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लेखक: space4knews

चपल भादुरी: रानी की भूमिका निभाने वाले पुरुष कलाकार की अनोखी कहानी

चपल भादुरी ने केवल 16 वर्ष की उम्र से स्त्री पात्रों की अभिनय यात्रा शुरू की और सामाजिक तिरस्कार तथा बदलते दौर के बावजूद अपने अभिनय को जारी रखा। 20वीं सदी के मध्य में भारत के पश्चिम बंगाल में एक ऐसा समय था जब थिएटर के सबसे प्रसिद्ध नायिकाएँ पुरुष ही होते थे। अर्थात पुरुष ही महिलाओं की भूमिकाएं निभाते थे। उन में सबसे चर्चित थे, चपल भादुरी। एक समय उन्हें बंगाली रंगमंच की दुनिया में ‘चपल रानी’ कहा जाता था। वे जात्रा के एकछत्र रानी माने जाते थे। जात्रा एक प्रकार की लोक घुमंतू नाट्य परंपरा है, जिसमें भारी संख्या में दर्शक शामिल होते थे। यह जात्रा विशेष रूप से बंगाल के ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय थी जहां संगीत के साथ मिथक एवं लोक कथाएँ मंचित की जाती थीं। लेकिन सार्वजनिक मंचन में महिलाओं का भागीदारी वर्जित था। सामाजिक प्रतिबंध के कारण महिलाएं नाच-गान में हिस्सा नहीं ले पाती थीं, इसलिए पुरुष कलाकार ही स्त्री पात्रों का अभिनय करते थे। ऐसे कलाकारों को ‘पुरुष रानी’ कहा जाता था और चपल भादुरी इस विधा के निर्विवाद रानी थे।

चपल भादुरी का जन्म 1939 में कोलकाता में हुआ था। उनका अभिनय उनके रग-तरंगों में था, क्योंकि उनकी मां प्रभा देवी स्वयं एक प्रतिष्ठित रंगकर्मी थीं। 16 वर्ष की कम उम्र में ही चपल ने मंच पर कदम रखा और उनकी सहज स्त्रीसुलभ स्वभाव एवं कोमल आवाज ने उन्हें स्त्रियों के पात्रों को सशक्त रूप से निभाने में मदद दी। उनकी भूमिका इतनी प्रामाणिक होती थी कि वे वास्तविक महिलाओं से कम नहीं लगते थे। परंतु इस प्रतिबंधित माहौल में स्त्री पात्र की भूमिका निभाना आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उन्हें पुराने कपड़े के टुकड़ों और क्रीम-टिका आदि का सहारा लेना पड़ता था। अपने करियर में उन्होंने रानी, देवी और वेश्यालय की मालकिन तक की भूमिकाएं निभाई। वे स्वयं अभिनय में अपने नारीत्व को अपनी पहचान मानती थीं। उनके पात्रों ने दर्शकों को हँसाया, रुलाया, और सोचने पर मजबूर भी किया।

1960 के दशक के अंतिम वर्षों में स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ। महिलाएं रंगमंच में आने लगीं और धीरे-धीरे पुरुष कलाकारों द्वारा निभाई जाने वाली रानी की भूमिकाओं को समाज ने स्वीकारना बंद कर दिया। एक बार नाटक के दौरान चपल को दर्शकों ने मिट्टी के कप से मारकर मंच से अपमानित कर बाहर निकाल दिया था, यह उनकी करियर की शुरुआत का समय था। सफलता के शिखर से नीचे उतरने पर उनका जीवन कठिन हो गया। उनके साथ काम करने वाले कई कलाकार गरीबी में चले गए। चपल ने हार नहीं मानी; वे पुस्तकालय में सफाई का काम करने लगीं। एक बार वह लोक देवी शीतला माता के वेश में सड़कों पर आशीर्वाद देते हुए भीख मांगते पाई गईं।

चपल का निजी जीवन भी उतना ही जटिल था। उन्होंने अपने प्रेम और यौनिकता को कभी छिपाया नहीं। प्रशंसकों से उन्हें प्रेम प्रस्ताव और संबंध के ऑफर मिलते थे। उनकी करीब 30 वर्षों की प्रेम कहानी किसी एक व्यक्ति से जुड़ी थी, जिसके अपने परिवार और संतान भी थे। चपल ने कभी खुद को तृतीय लिंग या किसी आधुनिक श्रेणी में रखना स्वीकार नहीं किया और उन्हें केवल ‘मैं जैसी मैं हूं’ कहने में गर्व था। उनके जीवन में असफलताएं कुछ समय की थीं; 1999 में नवीन किशोर और बाद में फिल्म निर्देशक कौशिक गांगुली द्वारा उनके जीवन पर बनी डॉक्यूमेंटरी और फिल्म ने उन्हें फिर से पहचान दिलाई। वे नई पीढ़ी के लिए एक ‘क्वीर आइकन’ और साहसी व्यक्तित्व के रूप में उभरे। आज 80 वर्ष की उम्र में चपल भादुरी कोलकाता के एक वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। वे अपने पुराने घर से दूर हैं, पर उनकी यादें आज भी जीवंत हैं। लेखक संदीप रॉय ने अपनी पुस्तक ‘चपल रानी: द लास्ट क्विन ऑफ बंगाली’ में उनकी असाधारण यात्रा का विवरण किया है।

उपसभामुख के चुनाव में एमाले ने ‘नो वोट’ का फैसला किया

नेकपा एमाले ने प्रतिनिधिसभा के उपसभामुख पद के चुनाव में हिस्सा न लेने का फैसला किया है। सत्तारूढ़ दल रास्वपा ने श्रम संस्कृति पार्टी की रुबीकुमारी ठाकुर का समर्थन करने का निर्णय लिया है। रास्वपा, कांग्रेस एवं नेकपा ने भी रुबीकुमारी ठाकुर के पक्ष में मतदान करने का निर्णय किया है। यह घटना २७ चैत, Kathmandu की है।

नेकपा एमाले ने उपसभामुख पद के लिए होने वाले चुनाव में भाग न लेने का निर्णय लिया है। आज होने वाले उपसभामुख चुनाव में श्रम संस्कृति पार्टी की रुबीकुमारी ठाकुर को सत्तारूढ़ दल रास्वपा द्वारा समर्थन मिलने के बाद, एमाले ने ‘नो वोट’ देने का निर्णय लिया है। लगभग दो तिहाई मतों के बहुमत के साथ रास्वपा, श्रम संस्कृति पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस और नेकपा भी रुबीकुमारी ठाकुर के पक्ष में मतदान करेंगे।

उपसभामुख पद के लिए राप्रपा की सरस्वती लामा और श्रम संस्कृति पार्टी की रुबीकुमारी ठाकुर के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा चल रही है।

अफगानिस्तान में भारी वर्षा के बाद 73 हजार से अधिक लोग बाढ़ प्रभावित

27 चैत, काठमांडू। पिछले दो हफ्तों में अफगानिस्तान में भारी बाढ़ ने दस हजारों लोगों को प्रभावित किया है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 26 मार्च से 6 अप्रैल तक अफगानिस्तान में अत्यंत भारी वर्षा हुई। वर्षा के कारण आई बाढ़ ने सैकड़ों गाँवों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है और 73 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ ने नौ हजार से अधिक घरों को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, कृषि फसलें और जमीन पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा के गंभीर संकट पैदा हो गए हैं।

नेपाली कांग्रेस संसदीय दल: संवैधानिक नियुक्ति निर्णय में भाग लेने वाले विपक्षी दल के नेता का चयन कब होगा?

मोहन आचार्य और भीष्मराज आङ्देम्बे

तस्बिर स्रोत, House of Representatives

तस्बिर विवरण, संसदीय दल के नेता के लिए मोहन आचार्य और भीष्मराज आङ्देम्बे के साथ अर्जुन नरसिंह केसी और वासना थापा के नाम भी चर्चा में हैं

संसद के दूसरे सबसे बड़े, यानी प्रमुख विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस ने चुनाव के अंतिम परिणाम आने के एक महीने करीब आते हुए भी संसदीय दल का नेता अभी तक चयन नहीं किया है।

चुनाव से पहले ही पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किए गए अध्यक्ष गगन थापा समेत पार्टी के कई पदाधिकारी प्रतिनिधिसभा चुनाव में हार गए, जिसके कारण पार्टी अंदर संसदीय दल के नेता चयन में उलझन देखने को मिल रही है, ऐसा विश्लेषकों का मानना है।

प्रतिनिधिसभा में कांग्रेस संसदीय दल का नेता सरकार के लिए भी एक अहम मुद्दा है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से लेकर चुनाव आयोग के अध्यक्ष तक रिक्त संवैधानिक पदों की नियुक्ति के लिए सिफारिश करने वाले संवैधानिक परिषद में प्रमुख विपक्षी दल के नेता सदस्य होते हैं।

प्रधानमंत्री अध्यक्ष रहते हैं इस परिषद में, जिसमें मुख्य न्यायाधीश, सभा अध्यक्ष, राष्ट्रीय सभा अध्यक्ष, प्रतिनिधि सभा के विपक्षी दल के नेता और उपसभापति पदेन सदस्य होते हैं।

प्रतिनिधि सभा से शुक्रवार को उपसभापति का चयन हो चुका है, अब इस परिषद के सदस्य के रूप में विपक्षी दल के नेता का चयन होना बाकी है।

ज्ञानेन्द्र शाहीले भने- एक थान उपसभामुख पद हाम्रो प्राथमिकता थिएन र छैन

ज्ञानेन्द्र शाही ने कहा- उपसभामुख पद हमारी प्राथमिकता नहीं है

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के संसदीय दल के नेता ज्ञानेन्द्र शाही ने उपसभामुख पद उनकी प्राथमिकता नहीं होने का स्पष्ट किया है। प्रतिनिधि सभा में उपसभामुख का चुनाव हो रहा है, जिसमें राप्रपा से सरस्वती लामा और श्रम संस्कृति पार्टी से रुबी ठाकुर की उम्मीदवार रहे हैं। शाही ने कहा कि रास्वपा ने प्रस्तावित करने पर उन्होंने उम्मीदवार दिया है, और उपसभामुख पद उनकी प्राथमिकता नहीं है।

27 चैत, काठमांडू। शाही ने प्रतिनिधि सभा की बैठक में कहा, “एक उपसभामुख पद हमारी प्राथमिकता नहीं थी और नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि संसद के सबसे बड़े दल से प्रस्ताव मिलने पर ही उन्होंने उम्मीदवार पेश किया। लामा की उम्मीदवारी में शाही प्रस्तावक भी हैं।

दुर्व्यवहार झेलिरहेका विद्यार्थीहरू मन्त्रालयमा सिधै उजुरी गर्न सक्ने व्यवस्था

२७ चैत, काठमाडौं। शिक्षा, विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालयले विद्यालयदेखि विश्वविद्यालयसम्मका विद्यार्थीहरूले भोग्नुपरेका उत्पीडन र दुर्व्यवहारका घटनालाई सम्बोधन गर्न नयाँ पहल सुरु गरेको छ। मन्त्री सस्मित पोखरेलले एउटा सार्वजनिक आह्वान गर्दै कुनै पनि प्रकारको दुर्व्यवहार भोगिरहेका विद्यार्थीहरूलाई सिधै मन्त्रालयमा गुनासो दर्ता गर्न आग्रह गरेका छन्। उनले सामाजिक सञ्जालमार्फत विद्यालय र विश्वविद्यालयमा अध्ययनरत विद्यार्थीहरूलाई आफूमाथि भएको अथवा भइरहेको दुर्व्यवहारबारे जानकारी दिन अनुरोध गरेका छन्। सुरक्षित शैक्षिक वातावरण निर्माण गर्ने उद्देश्यले मन्त्रालयले प्राप्त उजुरीहरूमा तत्काल अनुसन्धान र कारबाही प्रक्रिया अघि बढाउने बताएका छन्।

शैक्षिक संस्थाहरूमा हुने कुनै पनि प्रकारका दुर्व्यवहार र शोषणका विरुद्ध मन्त्रालयले शून्य सहनशीलताको नीति अंगीकार गरेको समेत उनले बताए। विद्यार्थीहरूले मन्त्रालयले उपलब्ध गराएको अनलाइन फारममार्फत आफ्नो उजुरी दर्ता गराउन सक्नेछन्। उजुरी गर्दा निम्न बुँदाहरू उल्लेख गर्नुपर्नेछ: १. अध्ययनरत शैक्षिक संस्थाको नाम। २. दुर्व्यवहारको प्रकृति। ३. घटनाको विस्तृत विवरण। यस प्रणालीमार्फत जातीय तथा लैङ्गिक भेदभाव, शाब्दिक वा भौतिक दुर्व्यवहार, यौनजन्य हिंसा, मनोवैज्ञानिक दबाब, बुलिङ र अनलाइन दुर्व्यवहार लगायतका विषयमा उजुरी दिन सकिने विकल्पहरू समावेश गरिएको छ।

राष्ट्रपति पौडेल: युवाओं को अपने देश और गांव में ही रहने की प्रेरणा दें

२७ चैत, काठमांडू। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने सरकार द्वारा युवाओं की इच्छानुसार काम करने का भरोसा व्यक्त किया है।

शुक्रवार को उन्होंने संघीय संसद्को संयुक्त बैठक में यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘रोजगार के नए अवसर खोजने और बाजार की मांग के अनुसार योग्य जनशक्ति तैयार करने के लिए शैक्षिक प्रणाली में सुधार करना आवश्यक है ताकि विदेश पलायन कर चुके युवाओं को अपने देश और गांव में रहना आनंददायक लगे। यह आज की मुख्य आवश्यकता है और सरकार इस पर विशेष ध्यान देगी।’

जेनजी आंदोलन के बाद बने अंतरिम सरकार की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने समय पर चुनाव कराने में सहयोग करने वाले सभी का धन्यवाद दिया।

निर्वाचन के माध्यम से नया जनादेश मिलने के बाद अब जनता की इच्छानुसार कानून बनाना जरूरी है, उन्होंने न्यायपालिका से शीघ्र और प्रभावी न्याय प्रदान करने पर भी जोर दिया।

संविधान कार्यान्वयन के पिछले दस वर्षों के अनुभव को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, ‘संविधान की मर्म और भावना के अनुसार और अधिक काम किया जाना बाकी है।’


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मेलानिया ट्रम्प ने व्हाइट हाउस से एपस्टीन से संबंधों के आरोपों का किया खंडन

मेलानिया ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट किया है कि उनका जेफ्री एपस्टीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि उनसे एपस्टीन से केवल 2000 में एक बार मुलाकात हुई थी और एपस्टीन की सहयोगी के साथ उनका केवल सामान्य शिष्टाचार तक सीमित संवाद हुआ था। मेलानिया ने एपस्टीन के पीड़ित महिलाओं के लिए अमेरिकी कांग्रेस में सार्वजनिक सुनवाई की मांग की है, जिसे विपक्षी सांसदों ने भी समर्थन दिया है। 27 चैत, काठमाडौँ।

मेलानिया ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में अप्रत्याशित रूप से बोलते हुए दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ अपने किसी भी प्रकार के संबंध होने के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया। लंबे समय तक ओझेल में रही मेलानिया की इस आकस्मिक उपस्थिति और सख्त भाषा ने अमेरिकी राजनीति में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एपस्टीन से जुड़े संबंध होने के आरोप पूर्णतया गलत हैं और ऐसे भ्रम फैलाने वाले प्रचार को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।

ऑनलाइन पर एपस्टीन ने मेलानिया को डोनाल्ड ट्रम्प से मिलवाने का दावा किया जाने वाले अफवाहों को उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला ‘दुराशयपूर्ण प्रयास’ बताया। “मैं कभी भी एपस्टीन की किसी गतिविधि में शामिल नहीं रही और मुझे पीड़ितों के प्रति उनके दुरुपयोग की कोई जानकारी नहीं थी,” उन्होंने कहा। उनका कहना है कि सन् 2000 में केवल एक बार ही उनसे मुलाकात हुई थी और एपस्टीन की सहयोगी ग्लिसेलन मैक्सवेल के साथ उनका ईमेल संवाद केवल सामान्य शिष्टाचार तक सीमित था।

मेलानिया ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए एपस्टीन की यौन तस्करी के पीड़ित महिलाओं के लिए अमेरिकी कांग्रेस में सार्वजनिक सुनवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘प्रत्येक महिला को अपना मामला सार्वजनिक रूप से रखने का अवसर मिलना चाहिए और उनके बयान संसद के रिकॉर्ड में स्थायी रूप से दर्ज किए जाने चाहिए। तभी सच्चाई सामने आएगी।’ विपक्षी डेमोक्रेट सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने मेलानिया की इस मांग का समर्थन करते हुए हाउस ओवरसाइट कमेटी के अध्यक्ष से सार्वजनिक सुनवाई का कार्यक्रम तैयार करने का आग्रह किया है।

मेलानिया के इस कदम से व्हाइट हाउस प्रशासन के अंदर भी कुछ असमंजस की स्थिति बन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें इस विषय पर पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, जबकि मेलानिया के प्रवक्ता ने बताया है कि राष्ट्रपतिय को जानकारी तो थी, लेकिन विषय वस्तु स्पष्ट नहीं थी। एपस्टीन के पीड़ितों ने इस घोषणा को मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। पीड़ित लिसा फिलिप्स ने इसे ‘साहसिक कदम’ करार दिया है, जबकि कुछ इसे ‘राजनीतिक नाटक’ मात्र मान रहे हैं। वर्जीनिया जोफ्रे के परिवार ने इसे पीड़ितों को फिर से बयान देने के लिए मजबूर करना न्याय की बजाय जिम्मेदारी से बचने का रास्ता बताया है। मेलानिया ट्रम्प पहले भी एपस्टीन से अपने नाम जुड़ने पर लेखक माइकल वुल्फ और कुछ मीडिया संस्थानों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे लड़ती आई हैं। हाल के दिनों में कई प्रतिष्ठित व्यवसायी एपस्टीन से संबंधों के कारण अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं और मेलानिया की प्रतिक्रिया भी उसी समय सामने आई है।

दशरथ रंगशाला में 14वां राष्ट्रीय रग्बी सेभेन्स की तैयारियां पूरी

काठमांडू के दशरथ रंगशाला में चैत्र 28 और 29 तारीख को राष्ट्रीय रग्बी सेभेन्स महिला और पुरुष प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता में पुरुष और महिला दोनों पक्षों से सात-से-सात टीमें हिस्सा लेंगी। इस प्रतियोगिता के माध्यम से आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए राष्ट्रीय टीम का चयन किया जाएगा। 27 चैत्र, काठमांडू।

काठमांडू के दशरथ रंगशाला में चैत्र 28 और 29 तारीख को होने वाली राष्ट्रीय रग्बी सेभेन्स महिला और पुरुष प्रतियोगिता की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आयोजक नेपाल रग्बी संघ ने शुक्रवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में प्रतियोगिता की तैयारियों की जानकारी दी। पुरुष वर्ग में एपीएफ क्लब, त्रिभुवन आर्मी क्लब, कर्णाली प्रदेश, बागमती प्रदेश, मधेस प्रदेश, लुम्बिनी प्रदेश और गण्डकी प्रदेश की टीमें भाग लेंगी। महिला वर्ग में एपीएफ क्लब, त्रिभुवन आर्मी क्लब, कर्णाली प्रदेश, बागमती प्रदेश, मधेस प्रदेश, सुदूर पश्चिम प्रदेश और कोशी प्रदेश की टीमें प्रतिस्पर्धा करेंगी।

टीमों को दो-दो समूहों में विभाजित किया गया है और प्रतियोगिता लीग कम नॉकआउट के आधार पर खेली जाएगी। प्रतियोगिता का अनुमानित खर्च 30 लाख रुपए है और खिलाड़ियों के लिए 1 लाख 25 हजार रुपए के बराबर दुर्घटना बीमा कराया गया है। विजेता महिला और पुरुष दोनों टीमों को 50 हजार रुपए के साथ ट्रॉफी प्रदान की जाएगी जबकि उपविजेता टीम को 30 हजार रुपए का पुरस्कार मिलेगा। सर्वश्रेष्ठ एक-एक महिला और पुरुष खिलाड़ी को 5 हजार रुपए के साथ सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता से आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए राष्ट्रीय टीम का चयन भी किया जाएगा। जापान में होने वाले 20वें एशियाई खेलों और ताइवान में आयोजित होने वाले एशिया रग्बी एमिरेट्स सेभेन्स ट्रॉफी के लिए खिलाड़ियों का चयन इसी प्रतियोगिता के आधार पर किया जाएगा।

लोक स्वादमा ‘निम्तो सुपारी’, प्रकाश सपुत र सुहाना थापाको छमछमी

चलचित्र ‘परालको आगो’ के नए गीत ‘निम्तो सुपारी’ में प्रकाश सपुत और सुहाना थापा की जोड़ी

लक्ष्मण सुनार निर्देशित चलचित्र ‘परालको आगो’ में शामिल नया गीत ‘निम्तो सुपारी’ यूट्यूब पर रिलीज़ हो चुका है। इस गीत में सत्य और मेलिना राई के स्वर, सुरेंद्र राना के शब्द एवं रामजी लामिछाने का नृत्य निर्देशन है। फिल्म ‘परालको आगो’ ११ बैशाख से प्रदर्शित होने की तैयारी में है जिसमें किशोर भण्डारी, ज्याक श्रेष्ठ समेत कई कलाकारों की भूमिका है।

काठमांडु। लक्ष्मण सुनार निर्देशित चलचित्र ‘परालको आगो’ का नया गीत ‘निम्तो सुपारी’ यूट्यूब के माध्यम से रिलीज़ किया गया है। संगीत संयोजन सत्य द्वारा किया गया है, जबकि स्वर सत्य और मेलिना राई ने दिए हैं। गीत के शब्द सुरेंद्र राना ने लिखे हैं। इस गीत में प्रकाश सपुत और सुहाना थापा की जोड़ी के रूप में उपस्थिति है। साथ ही सौगात मल्ल और सिर्जना अधिकारी को भी जोड़ी के रूप में दिखाया गया है। उनकी कैमिस्ट्री ने गीत को और भी आकर्षक बना दिया है।

ग्रामीण परिवेश में शूट किया गया इस गीत का नृत्य निर्देशन रामजी लामिछाने ने किया है। इससे पहले फिल्म का गीत ‘उडि जाऊँ भने, म पंक्षी होइन’ दर्शकों के बीच काफी चर्चा में रहा था। गुरुप्रसाद मैनाली की पुस्तक ‘परालको आगो’ से प्रेरित यह फिल्म किशोर भण्डारी, ज्याक श्रेष्ठ, सरिता भण्डारी, रेणु न्यौपाने, मञ्जिल बानियाँ जैसे कलाकारों द्वारा अभिनीत है। फिल्म को हरिओम सिने मेकर्स प्रालि के बैनर तले सुशील पोखरेल ने निर्माण किया है। ‘परालको आगो’ फिल्म ११ बैशाख से प्रदर्शन के लिए तैयार है।

निर्माण व्यवसायी ने मूल्य वृद्धि को सहज बनाने की मांग की

नेपाल निर्माण उद्योग परिषद् गुल्मी के अध्यक्ष धनिश्वर गौतम ने पेट्रोलियम पदार्थ, बिटुमिन, सीमेंट, लोहे से बने सामग्रियों और मजदूरी लागत में ३० से ३६ प्रतिशत तक वृद्धि होने की सूचना दी है। निर्माण व्यवसायियों ने मूल्य वृद्धि को ‘प्राइस एस्केलेशन’ के रूप में तत्काल संबोधित करने और अनावश्यक प्रशासनिक दबाव को समाप्त करने के लिए सरकार से आग्रह किया है। निर्माण क्षेत्र में मूल्य वृद्धि और आपूर्ति की अस्थिरता ने परियोजनाओं की प्रगति पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाला है, जिससे राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने की चेतावनी दी गई है। २७ चैत, गुल्मी।

देश भर में चल रहे विकास एवं निर्माण परियोजनाओं में आवश्यक सामग्रियों के असामान्य मूल्य वृद्धि के कारण संपूर्ण निर्माण क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गौतम के अनुसार पेट्रोलियम पदार्थ, बिटुमिन, सीमेंट, लोहे से बने सामान, परिवहन और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि के कारण औसतन निर्माण लागत में ३० से ३६ प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। आपूर्ति में अस्थिरता और बाहरी कारणों से उत्पन्न इस स्थिति ने अधिकांश परियोजनाओं की प्रगति को सीधे प्रभावित किया है, व्यवसायियों ने बताया।

उनका कहना है कि यह समस्या किसी एक परियोजना या कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशव्यापी साझा चुनौती है। संवेदनशील परिस्थिति में भी विभिन्न संस्थानों द्वारा अनावश्यक प्रशासनिक दबाव, बार-बार स्पष्टीकरण मांगना, सतर्क करना और मानसिक तनाव उत्पन्न करने जैसी गतिविधियां जारी हैं, जिस पर व्यवसायियों ने गंभीर ध्यानाकर्षण कराया है। निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने को आवश्यक बताते हुए उन्होंने अनौपचारिक एवं अनैतिक अपेक्षाएं सरकार के सुशासन के विरुद्ध बताईं।

निर्माण व्यवसायियों ने सरकार से मूल्य वृद्धि को ‘प्राइस एस्केलेशन’ के रूप में तुरंत संबोधित करने, बाहरी एवं नियंत्रण से परे स्थितियों को ‘फोर्स मेजर’ या ‘एक्सेप्शनल कंडीशन’ के रूप में मान्यता देने, व्यवसायियों पर लगने वाले अनावश्यक दबाव को खत्म करने तथा सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष रूप में संचालित करने की मांग की है। अध्यक्ष गौतम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि निर्माण क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की उपेक्षा करने से परियोजनाएं और प्रभावित होंगी। उन्होंने राष्ट्रीय विकास प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने तथा संबंधित संस्थानों के साथ औपचारिक पहल करने के लिए मजबूर होने की चेतावनी भी दी है।

महिला यात्रियों के साथ अभद्रता करते हुए वीडियो बनाने वाले राइड शेयरिंग चालक गिरफ्तार

नक्साल स्थित भगवती बहाल मंदिर के सामने महिला यात्रियों के साथ अभद्र भाषा प्रयोग कर वीडियो बनाने के आरोप में एक राइड शेयरिंग चालक को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए, काठमांडू उपत्यका अपराध अनुसंधान कार्यालय की टीम ने आरोपी चालक को हिरासत में लिया है। २७ चैत्र, काठमांडू – महिला यात्रियों के प्रति अभद्र भाषा कहने और वीडियो बनाने के मामले में एक राइड शेयरिंग चालक को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना नक्साल की भगवती बहाल मंदिर के सामने हुई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी राइडर ने मोटरसाइकिल पर सवार महिला यात्रियों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए वीडियो शूट किया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया था। इस मामले में संलग्न राइड शेयरिंग चालक को काठमांडू उपत्यका अपराध अनुसंधान कार्यालय की टीम ने गिरफ्तार किया है।

नयाँ मन्त्रीहरूको शपथ आजै – Online Khabar

नए मंत्रियों की आज शपथ ग्रहण की योजना

२७ चैत, काठमांडू। शुक्रवार को मंत्री बनने वाले गौरिकुमारी यादव और रामजी यादव आज ही शपथ ग्रहण करेंगे। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) शुक्रवार को मंत्रिपरिषद का विस्तार करने जा रहे हैं। उन्होंने श्रम मंत्री पद के लिए रामजी यादव और उद्योग मंत्री पद के लिए गौरिकुमारी यादव को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के समक्ष नामित किया है। प्रधानमंत्री शाह के सचिवालय के अनुसार, उनका शपथ ग्रहण भी आज ही होगा। हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने शपथ ग्रहण के समय को अभी तक निश्चित नहीं किया है।
इससे पहले, श्रम मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे दीपक साह को प्रधानमंत्री शाह ने पद से मुक्त किया था। वहीं, उद्योग मंत्रालय का कार्यभार प्रधानमंत्री शाह स्वयं संभाल रहे थे। रामजी सप्तरी क्षेत्र संख्या २ से निर्वाचित सांसद हैं, जबकि गौरिकुमारी महोत्तरी क्षेत्र संख्या ४ से निर्वाचित सांसद हैं।

रास्वपा संसदीय दल की बैठक जारी

प्रधानमंत्री बालेन शाह संसदीय दल की बैठक में शामिल होने जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के संसदीय दल की सिंहदरबार स्थित कार्यालय में बैठक शुरू हो चुकी है। बैठक में आज होने वाले उपसभापति के चुनाव और विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी, यह जानकारी रास्वपा ने दी है। बैठक में प्रधानमंत्री बालेन शाह और पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने भी शामिल हैं। 27 चैत्र, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के संसदीय दल की बैठक शुरू हो चुकी है। सिंहदरबार स्थित रास्वपा संसदीय दल के कार्यालय में बैठक चल रही है। बैठक में आज होने वाले उपसभापति के चुनाव और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, रास्वपा ने बताया है। बैठक में भाग लेने के लिए संसदीय दल के नेता और प्रधानमंत्री बालेन शाह, पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने सहित कई नेता पहुंचे हैं। उपसभापति पद के लिए श्रम संस्कृति पार्टी की रुबीकुमारी ठाकुर और राप्रपा की सरस्वती लामा उम्मीदवार हैं। श्रम संस्कृति की 25 वर्षीय ठाकुर ने गुरुवार को रास्वपा के समर्थन से अपनी उम्मीदवारी दर्ज कराई थी। प्रतिनिधि सभा में रास्वपा के लगभग दो-तिहाई बहुमत होने के कारण, ठाकुर के उपसभापति निर्वाचित होने की संभावना सुनिश्चित मानी जा रही है।

उपरथीमा बढुवा भएका दुई सैनिक अधिकृतलाई दर्ज्यानी चिह्न प्रदान

प्रधानसेनापति अशोकराजग सिग्देलले सैनिक मुख्यालय जंगी अड्डामा सहायक रथीबाट उपरथीमा बढुवा भएका पद्म बहादुर बुढा र पन खत्रीलाई दर्ज्यानी चिह्न प्रदान किया है। इस कार्यक्रम में बलाधिकृत रथी एवं अन्य अधिकृतों की उपस्थिति थी। २७ चैत, काठमाडौं। उपरथीमा बढुवा भएका दुई सैनिक अधिकृतलाई दर्ज्यानी चिह्न प्रदान किया गया है। प्रधानसेनापति अशोकराजग सिग्देल ने सैनिक मुख्यालय जंगी अड्डा में आयोजित एक समारोह के दौरान यह चिह्न प्रदान किया। सहायक रथी से उपरथीमा बढुवा हुए पद्म बहादुर बुढा (पीएचडी) और पन खत्री को यह चिह्न दिया गया। कार्यक्रम में बलाधिकृत रथी एवं अन्य अधिकृतों की मौजूदगी रही।