओर भागते हुए धनगढ़ी-९ के बांग्रा कटान से गिरफ्तार किया गया। जिला पुलिस कार्यालय कैलाली के प्रवक्ता योगेन्द्र तिमिल्सिना ने बताया कि राना को भारत की ओर भागते हुए लगभग ९ बजे शाम को पकड़ लिया गया है।
उनके अनुसार राना को विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी प्राधिकरण (जिप्रक) की ओर ले जाया जा रहा है। राना को २४ चैत्र को १३ ग्राम ब्राउन शुगर के साथ पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गुरुवार शाम लगभग ५ बजे मिर्गी के दौरे के कारण बेहोश होने पर उन्हें अस्पताल लेकर गया था। लेकिन उपचार के दौरान होश आने पर पुलिस की निगरानी में रहने वाले राना लगभग पौने ९ बजे रात में अस्पताल से भाग गए थे। इसके बाद पुलिस ने उनकी खोज तेज कर दी थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने नाटो महासचिव मार्क रुट्टे से मुलाकात में यूरोपीय देशों द्वारा अमेरिकी सैन्य आधारों के उपयोग में रुकावट डालने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ट्रम्प ने इरान के खिलाफ युद्ध में यूरोपीय सहयोगियों द्वारा आवश्यक समर्थन नहीं देने का आरोप लगाते हुए उन्हें दंडित करने की चेतावनी दी है। उन्होंने नाटो को ‘कागजी बाघ’ बताते हुए अमेरिका इस गठबंधन से बाहर आने पर विचार कर रहा होने की बात कही।
व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान ट्रम्प ने इरान के खिलाफ युद्ध में यूरोपीय देशों की अपर्याप्त सहयोग को लेकर दंडित करने की धमकी दी। हालांकि, इस संबंध में किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी, इस बारे में उन्होंने कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया। उन्होंने यूरोपीय राजधानियों द्वारा अमेरिका के खिलाफ हवाई सीमाएं बंद करने और सैन्य आधारों के उपयोग में अवरोध उत्पन्न करने पर असंतोष व्यक्त किया।
ट्रम्प ने कुछ नाटो सदस्य देशों को निशाना बनाते हुए कहा, “जब हमें जरूरत थी, तुम हमारे साथ नहीं थे”, जो एक कड़ा आरोप है। उन्होंने ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय सहभागी देशों द्वारा इरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से इनकार करने को तीव्र आलोचना की है। अमेरिका और सभी यूरोपीय संघ के देशों ने इरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से मना करने के बाद, ट्रम्प ने उन्हें ‘कायर’ बताते हुए सदैव याद रखने की चेतावनी दी है।
ट्रम्प ने नाटो सैन्य गठबंधन को ‘कागजी बाघ’ कहा है और इसके प्रभावकारिता पर सवाल उठाए हैं। १ अप्रैल को रॉयटर्स के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने नाटो प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया और बताया कि अमेरिका इस गठबंधन से बाहर निकलने का विकल्प विचार कर रहा है। इरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और इसके पुराने यूरोपीय सहयोगियों के संबंध इतिहास में अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुँच गए हैं।
नेपाल हाकी संघ ने राष्ट्रीय पुरुष और महिला हाकी टीम के लिए नई जर्सी का अनावरण किया है। २७ चैत्र को काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) के सदस्य राम चरित्र मेहता और नेपाल हाकी संघ के अध्यक्ष अनिल प्रसाद शर्मा ने संयुक्त रूप से जर्सी का अनावरण किया। पुरुष टीम के लिए लाल रंग की और महिला टीम के लिए गुलाबी रंग की जर्सी प्रस्तुत की गई है।
जर्सी अनावरण कार्यक्रम में राखेप सदस्य सचिव मेहता ने हाकी संघ के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे हाकी खेल को पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि राखेप हाकी खेल के विकास और पूर्वाधार निर्माण के लिए लगातार सहयोग कर रहा है। नेपाल हाकी संघ के महासचिव सुवर्ण श्रेष्ठ ने कहा कि राष्ट्रीय टीम की जर्सी सार्वजनिक करते हुए एक नई यात्रा शुरू की गई है और इससे आने वाले दिनों में हाकी खेल के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने जर्सी के लिए प्रायोजक खोजने की योजना भी बताई।
उसी दिन हाकी संघ ने महिला और पुरुष राष्ट्रीय टीम के लिए २६-२६ खिलाड़ियों की सूची भी जारी की। महासचिव श्रेष्ठ ने बताया कि पिछले फागुन में काठमांडू में हुए राष्ट्रीय हाकी प्रतियोगिता में प्रदर्शन के आधार पर राष्ट्रीय टीम का चयन किया गया है।
नासा के आर्टेमिस-२ चंद्रमा मिशन के अंतरिक्ष यात्री पूर्ण सूर्य ग्रहण का दृश्य अवलोकन कर शनिवार को पृथ्वी पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इस मिशन के अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के अति निकट से अंतरिक्षयान में बैठे हुए पूर्ण सूर्य ग्रहण को देख चुके हैं और अब वे पृथ्वी वापस लौटने की प्रक्रिया में हैं। शनिवार सुबह उतरने वाले इस दल के कमांडर रेड वाइजमैन के अनुसार, ओरियन अंतरिक्षयान के चालक दल ने जो दृश्य देखा है वह अब तक किसी मानव ने नहीं देखा था। आर्टेमिस मिशन के पायलट विक्टर ग्लोबर ने कहा कि उन्होंने जो दृश्य देखा उसकी व्याख्या करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं।
इस यात्रा के दौरान अंतरिक्षयान ने पृथ्वी से लगभग 2 लाख 52 हजार 756 मील अर्थात् 4 लाख 6 हजार 771 किलोमीटर की दूरी तय की, जो अब तक किसी मानव द्वारा अंतरिक्ष में तय की गई सबसे लंबी दूरी है। चंद्रमा के पीछे के भाग तक पहुंचने के बाद अंतरिक्ष यात्री और नासा के बीच लगभग 40 मिनट तक संपर्क टूट गया था। संपर्क पुनः स्थापित होने पर मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टिना कॉच ने अंतरिक्षयान से प्रतिक्रिया देते हुए कहा – “पृथ्वी से फिर से आवाज सुनकर अत्यंत अद्भुत अनुभव हुआ।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अंतरिक्ष यात्रियों से सीधे संवाद किया और इतिहास रचने पर गर्व व्यक्त किया।
अंतरिक्ष यात्री अमेरिका के पश्चिमी तट के पास प्रशांत महासागर में उतरने की उम्मीद है। नासा के एक सेवानिवृत्त अंतरिक्ष यात्री तथा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के पूर्व कमांडर टेरी विर्ट्स ने चिंताजनक लेकिन यथार्थपरक विचार व्यक्त किए। उनका मानना है कि इस मिशन में अंतरिक्षयान के चालक दल को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करते हुए उसकी परिक्रमा करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि आर्टेमिस मिशन के अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में बेहद दूर हैं और किसी भी आकस्मिक स्थिति में उनका बचाव करना संभव नहीं है।
नासा की विज्ञान प्रमुख डॉक्टर निकोला फॉक्स के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों ने मिशन के इस महत्वपूर्ण चरण के लिए कई वर्षों तक तैयारी की है और नासा की टीम के साथ मिलकर चंद्र विज्ञान का गहन अध्ययन किया है। आर्टेमिस-२ मिशन के मुख्य सदस्य तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री रेड वाइजमैन, क्रिस्टिना कॉच और विक्टर ग्लोबर के साथ एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैंसन भी हैं। चंद्रमा में पानी की खोज और वहां के खनिजों का अध्ययन भविष्य में मानव निवास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
२७ चैत्र, काठमाडौ। उपसभामुख के रूप में निर्वाचित होने के बाद रुबीकुमारी ने श्रम संस्कृति पार्टी की जिम्मेदारियों से अलग होने का निर्णय लिया है। उन्होंने शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष हर्क साम्पाङ को सौंपे अपने इस्तीफे में संविधान और कानून द्वारा निर्धारित तटस्थ भूमिका निभाने के लिए पार्टी छोड़ने की आवश्यकता जताई।
शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की सरस्वती लामा को हराते हुए रुबीकुमारी उपसभामुख के पद पर निर्वाचित हुईं। सदन में उपस्थित २५६ सदस्यों में से २२९ ने उनका समर्थन किया।
एमाले ने प्रतिनिधि सभा के उपसभामुख पद के लिए श्रम संस्कृति पार्टी की सांसद रुबीकुमारी का समर्थन किए बिना तटस्थता अपनाई है। रुबीकुमारी उपसभामुख पद के लिए दो तिहाई समर्थन लेकर आई थीं, जिसमें कांग्रेस, रास्वपा और नेकपा ने उनका समर्थन किया था। एमाले ने तटस्थता चुना जिसके कारण न केवल वे नई पीढ़ी और समावेशिता का संदेश देने में असफल रहे, बल्कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर भी खो दिया। २६ चैत, Kathmandu। जब श्रम संस्कृति पार्टी की सांसद रुबीकुमारी उपसभामुख पद के लिए चुनने वाली थीं, तब एमाले चुनाव प्रक्रिया में तटस्थ रहा। वे न तो उनके पक्ष में थे, न ही विपक्ष में। पिछले दशक से एमाले हर राजनीतिक मोर्चे पर स्पष्ट और ठोस रुख अपनाता रहा है। लेकिन इस बार उपसभामुख पद के चुनाव में किसी स्पष्ट कारण के बिना तटस्थता की नीति अपनाई गई। यदि वे किसी अन्य उम्मीदवार को स्वीकार नहीं कर सकते थे, तो वे खुद का भी नामांकन कर सकते थे। लेकिन पार्टी ने संसद के नियमावलियों में दिए गए तटस्थ रहने के प्रावधान का उपयोग किया। नियमों के अनुसार यह गलत नहीं है, लेकिन इसने एमाले को एक महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने के अवसर से वंचित कर दिया।
एमाले के सांसद मोहम्मद इस्तियाक राई कहते हैं, ‘सभामुख के पक्ष में व्यापक समर्थन किया गया, पर उपसभामुख के मामले में उस प्रयास का अभाव था, इसलिए हम तटस्थ रहे।’ उनके अनुसार वर्तमान में सत्तापक्ष जो व्यवहार विपक्षी दलों के प्रति कर रहा है, उस पर भी एमाले असंतुष्ट है। अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को पूर्वाग्रहपूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जिससे पार्टी प्रतिक्रिया दे रही है। संसदीय राजनीति में ऐसे अवसर आते हैं जिनसे दल की वैचारिक ऊँचाई, राजनीतिक परिपक्वता और दूरदृष्टि मापी जा सकती है। लेकिन इस तटस्थता की नीति से सीमित दूरदर्शिता प्रकट होती है।
रुबीकुमारी ठाकुर को उपसभामुख के रूप में समर्थन देने से एमाले को कई फायदे होते। एक ओर वे उपसभामुख बनने वाली उम्मीदवार थीं, वहीं उनका नामांकन एक बड़ा संदेश भी था। वे मधेस के सीमावर्ती क्षेत्र की हैं, आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से उठी हैं और राष्ट्रीय राजनीति में संघर्ष के बाद आई हैं। वे नए पीढ़ी का प्रतिनिधित्व भी करती हैं। श्रम संस्कृति पार्टी से समानुपातिक सांसद बनी रुबी को राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने भी समर्थन दिया था, जिससे उन्हें दो तिहाई से अधिक समर्थन मिला था। संसद के प्रमुख दल—रास्वपा, कांग्रेस और नेकपा उनके साथ थे। यदि एमाले ने भी उनका समर्थन किया होता, तो उपसभामुख का पद सर्वसम्मति से तय हो सकता था।
लेकिन एमाले ने अलग रास्ता छांटा और तटस्थता की नीति अपनाई। राजनीति में तटस्थता हमेशा निष्पक्षता का प्रतीक नहीं होती; कई बार यह अस्वीकार का दूसरा रूप भी होती है। रुबीकुमारी को व्यापक समर्थन मिलने के बावजूद, और दो तिहाई से अधिक मतों से चुने जाने की स्थिति में, एमाले की तटस्थता का परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ता। समर्थन देकर वे उपसभामुख जैसे तटस्थ पद को अपने स्वामित्व में ले सकते थे। यदि एमाले ने रुबी का समर्थन किया होता, तो यह केवल एक व्यक्ति को पद दिलाने का काम नहीं होता, बल्कि संसद में नए दलों के प्रति सहकार्य का संदेश भी बनता।