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लेखक: space4knews

इरान में नौ दिन तक अमेरिकी हवाई हमला जारी, एक अमेरिकी सैनिक की मौत

अमेरिकी सेना ने इरान के सैन्य केंद्रों, मिसाइल साइटों और संचार नेटवर्कों को निशाना बनाते हुए नौ दिन तक लगातार हवाई हमले जारी रखे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि इरान के परमाणु मिसाइल निर्माण क्षमता को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सैन्य कार्रवाई की जा रही है। इरान द्वारा खाड़ी के अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले के बाद एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हुई है और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है। ४ साउन, काठमांडू। अमेरिकी सेना ने सोमवार रात को भी इरान पर लगातार नौवें दिन हवाई हमले जारी रखे। अमेरिकी केंद्रीय कमांड के अनुसार इरान के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग साइट, समुद्री संपदा तथा संचार नेटवर्कों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी सेना ने इरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर खुरमोज, बुशहर और होर्मुजगान के साथ-साथ उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज में भी हमले किए हैं। चाबहार और बंदर इमाम जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर भी हमले के लक्ष्य बने हैं।

हमलों के बाद उत्तर-पश्चिमी इरान के ‘तबरीज मिसाइल फील्ड’ में आग लगने की खबर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अमेरिकी हमले के तुरंत बाद उस मिसाइल केंद्र में आग लग गई। यह मिसाइल केंद्र इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स के तहत संचालित होता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इरान होर्मुज जलमार्ग का उपयोग युद्ध में दबाव बनाने वाले उपकरण के रूप में कर रहा है और विश्व के अन्य देशों से उस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए उपकरण या कोष देने का आह्वान किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वर्तमान सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य इरान के परमाणु मिसाइल निर्माण की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त करना है।

दूसरी ओर, उत्तरी इराक में गिराए गए एक इरानी ड्रोन को नियंत्रित ढंग से नष्ट करने के क्रम में एक अमेरिकी सैनिक की मृत्यु हो गई जबकि एक अन्य घायल हुआ है। इस घटना के बाद इस युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या १७ हो गई है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर इरान के जवाबी हमलों के दावे आईआरजीसी ने जॉर्डन, कुवैत, ओमान सहित कई अन्य देशों में बड़े हमलों की बात कही है और अभियान जारी रखने की चेतावनी दी है। कुवैत में विद्युत उत्पादन और जल शोधन संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमले जारी हैं।

इन हमलों ने कई विद्युत उत्पादन इकाइयों में आग लगाई है और राहत कार्य जारी है, यह कुवैत सरकार की रिपोर्ट है। आईआरजीसी ने कहा कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस पर ड्रोन हमले कर रडार प्रणाली और अमेरिकी MQ-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर को नष्ट किया। बहरीन में एयर रेड सायरन बजाया गया और वहां स्थित अमेरिकी दूतावास ने मनामा के मध्य क्षेत्र में इरान के हमले की आशंका के कारण अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षा चेतावनी जारी की है।

इरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने खुजस्तान प्रांत में निर्माणाधीन ‘दारखोविन परमाणु ऊर्जा केंद्र’ की साइट पर अमेरिकी हमले का आरोप लगाया है। अमेरिकी हमले और अत्यधिक गर्मी के कारण इरान में विद्युत संकट गहरा गया है। राजधानी तेहरान समेत कई क्षेत्रों में दैनिक रूप से लोडशेडिंग जारी है, जिससे जनजीवन और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इराक ने अपना तेल निर्यात होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने के लिए बसरा से तुर्की और सीरिया तक एक नई तेल पाइपलाइन निर्माण की योजना शुरू की है। पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी माइकल मुलर के अनुसार अमेरिका और इरान दोनों एक-दूसरे को समझौता करने के लिए बाध्य करने हेतु सैन्य कारवाइयाँ बढ़ा रहे हैं। अमेरिका इरान की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने के लिए आधारभूत संरचनाओं पर हमला कर रहा है, जबकि इरान खाड़ी देशों के साथ अपने संबंध बिगाड़कर भी इसे ‘अस्तित्व की लड़ाई’ मानते हुए खाड़ी में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।

सल्यान के सामुदायिक वन में चार असलहा बन्दूक बरामद

४ साउन, काठमाडौं। सल्यान के बनगाड कुपिन्डे नगरपालिका १२ भदाले सामुदायिक वन के ओझार से चार असलहा बन्दूक बरामद हुईं हैं। पुलिस ने कल शाम साढ़े पांच बजे बन्दूक बरामद करने की जानकारी दी है।

पुलिस के अनुसार, ये बन्दूकें अवैध रूप से रखी गई थीं। इस बात का पता नहीं चल पाया है कि इन्हें किसने छुपाया था। इस मामले में जिला पुलिस कार्यालय सल्यान द्वारा जांच जारी है।

किलियान म्बाप्पे दूसरे विश्व कप में भी ‘गोल्डन बूट’ जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने, स्पेन के रोड्री को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब

साल 2026 के विश्व कप फुटबॉल टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले फ्रांस के किलियान म्बाप्पे ने लगातार दूसरी बार ‘गोल्डन बूट’ का खिताब अपने नाम किया है। उन्होंने इस प्रतियोगिता में कुल 10 गोल करते हुए अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी (8 गोल) को पीछे छोड़ दिया। साल 2022 के कतर विश्व कप में भी म्बाप्पे ने 8 गोल कर यह उपाधि जीती थी।

इतिहास में म्बाप्पे पश्चिम जर्मनी के गर्ड मुलर के बाद 1970 में दोहरे अंकों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। 1958 में फ्रांस के जस्ट फींटेन ने 13 गोल किए थे जबकि 1954 में हंगरी के सांडर कोचिश ने 11 गोल किए थे। व्यक्तिगत रूप से विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकार्ड अभी भी इन खिलाड़ियों के नाम है। म्बाप्पे ने विश्व कप के विभिन्न संस्करणों में सबसे ज्यादा गोल करने का कीर्तिमान भी कायम किया है। उन्होंने कुल 22 गोल किए हैं, जो मेस्सी से एक गोल ज्यादा है।

शनिवार मध्यरात्रि के बाद हुए मैच में इंग्लैंड से 6-4 की हार के बावजूद म्बाप्पे ने 2 गोल किए। इस प्रदर्शन ने उन्हें मेस्सी से आगे कर दिया और फाइनल में मेस्सी के गोल ना कर पाने से उनकी उपाधि पक्की हो गई। म्बाप्पे ने समूह चरण में सेनेगल और इराक के खिलाफ दो-दो गोल किए जबकि अंतिम 32 में स्वीडन के खिलाफ दो गोल किए।

साल 2026 के टूर्नामेंट के अन्य प्रमुख खिताब स्पेन के खिलाड़ियों ने जीते। कप्तान रोड्री को प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी या ‘गोल्डन बॉल’ का पुरस्कार मिला। इंग्लिश प्रीमियर लीग की मैनचेस्टर सिटी के मिडफील्डर रोड्री ने स्पेन के लिए यह दूसरा स्वर्ण खिताब हासिल किया और निर्णायक भूमिका निभाई। 30 वर्षीय रोड्री को फाइनल में फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने ‘गोल्डन बॉल’ पुरस्कार प्रदान किया।

प्रतियोगिता में दूसरे श्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में मेस्सी को ‘सिल्वर बॉल’ और तीसरे श्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में म्बाप्पे को ‘ब्रॉन्ज बॉल’ मिला। स्पेन के उनाई सिमोन ने सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर के रूप में ‘गोल्डन ग्लव’ पुरस्कार जीता।

जनमत का संदेश क्यों नहीं समझा गया?

समाचार सारांश

  • नेपाली कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के नेतृत्व को लेकर पूर्वसहमति न होने का निष्कर्ष निकालते हुए सत्ता गठबंधन तोड़ने का निर्णय लिया, जिससे राष्ट्रीय राजनीति फिर सक्रिय हो गई है।
  • जेनजी विद्रोह और जनदबाव के बीच विशेष महाधिवेशन से परिवर्तन की प्रतिबद्धता जताने वाली कांग्रेस अब सत्ता केंद्रित राजनीति के कारण अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती झेल रही है।
  • अल्पकालीन सत्ता लाभ की बजाय दीर्घकालीन जनविश्वास और राजनीतिक संस्कार परिवर्तन को प्राथमिकता देना कांग्रेस के लिए अगली दिशा होनी चाहिए, ऐसा विश्लेषकों का सुझाव है।

जेनजी आंदोलन से पहले नेकपा एमाले के साथ सत्ता गठबंधन बनाए रख रही नेपाली कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश सरकार के नेतृत्व में पूर्वसहमति के अनुसार काम न चलने का निष्कर्ष निकाल कर गठबंधन तोड़ने का निर्णय लिया, जिससे राष्ट्रीय राजनीति पुनः सक्रिय हो गई है। संवैधानिक रूप से सरकार परिवर्तन एक स्वाभाविक राजनीतिक प्रक्रिया है।

लेकिन लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक निर्णय का मूल्यांकन केवल संविधान की व्यवस्था से नहीं होता, इसे जनमत, राजनीतिक नैतिकता, लोकतांत्रिक संस्कार और दीर्घकालीन राष्ट्रीय हित के आधार पर भी करना आवश्यक है। इसलिए आज का मुख्य सवाल सिर्फ यह नहीं कि सरकार कौन बनाएगा, बल्कि यह है कि जनता ने बदलाव के नाम पर जो संदेश दिया है, उसे राजनीतिक दल किस प्रकार समझ रहे हैं।

कुछ वर्षों से नेपाली राजनीति के प्रति बढ़ती असंतुष्टि को जेनजी विद्रोह के माध्यम से संस्थागत रूप दिया गया और राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के रूप में नई शक्ति के रूप में इसका उदय हुआ है। हालांकि उस पार्टी के लगभग दो तिहाई बहुमत वाली सरकार द्वारा किए गए प्रतिबद्धताओं के बावजूद कोई बदलाव के संकेत नहीं दिख रहे, जिसे सरकार के आर्थिक वर्ष 2083/84 की नीति तथा कार्यक्रम और बजट भी पुष्टि करते हैं।

और स्पष्ट रूप से देखें तो गरीबी और सुकुम्वासी वर्ग के प्रति सरकार की निर्दयता ने आत्महत्याओं की श्रृंखला को बढ़ावा दिया है। जेनजी विद्रोह किसी एक दल के खिलाफ आंदोलन नहीं था, बल्कि यह पुरानी राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ असंतोष था। सत्ता के लिए अस्वाभाविक गठबंधन, बार-बार सरकार परिवर्तन, भ्रष्टाचार, घूसखोरी, अवसरवाद और जनमत की अनदेखी ने युवाओं को राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने केवल नए चेहरे नहीं, बल्कि नए राजनीतिक चरित्र की भी मांग की थी।

इसी जनदबाव के बीच नेपाली कांग्रेस ने भी आत्मसमीक्षा की आवश्यकता महसूस की जिसका उदाहरण विशेष महाधिवेशन है। उस समय पंक्तिकार सहित सामाजिक मीडिया और विभिन्न लेखों के माध्यम से भी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता पर दबाव डाला गया था। हालांकि नेकपा एमाले और माओवादी के अंदर रूपांतरण के मुद्दे दबाए गए, नेपाली कांग्रेस का विशेष महाधिवेशन उसी का परिणाम था। इसका उद्देश्य सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन ही नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कार में बदलाव भी था। पार्टी के भीतर नई ऊर्जा, नए युवाओं की भागीदारी, नीतिगत राजनीति, पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही की उम्मीद की गई थी। विशेष महाधिवेशन ने कांग्रेस को नई दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया था।

लेकिन आज फिर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में बदलाव के नाम पर सत्ता समीकरण बदलने की चर्चा शुरू होने से एक गंभीर प्रश्न उठता है – यदि फिर से पुरानी सत्ता केंद्रित राजनीति दोहराई जाएगी, तो विशेष महाधिवेशन की आवश्यकता क्या थी? व्यवहार में कोई बदलाव न हुआ तो नेतृत्व परिवर्तन का क्या औचित्य होगा? जनता ने नई सोच की उम्मीद की थी या केवल पुराने खेल का नया संस्करण?

नेपाल के राजनीतिक इतिहास से एक महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है कि जनता सत्ता परिवर्तन से ज्यादा राजनीतिक संस्कार परिवर्तन चाहती है। 2046 साल के जनआन्दोलन से लेकर गणतंत्र स्थापना, संविधान निर्माण और हाल के चुनावों तक जनता बार-बार बदलाव के पक्ष में मतदान कर चुकी है। लेकिन हर बदलाव के बाद वही सत्ता केंद्रित प्रवृत्ति, वही भ्रष्टाचार और अस्थिर गठबंधन राजनेताओं ने लोगों में गहरी निराशा पैदा की है। इसी निराशा ने विशेषकर युवाओं को पारंपरिक राजनीति पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया है।

जेनजी विद्रोह का मूल संदेश था कि राजनीति जनता के विश्वास पर आधारित होनी चाहिए, सत्ता के समीकरण के गणित पर नहीं। उन्होंने राजनीतिक दलों को यह स्पष्ट संकेत दिया कि बस चुनाव जीतने की रणनीति ही काफी नहीं है, जनता का विश्वास जीतने वाला चरित्र भी जरूरी है। इसलिए आज किसी भी दल को अपने निर्णय में जनता का संदेश केंद्र में रखना चाहिए।

नेपाल में सत्ता से बाहर रहना राजनीतिक असफलता माना जाना अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कांग्रेस को इस सोच को बदलने में सफलता मिलनी चाहिए ताकि वह नई राजनीतिक संस्कृति का नेतृत्व कर सके।

नेपाली कांग्रेस ने विशेष महाधिवेशन के जरिए खुद को बदलने की प्रतिबद्धता जताई थी। पार्टी में युवाओं का समावेश, नीतिगत नेतृत्व, संगठन सुधार, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्य संरक्षण को प्राथमिकता देने की घोषणा की गई थी। कई कार्यकर्ता इसे कांग्रेस का दूसरा पुनर्जागरण मानते थे। लेकिन राजनीतिक घोषणाओं की सच्चाई व्यवहार में परखी जानी चाहिए।

अब जब प्रदेश सरकार के नेतृत्व में बदलाव के नाम पर अस्थिर गठबंधन की राजनीति फिर शुरू हो रही है, तो इससे कांग्रेस की प्रतिबद्धता के संदेश को नुकसान पहुंचेगा। जनता सवाल करेगी कि अगर अंतिम लक्ष्य सत्ता ही थी तो विशेष महाधिवेशन क्यों किया गया? अगर निर्णय लेने का तरीका वही रहा तो नेतृत्व परिवर्तन का क्या अर्थ होगा? बदलाव केवल नेतृत्व का था या राजनीतिक संस्कार का भी?

इसलिए अब कांग्रेस के लिए जरूरी है कि वह अल्पकालीन सत्ता लाभ और दीर्घकालीन राजनीतिक हित के बीच स्पष्ट चयन करे। इतिहास कभी-कभी ऐसे अवसर लाता है, जहां तत्कालीन लाभ छोड़कर दीर्घकालीन विश्वास हासिल किया जा सकता है। फिलहाल कांग्रेस इसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है।

राजनीति में विपक्ष की भूमिका कमजोरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की अनिवार्य आवश्यकता है। प्रभावी विपक्ष सरकार को जवाबदेह बनाता है, जनता की आवाज संसद और सार्वजनिक बहस में उठाता है, और वैकल्पिक नीतियां प्रस्तुत करता है। कई लोकतांत्रिक देशों में चुनाव हारकर विपक्ष में रहकर खुद को मजबूत करने की परंपरा है।

लेकिन नेपाल में सत्ता से बाहर रहना राजनीतिक असफलता है, ऐसी सोच अभी तक खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस को यही सोच बदलनी होगी तभी वह नई राजनीतिक संस्कृति का नेतृत्व कर पाएगी।

राजनीतिक परिवर्तन का वास्तविक मापदंड यह नहीं कि सरकार का नेतृत्व कौन करता है, बल्कि यह है कि जनता अपने जीवन में कितने बदलाव अनुभव कर रही है। नेपाल के समाज के मुख्य मुद्दे हैं रोजगार, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आर्थिक संकट और युवाओं का विदेश पलायन। दुख की बात है कि राजनीतिक बहस अक्सर सत्ता समीकरण, मंत्रालय वितरण और सरकार गठन-विघटन के इर्द-गिर्द ही सीमित रहती है। इससे जनता में यह धारणा फैल गई है कि ‘राजनीति केवल अपनी समस्याओं से ज्यादा सत्ता के खेल में लगी है।’

अगर नेपाली कांग्रेस फिर से प्रदेश सरकार के नेता बनने के लिए नए गठबंधन बनाने में लगी है, तो जनता विशेष महाधिवेशन में दिए गए परिवर्तन के संदेश को असफल मान सकती है। क्योंकि बदलाव का मतलब केवल सत्ता पाने का नया रास्ता ढूंढ़ना नहीं, बल्कि सत्ता चलाने की नई संस्कृति स्थापित करना भी है।

विशेष महाधिवेशन ने कांग्रेस को ऐतिहासिक अवसर दिया है। यह अवसर केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है। इससे कांग्रेस को अपनी ऐतिहासिक पहचान पुनर्जीवित करने का मौका मिला है। बी.पी. कोइराला द्वारा प्रतिपादित लोकतांत्रिक समाजवाद, नैतिक राजनीति, राष्ट्रीय सहमति और जनता के प्रति जवाबदेही के मार्ग को आधुनिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की जिम्मेदारी पार्टी को मिली है। यदि पार्टी ऐसा नहीं कर पाई तो बदलाव केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता केवल एक राजनीतिक दल के रूप में उसे देखती नहीं, बल्कि उसे नेपाल के लोकतांत्रिक आंदोलन से जुड़ा दल मानती है। इसलिए पार्टी से उच्च स्तर की राजनीतिक नैतिकता की अपेक्षा की जाती है। इसलिए कांग्रेस के निर्णय सिर्फ सामान्य राजनीति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति के दिशा निर्धारण में महत्वपूर्ण होंगे।

आज प्रदेश सरकार की अगुवाई पाना एक तत्काल उपलब्धि हो सकती है, लेकिन अस्थिरता, अविश्वास और बार-बार गठबंधन बदलने को स्वीकार कर बनी सरकार राजनीतिक कीमत चुका सकती है। सरकार बनाना कुछ महीनों का विकेट हो सकता है, लेकिन जनता का विश्वास खोना लम्बे समय तक असर डालता है।

युवा वर्ग राजनीति को बारीकी से देख रहा है। सामाजिक मीडिया हर निर्णय को तुरंत सार्वजनिक बहस का विषय बना देता है। कोई भी अपारदर्शी सहमति, अस्वाभाविक गठबंधन या अवसरवादी फैसले अब लंबे समय तक छिप नहीं सकते। इसलिए आज राजनीतिक दलों को पहले से कहीं अधिक जनता के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए। यही नया यथार्थ जेनजी विद्रोह का सच्चा संदेश है।

जनता की मान्यताओं का सम्मान करने वाला दल कभी-कभी सत्ता से ऊपर विश्वास को प्राथमिकता देता है। लोकतंत्र में विश्वास खोई सत्ता मजबूत नहीं होती, जबकि विश्वास जीतने वाला विपक्ष भविष्य में विकल्प बन सकता है। इसलिए नेपाली कांग्रेस को केवल सरकार बनाने वाली पार्टी न रहकर राष्ट्र को सही राजनीतिक दिशा दिखाने वाली जिम्मेदार लोकतांत्रिक शक्ति बनना चाहिए। इससे पार्टी का दीर्घकालीन भविष्य सुरक्षित होगा और लोकतंत्र मजबूत होगा।

यह फैसला न केवल सरकार की बल्कि कांग्रेस की विश्वसनीयता, लोकतंत्र की स्थिरता और नई पीढ़ी की राजनीति के प्रति विश्वास का भविष्य तय करेगा।

राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता भाषणों से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लिए गए फैसलों से तय होती है। जब सत्ता पाने और राजनीतिक सिद्धांत के बीच चुनाव करना पड़ता है, तभी दल की असली तहसील सामने आती है। नेपाली कांग्रेस आज इसी परीक्षा से गुजर रही है। अगर वह तत्कालीन सत्ता की तुलना में जनमत को अधिक महत्व दे पाए, तो विशेष महाधिवेशन की शुरुआत की गई परिवर्तन यात्रा सार्थक होगी। लेकिन पुरानी सत्ता केंद्रित प्रवृत्ति दोबारा सामने आई, तो बदलाव का संदेश कमजोर होगा।

नेपाल का लोकतंत्र अभी नई पीढ़ी के मूल्यांकन के चरण में है। युवा किसी भी दल को केवल इतिहास के आधार पर नहीं बल्कि वर्तमान व्यवहार और भविष्य की दृष्टि के आधार पर समर्थन देते हैं। इसलिए कांग्रेस को अपने गौरवशाली इतिहास के साथ-साथ वर्तमान जिम्मेदारी भी निभानी होगी। बी.पी. कोइराला के लोकतांत्रिक समाजवाद, गणेशमान सिंह का त्याग, कृष्ण प्रसाद भट्टarai की नैतिक राजनीति और गिरिजाप्रसाद कोइराला की प्रतिबद्धता केवल भाषण में नहीं, बल्कि निर्णयों में भी प्रतिबिंबित होनी चाहिए।

प्रदेश सरकार बार-बार बदलने, गठबंधन पुनः गठन और अल्पकालीन राजनीतिक स्वार्थों पर आधारित सरकारों के कारण संघीय लोकतंत्र की प्रभावकारिता पर सवाल उठने का खतरा बढ़ गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रदेश सरकार के नेतृत्व से अधिक संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनविश्वास को मजबूत करने का निर्णय लेना होगा।

देश को जिम्मेदार विपक्ष की जरूरत है। विपक्ष केवल सरकार का विरोध नहीं करता, सही निर्णयों का समर्थन करता है, गलत निर्णयों को तथ्य आधारित चुनौती देता है और वैकल्पिक नीतियों का प्रस्ताव रखता है। कांग्रेस अगर संघ और प्रदेश दोनों स्तरों पर सशक्त, मर्यादित और रचनात्मक विपक्षी भूमिका निभा पाई तो चुनावों में जनता का विश्वास स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा। जनता अवसरवाद नहीं, स्थिरता और परिपक्वता चाहती है।

विशेष महाधिवेशन ने कांग्रेस को नई दिशा दी है। वह दिशा केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि कार्यशैली परिवर्तन है। इसलिए आज मुख्य सवाल यह नहीं कि सरकार कौन बनाएगा, बल्कि यह है कि नया नेतृत्व पुरानी राजनीति को जारी रखेगा या नई राजनीतिक संस्कृति का आधार बनाएगा। इस प्रश्न के उत्तर से विशेष महाधिवेशन का ऐतिहासिक महत्व निर्धारित होगा।

अंततः राष्ट्रीय राजनीति की गंभीर समीक्षा करते हुए जनमत का सम्मान करना नेपाली कांग्रेस की पहली जिम्मेदारी है। प्रदेश सरकार के गठन के नाम पर अस्थिर गठबंधन फिर से करना पार्टी के लिए नुकसानदायक होगा। संघ और प्रदेश दोनों स्तरों पर सशक्त, जिम्मेदार और रचनात्मक विपक्ष बनकर लोकतंत्र को मजबूत करना, सरकार को जवाबदेह बनाना और जनविश्वास जीतना कांग्रेस तथा पूरे लोकतंत्र के लिए लाभकारी होगा।

जेनजी विद्रोह ने परिवर्तन की मांग की और विशेष महाधिवेशन ने प्रतिबद्धता व्यक्त की। अब वह प्रतिबद्धता व्यवहार में लाई जाए या पुराने ढर्रे पर वापस लौटें, इसका निर्णय कांग्रेस के हाथों में है। इतिहास बार-बार ऐसे मौके नहीं देता। आज का निर्णय सरकार की ही नहीं, कांग्रेस की विश्वसनीयता, लोकतंत्र की परिपक्वता और नई पीढ़ी के विश्वास के भविष्य का निर्धारण करेगा। जनमत का सम्मान कर परिवर्तन को संस्थागत करेंगे या अल्पकालीन सत्ता के लालच में बदलाव के औचित्य को कमतर करेंगे? यही बड़ा राजनीतिक सवाल है।

(पोख्रेल राजनीतिक विश्लेषक एवं समाजशास्त्री हैं।)

बर्खामा बिजली बर्बाद होने के कारण और समाधान के उपाय

अपना विद्युत निर्यात न कर पाने के कारण, नेपाल में वर्षा ऋतु के दौरान अत्यधिक मात्रा में बिजली बर्बाद हो रही है, ऐसा निजी ऊर्जा उत्पादकों के संगठन ‘इप्पान’ के अध्यक्ष ने बताया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण और निजी जलवायु तथा सौर ऊर्जा उत्पादक वर्षा ऋतु में लगभग 4,300 मेगावाट तक बिजली उत्पादन कर सकते हैं। लेकिन देश में केवल 2,500 मेगावाट की मांग रहती है जबकि भारत और बांग्लादेश को केवल 1,200 मेगावाट ही निर्यात किया जा रहा है, प्राधिकरण के कर्मचारियों ने जानकारी दी है।

विद्युत् खरीद, बिक्री, निर्यात और वितरण करने वाले प्राधिकरण के प्रवक्ता ने बताया कि निजी ऊर्जा उत्पादकों के दावे पूर्णतया सही नहीं हैं। ऊर्जा खरीद समझौते के अनुसार बिजली उपयोग न होने की स्थिति में भी प्राधिकरण उत्पादक कंपनियों को क्षतिपूर्ति प्रदान करता है, प्रवक्ता राजन ढकाल ने बताया। वर्षा ऋतु में लगभग चार महीने तक पूर्ण क्षमता से बिजली उत्पादन होता है, लेकिन सर्दियों में केवल 15 से 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन होता है, जिससे सर्दियों में उद्योगों को बिजली की कमी होती है और वर्षा ऋतु में बिजली बेकार जाती है।

इप्पान के अध्यक्ष मोहन डाँगी के अनुसार, वर्तमान में लगभग 900 से 1000 मेगावाट बिजली वर्षा ऋतु में व्यर्थ हो जाती है। हालांकि प्राधिकरण के प्रवक्ता ढकाल कहते हैं कि वर्षा ऋतु में सभी परियोजनाएं अपनी पूर्ण क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं करती हैं। पिछले वर्ष तक विद्युत प्राधिकरण ने ‘टेक ऑर पे’ नीति के तहत समझौते में उल्लेखित बिजली का भुगतान किया है। लेकिन वर्तमान में नदी प्रवाह आधारित जलविद्युत परियोजनाओं के लिए ‘टेक ऑर पे’ समझौता इतना व्यापक नहीं है, इप्पान ने यह जानकारी दी है।

निजी क्षेत्र बिजली निर्यात की अनुमति देने की मांग करता आ रहा है। डाँगी ने कहा, “हमारे सात आठ कंपनियां बिजली निर्यात की अनुमति मांग रही हैं। यदि सरकार चाहे तो निजी क्षेत्र को निर्यात एवं प्रसारण लाइन बनाने की नीति आवश्यक है।” इस बीच, नेपाल-भारत ऊर्जा सचिव स्तरीय बैठक में नेपाल और भारत के बीच विद्युत व्यापार विस्तार का समझौता हुआ है। इस समझौते के अनुसार, अब भारत के दो अंतर्देशीय प्रसारण लाइनों के माध्यम से 1,850 मेगावाट तक बिजली निर्यात संभव होगा।

आज विदेशी मुद्राको विनिमय दर

नेपाल राष्ट्र बैंकले सोमबारका लागि अमेरिकी डलरको खरिददर १५३ रुपैयाँ ७६ पैसा र बिक्रीदर १५४ रुपैयाँ ३६ पैसा निर्धारण गरेको छ। केन्द्रीय बैंकले विभिन्न विदेशी मुद्राको विनिमय दरमा सामान्य सुधार गरेको जनाएको छ। भारतीय रुपैयाँ १०० को खरिददर १६० रुपैयाँ र बिक्रीदर १६० रुपैयाँ १५ पैसा कायम गरिएको छ।

राष्ट्र बैंकका अनुसार युरोपियन युरोको खरिददर १७५ रुपैयाँ ८९ पैसा र बिक्रीदर १७६ रुपैयाँ ५८ पैसा, युके पाउण्ड स्ट्रलिङ्गको खरिददर २०६ रुपैयाँ ८८ पैसा र बिक्रीदर २०७ रुपैयाँ ६८ पैसा, स्वीस फ्र्याङ्कको खरिददर १९० रुपैयाँ ४४ पैसा र बिक्रीदर १९१ रुपैयाँ १८ पैसा तोकिएको छ।

अष्ट्रेलियन डलरको खरिददर १०७ रुपैयाँ ३६ पैसा र बिक्रीदर १०७ रुपैयाँ ७८ पैसा, क्यानाडियन डलरको खरिददर १०९ रुपैयाँ ६६ पैसा र बिक्रीदर ११० रुपैयाँ ०९ पैसा, सिङ्गापुर डलरको खरिददर ११९ रुपैयाँ ०४ पैसा र बिक्रीदर ११९ रुपैयाँ ५१ पैसा तोकिएको छ।

राष्ट्र बैंकले यो विनिमय दरलाई आवश्यकतानुसार जुनसुकै समयमा संशोधन गर्न सकिने जनाएको छ। वाणिज्य बैंकले तोक्ने विनिमय दर फरक हुनसक्ने र अद्यावधिक विनिमय दर केन्द्रीय बैंकको वेबसाइटमा उपलब्ध हुने जनाइएको छ।

प्रकृति में केवल 20 मिनट बिताने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव

प्रकृति में आनंदित एक परिवार

तस्बिर स्रोत, Getty Images

तस्बिर का शीर्षक, प्रकृति में केवल 20 मिनट बिताने से आपके शरीर में मापन योग्य बदलाव शुरू हो सकते हैं

अगर पार्क में टहलने के बाद या जंगल के रास्ते पर घूमते हुए आपको शांति महसूस होती है, तो यह केवल आपकी कल्पना नहीं है, इसके पीछे विज्ञान भी है।

बाहरी वातावरण में समय बिताने से शरीर में कई मापन योग्य बदलाव होने लगते हैं। यह तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन को कम कर सकता है, रक्तचाप घटा सकता है और पेट के स्वास्थ्य में भी सुधार कर सकता है।

इन फायदों का अनुभव करने के लिए घंटों पैदल चलना जरूरी नहीं है। केवल 20 मिनट में अधिकतम प्रभाव दिखने वाले अनेक अध्ययनों से पता चला है। इसलिए सप्ताह में कुछ दिनों दोपहर में पार्क में टहलना या वहां की बेंच पर बैठकर नाश्ता करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी हो सकता है।

आइए, प्रकृति में समय बिताकर स्वास्थ्य में सुधार के चार मुख्य तरीकों को जानते हैं।

१. अनायास ही शांति मिलती है

हरे भरे पेड़ देखकर, सैल का सुगंध महसूस करके, पत्तों की हल्की फुंफकार सुनकर या पक्षियों की चहचहाहट सुनकर हमारे शरीर की अनजानी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाला नर्वस सिस्टम तुरंत प्रतिक्रिया करता है।

रोड्री ने जीता गोल्डन बल, एमबाप्पे को मिला गोल्डन बूट अवार्ड

स्पेन को कप्तान रोड्री ने अपनी टीम को अपराजित चैंपियन बनाते हुए गोल्डन बल अवार्ड जीता, जबकि फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने गोल्डन बूट अवार्ड हासिल किया। स्पेन के कप्तान रोड्रिगो हर्नान्डेज कासांते (रोड्री) ने १६ वर्षों बाद स्पेन को फीफा विश्व कप का खिताब दिलाते हुए श्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में एडिडास गोल्डन बल अवार्ड प्राप्त किया। फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को १-० के गोल अंतर से हराकर इतिहास में दूसरी बार विश्व कप का खिताब जीता।

फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने १० गोल करके लगातार दूसरी बार गोल्डन बूट अवार्ड जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

रोड्री ने स्पेन की कप्तानी करते हुए मिडफील्ड में गेंद नियंत्रण और आक्रमण दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में स्पेन ने सोमवार सुबह संपन्न फाइनल में विजेता अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में १-० से हराकर दूसरी बार फीफा विश्व कप की उपाधि जीती।

२०१८ में स्पेन के लिए पदार्पण करने वाले रोड्री विश्व कप जीताने वाले दूसरे कप्तान बने। इससे पहले, २०१० में गोलकीपर इकर कासियास की कप्तानी में स्पेन ने पहली बार विश्व कप खिताब हासिल किया था। गोल करने से ज्यादा रोड्री टीम के मिडफील्ड में मुख्य खिलाड़ी हैं। उन्होंने २०२४ में उत्कृष्ट खिलाड़ी को मिलने वाला बालोन डी’ओर अवार्ड भी अपने नाम किया है।

मैनचेस्टर सिटी के खिलाड़ी रोड्री ने फीफा विश्व कप, यूएफा चैंपियंस लीग और बालोन डी’ओर जीतने वाले ११ खिलाड़ियों की सूची में खुद को शामिल किया है। २०२४ के यूरो कप में जब स्पेन ने उपाधि जीती थी, तब रोड्री को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में गोल्डन बल अवार्ड मिला था। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी को सिल्वर बल अवार्ड मिला जबकि फ्रांस के कप्तान एमबाप्पे को ब्रोंज बल अवार्ड मिला।

इसी तरह, स्पेन के गोलकीपर उनाई सिम्मोन ने सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर के रूप में गोल्डन ग्लॉव्स अवार्ड जीता और स्पेन के युवा डिफेंडर पाउ कुबार्सी को सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सिम्मोन ने इस विश्व कप में ८ मैचों में से ७ में क्लीन शीट बनाए और नया रिकॉर्ड बनाया।

उन्होंने विश्व कप में लगातार ६०० से अधिक मिनटों तक गोल खाए बिना नया कीर्तिमान स्थापित किया। १९ साल के बार्सिलोना के डिफेंडर कुबार्सी ने स्पेन की रक्षा लाइन में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। विश्व कप में सर्वाधिक १० गोल करने वाले फ्रांस के कप्तान एमबाप्पे को गोल्डन बूट अवार्ड मिला। एमबाप्पे दो बार गोल्डन बूट जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।

८ गोल करने वाले मेसी को सिल्वर बूट और ७ गोल करने वाले इंग्लैंड के जूड बेलींगहम को ब्रोंज बूट अवार्ड मिला।

धनुषाबाट सबसे अधिक और मनाङबाट सबसे कम वैदेशिक रोजगारको लागि श्रम स्वीकृति प्राप्त

गत आर्थिक वर्ष २०८२/८३ में धनुषा जिले से सबसे अधिक ३८ हजार ५५३ लोगों ने वैदेशिक रोजगार के लिए श्रम स्वीकृति प्राप्त की है। वैदेशिक रोजगार विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मनाङ से सबसे कम मात्र २१७ लोगों ने श्रम स्वीकृति लेकर वैदेशिक रोजगार के लिए यात्रा की है। उक्त अवधि में कुल ७ लाख ९२ हजार १८७ लोगों ने श्रम स्वीकृति प्राप्त की, जिसमें तराई क्षेत्र के जिलों से जाने वालों की संख्या हिमाली जिलों की तुलना में अधिक देखी गई है।

वैदेशिक रोजगार विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ७७ जिलों में धनुषा से सबसे अधिक श्रमिक वैदेशिक रोजगार के लिए गए हैं। झापा से ३५ हजार १२४, मोरङ से ३१ हजार १२४, सिरहा से ३० हजार २११, महोत्तरी से २८ हजार २२९, रुपन्देही से २५ हजार ३९१, सुनसरी से २४ हजार ३६५, सर्लाही से २३ हजार २००, सप्तरी से २० हजार ५५९ और चितवन से १९ हजार ८०३ लोगों ने श्रम स्वीकृति लेकर वैदेशिक रोजगार किया।

मनाङ से केवल २१७ लोगों ने वैदेशिक रोजगार के लिए श्रम स्वीकृति ली है। इसके बाद मुस्ताङ २४४, डोल्पा ६१४, हुम्ला ६४३, डोटी १,१६५, कालीकोट १,०२४, जुम्ला १,३९४, रसुवा १,७७१, रुकुम पश्चिम २,१६६, डडेल्धुरा २,३१९ और दार्चुला से २,३५३ लोगों ने श्रम स्वीकृति प्राप्त की है।

गत आर्थिक वर्ष में कुल ७ लाख ९२ हजार १८७ लोगों ने वैदेशिक रोजगार के लिए श्रम स्वीकृति ली है, जिनमें ६ लाख ९७ हजार ९६ पुरुष और ९५ हजार ९१ महिलाएं शामिल हैं। पुनः श्रम स्वीकृति निरस्तीकरण के बाद नई श्रम स्वीकृति लेने वालों की संख्या ४ लाख ६० हजार ४०४ है, विभाग के आंकड़ों से पता चलता है। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि तराई क्षेत्र के जिलों से वैदेशिक रोजगार के लिए जाने वालों की संख्या अधिक है, जबकि हिमाली और कम जनसंख्या वाले जिलों से यह संख्या कम है।

स्पेन ने 16 वर्ष बाद फिफा विश्व कप 2026 की ट्रॉफी जीती

युवा प्रतिभा, आकर्षक पासिंग फुटबॉल और सामूहिक प्रदर्शन की ताकत से स्पेन ने फिफा विश्व कप 2026 की ट्रॉफी जीतकर दूसरी बार विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया है। स्पेन ने न्यूयॉर्क–न्यू जर्सी स्टेडियम में हुए फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 गोल से हराकर यह खिताब अपने नाम किया। अतिरिक्त समय के 106वें मिनट में फेरेन टोरेस द्वारा किए गए निर्णायक गोल से 16 वर्षों बाद स्पेन एक बार फिर विश्व चैंपियन बना। कोच लुइस डे ला फुंते के नेतृत्व में चल रहे स्पेन ने युवा प्रतिभाओं और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित प्रदर्शन के माध्यम से विश्व फुटबॉल में अपनी सत्ता फिर से कायम की है। ४ साउन, काठमाडौं।

16 साल पहले दक्षिण अफ्रीका में पहली बार विश्व फुटबॉल की चरम सीमा छूने वाला स्पेन अब फिर से विश्व फुटबॉल पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में सफल रहा है। युवा प्रतिभा, आकर्षक पासिंग फुटबॉल और सामूहिक खेल के दम पर स्पेन ने फिफा विश्व कप 2026 की ट्रॉफी जीती और दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया। न्यूयॉर्क–न्यू जर्सी स्टेडियम में हुए फाइनल में पूर्व विजेता अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर स्पेन ने 16 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा को समाप्त किया। 2010 के बाद पहली बार विश्व कप उठाते हुए स्पेन ने अपनी नई पीढ़ी को विश्व फुटबॉल के नेतृत्व के लिए तैयार होने का स्पष्ट संदेश भी दिया है।

कोच लुइस डे ला फुंते के नेतृत्व में स्पेन ने टूर्नामेंट में सबसे आकर्षक और संतुलित फुटबॉल खेल्ने टीम के रूप में खुद को स्थापित किया। गेंद पर नियंत्रण, उच्च दबाव, तीव्र आक्रमण और अनुशासित रक्षा के मिश्रण से स्पेन ने उपाधि हासिल की। फ्रांस जैसी मजबूत टीम को सेमीफाइनल में प्रभावशाली तरीके से मात देने के बाद स्पेन ने फाइनल में भी अपनी लय बरकरार रखी और पूर्व विजेता अर्जेंटीना को मात दी। फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ लगातार आक्रमण करते हुए स्पेन ने दर्जनों अवसर बनाए। जीत के लिए अतिरिक्त समय का सहारा लेना पड़ा।

नयी पीढ़ी का सुनहरा उदय हुआ है, जो कभी जावि, इनिएस्टा, कासियास और पुइयोल की टीम विश्व फुटबॉल पर राज किया करती थी, वहीं आज स्पेन नए चेहरे लेकर दुनिया के सर्वोच्च स्थान पर पहुंच गया है। लामिन यमाल, पाउ कुबार्सी, पेड्रो पोरो, फेरेन टोरेस जैसे युवा खिलाड़ी और रोड्री, फाबियन रूइज तथा आयमेरिक लापोर्ट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलित संयोजन स्पेन को विश्व विजेता बनाना सम्भव बनाया। पाउ कुबार्सी को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया जबकि कप्तान रोड्री को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पदक गोल्डन बॉल अवार्ड से नवाजा गया।

चीन की ओर नेपाली वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि

सूचना के अनुसार, उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में नेपाल का कुल वस्तु निर्यात ८१.८ प्रतिशत की वृद्धि के साथ २७७ अरब ३ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। चीन की ओर ऊनी गलियाचा, हस्तशिल्प और तैयार वस्त्र के निर्यात में खास वृद्धि देखी गई है, जबकि भारत की ओर सोयाबीन तेल, पॉलिएस्टर धागा और जूट आधारित वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में कुल वस्तु व्यापार घाटा ६० प्रतिशत बढ़कर १५२७ अरब ९ करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

काठमाडौं में ३ सावन को आयोजित कार्यक्रम में मंत्रालय ने चीन की ओर निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में ४६.६ प्रतिशत बढ़कर आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में १.६ प्रतिशत की वृद्धि के साथ २ अरब ६३ करोड़ रुपये तक पहुंचने के आंकड़े सार्वजनिक किए। मंत्रालय के अनुसार, “चीन की ओर विशेष रूप से ऊनी गलियाचा, हस्तशिल्प सामग्री, तैयार वस्त्र समेत विभिन्न वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि हुई है।”

मंत्रालय ने २०७९/८० से २०८४/८५ तक के व्यापार घाटा न्यूनीकरण से जुड़ी राष्ट्रीय कार्ययोजना को सन् २०२३ में अद्यतन किया है, जिसमें नेपाल के आयात और निर्यात का विस्तृत विवरण शामिल है। आर्थिक वर्ष २०७४/७५ में नेपाल में वस्तु आयात की राशि १,२४५ अरब रुपये थी, जो पांच वर्षों में बढ़कर २०७८/७९ में १,९२० अरब रुपये हो गई थी।

इसी के अनुरूप, आर्थिक वर्ष २०८१/८२ में कुल वस्तु आयात में १३.३ प्रतिशत की वृद्धि होकर १८०४ अरब १२ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। भारत से आयात में ७५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह १०७१ अरब २० करोड़ रुपये हो गया है, जबकि चीन से आयात में १४.२ प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह ३४१ अरब १० करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इस प्रकार कुल वस्तु व्यापार घाटा ६० प्रतिशत की वृद्धि के साथ १५२७ अरब ९ करोड़ रुपये तक पहुंचा है।

फ्रांस को खिताब दिलाने में नाकाम, सर्वाधिक गोल और लगातार दूसरी बार गोल्डन बूट में कीर्तिमान स्थापित किलियन एमबाप्पे

लगातार दो विश्व कप फाइनल खेलने वाले, एक बार विजेता और एक बार गोल्डन बूट अवॉर्ड जीत चुके किलियन एमबाप्पे इस बार फ्रांस को फाइनल तक ले जाने में सफल नहीं हुए, लेकिन लियोनेल मेसी को पीछे छोड़कर विश्व कप इतिहास के सर्वकालीन सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए।

समाचार सारांश

  • किलियन एमबाप्पे ने इस विश्व कप में 10 गोल करते हुए लगातार दो बार गोल्डन बूट जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
  • एमबाप्पे ने 22 विश्व कप मैचों में 22 गोल कर लियोनेल मेसी के 21 गोल के रिकॉर्ड को तोड़ा और सर्वाधिक गोलकर्ता बने।
  • फ्रांस के कप्तान एमबाप्पे ने राष्ट्रीय टीम के लिए 106 मैच खेलते हुए 66 गोल का रिकॉर्ड कायम किया है।

4 साउन, काठमांडू। फीफा विश्व कप शुरू होने से पहले, पिछले उपविजेता फ्रांस को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। स्टार खिलाड़ियों की टीम फ्रांसीसी टीम का नेतृत्व 27 वर्षीय किलियन एमबाप्पे ने किया था।

समूह चरण से लेकर नॉकआउट चरण तक फ्रांस का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। प्रीक्वार्टरफाइनल में पैराग्वे के खिलाफ कुछ संघर्ष के बावजूद सेमीफाइनल तक एमबाप्पे ने टीम का बेहतरीन नेतृत्व किया।

लेकिन अल यूरोपियन सेमीफाइनल में स्पेन के खिलाफ 2-0 से हारकर फ्रांस खिताब की दौड़ से बाहर हो गया।

एमबाप्पे ने साल 2018 में मात्र 19 साल की उम्र में फ्रांस के साथ विश्व कप जीता था। चार साल बाद, कतर में हुए विश्व कप में एमबाप्पे और परिपक्व हो गए और फ्रांस को फाइनल तक पहुंचाकर गोल्डन बूट अवॉर्ड जीता।

उस फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ हैट्रिक करने के बावजूद, पेनल्टी शूटआउट में फ्रांस की हार के कारण एमबाप्पे लगातार विश्व कप ट्रॉफी जीतने में सफल नहीं हो सके।

पहले विश्व कप में 4 गोल करने वाले एमबाप्पे ने 2022 में सर्वाधिक 8 गोल कर व्यक्तिगत पुरस्कार प्राप्त किया था।

अपने तीसरे विश्व कप में एमबाप्पे कप्तान बने, लेकिन 27 वर्ष की उम्र में फ्रांस की कप्तानी करते हुए फाइनल तक नहीं पहुंच सके।

लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में देखे जाने वाले एमबाप्पे लगातार दो बार विश्व कप फाइनल खेलने में सफल हुए और एक बार खिताब भी जीत चुके हैं।

लेकिन अभी तक संयुक्त रूप से आयोजित उत्तर अमेरिका के तीन देशों में हुए अब तक के सबसे बड़े फीफा विश्व कप में एमबाप्पे खिताब जीतने में नाकाम रहे।

लगातार दूसरा गोल्डन बूट

टीम को खिताब नहीं दिला पाने के बावजूद एमबाप्पे का व्यक्तिगत प्रदर्शन शानदार रहा। फाइनल में न पहुंचने के बाद तीसरे स्थान के मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 2 गोल करने के बाद उन्होंने गोल स्कोरिंग में नया रिकॉर्ड बनाया।

उन्होंने 23वें विश्व कप संस्करण में सर्वाधिक गोलकर्ता रहे। वे पहले ही गोल्डन बूट अवॉर्ड जीत चुके थे और लगातार दो बार गोल्डन बूट जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।

इस बार उन्होंने डबल डिजिट गोल किए; कुल 8 मैचों में 10 गोल और 4 असिस्ट का रिकॉर्ड बनाया।

तीसरे स्थान और फाइनल से पहले एमबाप्पे असिस्ट के मामले में मेसी से पीछे थे। मेसी और एमबाप्पे दोनों के 8 गोल थे, लेकिन मेसी के 4 असिस्ट थे जबकि एमबाप्पे के 3।

लेकिन तीसरे स्थान के मैच में एमबाप्पे ने 2 गोल और 1 असिस्ट जोड़ा। फाइनल में मेसी स्पेन के खिलाफ गोल करने में असफल रहे।

एमबाप्पे लगातार दूसरी बार सर्वाधिक गोलकर्ता बने और दो बार गोल्डन बूट जीतने में सफल रहे।

उन्होंने समूह चरण के पहले मैच में सेनेगल के खिलाफ 2 गोल कर धमाकेदार शुरुआत की। इसके बाद इराक के खिलाफ भी 2 गोल किए जबकि नॉर्वे के खिलाफ गोल करने में असफल रहे।

राउंड ऑफ 32 में स्वीडन के खिलाफ 2 गोल करने वाले एमबाप्पे ने प्रीक्वार्टरफाइनल में पैराग्वे के खिलाफ निर्णायक पेनल्टी गोल किया। क्वार्टरफाइनल में मोरक्को के खिलाफ भी एक गोल किया। सेमीफाइनल में गोल नहीं किया लेकिन तीसरे स्थान के मैच में 2 गोल किए।

समूह चरण में नॉर्वे के खिलाफ गोल न करने के बावजूद उस्मान डेम्बेले ने हेटट्रिक कर फ्रांस को 4-1 की जीत दिलाई। सेमीफाइनल में भी स्पेन के खिलाफ एमबाप्पे गोल नहीं कर पाए।

विश्व कप के सर्वाधिक गोलकर्ता

स्पेनिश क्लब रियल मैड्रिड से पेशेवर फुटबॉल खेलने वाले एमबाप्पे एक वास्तविक गोल मशीन हैं। क्लब स्तर पर भी उन्होंने अपनी क्षमता प्रदर्शित की है।

उन्होंने पिछले दो विश्व कपों में कुल 12 गोल किए थे और इस बार 8 मैचों में 10 गोल कर अपनी पहचान और मजबूत की।

तीन संस्करणों के विश्व कप में कुल 22 मैचों में 22 गोल कर वे सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बने। उन्होंने अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी के 21 गोल के रिकॉर्ड को तोड़ा, जो मेसी ने 33 मैचों में बनाया था, जबकि एमबाप्पे ने 11 मैच कम खेल कर यह रिकॉर्ड बनाया।

इस विश्व कप से पहले जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज सर्वाधिक गोलकर्ता थे, जिन्होंने 16 गोल किए थे। मेसी के 13 और एमबाप्पे के 12 गोल थे।

मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ पहले मैच में हेट्रिक करते हुए क्लोज के समान गोल किए, और ऑस्ट्रिया के खिलाफ 2 गोल करते हुए सर्वाधिक गोलकर्ता बन के récord बनाया।

एमबाप्पे ने समूह चरण में 4 गोल कर क्लोज के बराबरी की। उसके बाद स्वीडन के खिलाफ गोल कर क्लोज को पीछे छोड़ा और मेसी के क़रीब बने रहे।

फाइनल खेलने से पहले मेसी को पीछे छोड़ते हुए एमबाप्पे ने इंग्लैंड के खिलाफ 2 गोल कर मेसी के 21 गोल के रिकॉर्ड को तोड़ा।

पहले फ्रांस के जस्ट फॉन्टेन एक ही विश्व कप में 13 गोल कर सर्वाधिक गोलकर्ताओं की सूची में थे। इस बार एमबाप्पे ने फॉन्टेन, क्लोज, ब्राजील के रोनाल्डो और मेसी सभी को पीछे छोड़ दिया।

एमबाप्पे सबसे कम मैच में सर्वाधिक गोल करने वाले और सबसे कम उम्र में विश्व कप में 22 गोल करने वाले खिलाड़ी बने।

फ्रांस के लिए 100 मैच और सर्वश्रेष्ठ गोलकर्ता

इस विश्व कप में एमबाप्पे ने फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के लिए भी नए कीर्तिमान स्थापित किए। वे विश्व कप में फ्रांस के लिए सबसे अधिक मैच खेलने, सबसे अधिक गोल करने और राष्ट्रीय टीम के सर्वश्रेष्ठ गोलकर्ता बने।

एमबाप्पे ने फ्रांस के विश्व कप में सबसे अधिक मैच खेलने वाले गोलकीपर ह्यूगो लोरिस का रिकॉर्ड तोड़ा जिन्होंने 20 मैच खेले थे। उन्होंने 22 मैच खेल लिए। साथ ही, वे फ्रांस के लिए विश्व कप में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी भी बन गए।

उन्होंने विश्व कप के पहले मैच में सेनेगल के खिलाफ 2 गोल करते हुए फ्रांस के लिए सबसे अधिक गोल करने वाले ओलिवर जिरुड के 57 गोल का रिकॉर्ड भी तोड़ा।

दूसरे मैच में इराक के खिलाफ उन्होंने फ्रांस की सीनियर टीम के लिए 100वां मैच खेला। वे फ्रांस के लिए 100 मैच खेलने वाले दसवें खिलाड़ी बने। विश्व कप के बाद वे फ्रांस के लिए सबसे अधिक मैच खेलने वालों की सूची में नौवें स्थान पर पहुंच गए हैं। उन्होंने 106 मैच खेल कर 66 गोल किए हैं।

फ्रांस के गोलकीपर ह्यूगो लोरिस ने अब तक 145 मैच खेले हैं। यदि एमबाप्पे इसी लय को बनाए रखते हैं तो वे जल्द ही लोरिस का रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।

एमबाप्पे ने मोनाको क्लब में खेलते हुए साल 2014 में फ्रांस के युवा वर्ग से फुटबॉल खेलना शुरू किया। उन्होंने फ्रांस की U-17 टीम के लिए 2 और U-19 टीम के लिए 11 मैच खेले हैं।

फ्रांस ने 2016 में U-19 चैंपियनशिप जीती थी, तब 17 वर्ष की उम्र में एमबाप्पे ने 5 गोल किए थे।

साल 2017 में लक्जमबर्ग के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने पहली बार राष्ट्रीय टीम में पदार्पण किया था। उस समय वे फ्रांस के लिए खेलने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे।

इसी तरह 2017 सितंबर में नीदरलैंड्स के खिलाफ पहला अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले एमबाप्पे ने एक दशक के भीतर राष्ट्रीय टीम की कप्तानी, विश्व कप जीतने और सर्वाधिक गोलकर्ता बनने जैसे रिकॉर्ड बनाए हैं और अब भी कई उपलब्धियों के लिए तैयार हैं।

विश्व कप के सर्वाधिक गोलकर्ता

किलियन एमबाप्पे : 22 गोल

लियोनेल मेसी : 21 गोल

मिरोस्लाव क्लोज : 16 गोल

क्रिस्टियानो रोनाल्डो : 15 गोल

गर्ड मुलर : 14 गोल

हैरी केन : 14 गोल

जस्ट फॉन्टेन : 13 गोल

पेलé : 12 गोल

दुग्ध विकास संस्थान की नई नीति: साउन के भीतर संपर्क न करने पर दूध नहीं खरीदा जाएगा

दुग्ध विकास संस्थान ने दूध संकलन प्रणाली को व्यवस्थित बनाने के लिए नई नीति लागू करते हुए साउन मास के अंत तक संपर्क और नवीनीकरण को अनिवार्य कर दिया है। निर्धारित समय सीमा में संपर्क नहीं करने वाले सहकारी संस्थान और फार्मों से दूध खरीदने के लिए संस्थान बाध्य नहीं होगा। दुग्ध व्यवसायियों को दूध कारोबार निरंतर जारी रखने के लिए जिला आयोजना कार्यालय या चिलिंग सेंटर में संपर्क कर नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

सरकारी स्वामित्व वाले दुग्ध विकास संस्थान (डीडीसी) ने दूध संकलन प्रणाली के आधुनिकीकरण और और अधिक व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह नई नीति लागू की है। देशभर के किसानों से लंबे समय से दूध संकलन कर रहा डीडीसी ने आर्थिक वर्ष २०७८/७९ से लागू होने वाली इस नीति के तहत दूध आपूर्ति करने वाले सहकारी तथा निजी फार्मों को साउन मास के अंत तक संपर्क एवं नवीनीकरण करना अनिवार्य कर दिया है।

डीडीसी केन्द्रीय कार्यालय लैनचौर ने सूचना जारी करते हुए बताया कि दूध संकलन को तकनीकी रूप से सुपाठ्य, अनुमान योग्य, स्थायी और ज्यादा व्यवस्थित बनाने के लिए नई नीति लागू की गई है। डीडीसी के साथ निरंतर दूध कारोबार करने वाले दुग्ध उत्पादक सहकारी संस्थाओं और निजी फार्मों को साउन मास के भीतर अनिवार्य रूप से संपर्क करना आवश्यक है।

सूचना में कहा गया है, ‘२०७८ साउन मास के अंत तक संपर्क नहीं करने वाले संस्था तथा फार्म के साथ डीडीसी दूध कारोबार करने के लिए बाध्य नहीं होगा।’ साउन मास के बाद संपर्क नहीं करने वाले फार्म या सहकारी संस्थाओं का दूध डीडीसी उठाने की इच्छा भी नहीं करेगा। ५७ वर्षों से दुग्ध क्षेत्र में सक्रिय डीडीसी सहकारी संस्था, निजी फार्म और किसान से दूध संकलन करता आ रहा है।

केन्द्रीय बैंक ने सीईओ को केवल चेतावनी पर अयोग्य न ठहराने का सुझाव दिया

बैंकरों ने बैंक के सीईओ या संचालकों को केवल सामान्य चेतावनी मिलने के आधार पर अयोग्य घोषित करने की व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की है। नेपाल बैंकर्स संघ के अध्यक्ष संतोष कोईराला ने विधेयक में सीईओ को गवर्नर बनने से रोकने के प्रावधान पर असंतोष व्यक्त करते हुए विकल्प खुला रखने का सुझाव दिया है। सिबिफिन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश उपाध्याय ने अपराध की प्रकृति के अनुसार सजा का वर्गीकरण करने और सहकारी संस्थाओं के नियमन की जिम्मेदारी राष्ट्र बैंक को सौंपने की मांग की है।

३ साउन, काठमाडौं। बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं के संचालक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को राष्ट्र बैंक द्वारा केवल चेतावनी या स्पष्टीकरण मांगने के आधार पर अयोग्य घोषित नहीं किया जाना चाहिए, यह बैंकरों का कथन है। प्रतिनिधिसभा की अर्थ समिति में राष्ट्र बैंक विधेयक पर हुए विचार-विमर्श में बैंकरों ने ऐसे सुझाव प्रस्तुत किए।

नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन, २०५८ में संशोधन के लिए तैयार विधेयक में स्पष्ट रूप से यह निर्धारण नहीं किया गया है कि बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं के संचालक और सीईओ किन परिस्थितियों में अयोग्य घोषित होंगे, जिस पर बैंकरों ने स्पष्टता एवं अपराध के प्रकारानुसार दंड व्यवस्था की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। साथ ही, वाणिज्य बैंक के सीईओ को गवर्नर बनने से रोकने के प्रावधान पर भी उन्होंने असहमति जताई है।

नेपाल बैंकर्स संघ के अध्यक्ष संतोष कोईराला ने कहा कि विधेयक के अनुसार बैंक के सीईओ को गवर्नर बनने से रोकना आवश्यक नहीं है, इसलिए विकल्प खुला रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि कुलिंग पीरियड रखकर विकल्प खुले रखे जा सकते हैं बजाय इस प्रतिबंध के। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े सहकारी संस्थाओं को भी राष्ट्र बैंक के नियमन में लाने से सहकारी क्षेत्र की समस्याओं का समाधान संभव होगा।

बैंक तथा वित्तीय संस्था परिसंघ नेपाल (सिबिफिन) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश उपाध्याय ने कहा कि बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं के प्रति दंडात्मक कार्रवाई करते समय अपराध की प्रकृति के अनुसार सजाय का वर्गीकरण आवश्यक है। सामान्य चेतावनी या सलाह देने जैसी मामूली बातों को गंभीर अपराध के रूप में नहीं लेना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘अपराधों का वर्गीकरण आवश्यक है, सामान्य चेतावनी या सलाह को गंभीर अपराध जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, विधेयक के परिभाषा में जनता से निक्षेप इकठ्ठा करने वाले सभी सहकारी और वित्तीय संस्थाओं को शामिल किया गया है, इसलिए सहकारी संस्थाओं का नियमन भी राष्ट्र बैंक द्वारा होना चाहिए। बैंकिंग कारोबार करने वाले सहकारी संस्थाओं का नियमन संविधान और राष्ट्र बैंक के ऐन के तहत कवर किया जाना चाहिए।’’

नेपाल बैंकर्स संघ के उपाध्यक्ष सुरेन्द्रराज रेग्मी ने कहा कि कर्मचारियों की सामान्य गलतियों के कारण सीईओ या संचालक को अयोग्य घोषित करने की व्यवस्था हटानी चाहिए। तल्लो स्तर के कर्मचारियों की मामूली त्रुटि के आधार पर सीईओ या संचालक को अयोग्य ठहराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने बताया कि तीन दशक से अधिक सेवा वाले व्यक्तियों को सीईओ पद पर रखा गया है और उन्हें इस मामले में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक में ऐसे अनिश्चितताओं को दूर किया जाना चाहिए।

प्राइम कमर्शियल बैंक के सीईओ संजीव मानन्धर ने भी दंड संबंधी नियमों में लचीलापन लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केवल चेतावनी या सलाह की प्रकृति की कार्रवाई को पद से हटाने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि सर्वोच्च न्यायालय में दायर रिट में नेपाल राष्ट्र बैंक ने ऐसी कार्रवाइयों को सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में माना है, इसलिए राष्ट्र बैंक ऐन संशोधन विधेयक को भी उसी अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए।

सऊदी अरब ने विवादित स्किल प्रमाणीकरण लागू किया, निजी कंपनी के माध्यम से 50 डॉलर की फीस वसूलने लगी

नेपाल सरकार के अनुरोध और वैदेशिक रोजगार व्यवसायियों के विरोध के बावजूद सऊदी अरब ने विवादित स्किल प्रमाणीकरण कार्यक्रम (एसवीपी) को लागू कर दिया है। सऊदी पक्ष ने निजी कंपनी के माध्यम से मैनपावर व्यवसायियों को 50 अमेरिकी डॉलर शुल्क के रूप में भुगतान करने के लिए ईमेल के जरिए दबाव डाला है। वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ ने इस प्रक्रिया को आर्थिक ठगी बताते हुए इसे श्रमिकों और व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डलाने का प्रयास बताया है।

3 साउन, काठमाडौं। नेपाल सरकार के अनुरोध और वैदेशिक रोजगार व्यवसायी वर्ग के व्यापक विरोध के बावजूद सऊदी अरब ने नेपाली श्रमिकों के लिए विवादित स्किल प्रमाणीकरण कार्यक्रम (एसवीपी) को लागू किया है। युवा, श्रम तथा रोजगार मन्त्रालय ने तत्काल इस कार्यक्रम को लागू न करने की सऊदी सरकार से अपील की थी। फिर भी, व्यवहार में सऊदी पक्ष निजी कंपनी के माध्यम से शुल्क लेकर इस कार्यक्रम को निरंतरता प्रदान कर रहा है।

नेपाल वैदेशिक रोजगार व्यवसायी संघ के अध्यक्ष डिकबहादुर खत्री ने इस प्रक्रिया को ‘सीधी ठगी’ बताया है। उनके अनुसार शुरू में इसे ‘इम्प्लॉयर पे मॉडल’ कहा गया था, जिसमें नियोक्ता सम्पूर्ण शुल्क उठाएगा, लेकिन अब मैनपावर व्यवसायियों को 50 डॉलर देने के लिए ईमेल के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। खत्री के मुताबिक अनुमोदित मैनपावर कंपनियों को ‘साई विजन डिजिटल प्रालि सामाखुसी’ नामक निजी कंपनी के माध्यम से डलर देने के लिए ईमेल भेजे जा रहे हैं।

सऊदी सरकार द्वारा शुल्क वसूलने की प्रक्रिया बढ़ने पर व्यवसायियों ने राज्य तंत्र को निरीह बताया है। सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर स्थगित करने की बात कही है, लेकिन निजी कंपनी के माध्यम से इसे कैसे लागू किया जा रहा है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, वर्तमान केंद्रों के अलावा, काठमांडू और भक्तपुर के विभिन्न स्थानों पर और परीक्षा केंद्रों का विस्तार भी योजना बद्ध है।