Skip to main content

लेखक: space4knews

विश्व बाघ दिवस: बाघों की संख्या बढ़ने के बावजूद मानव-प्राणी संघर्ष कैसे घटाएं?

राजधानी काठमांडू में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसे वन्यजीव संरक्षणकर्मी और अधिकारी उत्साहपूर्वक देख रहे हैं। राष्ट्रीय अभयारण्यों और वन्यजीव संरक्षण विभाग के अनुसार वर्तमान में नेपाल में ४२९ वयस्क बाघ मौजूद हैं। हालांकि, लुम्बिनी प्रदेश के राप्ती सोनारी गाउँपालिका की उपाध्यक्ष मनीषा सिंह थारू ने बाघों की संख्या बढ़ने को स्थानीय समुदाय के लिए केवल खुशियों की बात न मानते हुए प्रतिक्रिया दी है। “स्थानीय सरकार के गठन से ही इस गाउँपालिका में १०-१५ लोगों की बाघ के हमले में मृत्यु हो चुकी है। इसलिए संख्या बढ़ने पर वे उत्साहित नहीं होते,” थारू ने बताया।

राप्ती सोनारी गाउँपालिका का अधिकांश भूभाग बांके राष्ट्रीय अभयारण्य के अंतर्गत आता है, जहां वर्तमान में बाघों की संख्या ५१ पहुंच चुकी है, जैसा कि सर्वेक्षण में देखा गया है। थारू द्वारा उठाए गए मुद्दे पर संरक्षण विशेषज्ञ सहमत हैं। संरक्षण के स्थायी न होने की चिंता जताते हुए बाघ संरक्षण विशेषज्ञ बाबुराम लामिछाने ने कहा, “संख्या बढ़ना संरक्षण में सफलता जरूर है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मानव जीवन का कोई नुकसान न हो। बाघ या अन्य वन्य प्राणियों से मानव हानि शून्य होने पर ही संरक्षण स्थायी हो सकता है।”

संरक्षक कुमार पौडेल ने भी बताया कि केवल संख्या के आधार पर संरक्षण कार्यक्रम को पूरी सफलता नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा, “जो स्थानीय समुदाय बाघ के साथ सह-अस्तित्व रखता है, जब तक वे खुशी-खुशी स्वीकार नहीं करते, यह सफलता आंशिक ही है।” राष्ट्रीय अभयारण्य और वन्यजीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने भी संख्या वृद्धि को चुनौती माना है। विभाग के उप महानिर्देशक वेदकुमार ढकाल ने कहा, “पिछले चार वर्षों में वयस्क बाघों की संख्या वार्षिक ५ प्रतिशत की दर से बढ़ी है। हम खुश हैं, लेकिन चुनौतियां बढ़ती हैं इसलिए जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।”

विश्व बाघ दिवस के अवसर पर हाल ही में किये गए बाघ सर्वेक्षण के नतीजे बुधवार को जारी किए गए। २०२२ में नेपाल में बाघों की संख्या ३५५ थी। नई रिपोर्ट के अनुसार चितवन राष्ट्रीय अभयारण्य क्षेत्र और उसके आसपास सबसे अधिक १४५ बाघ पाए गए हैं। बर्दिया राष्ट्रीय अभयारण्य क्षेत्र में ११२ बाघ और आस-पास के वन क्षेत्रों में अवस्थित हैं। पर्सा राष्ट्रीय अभयारण्य में ७१, बांके राष्ट्रीय अभयारण्य में ५१ और शुक्लाफांटा राष्ट्रीय अभयारण्य में ५० बाघ पाए गए हैं।

भारत के शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर बलात्कारियों के समर्थन का आरोप

भारत के नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर बलात्कारियों का बचाव करने के आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने विरोध जताया है। लोकसभा में प्रियंका गांधी द्वारा उठाए गए आरोप को शिक्षा मंत्री जोशी ने सदन में ही खंडित करते हुए नियम ३५३ के तहत माफी मांगी है। संसद में पेपर लीक से संबंधित सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, २०२६ पर आठ घंटे तक चर्चा करने के लिए सभी दलों के बीच सहमति बनी है। १३ साउन, काठमाडौं।

भारत के नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शनिवार को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रल्हाद जोशी को लेकर संसद के बाहर राहुल गांधी ने आरोप लगाए, जिसमें उन्होंने गर्भवती महिलाओं के बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन करने का दावा किया।

राहुल गांधी ने कहा, “शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्रों ने आंदोलन किया और लाठी खाई। इसके बाद बीजेपी ने एक ऐसे व्यक्ति को कैबिनेट में रखा है जो बलात्कारियों का बचाव करता है।” उन्होंने यह भी कहा, “प्रधानमंत्री की यह प्रतिक्रिया अजीब है।” इसके जवाब में प्रल्हाद जोशी ने लोकसभा में कहा, “सर प्रियंका जी को प्रमाण देना चाहिए अन्यथा गलत सूचना देने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

संसद का मानसून सत्र मंगलवार को काफी महत्वपूर्ण रहा। इस दिन लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा ‘पब्लिक एक्जामिनेशन संशोधन विधेयक, २०२६’ पर चर्चा शुरू हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने सभी दलों की सहमति से ६ घंटे की चर्चा को २ घंटे बढ़ाकर ८ घंटे करने की जानकारी दी।

वैभव सूर्यवंशी ने 230 स्थान कूदकर शीर्ष 50 में प्रवेश किया

भारत के 15 वर्षीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने ICC T20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी रैंकिंग में 230 स्थान की सुधार करते हुए अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 48वीं रैंक हासिल की है। जिम्बाब्वे के खिलाफ श्रृंखला में 151 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज बनने में सफल सूर्यवंशी का वर्तमान रेटिंग 536 अंक हो गया है।

भारतीय बल्लेबाज इशान किशन 916 रेटिंग अंकों के साथ शीर्ष स्थान सुरक्षित रखते हुए T20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में तीसरे सबसे उच्च रेटिंग का रिकॉर्ड बनाए हैं। 13 साउन, काठमांडू।

सूर्यवंशी ने हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ संपन्न तीन मैचों की श्रृंखला में 50.33 की औसत से 151 रन बनाए। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने पहली बार श्रृंखला के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी (प्लेयर ऑफ द सीरीज) का पुरस्कार भी जीता।

बल्लेबाजी रैंकिंग में भारत के इशान किशन शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे मैच में 81 रन की शानदार पारी खेलने के बाद उन्होंने अपने करियर की उच्चतम 916 रेटिंग अंक हासिल किए थे। हालांकि सूर्यवंशी अभी अनुभवी भारतीय बल्लेबाजों से पीछे हैं, लेकिन इतने कम समय में उनकी प्रगति ने भविष्य के लिए उनकी संभावनाओं को और मजबूत दिखाया है।

‘संसद विस्तारै ट्र्याक पर आ रही है’ – नरेन्द्रकुमार केरुङ के साथ संवाद

नेपाली कांग्रेस के पाँचथर से निर्वाचित प्रतिनिधि सभा सदस्य नरेन्द्रकुमार केरुङ हैं। २१ फागुन को हुए चुनाव के बाद से अब तक संघीय संसद के ४१ बैठकें हो चुकी हैं और उन सभी में उपस्थित रहने वाले सांसद केरुङ ही हैं। संसद की सभी बैठकों में उनकी उपस्थिति, संसदीय अनुभव और हाल की राजनीतिक गतिविधियों के बारे में संवाददाता गिरिराज बाँस्कोटा ने उनसे बातचीत की है। प्रस्तुत है उस बातचीत का संपादित अंश:

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने केवल ६ बार संसद में प्रवेश किया है और नेकपा के संसदीय दल के नेता पुष्पकमल दाहाल ने ५ बार, जबकि आप ४१ सभी बैठकों में उपस्थित हैं, आपकी ऊर्जा कैसी है? पांचथर के लोगों ने मुझे बड़ी जिम्मेदारी दी है और उस जिम्मेदारी को ईमानदारी से पूरा करना मेरा दायित्व है। पांचथर और पूरे देश की समस्याओं तथा जनजीवन के मुद्दों को संसद में उठाने का जिम्मा पांचथरवासियों ने मुझे दिया है। इसलिए मैं हर संसद की बैठक में उपस्थित रहने का प्रयास करता हूँ। संसद न जाने पर स्कूल में शिक्षक को सज़ा नहीं मिलती, पर मेरे मन में हमेशा डर रहता है – मतदाताओं ने मुझे सदन में जाकर काम करने और जनजीवन के मुद्दे उठाने के लिए चुना है।

संसद में हर सांसद द्वारा उठाये जाने वाले समस्याएँ और प्रश्न मेरे लिए सीखने का माध्यम हैं। वहां से देश के सभी निर्वाचन क्षेत्रों की आवाजें सुनाई देती हैं। इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों द्वारा उठायें गए विषय गंभीर और संवेदनशील होते हैं। संसद में बैठकर देश को करीब से समझने का अवसर मिलता है। संसदीय कार्यसूची में कोई भी विषय कम या ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता। एक जनप्रतिनिधि के रूप में सम्मिलित होकर चर्चा करना आत्मसंतुष्टि देता है और देश को समझने का अवसर प्रदान करता है। संसद में आपकी एक बार नाराज़गी भी हुई, वह अनुभव कैसा रहा? वह स्थिति तत्कालीन विषयवस्तु से उत्पन्न हुई थी, कोई पूर्व नियोजित घटना नहीं थी।

संसद की मर्यादा और गरिमा बनाए रखते हुए, सत्तापक्ष और विपक्ष के सभी सांसद समान होते हैं। बड़े दल के सांसद को छोटे दल के सांसदों का अपमान नहीं करना चाहिए। संसद में पहुंचने पर सभी सदस्य समान होते हैं। यदि बड़े दल द्वारा छोटे दल के सांसदों का अपमान हुआ तो कड़ी निंदा की जाएगी। उस घटना के बाद सत्तापक्ष के सांसदों का दृष्टिकोण बदल गया और विपक्ष के सांसदों का आत्मबल बढ़ा। यह समझ फैली कि ‘सभी सांसद समान हैं’। इसलिए जो मैंने किया, मुझे लगता है कि वह सही था।

मोलडोभा में ‘एएनओ युरेसिया’ को उग्रवादी संगठन घोषित, रूसी सांसद का आरोप

मोलडोभा की अदालत ने ‘एएनओ युरेसिया’ नामक गैर-लाभकारी संस्था को उग्रवादी संस्था घोषित कर दिया है। रूसी स्टेट डूमा की सदस्य अलेयोना आर्भिसनोभा ने मोलडोभा की न्यायिक प्रणाली पर पश्चिमी हितों के प्रभाव की तीव्र आलोचना की। उन्होंने इस संस्था को केवल मानवीय कार्यों में संलग्न बताते हुए कहा कि यह जनसंपर्क को बढ़ाने के प्रयास में है।

मोलडोभा की अदालत ने गैर-लाभकारी संस्था ‘एएनओ युरेसिया’ को उग्रवादी घोषित किया है। रूसी स्टेट डूमा की सदस्य अलेयोना आर्भिसनोभा ने इस निर्णय को मोलडोभा के राष्ट्रपति माया सान्डू और उनके पश्चिमी समर्थकों के स्वार्थों के तहत काम करने वाला बताया। आर्भिसनोभा स्वयं युरेसिया संस्था की प्रमुख भी हैं। उन्होंने तस समाचार एजेंसी को बताया, ‘मोलडोभा की अदालत ने एएनओ युरेसिया को उग्रवादी संस्था के रूप में मान्यता दी है।’

आर्भिसनोभा ने आगे कहा, ‘यह निर्णय मोलडोभा की न्यायिक प्रणाली की पूरी तरह से भ्रष्ट होने की पुनः पुष्टि करता है। यह स्पष्ट रूप से माया सान्डू के पश्चिमी मालिकों के हितों की सेवा कर रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘मोलडोभा में मनगढ़ंत आरोप लगाकर मुख्य राजनीतिक हस्तियों को जेल भेजना और असहमति को दबाना एक प्रसिद्ध प्रथा है।’

उनके अनुसार युरेसिया संस्था किसी राजनीतिक गतिविधि में संलिप्त नहीं है, बल्कि यह मानवीय कार्यों में सक्रिय है। आर्भिसनोभा ने कहा, ‘एएनओ युरेसिया एक पूरी तरह से मानवीय संस्था है। हम रूस, मोलडोभा, युरासियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू), कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (सीआईएस) और कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रिटी ऑर्गनाइजेशन (सीएसटीओ) के सदस्य देशों को करीब लाने वाली समन्वय परियोजनाएं विकसित कर रहे हैं। हम बिना किसी मध्यस्थ के जनस्तर संवाद को प्राथमिकता देते हैं। हमारा उद्देश्य रूस, मोलडोभा और यूरोप की साझा ऐतिहासिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित करना है। इसी वजह से हम नेपाली राजनीतिक नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बने हैं।’

आर्भिसनोभा का कहना है कि यूरोप और सामूहिक पश्चिमी शक्तियों के लिए युरेसिया की गतिविधियां एक बड़ी चुनौती हैं। वे समूह लोगों को विभाजित करने, सीमाएं स्थापित करने और साझा इतिहास को नष्ट करने के प्रयास में लगे हैं। उनका उद्देश्य पूर्व सोवियत संघ के देशों के साथ संयुक्त संबंध और साझा स्मृति को मिटाना है। आर्भिसनोभा ने कहा, ‘हमारा मानवीय और दोस्ताना मिशन ब्रसेल्स की योजना को विफल कर रहा है। इस योजना ने राष्ट्रपति माया सान्डू को मोलडोभा के नागरिकों को तथाकथित ‘यूरोपीय क्लान’ से बाहर निकलने से रोकने का निर्देश दिया था।’

मम्स इन्टरनेसनल नेपाल द्वारा कराटे चैंपियन सुनिल और उदीयमान याङतेन को सम्मानित

मम्स इन्टरनेसनल नेपाल ने कीर्तिमानी कराटे खिलाड़ी सुनिल लामा और उदीयमान खिलाड़ी याङतेन लामालाई एक विशेष कार्यक्रम के बीच सम्मानित किया है। ११वें दक्षिण एशियाई खेलकूद के स्वर्ण पदक विजेता सुनिल लामा और उनके पुत्र याङतेन लामाके खेल क्षेत्र में योगदान की प्रशंसा की गई। मुख्य अतिथि सुरेन्द्र श्रेष्ठ ने सम्मान पत्र और खादा पहनाकर दोनों खिलाड़ियों का सम्मान किया, जबकि सुनिल लामाने आभार व्यक्त किया। १३ साउन, काठमांडू।

मम्स इन्टरनेसनल नेपाल ने नेपाली कराटे खेल के विकास और विस्तार में योगदान के लिए कीर्तिमानी कराटे खिलाड़ी सुनिल लामा और उदीयमान खिलाड़ी याङतेन लामालाई बुधवार को एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया। बांग्लादेश में सम्पन्न ११वें दक्षिण एशियाई खेलकूद (साग) एवं १३वें एशिया पैसिफिक सितोरियो कराटे चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता सुनिल लामाके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल को दिलाई गई सफलता के सम्मानस्वरूप अभिवादन किया गया।

साथ ही, विभिन्न राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उनके पुत्र याङतेन लामालाई भी उसी कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। वर्तमान में अमेरिका के न्यूयॉर्क में निवासरत सुनिल लामा वहां और काठमांडू के रानीवन में ‘चैंपियंस मार्शल आर्ट्स एकेडमी’ चला रहे हैं, जहां वे कराटे खेल के प्रचार-प्रसार और नए खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम में मम्स इन्टरनेसनल नेपाल की प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रंजिता लामा ने कहा कि नेपाली कराटे के अनुभवी और उदीयमान खिलाड़ियों को एक मंच पर सम्मानित करना संस्था के लिए गर्व की बात है। उन्होंने ‘चैंपियंस मार्शल आर्ट्स एकेडमी’ द्वारा नेपाल से अमेरिका तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों का स्वागत और सहयोग की भी प्रशंसा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रसिद्ध संगीत समूह ‘एक्स बैंड’ के ड्रमर सुरेन्द्र श्रेष्ठ ने दोनों खिलाड़ियों को सम्मान पत्र और खादा पहनाकर सम्मानित किया।

इसी प्रकार, १३वें साग के द्विगु स्वर्ण पदक विजेता और राष्ट्रीय कराटे टीम के प्रशिक्षक मन्दे काजी श्रेष्ठ तथा अंतरराष्ट्रीय कराटे खिलाड़ी सुमन तिमल्सिनाले भी खादा पहनाकर बधाई दी। सम्मान के बाद बोलते हुए सुनिल लामाने अपनी और अपने पुत्र की उपलब्धियों की सराहना करते हुए मम्स इन्टरनेसनल नेपाल परिवार को हार्दिक आभार व्यक्त किया।

सिरहा प्रशासन ने सामाजिक सद्भाव कायम रखने के लिए सभी से अपील की

सुनसरी जिले में हाल हुई घटना के बाद सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें और नकारात्मक अभिव्यक्तियों को लेकर जिला प्रशासन कार्यालय सिरहा ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी चेतराज बराल ने सभी से सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले कार्यों से बचने और भ्रामक सूचनाओं का अनुसरण न करने का आग्रह किया है। प्रशासन ने धार्मिक या सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

१३ साउन, सिरहा। सुनसरी जिले की घटना के बाद धार्मिक एवं साम्प्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाली भ्रामक सूचनाएं, अफवाहें और द्वेषपूर्ण अभिव्यक्तियां सोशल मीडिया पर फैलने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन कार्यालय सिरहा ने सभी नागरिकों से संयम बरतने की अपील की है। बुधवार को सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी चेतराज बराल ने जारी बयान में पुरानी घटनाओं को वर्तमान घटना से जोड़कर भ्रम फैलाने, किसी धर्म, समुदाय, संस्कृति या आस्था के प्रति नफरत फैलाने वाले कार्यों से दूर रहने का अनुरोध किया।

प्रशासन ने सिरहा में विभिन्न जाति, भाषा, धर्म और समुदायों के बीच बनी हुई एकता, सद्भाव, सहिष्णुता और भाईचारे को सुरक्षित रखना सभी नागरिकों की साझा जिम्मेदारी बताया है। धार्मिक गुरु, नागरिक समाज, बुद्धिजीवी, मीडिया कर्मी और सभी हितधारकों से सामाजिक सद्भाव के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सामाजिक उत्तेजना फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या कानून के विरुद्ध कार्य करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ मुलूकी अपराध संहिता २०७४ और इलेक्ट्रॉनिक व्यापार अधिनियम २०६३ के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अमेरिका ने ह्युमनोइड रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगाया

अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा मानते हुए चीन में बने ह्युमनोइड और चार-पैर वाले रोबोटों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (एफसीसी) ने डेटा सेंटर और सोलर पैनलों में इस्तेमाल होने वाले पावर इन्वर्टरों के आयात पर भी रोक लगा दी है। एफसीसी के अध्यक्ष ब्रेंडन कार ने कहा, ‘एजेंसी अमेरिका की महत्वपूर्ण सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रही है।’

ट्रम्प प्रशासन ने मंगलवार को अमेरिका में ह्युमनोइड रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। प्रशासन ने बताया कि ये रोबोट देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं और ऐसे जोखिम को स्वीकार करना संभव नहीं है। यह प्रतिबंध उन्नत तकनीक वाले रोबोटों पर लागू होगा, जिनमें ह्युमनोइड और चार-पैर वाले रोबोट शामिल हैं। अधिकांश ये रोबोट चीन में बनाए जाते हैं।

चीन और अमेरिका फिलहाल रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन ने डेटा सेंटर और सोलर पैनलों में इस्तेमाल होने वाले पावर इन्वर्टरों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया है। एफसीसी ने कहा है कि ये उपकरण अमेरिकी अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण ढांचे के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

एफसीसी के अध्यक्ष ब्रेंडन कार ने कहा, ‘एजेंसी अमेरिका की महत्वपूर्ण सप्लाई चेन की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।’ एफसीसी ने इन रोबोटों और इन्वर्टरों को अपनी ‘कवरड लिस्ट’ में शामिल किया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक वस्तुएं और सेवाएं शामिल होती हैं। इस मामले पर चीन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रायन टेन डोशाटे को नाइट राइडर्स समूहका क्रिकेट रणनीति प्रमुखको रुपमा नियुक्ति

भारत के पूर्व सहायक कोच रायन टेन डोशाटे को नाइट राइडर्स समूहको क्रिकेट रणनीति प्रमुख पदमा नियुक्त किया गया है। वह नाइट राइडर्स के चारों फ्रेंचाइजी के लिए खिलाड़ियों की खोज, भर्ती और टीम निर्माण से जुड़ी रणनीतिक जिम्मेदारियाँ निभाएंगे। 2024 में कोलकाता ने आईपीएल का खिताब जीता था जिसमें उनका महत्वपूर्ण योगदान था और अब वह नई जिम्मेदारी के लिए सीपीएल से शुरुआत करेंगे। १३ साउन, काठमाडौं।

नाइट राइडर्स समूह ने बुधवार को रायन टेन डोशाटे की नियुक्ति की घोषणा की। इससे पहले उन्होंने दो साल तक भारत के पुरुष राष्ट्रीय टीम के सहायक कोच के रूप में काम किया था। भारतीय टीम की जिम्मेदारी से हटते ही वह नाइट राइडर्स समूह में इस नई भूमिका में लौटे। टेन डोशाटे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की कोलकाता नाइट राइडर्स, कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) की ट्रिनबागो नाइट राइडर्स, अंतरराष्ट्रीय लीग टी-20 (आईएलटी-20) की अबूधाबी नाइट राइडर्स और मेजर लीग क्रिकेट (एमएलसी) की लॉस एंजिल्स नाइट राइडर्स, दोनों फ्रेंचाइजी के क्रिकेट रणनीति नेतृत्व करेंगे।

उनकी पहली जिम्मेदारी ७ अगस्त से शुरू होने वाले सीपीएल में ट्रिनबागो नाइट राइडर्स के साथ होगी। नियुक्ति के बाद उन्होंने कहा कि नाइट राइडर्स परिवार में लौटकर वह उत्साहित हैं। उन्होंने कोच और विश्लेषक टीम के साथ मिलकर खिलाड़ियों की खोज, प्रतिभा विकास प्रणाली को मजबूत बनाने और दीर्घकालिक क्रिकेट रणनीति बनाने में काम करने का वचन दिया। ४६ वर्षीय टेन डोशाटे का नाइट राइडर्स से लंबा रिश्ता है। उन्होंने 2011 में कोलकाता के लिए आईपीएल खेलना शुरू किया था और 2012 तथा 2014 में टीम को खिताब दिलाने में मदद की थी।

नाइट राइडर्स समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेन्की मैसोर ने कहा कि टेन डोशाटे का फ्रेंचाइजी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दोनों क्षेत्रों का अनुभव समूह के आगामी रणनीतिक विकास में अहम भूमिका निभाएगा। नई भूमिका में वह खिलाड़ी खोजने, भर्ती, टीम निर्माण एवं प्रदर्शन मूल्यांकन समेत पूरी क्रिकेट रणनीति का नेतृत्व करेंगे। आईपीएल में वह कोलकाता नाइट राइडर्स के मुख्य कोच अभिषेक नायर के साथ फिर से काम करेंगे।

किशोरों में ड्रग्स की लत बढ़ने का मुख्य कारण ‘डिजिटल एक्सपोजर’

भारत के विभिन्न विद्यालयों में किए गए अध्ययन से पता चला है कि हर पाँच में से एक किशोर ड्रग्स के मध्यम या उच्च जोखिम में है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले किशोरों में ड्रग्स की लत की समस्या व्यापक रूप से देखी जा रही है। पड़ोसी देश भारत में किए गए एक अध्ययन ने पुष्टि की है कि स्कूल जाने वाले किशोरों में यह लत तेजी से बढ़ रही है। 2025–2026 में किए गए सर्वेक्षण की रिपोर्ट ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ—साउथईस्ट-एशिया’ में प्रकाशित हुई है। अध्ययन से पता चला है कि किशोरों को ड्रग्स के प्रयोग के सबसे उच्च जोखिम में माना गया है।

भारत के विभिन्न जिलों के 108 निजी एवं सरकारी विद्यालयों में कुल 6,168 किशोरों का सर्वेक्षण किया गया, जैसा कि रिपोर्ट में उल्लेख है। अनुसन्धानकर्ताओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्क्रीनिंग विधि का उपयोग किया है। इस सर्वेक्षण से यह प्रमाणित हुआ कि हर पांच में से एक किशोर ड्रग्स के मध्यम से उच्च जोखिम में है। विशेष रूप से धूम्रपान, शराब और अन्य नशेड़ी पदार्थों के प्रयोगकर्ताओं की स्क्रीनिंग की गई थी। सर्वेक्षण में गोरखपुर (उत्तर प्रदेश), कामरूप (असम), नागपुर (महाराष्ट्र), राजकोट, झारखंड और पुडुचेरी के सरकारी और निजी विद्यालय शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार 21.4 प्रतिशत किशोर ड्रग्स के प्रयोग के मध्यम या उच्च जोखिम में पाए गए, जिनमें 10.3 प्रतिशत मध्यम और 11.1 प्रतिशत उच्च जोखिम में हैं। विशेष रूप से गुवाहाटी और देवघर के विद्यालयों में उच्च जोखिम वाले किशोरों का अनुपात ज्यादा देखा गया, जबकि नागपुर और पुडुचेरी में जोखिम कम पाया गया।

अध्ययन में किशोरों को ड्रग्स के जोखिम में डालने वाला मुख्य कारक डिजिटल एक्सपोजर बताया गया है। तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ लत लगने की संभावना भी बढ़ रही है। बच्चे इंटरनेट की दुनिया में जितना अधिक समय बिताते हैं, उनके खराब संगति और लत की संभावना उतनी ही अधिक होती है, यह अध्ययनकर्ताओं का दावा है। दूसरा मुख्य कारण ड्रग्स की आसानी से उपलब्धता भी पाया गया है। इसके अलावा, किशोरों का ड्रग्स के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी जोखिम बढ़ाने वाला एक तत्व माना गया है। अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं में विद्यालय का माहौल, सामाजिक और आर्थिक स्थिति, तथा व्यक्तिगत स्वभाव जैसे कारकों ने भी किशोरों को ड्रग्स की ओर प्रवृत्त करने में भूमिका निभाई है। रोकथाम के लिए बहु-स्तरीय हस्तक्षेप आवश्यक बताया गया है। समुदाय आधारित हस्तक्षेप और किशोरों के साथी नेतृत्व वाले कार्यक्रम इस समस्या को घटाने में सहायक हो सकते हैं, ऐसा सुझाव अध्ययन में दिया गया है।

सुनसरी में साम्प्रदायिक तनाव: सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री बालेन की खोज, नेताओं ने व्यक्त किए अपने विचार

क्रमश: बाएं से पुष्पकमल दाहाल, गगन थापा, रवि लामिछाने और शंकर पोखरेल

तस्वीर स्रोत, Nepal Photo Library

सुनसरी में हुए घटनाक्रम के समाधान के लिए संयम बरतते हुए दीर्घकालीन समाधान खोजने का नतीजा सत्तारूढ़ एवं विपक्षी नेताओं के बीच निकला है।

सुनसरी में साम्प्रदायिक तनाव भड़कने के बाद सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व द्वारा बुलाए गए सर्वदलीय बैठक में भाग लेने वाले नेताओं ने इस प्रकार की घटनाओं के कारण और जड़ों को पहचानकर समाधान खोजने पर जोर दिया। “ऐसी घटनाओं में सभी को एक जगह खड़ा होना जरूरी होता है, यह हम सभी ने महसूस किया,” बैठक के आयोजक राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने ने बताया।

लेकिन उस बैठक में प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ और गृहमंत्री सुधन गुरुङ शामिल नहीं हुए। खासतौर पर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए।

“रास्वपाका सभापति को धन्यवाद, लेकिन सरकार से भी सवाल है – वर्तमान में सरकार क्या कर रही है?” विपक्षी नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा ने कहा।

लामिछाने ने कहा कि सर्वदलीय बैठक होने के कारण दलों के शीर्ष नेता ही उपस्थित थे। बैठक में सरकार की ओर से केवल अर्थ मंत्री स्वर्णिम वाग्ले मौजूद थे।

प्रधानमंत्री की खोज

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने सुनसरी घटनाक्रम पर चर्चा के लिए सिंहदरबार में संपन्न सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए

तस्वीर स्रोत, RSS

विपक्षी नेता थापा ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री को संबंधित पक्षों से संवाद का नेतृत्व करना चाहिए।

“सरकार सिर्फ बंदूक की गोली और डंडे तक सीमित नहीं होनी चाहिए,” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री सिर्फ अभिभावक नहीं बल्कि नेता भी हैं।

“उन्हें सहयोग करना चाहिए, दूसरों पर भरोसा करना चाहिए और तभी दूसरे उन पर भरोसा करेंगे।”

“हम सरकार को मुश्किल में डालना नहीं चाहते, लेकिन मैंने बैठक में कहा — ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री क्यों ख़ामोशी से बैठे हैं? क्या सभी को जोड़ने का प्रयास करना आवश्यक नहीं? हम सोचते हैं कि प्रधानमंत्री को ऐसा करना चाहिए,” थापा ने कहा।

बैठक में नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे भी मौजूद थे।

सर्वदलीय बैठक के लगभग सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की उपस्थिति की मांग की है, ऐसा जनमत पार्टी के सीके राउत ने बताया।

“हमें लगा कि यह बैठक सरकार को ही बुलानी चाहिए थी,” उन्होंने कहा, “अर्थमंत्री वाग्ले ने अपने विचार रखे हैं और प्रधानमंत्री ने फेसबुक पर अपनी बात रख दी है।”

प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर श्रमसंस्कृति पार्टी के सांसद आर्यन राई ने भी सवाल उठाए।

“प्रधानमंत्री न आए, लेकिन कम से कम गृहमंत्री को आना चाहिए था, यह मांग हुई। सरकार कितनी संवेदनशील है, यह ऐसी स्थिति में पता चलता है,” सांसद राई ने कहा, “अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा कि वे बैठक में उठाए गए मुद्दे प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे।”

सातबिंदु अपील

बैठक ने सद्भाव बनाए रखने के लिए सातबिंदु अपील जारी की है।

“आवेग और टकराव से समस्या का समाधान नहीं होता, यह केवल जटिलता बढ़ाता है, यह समझ आवश्यक है,” अपील में कहा गया है।

दल शांति बनाए रखने के लिए प्रदेश, जिला व स्थानीय स्तर पर सर्वदलीय और सर्वपक्षीय संवाद के लिए अपनी पार्टी के विभिन्न स्तरों के समितियों को निर्देश दे रहे हैं।

“स्थानीय स्तर पर धार्मिक नेताओं, नागरिक समाज और प्रशासन को जोड़कर सक्रियता बढ़ाना जरूरी है,” अपील में उल्लेख किया गया है।

उन्होंने अत्यंत संयम बरतने, निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के अनुसार दंडित करने और पीड़ितों को उचित मुआवजा देने के लिए नेपाल सरकार का ध्यानाकर्षण कराया है।

बैठक में अन्य मुद्दे

बैठक में तनाव बढ़ने से रोकने और दीर्घकालीन समाधान ढूंढने पर चर्चा हुई, ऐसा जनमत पार्टी के राउत ने बताया।

“संकट की घड़ी में सभी दल एकत्र होकर संदेश देना चाहिए। इस रूप में यह बैठक एक सकारात्मक संकेत है,” उन्होंने कहा।

“देश में साम्प्रदायिक दुर्घटना का जोखिम है, सभी पक्षों के एक स्थान पर खड़े होने के महत्व पर चर्चा हुई,” बैठक में शामिल श्रमसंस्कृति पार्टी के राई ने कहा।

सुनसरी घटनाक्रम में सुरक्षा बलों के बल प्रयोग पर भी चर्चा हुई, उन्होंने बताया।

“सरकार को जब भी बल प्रयोग करना हो, संयम के साथ करना चाहिए। सूचना प्रणाली सुधारने आदि विषय उठाए,” राई ने कहा।

बैठक में एमाले महासचिव शंकर पोखरेल और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र लिंदेन भी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री बालेन की अपील

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह बालेन ने सुनसरी घटनाक्रम पर सरकार द्वारा गंभीर समीक्षा की बात कही और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का आग्रह किया।

“फिर से ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए सरकार जिम्मेदार कदम उठाएगी,” मंगलवार रात फेसबुक पर उन्होंने लिखा।

“उस समय अपना आवेश और गुस्सा रोकें। हमारा धर्म यही सन्देश देता है – मनुष्य का पहला धर्म जीवन रक्षा है और सरकार को अपने नागरिकों को सुरक्षित रखना चाहिए। दोषी को दंडित करना और पीड़ित को न्याय तथा मुआवजा दिलाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।”

उन्होंने स्वीकार किया कि शुरू से ही सरकार घटनास्थल पर मौजूद थी, फिर भी यह पर्याप्त नहीं था।

“सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिक मरे और घायल हुए। ऐसे नुकसान कभी भी सामान्य नहीं हैं। जांच चल रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी,” उन्होंने बताया।

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय तथा विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी संयम बरतने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया है।

सुनसरी की स्थिति क्या है?

विराटनगर में प्रदर्शनकारी और पुलिस

तस्वीर स्रोत, BBC/BIKRAM NIRAULA

तस्वीर का कैप्शन, मंगलवार को विराटनगर में प्रदर्शन हुए

कप्तानगंज से शुरू हुआ तनाव शांत न होने पर सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन कार्यालय सुनसरी ने कर्फ्यू को कुछ अतिरिक्त क्षेत्रों तक बढ़ा दिया है।

जिला सुरक्षा समिति की बैठक के बाद मंगलवार रात 9 बजे से अगले आदेश तक अतिरिक्त क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू करने की जानकारी प्रमुख जिला अधिकारी ईश्वरीप्रसाद अर्याल ने दी है।

इटहरी उपमहानगर पालिका वार्ड नं 16 और 17, रामधुनी नगरपालिका के वार्ड नं 1 और 5 के अंतर्गत महेन्द्र राजमार्ग के दाएं-बाएं 200 मीटर क्षेत्र में भी कर्फ्यू लगाया गया है। इसके अलावा इनरुवा, दुहबी नगरपालिकाओं के इलाके, भोक्राहा नरसिंह, कोशी, गढ़ी, देवानगंज, हरिनगर और बर्जु गाउँपालिका में भी कर्फ्यू जारी है।

कर्फ्यू अवधि में निर्दिष्ट क्षेत्रों में आवागमन, किसी भी प्रकार का सभा, जुलूस या बैठक आयोजित करने पर रोक लगाई गई है।

“रात को कप्तानगंज से कुछ तोड़फोड़ की खबरें आई थीं,” जिला प्रशासन कार्यालय के प्रवक्ता पोषण लामिछाने ने कहा, “कर्फ्यू का विस्तार होने से स्थिति अपेक्षाकृत शांत है।”

सोमवार और मंगलवार को कप्तानगंज क्षेत्र में कर्फ्यू के बावजूद स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई, सुरक्षित बल क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं।

घटना का कारण

सुनसरी का नक्शा
तस्वीर का कैप्शन, देवानगंज गाउँपालिका की सीमा भारत से जुड़ी है

सोमवार को बोले बम यात्रा की तैयारी कर रहे एक पक्ष ने दूसरे समुदाय के नज़दीक बिजली के खंभे पर झंडा लगाया और तेज आवाज में ‘डीजे’ बजाया जिससे तनाव शुरू हुआ।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार कप्तानगंज में मुस्लिम बस्ती के निकट, जहां बाजार शुरू होता है, वहां एक शिवालय है।

वहां पहले भी झड़प हो चुकी है।

तनाव बढ़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया, जिसमें एक की मौत और कुछ घायल हुए।

घटना की जांच के लिए गृह मंत्रालय ने टीम बनाई है। गृह मंत्री, गृह सचिव और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख के बीच चर्चा के बाद सहसचिव भूเพन्द्र थापा के नेतृत्व में समिति गठित हुई है।

‘डीजे म्यूजिक’ क्या है?

भारत से सटे तराई के जिलों में पिछले कुछ सालों में विवाह, त्योहार और मेलों में ‘डीजे’ संगीत का प्रचलन बढ़ा है।

इसे एक सामान्य रिवाज माना जाता है।

सुनसरी के पुष्पलाल चौधरी के अनुसार छोटे और खुले वैनों में आठ-दस तेज स्पीकर और हॉर्न लगा म्यूजिक सिस्टम को ‘डीजे’ कहते हैं।

इनमें लाइट्स का उपयोग होता है, इसलिए बिजली की खपत अधिक होती है, इसलिए जनरेटर भी होता है।

इसकी आवाज सामान्यत: 1 से 1.5 किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा रैंप शो, रैली और जुलूस में भी इसका उपयोग होता है।

सुनसरी में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने में ‘डीजे’ संगीत की तेज आवाज की भूमिका भी मानी गई है, जिसके कारण पड़ोसी मोरंग जिले ने ‘डीजे’ के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर भी हमारे सामग्री देखी जा सकती है और सब्सक्राइब किया जा सकता है। साथ ही नेपाली सेवा कार्यक्रम शाम पौने नौ बजे रेडियो पर उपलब्ध है।

जापान भूकंप: शॉपिंग सेंटर से लोगों को बचाने का कार्य जारी

जापान के क्यूशू द्वीप के कुमामोतो में भूकंप के बाद एक शॉपिंग सेंटर में फंसे लोगों को बचाने का कार्य अभी भी जारी है। राहतकर्मियों ने काशिमा नगर में स्थित इओन मॉल के मलबे में तलाश जारी रखी हुई है। भूकंप के कारण विभिन्न इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों ने बताया है कि एक प्राचीन महल की दीवार का कुछ हिस्सा ढह गया है जबकि एक हवा में बना पुल पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

वहां डेढ़ लाख से अधिक लोग बेघर हो गए हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि 40,000 से अधिक घरों में बिजली आपूर्ति बंद हो गई है। कुमामोतो प्रान्त में एक कागज फैक्ट्री की चिमनी गिरने से कुछ लोग संपर्क विहीन हो गए हैं, ऐसा अधिकारियों ने जानकारी दी है। जापानी सरकारी एजेंसियों ने मंगलवार के भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी है, जबकि अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण संस्था USGS ने इसे 6.8 के मापांक के साथ दर्ज किया था।

विश्व बाघ दिवस: नेपाल में पाटेबाघ की संख्या 429 पहुंचने की घोषणा, गणना की विस्तृत प्रक्रिया

नेपाल में पाटेबाघ की संख्या 429 तक पहुँच चुकी है, यह जानकारी राष्ट्रीय निकुञ्ज तथा वन्यजन्तु संरक्षण विभाग द्वारा प्रकाशित की गई है। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर हाल ही में संपन्न हुए बाघ गणना के परिणाम बुधवार को सार्वजनिक किए गए। कृषि, वन तथा वातावरण मंत्री गीता चौधरी ने उक्त परिणामों का अनावरण किया। वर्ष 2009 से नेपाल में हर चार वर्ष पर नियमित रूप से बाघ गणना होती रही है। इससे पहले वर्ष 2021 में हुई गणना में नेपाल में कुल 355 बाघ प्राकृतिक आवासों में पाए गए थे। इनमें से चितवन में 128, बर्दिया में 125, बाँके में 25, शुक्लाफाँटा में 36 और पर्सा में 41 बाघ थे।

वर्तमान में सबसे अधिक बाघ चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज एवं आस-पास के क्षेत्रों में पाए गए हैं, जहां कुल 145 बाघ गिने गए हैं। बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज और आस-पास के वन क्षेत्रों में 112 बाघों की गणना हुई है। पर्सा राष्ट्रीय निकुञ्ज एवं आसपास के वन क्षेत्रों में 71, बाँके राष्ट्रीय निकुञ्ज और शुक्लाफाँटा राष्ट्रीय निकुञ्ज तथा आसपास के वन क्षेत्रों में क्रमशः 51 और 50 बाघ देखें गए हैं।

पिछला राष्ट्रीय बाघ सर्वेक्षण 2082 पुष 1 से शुरू होकर 2083 बैसाख 10 को सम्पन्न हुआ। नेपाल के पाँच प्रमुख बाघ आवासीय निकुञ्जों और आसपास के वन क्षेत्रों में कैमरा ट्रैपिंग तकनीक का उपयोग करते हुए बाघों की गणना की गई है, विभाग ने यह भी बताया। इस अभियान में बाघ के आवासों को तीन ‘कंप्लेक्स’ों में विभाजित किया गया था — चितवन-पर्सा कंप्लेक्स, बाँके-बर्दिया कंप्लेक्स, और शुक्लाफाँटा-लालझाड़ी कंप्लेक्स।

गणना के लिए नेपाल सरकार तथा विभिन्न दातृ संस्थाओं ने सहयोग किया। विश्लेषण के आधार पर नेपाल में बाघों की कुल संख्या 402 से 500 के बीच होने का अनुमान लगाया गया है। उपमहानिर्देशक एवं प्रवक्ता वेदकुमार ढकाल द्वारा जारी विभागीय विज्ञप्ति में कहा गया है, “यह परिणाम नेपाल में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में पिछले वर्षों से चल रहे आवास संरक्षण और प्रबंधन, शिकारी नियंत्रण, आहार प्रजातियों का संरक्षण तथा जैविक मार्ग संरक्षण जैसे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम को दर्शाता है।”

गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है और इसका महत्व क्या है?

गुरु पूर्णिमा

तस्वीर स्रोत, RSS

तस्वीर कैप्शन, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को काठमांडू में आयोजित गुरु सम्मान कार्यक्रम में काठमांडू के 63 बड़े विभिन्न क्षेत्रों के गुरुयों को सम्मानित करते हुए काठमांडू महानगरपालिका की उपप्रमुख सुनीता डँगोल

प्रकाशित

गुरु पूर्णिमा गुरु के सम्मान में मनाया जानेवाला एक पर्व है। वह गुरु आध्यात्मिक या प्राज्ञिक हो सकते हैं। मनुष्य के जीवन के आरंभ से ही गुरु का महत्वपूर्ण भूमिका और प्रभाव रहता है।

किसी भी व्यक्ति का सफल या असफल होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि गुरु उसे कैसी शिक्षा देते हैं।

वे गुरु केवल औपचारिक शिक्षा देने वाले शिक्षक ही नहीं बल्कि कोई भी व्यक्ति हो सकता है।

“सफल जीवन के लिए मार्गदर्शन करने वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने वाला दिवस गुरु पूर्णिमा है,” संस्कृतिकर्मी और प्राध्यापक माधवप्रसाद भट्टराई कहते हैं।

गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है?

भारत में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है

तस्वीर स्रोत, ANI

तस्वीर कैप्शन, भारत में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है

विशेषतः हिंदू धर्मावलंबी आश्विन शुक्ल पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में इसका आयोजन करते हैं।

जापान में भूकंप: कम से कम १३ मौतें, शॉपिंग सेंटर में फंसे लोगों के बचाव कार्य जारी

दक्षिण-पश्चिमी जापान में आए शक्तिशाली भूकंप के कारण कम से कम १३ लोगों की मौत हुई है, यह जानकारी जापान की प्रधानमंत्री सना ए ताकाइची ने दी। कुमामोतो स्थित शॉपिंग सेंटर के अंदर फंसे लोगों का बचाव कार्य अभी भी जारी है। बताया गया है कि वहाँ कई लोग फंसे हुए हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक उस शॉपिंग सेंटर की दूसरी मंजिल को गंभीर नुकसान पहुंचा है। जापान की राष्ट्रीय प्रसारण संस्था ‘एनएचके’ ने ध्वस्त हुए इओन शॉपिंग मॉल में तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है।

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण एजेंसी के अनुसार, मैग्निट्यूड ६.८ का यह भूकंप स्थानीय समय अनुसार मंगलवार दोपहर ४:२७ बजे जापान के क्यूशू द्वीप को केंद्र बना कर आया था। कुमामोतो क्यूशू के चार मुख्य द्वीपों में से एक शहर है। यह दक्षिणी द्वीप जापान का तीसरा सबसे बड़ा और दूसरी सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि सुबह के नवीनतम आंकड़ों में मृतकों के प्रति संवेदना जाहिर करते हुए उन्होंने खोज और बचाव कार्य में सक्रिय आपातकालीन सेवा कर्मियों का धन्यवाद किया। उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी कई लोग बचाव की प्रतीक्षा में हैं। “यह एक समय-संग दौड़ है,” उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय निवासियों और बचावकर्मियों से उच्च तापमान के कारण गर्मी से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने का आग्रह किया। इओन शॉपिंग सेंटर सहित अन्य स्थानों पर बचाव चल रहा है। कुमामोतो के स्थानीय अधिकारियों ने ९,८७२ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की सूचना दी है। लगभग डेढ़ लाख से अधिक घरों में बिजली की आपूर्ति बाधित है। कई स्थानों पर सड़कें भी क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट मिली है। ‘एनएचके’ द्वारा प्रसारित वीडियो में सड़कों और पुलों के टूटने के साथ-साथ दर्जनों भवनों में आग लगी हुई दिखाई गई है।

यह भूकंप जमीन के नीचे १० किलोमीटर की गहराई से आया था, जिस कारण सरकारी एजेंसियों ने शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स आने की चेतावनी जारी की है। जापान विश्व के सबसे भूकंप प्रभावित देशों में से एक है, जहाँ हर साल लगभग १,५०० से अधिक भूकंप दर्ज किए जाते हैं। पिछले दिसंबर में पूर्वोत्तर जापान में मैग्निट्यूड ७.५ के भूकंप से ३० लोग घायल हो गए थे। २०१६ की अप्रैल में दो दिनों के अंतराल में मैग्निट्यूड ६.५ और ७.३ के दो भूकंपों ने २७० से अधिक लोगों की जान ली थी। मार्च २०११ में जापान के पूर्वी हिस्से में मैग्निट्यूड ९.० के भूकंप और उसके बाद आए विशाल सुनामी से १८,००० से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।