Skip to main content

लेखक: space4knews

एनभीएल में काठमांडू की तीसरी जीत, कर्णाली की पहली हार

काठमांडू रेड्स ने नेपाल वॉलीबॉल लीग में कर्णाली शिवराज को ३-१ सेट से हराकर तीसरी जीत हासिल की है। काठमांडू ने कर्णाली की अपराजित यात्रा को रोका और प्लेऑफ की संभावना मजबूत की है। कर्णाली को तीसरी हार हुई है, जिसके बाद प्लेऑफ में प्रवेश का फैसला अंतिम लीग मैच के बाद ही साफ होगा। २४ भाद्र, काठमांडू। काठमांडू रेड्स ने नेपाल वॉलीबॉल लीग (एनभीएल) में कर्णाली शिवराज को पराजित कर तीसरी सफलता हासिल की है। त्रिपुरेश्वर स्थित राष्ट्रीय खेल परिषद के कवर हॉल में हुए मैच में काठमांडू ने कर्णाली के अपराजित अभियान को तोड़कर प्लेऑफ में पहुँचने की संभावनाएं बढ़ा दीं। यह कर्णाली की पहली हार है, जो उन्होंने तीन लगातार जीत के बाद झेली। पहला सेट काफी प्रतिस्पर्धात्मक रहा, जिसमें काठमांडू ने २८-२६ के स्कोर से बढ़त बनाई। दूसरे सेट में भी काठमांडू ने अपना लय बनाए रखा और २५-१८ से आसानी से जीतते हुए २-० की बढ़त बना ली। तीसरे सेट में कर्णाली ने २५-२१ से जीत दर्ज कर मैच में वापसी की। लेकिन काठमांडू ने चौथे सेट को भी २५-२१ से जीतकर समग्र मैच में विजय हासिल की। तीन जीत के बाद काठमांडू और कर्णाली दोनों के ८ अंक हैं और दोनों ने ४-४ मैच खेले हैं। कर्णाली ने काठमांडू को हराकर अंतिम लीग मैच से पहले प्लेऑफ में जगह पक्की करने का अवसर खो दिया है। अब कर्णाली को भी अंतिम मैच के नतीजे का इंतजार करना होगा। अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स ९ अंकों के साथ शीर्ष स्थान पर हैं। उसके बाद कर्णाली और काठमांडू समान ८-८ अंकों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं, जबकि सगरमाथा स्मैशर्स ७ अंकों के साथ चौथे स्थान पर है। अब गुरूवार को लीग चरण के अंतिम तीन मैच होंगे, जो शीर्ष तीन टीमों की स्थिति तय करेंगे। गुरूवार को पहला मैच दोपहर १ बजे अन्नपूर्ण और सगरमाथा के बीच होगा। इस मैच को जीतने पर अन्नपूर्ण सीधे फाइनल में पहुंच जाएगा। दूसरे मैच में कर्णाली मधेश वारियर्स से मुकाबला करेगी और तीसरे मैच में काठमांडू और खप्तड फाल्कन्स आमने-सामने होंगे।

जसपाको भनाइ: लुम्बिनी सभामुखको निर्णय अवैधानिक छ

समाचार सारांश परीक्षित सामग्री। जनता समाजवादी पार्टी नेपालका महासचिव डा. सुरेन्द्र झाले लुम्बिनी प्रदेश सभाका सभामुख तुलाराम घर्तीको निर्णयलाई अवैधानिक भन्दै कानुनी उपचारका लागि अघि बढ्ने बताउनुभएको छ। लुम्बिनी प्रदेश सभा सचिवालयले अम्बिका काफ्लेको दल त्यागसम्बन्धी सूचना राजनीतिक दलसम्बन्धी ऐन र नियमावली अनुसार बुधबार प्रकाशित गरेको छ। उनले पार्टीबाट निष्कासन गरिएका व्यक्तिहरूको सिफारिसका आधारमा सांसद काफ्लेलाई पदमुक्त गर्नु पक्षपातपूर्ण भएको आरोप लगाउनुभएको छ। २४ भदौ, बुटवल।

महासचिव डा. सुरेन्द्र झाले लुम्बिनी प्रदेश सभाका सभामुख तुलाराम घर्तीले गरेका निर्णयलाई अवैधानिक ठहर गर्दै कानुनी उपचारका लागि अघि बढ्ने बताउनुभयो। बुधबार लुम्बिनी प्रदेश सभा सचिवालयले जनता समाजवादी पार्टी नेपालकी प्रदेश सभा सदस्य अम्बिका काफ्लेको दल त्यागसम्बन्धी सूचना सार्वजनिक गरेको थियो। प्रदेश सभा अधिवेशन सञ्चालनमा नरहेको अवस्थामा सभामुखको निर्देशनमा राजनीतिक दलसम्बन्धी ऐन, २०७३ को दफा ३५ को उपदफा (२) र लुम्बिनी प्रदेश सभा नियमावली, २०७९ को नियम १९६ अनुसार दल त्यागसम्बन्धी सूचना प्रकाशित गरिएको हो।

महासचिव डा. झाले कुराकानी गर्दै भन्नुभयो— पार्टीले साधारण सदस्यसमेत नरहने गरी निष्कासन गरेका व्यक्तिहरूको सिफारिसका आधारमा पार्टी निर्णयको पक्षमा रहेकी सांसदलाई सभामुखले पदमुक्त गर्नु अवैधानिक भएको छ। ‘सभामुखले अवैधानिक निर्णय गर्नुभएको छ, उहाँले तटस्थ, निष्पक्ष, साझा र अभिभावकीय भूमिका निर्वाह गर्नु पर्ने भएतापनि एमाले–माओवादी गठबन्धनको सरकार जोगाउने काम गर्नुभएको छ’, महासचिवले भने।

सभामुखको यस्तो पक्षपाती निर्णयले प्रदेश सरकारलाई कठिनाइमा पार्ने चेतावनी पनि महासचिव डा. झाले दिनुभयो। जसपा नेपाल लुम्बिनी प्रदेश सभा संसदीय दलको निर्णय र सिफारिसका आधारमा काफ्लेलाई सभामुखले प्रदेशसभा सदस्य पदबाट निष्कासन गर्ने निर्णय गरेको थियो। प्रदेश सभा सचिव दुर्लभकुमार पुन मगरले जारी गरेको सूचनामा काफ्लेको दल त्यागसम्बन्धी विवरण सार्वजनिक गरिएको उल्लेख छ। उक्त सूचनामा पार्टीले प्रदेश सभा सदस्य पदबाट निष्कासन गरेको जानकारी कानुनी प्रक्रियाअनुसार सचिवालयले प्रकाशित गरेको बताइएको छ। काफ्लेलाई मुख्यमन्त्री चेतनारायण आचार्यले प्रदेश सभाबाट विश्वासको मत लिने क्रममा पार्टीले जारी गरेको ह्वीप उल्लङ्घन गरेको र पार्टी एवं संसदीय दलको निर्णय विपरीत काम गरेको आरोप लगाई कारबाही गरिएको हो। काफ्ले पार्टीको संस्थापन पक्षमा उभिएकी छिन्। पार्टी केन्द्रीय तहले प्रदेश सभाका चार सांसद—सन्तोष पाण्डे, भण्डारी लाल अहिर, आदेश अग्रवाल र हेमा बेल्बासे केसीलाई पार्टीको साधारण सदस्य समेत नरहने गरी पार्टीबाट निष्कासन गरेको पत्र प्रदेश सभा सचिवालयमा पहिले नै पठाइसकेको थियो। तर सो पत्र अनुसार चार जना सांसदको पदमुक्ति बारे जानकारी नगराई पार्टी संस्थापन पक्षमा उभिएकी सांसदलाई कारबाही गरेको सभामुख तुलाराम घर्तीको निर्णय विवादास्पद बनेको छ।

‘जेनजी आन्दोलन के दौरान नेपाली सेना ने संकट प्रबंधन में प्रभावी भूमिका निभाई’

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • २३ भदौ से पहले सूचना न होना नहीं, बल्कि सही विश्लेषण और समय पर निर्णय प्रक्रिया न होने के कारण सुरक्षा तंत्र असफल रहा, ऐसा नारायण अधिकारी ने बताया।
  • २४ भदौ को सर्वोच्च न्यायालय, सिंहदरबार सहित संवेदनशील संरचनाओं के विध्वंस और आगजनी से राज्य के संकट प्रबंधन और कमाण्ड-नियंत्रण में कमजोरी आई, उन्होंने कहा।
  • जेनजी आन्दोलन को उन्होंने केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सुशासन, युवाओं की असंतुष्टि, डिजिटल परिचालन और विश्वास संकट के विस्फोट के रूप में समझाया।

सिर्फ राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि सुरक्षा विशेषज्ञ भी २०८२ भदौं २३ और २४ की घटनाओं को अलग करके समझने की जरूरत बताते हैं। उस समय सरकार जीवन और संपत्ति दोनों की रक्षा करने में सक्षम नहीं थी। जेनजी आन्दोलन को सुरक्षा के दृष्टिकोण से कैसे देखा जाता है? आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मामले में इन घटनाओं से क्या सीखना चाहिए? इस विषय पर सुरक्षा विशेषज्ञ नारायण अधिकारी से हुई बातचीत:

२०८२ भदौं २३ की घटना के संदर्भ में सुरक्षा एजेंसियों की पूर्व सूचना और विश्लेषण क्यों विफल हुए?

पूर्व सूचना में असफलता निश्चित है। लेकिन मेरे अनुसार सिर्फ सूचना न मिलना समस्या नहीं था। सूचना मिलने के बाद भी उसे गंभीरता से विश्लेषित कर निर्णय प्रक्रिया में समय पर उपयोग नहीं कर पाने से समस्या हुई। राज्य ने गुप्तचर प्रणाली में कितना निवेश किया, इसकी क्षमता क्या है, और इसे कितना व्यावसायिक एवं प्रभावी बनाया जा सकता है, यह महत्वपूर्ण है।

गुप्तचर काम केवल सूचना संग्रह नहीं, बल्कि जोखिम के स्तर के विश्लेषण, घटनाओं के भविष्य में कहां जा सकती हैं, और इन्हें रोकने या प्रबंधित करने के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए, ऐसी रणनीतिक चेतावनी देना है।

२३ भदौं से पहले आंदोलन के संकेत, युवाओं की डिजिटल गतिविधि और सोशल मीडिया पर बढ़ रही असंतुष्टि के पर्याप्त संकेत थे। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इन संकेतों को पारंपरिक तौर पर

भारत के गुजरात में गोमन सांप ने ९ मुर्गी के अंडे निगल लिए

भारत के गुजरात में एक गाँव में एक गोमन सांप ने नौ मुर्गी के अंडे निगलते देखा गया। एक काला गोमन सांप एक परिवार के घर के अंदर घुस गया था। इस दौरान सांप ने कुछ मुर्गियां मारीं और फिर कुछ अंडे निगल लिए। बाद में उस सांप को जंगल में छोड़ दिया गया।

शेरबहादुर देउवाले देशभर भ्रमण गर्ने घोषणा की

२४ भदौ, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस के पूर्व सभापति शेरबहादुर देउवाले देशव्यापी भ्रमण पर निकलने का ऐलान किया है। कांग्रेस भक्तपुर ने बुधवार १३३वीं बीपी जयन्ती के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में उन्होंने यह घोषणा की। ‘जिला, गाँव, हर जगह भ्रमित साथियों को अपनी तरफ लाते हुए मैं जल्द ही पूरे देश में घूमने आऊंगा,’ देउवा ने कहा।

पूर्व सभापति देउवा ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने में पूर्ण विश्वास भी प्रकट किया। ‘मैं पूरे देश में घूम कर फिर से जनता के पक्ष में जाने का भरोसा दिलाता हूँ, यहाँ आए सभी को मैं हार्दिक धन्यवाद देता हूँ और मुझे भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय मिलेगा,’ उन्होंने स्पष्ट किया। विदेश से उपचार करा कर स्वदेश लौटने पर मिली माया केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि सभी कांग्रेस के सच्चे कार्यकर्ताओं को भी मिली है, देउवा ने बताया।

‘जब मैं काठमांडू आया तो सिर्फ मैंने ही नहीं, बल्कि सभी साथियों ने यह माया पाई है,’ उन्होंने कहा, ‘यह माया नेपाली कांग्रेस के सच्चे कार्यकर्ताओं को मिली है।’ देउवा ने जनता से मिली इस माया को साझा मान कर आगे बढ़ने पर जोर दिया। ‘हमें सबको जनता द्वारा मिली माया को अपनी माया समझ कर आगे बढ़ना चाहिए,’ उन्होंने कहा। साथ ही देउवा ने १० भदौ को रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से हुए जनधन की क्षति पर गहरा दुःख व्यक्त किया।

कार्लोस अल्काराज यूएस ओपन से बाहर, बेन शेल्टन सेमीफाइनल में पहुंचे

अमेरिकी खिलाड़ी बेन शेल्टन ने पांच सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में कार्लोस अल्काराज को ६–७, ६–१, ६–३, १–६, ७–६ के स्कोर से हराकर यूएस ओपन के सेमीफाइनल में प्रवेश किया है। न्यूयॉर्क में हुए इस मैच का दौर ४ घंटे २८ मिनट तक चला और यह यूएस ओपन के इतिहास का सबसे देर से खत्म हुआ मैच बन गया। सेमीफाइनल में शेल्टन का सामना एक अन्य अमेरिकी खिलाड़ी फ्रांसिस टियाफो से होगा, जिन्होंने २३ वर्षों बाद अमेरिकी पुरुष टेनिस खिलाड़ी के यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचने की पुष्टि की है। २४ भदौ, काठमांडू।

पूर्व विजेता कार्लोस अल्काराज यूएस ओपन टेनिस के क्वार्टरफाइनल में बाहर हो गए हैं। अमेरिकी खिलाड़ी बेन शेल्टन ने गुरुवार सुबह सम्पन्न पांच सेट के मुकाबले में अल्काराज को ६–७ (५–७), ६–१, ६–३, १–६, ७–६ (१०–७) के अंकों से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। न्यूयॉर्क के आर्थर एश स्टेडियम में स्थानीय समयानुसार रात ११ बजे के बाद शुरू हुआ मैच सुबह ३:३४ बजे समाप्त हुआ।

आठवीं वरीयता वाले शेल्टन ने अपने करियर में पहली बार विश्व के शीर्ष तीन खिलाड़ियों को हराया है। इससे पहले उन्होंने शीर्ष तीन विरोधियों के खिलाफ खेले गए १७ मैचों में कोई जीत हासिल नहीं की थी और अल्काराज के खिलाफ हुए तीनों मैचों में हार दर्ज की थी। सेमीफाइनल में शेल्टन का मुकाबला अमेरिकी खिलाड़ी फ्रांसिस टियाफो से होगा, जिससे २३ वर्षों बाद फिर से कोई अमेरिकी पुरुष खिलाड़ी यूएस ओपन के फाइनल में पहुंचने जा रहा है।

चार महीने से अधिक समय तक घुटने की चोट से उबरकर लौटे विश्व नंबर तीन अल्काराज ने टूर्नामेंट में अच्छी प्रदर्शन किया, लेकिन अंततः उपाधि बचा नहीं सके। मैच के बाद अल्काराज ने हार को लेकर निराशा व्यक्त नहीं की और अपनी मेहनत व संघर्ष पर गर्व जताया। उन्होंने कहा, ‘मैं स्वस्थ होकर मुस्कान के साथ कोर्ट छोड़ रहा हूँ, यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है।’

पोखराका कबाड़ी व्यवसायियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 8 लाख रुपए की राहत सहायता प्रदान की

भाद्र १० तारीख को वोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए पोखरा के कबाड़ी व्यवसायियों ने 8 लाख रुपए मूल्य के राहत सामग्री सौंपे हैं। सुजन गुरुङ की अगुवाई में व्यवसायियों ने खाद्य सामग्री, बर्तन, कपड़े और स्वास्थ्य सामग्री एकत्रित कर पोखरा महानगरपालिका के माध्यम से राहत प्रदान की है। महानगर के प्रतिनिधियों ने कबाड़ी व्यवसायियों के इस प्रयास को अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक बताया।

२४ भाद्र, पोखरा। भाद्र १० को वोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के प्रभाव से त्रिशूली नदी तक क्षति फैल गई, जिससे जन-धन का बड़ा नुकसान हुआ। इस पर पोखरा के कबाड़ी व्यवसायी राहत और पुनर्स्थापना के लिए आगे आए हैं। कबाड़ी संग्रहण से लेकर बिक्री-प्रशासन तक निवेश करते हुए व्यवसायियों ने एकजुट होकर बाढ़ पीड़ितों के लिए 8 लाख रुपए तक का आवश्यक सामग्री सहयोग दिया है।

व्यवसायी सुजन गुरुङ की अगुवाई में पोखरा के कबाड़ी व्यवसायियों ने स्वेच्छा से राशि जमा कर बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जरूरी खाद्य और भौतिक सामग्री खरीदकर भेजी है। पोखरा महानगरपालिका द्वारा संचालित एकीकृत राहत संग्रहण अभियान से जुड़कर व्यवसायियों ने महानगर प्रतिनिधि धनराज आचार्य समेत अन्य की मौजूदगी में सामग्री हस्तांतरण की।

राहत संग्रहण अभियान के संयोजक सुजन गुरुङ ने कहा, ‘‘भाद्र १० की बाढ़ ने कई परिवारों को बेघर और विस्थापित कर दिया है। छोटे-मध्यम कबाड़ी व्यवसायी जो सामाजिक जिम्मेदारी का अनुभव करते हैं, उन्होंने अपनी क्षमता अनुसार धन जुटाकर यह सहयोग दिया है, जो हम सभी की एक संयुक्त पहल है।’’ व्यवसायियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए त्वरित खाद्य सामग्री और दैनिक जीवन के लिए आवश्यक बर्तन तथा राशन प्रदान किए हैं। पोखरा महानगरपालिका के राहत केंद्र के माध्यम से इन सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

जनरेशन जेड आंदोलन में क्षतिग्रस्त संरचनाओं का पुनर्निर्माण कैसा है?

जनरेशन जेड आंदोलन के दौरान जलाया गया सिंहदरबार

तस्वीर स्रोत, EPA/Shutterstock

युवाओं के आंदोलन को दमन करने के बाद गोलीबारी और आगजनी के कारण कई महत्वपूर्ण संरचनाएं लगभग एक वर्ष पहले नष्ट हो चुकी हैं।

पिछले भदौ २४ तारीख को राष्ट्रपति निवास, संसद और सुप्रीम कोर्ट समेत नष्ट हुई संरचनाओं का पुनर्निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। प्रधानमंत्री कार्यालय गृह मंत्रालय भवन से कार्यरत है, जबकि गृह मंत्रालय महाधिवक्ता के नए भवन से संचालन कर रहा है।

संसद द्वारा किराए पर लिए गए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र का पुनर्निर्माण भी अभी तक व्यवस्थित रूप से नहीं हुआ है। संघीय सचिवालय निर्माण एवं प्रबंधन कार्यालय और शहरी विकास और भवन निर्माण विभाग ने बताया कि कई और संरचनाओं के पुनर्निर्माण के ठेके अभी तक नहीं दिए गए हैं।

पहले से बनाए जा रहे नए भवनों में सुप्रीम कोर्ट और संसद सचिवालय के लिए बजट में कटौती की स्थिति ने भी काम को प्रभावित किया है।

भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के प्रमुख गोविंदराज पोखरेल ने जनरेशन जेड आंदोलन के बाद पुनर्निर्माण को संतोषजनक नहीं बताया है।

अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स ने लगातार तीसरी जीत दर्ज कर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया

समाचार सारांश

OK AI द्वारा उत्पादित। सम्पादकीय समीक्षा गरिएको।

  • अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स ने नेपाल वॉलीबॉल लीग में खप्तड फाल्कन्स सुदूर पश्चिम को २५-१५, २५-१५, २९-२७ के सीधे सेट में हराकर लगातार तीसरी जीत दर्ज की।
  • अन्नपूर्ण ने ४ मैचों में ९ अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल कर फाइनल में पहुँचने की संभावना बनाए रखी है।
  • खप्तड फाल्कन्स के लिए यह लगातार चौथा हार है और वे गुरुवार को आखिरी लीग मैच में काठमांडू रेड्स से मुकाबला करेंगे।

२४ भदौ, काठमांडू। अन्नपूर्ण स्पाइकर किंग्स ने नेपाल वॉलीबॉल लीग (NVL) में लगातार तीसरी जीत दर्ज करते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा कर लिया है।

त्रिपुरेश्वर में राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के कवर हॉल में बुधवार को खेले गए मैच में अन्नपूर्ण ने खप्तड फाल्कन्स सुदूर पश्चिम को सीधे सेट में हरा दिया।

अन्नपूर्ण ने खप्तड को २५-१५, २५-१५, २९-२७ से मात दी। पहले दो सेट अन्नपूर्ण के पक्ष में एकतरफा रहे।

तीसरे सेट में खप्तड ने कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन अंततः अन्नपूर्ण ने टाईब्रेक में जीत हासिल की।

लगातार तीन मैच जीतने के बाद अन्नपूर्ण ने चार मैचों में ९ अंक जुटाकर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।

पहले मैच में अन्नपूर्ण को कर्णाली शिवराज से हार मिली थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने काठमांडू रेड्स और मधेश वारियर्स को हराया।

इस जीत से अन्नपूर्ण को फाइनल में पहुंचने की संभावना भी बरकरार रही है।

अब अन्नपूर्ण गुरुवार को लीग चरण के अंतिम मैच में सगरमाथा स्मैशर्स से भिड़ेगा।

खप्तड के लिए यह लगातार चौथी हार है और वे भी गुरुवार को अपने अंतिम लीग मैच में काठमांडू रेड्स से मुकाबला करेंगे।

उसी दिन कर्णाली शिवराज और काठमांडू रेड्स के बीच भी मुकाबला होगा।

तस्वीरें : विकास श्रेष्ठ

फोन ने कहा – ‘मोबाइल स्विच ऑफ है’

भाद्र १० तारीख की सुबह। मैं नियमित रूप से सुबह ९ बजे अस्पताल पहुंचा। मरीजों की देखभाल शुरू किए कुछ समय बाद एक सहकर्मी चिकित्सक ने बताया – नेपाल-चीन सीमा की ओर भारी बाढ़ आई है। मानव हानि की खबरें भी आ रही हैं। अस्पताल की सामान्य भीड़-भाड़ के बीच ये समाचार सुनकर शुरुआत में ज्यादा ध्यान नहीं गया। पर कुछ ही पलों में मन अचानक डरा सा गया। मुझे अपने सासूआमा चौसरा पुन और ससुर थमबहादुर पुन की याद आई। वे ‘ढोरपाटन’ से तीर्थयात्रा के लिए गोसाईंकुण्ड जा रहे थे। मन में सन्नाटा छा गया। यात्रा का गंतव्य सचमुच गोसाईंकुण्ड ही है या नहीं, यह पता करने के लिए मैंने अपनी सालन को फोन किया। उन्होंने पुष्टि की कि वे गोसाईंकुण्ड जा रहे थे। तब तक रसुवा की बाढ़ की खबरें लगातार आ रही थीं। मैंने तुरंत अपनी पत्नी सहित पूरे परिवार से उनके फोन से संपर्क करने को कहा। लेकिन जवाब निराशाजनक था – ‘संपर्क नहीं हो पा रहा है।’ कुछ देर बाद कॉल किया तो दूसरी आवाज आई – ‘मोबाइल का स्विच ऑफ किया गया है।’ सामान्यतः फोन न उठना और मोबाइल बंद होना में बड़ा फर्क होता है। कुछ मिनट के अंतराल में आए इस जवाब के बदलाव ने हमें संभावित हादसे का डर दिलाया। उस दिन हमने परिवार के सदस्यों ने उनकी यात्रा को लेकर कई अंदाजे लगाए। मेरी पत्नी डॉ. सुनिता बस छूटने के स्थान पर पहुंचीं। बस का नंबर सुनिश्चित किया। फिर रिश्तेदारों और दोस्तों से संपर्क कर भाद्र १० को संपर्क विहीन हुई बस की संख्या पता करने लगे। आधिकारिक सूत्रों से एक बस बाढ़ में फंसी होने की खबर आई थी, लेकिन वह संख्या उस बस से मेल नहीं खाती थी जिसमें वे सवार थे। उस खबर ने थोड़ी राहत दी पर तनाव भी बढ़ाया। संदेह डूबा रहा। कहीं वे सुरक्षित तो हैं? यह एक छोटी उम्मीद भी थी। अगली सुबह तक फोन पर वही जवाब आता रहा – ‘मोबाइल का स्विच ऑफ है।’ अंतिम स्थान: बेत्रावती फोन संपर्क न होने पर अगला सवाल उठा – वे आखिर कहां तक पहुंचे थे? अगर अंतिम स्थान पता चल जाता तो उनकी स्थिति का कुछ अनुमान लगाया जा सकता था। नेपाल टेलिकम से जानकारी लेने पर पता चला कि उनका मोबाइल आखिरी बार बेत्रावती क्षेत्र से दिखा था। हम थोड़े आश्चर्यचकित थे। दोस्तों और रिश्तेदारों ने धादिंग से गोसाईंकुण्ड जाने वाली यात्रा में इतने कम समय में बेत्रावती पहुंचने की संभावना कम आंकी थी। लेकिन यात्रा के शुरू होने का समय, सड़क की स्थिति, यातायात की भीड़ और चालक की चाल से समय में भिन्नता हो सकती थी। इसलिए एक बार फिर एक छोटी उम्मीद जगी। शायद वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नहीं पहुंचे? शायद कहीं सुरक्षित हैं? इसी उम्मीद के साथ हम बबरमहल स्थित नेपाल टेलिकम कार्यालय पहुंचे। वहां कई लोग अपने परिजनों की खोज में आए थे। कोई फोन के अंतिम लोकेशन पूछ रहा था, कोई संपर्क विहीन परिजनों की जानकारी ढूंढ़ रहा था। टेलिकम के कर्मचारी जो जानकारी दे सकते थे, सहयोग कर रहे थे। ऐसे आपदा के समय वहां का दृश्य यह सिखाता है – बड़ा प्राकृतिक संकट नेपाली को केवल दुःख नहीं देता, बल्कि एक-दूसरे के सहारा बनना भी सिखाता है। २०७२ साल के भूकंप में भी नेपाल टेलिकम की भूमिका याद आई। पर बबरमहल से मिली ताजी जानकारी ने फिर हमारी उम्मीदों को ठेस पहुँचाई। बेत्रावती लगभग धूल-धूसरित हो चुका था। वे लोग सवार बस वापस नहीं आई थी। मोबाइल आखिरी बार बेत्रावती से संपर्क में था। वहां की स्थिति भयावह थी और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। ये सभी तथ्य मिलाकर हमने मना भी न कर सकने वाला नतीजा सोचा। सोशल मीडिया पर एक छोटी उम्मीद मिली। फेसबुक के पोस्ट, फोटो और वीडियो देखते रहे। कहीं ‘सुरक्षित हैं’ ऐसी पोस्ट पर वे दिखें? कहीं उद्धार किए गए लोगों की भीड़ में उनकी तस्वीर मिल जाए? हर पोस्ट एक संभावना थी। हर वीडियो एक उम्मीद। एक पोस्ट में उनके कद-काठी वाले लोगों का वीडियो मिला जिससे धड़कन तेज हुई। पर वीडियो में सभी का चेहरा दूसरी तरफ था। विश्वास करना मुश्किल था। बाद में पता चला – वह वीडियो कट-पेस्ट कर बनाया गया था। यह खबर भी बची हुई उम्मीदों पर पानी फेर गई। प्राकृतिक आपदा में गलत सूचना फैलाना न सिर्फ गलत है, बल्कि पीड़ितों के दर्द में और अधिक घाव लगाने जैसा है। रसुवा की बाढ़ के बाद सोशल मीडिया पर फैली झूठी और अपुष्ट सूचनाओं ने पीड़ित परिवारों को कितना मानसिक तनाव दिया, हमने खुद महसूस किया। इसलिए मेरी व्यक्तिगत अपील है – कृपया इस तरह के संकट के समय अपुष्ट सूचना न फैलाएं। अस्पताल से डीएनएस तक घायल लोगों को बचाकर काठमांडू लाने की खबर सुनकर हमारी खोज अस्पताल की ओर मुड़ी। एक-एक अस्पताल जाकर पता लगाया – कहीं वे घायल पहुंचाए गए हैं क्या? पर किसी अस्पताल से कोई सकारात्मक खबर नहीं मिली। सरकार ने पहचाना न जा सकने वाले शवों के डीएनए परीक्षण हेतु परिवार से नमूने मांगे थे, तब उनके बेटे ने भी रक्त का नमूना दिया था। पर परिणाम कब आएगा यह निश्चित नहीं था। बाढ़ ने जो विनाश मचाया, वो धीरे-धीरे सामने आ रहा था। इतनी बड़ी मानवीय क्षति हमारी कल्पना से परे थी। समय गुजरा और खोज की संभावना कम होती गई। अंततः परिवार की सलाह पर हमने कठोर निर्णय लिया – उनका अंतिम संस्कार करें। लेकिन शव हमारे पास नहीं था। इसलिए कुश के शव का निर्माण कर परंपरानुसार अंतिम संस्कार किया। रिश्तेदार इकट्ठे हुए, संस्कार संपन्न हुआ। भाद्र २२ तारीख सोमवार को १३वें दिन की पितृकर्म भी संपन्न किया। उसी दिन सरकार ने रसुवा बाढ़ में मारे गए लोगों के सम्मान में राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया। त्रिशूली के साथ बह गया वह हँसी, मेरे माता-पिता, सासूआमा और ससुर का मुस्कुराता चेहरा अब केवल यादों में बचा है। वे कहां हैं, कैसे गुम हुए – इसका जवाब हमारे पास अभी भी नहीं है। लेकिन एक बात जरूर है – उनका जीवन अब त्रिशूली की उफनती जलधारा के साथ इतिहास बन चुका है। यह दंश केवल मेरे परिवार तक सीमित नहीं है, हजारों परिवारों ने इसका सामना किया है। किसी ने बेटा खोया, किसी ने बेटी, किसी ने जीवनसाथी, तो किसी ने अपना सबसे प्रिय व्यक्ति। प्राकृतिक आपदा केवल घर, संपत्ति और रास्तों को नष्ट नहीं करता, बल्कि परिवार के सपने, रिश्ते और यादों को भी बहा ले जाता है। जिन बचे वे सबके मन में एक सवाल रह जाता है – अब कैसे जियें? इस राष्ट्रीय शोक के वक्त मैं बाढ़ प्रभावित सभी परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। मृतकों के परिजन इस दर्द को सहन करने की शक्ति पाएं। जो लोग अब भी संपर्क विहीन हैं, उनकी शीघ्र खोज हो और वे सुरक्षित मिलें, ऐसी कामना करता हूं। पर इस सबके बाद भी मन में एक सवाल बार-बार आता है – क्या हम इस विनाश से कोई सबक सीख पाएंगे? क्योंकि ऐसी तबाही पहली बार नहीं हुई है और संभवत: अंतिम बार भी नहीं है। अतीत में भी जब आपदा आई, हम घबरा गए, राहत और बचाव के कार्यों में जुट गए, आंसू बहाए। कुछ दिन बाद सब सामान्य हो जाता और हम भूल जाते। पर प्रकृति हमारी भूल नहीं भूलती। प्रकृति फिर सवाल करेगी। उससे पहले हमें खुद से पूछना होगा – अगली बाढ़ आने से पहले, क्या हमने इस बार की बाढ़ से सचमुच कुछ सीखा?

भारतीय महिला के पेट से 13 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती निकाली गई

भारत में एक महिला के पेट से 13 डटपेन, पांच लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती मिलने के बाद चिकित्सकों ने शल्यक्रिया कर इन वस्तुओं को बाहर निकाला है। पेट से निकाली गई वस्तुओं में एक डटपेन 25 सेंटीमीटर लंबा था। सामान्यतः असामान्य वस्तु निगलने पर पेट में काफी दर्द, उल्टी या दस्त होते हैं। लेकिन जब कड़ी वस्तुएं पेट में होती हैं, तो महिला को किस प्रकार की समस्याएँ हुईं? और ये वस्तुएं कैसे निकाली गईं? शल्यक्रिया करने वाले डॉक्टर ने जानकारी दी है।

चिकित्सकों के अनुसार यह महिला आंध्र प्रदेश के पालनाडु जिले की 33 वर्षीय विवाहित महिला हैं। छाती के बाएं हिस्से में तीव्र दर्द होने पर परिवार ने उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने तुरंत उनका ECG और एंडोस्कोपी किया। माताश्री प्राइवेट अस्पताल की डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि ECG सामान्य था, लेकिन एंडोस्कोपी में पेट में डटपेन, चम्मच और मोमबत्ती जैसी कठोर वस्तुएं पाई गईं।

डॉ. रेड्डी के अनुसार तुरंत CT स्कैन कर पुष्टि करने के बाद एंडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी के माध्यम से शल्यक्रिया कर ये सभी वस्तुएं निकाली गईं। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चों के उपयोग वाला 25 सेंटीमीटर लंबा पेन महिला के पेट में छेद कर चुका था, जिससे ‘न्यूमोमेडियास्टिनम’ नामक स्थिति उत्पन्न हुई थी। डॉ. रेड्डी ने बताया कि फिलहाल महिला की स्थिति स्थिर है। यह महिला एक साल पहले भी चार पेन निगल चुकी थीं, तब भी शल्यक्रिया के जरिए उन वस्तुओं को निकाला गया था।

मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ बताते हैं कि इस प्रकार की समस्या आम तौर पर मानसिक रोगों से ग्रसित मरीजों में देखने को मिलती है। डॉ. रामचंद्र रेड्डी ने कहा कि मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्ति की उचित देखभाल और नियमित दवा सेवन में अभिभावकों की विशेष जिम्मेदारी होती है। उनका कहना है कि यह महिला मानसिक समस्याओं से पीड़ित थी और मनोचिकित्सक के परामर्श पर उपचार जारी है।

रवि लामिछाने : रसुवा बाढ़ को ‘अंतरराष्ट्रीयकरण’ की मांग के साथ रास्वपा अध्यक्ष का मुख्य प्रस्ताव

रवि लामिछाने

तस्वीर स्रोत, RSS

प्रकाशित

पढ़ने का समय: ३ मिनट

सत्ताधारी दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने कहा कि “जलवायु संकट से असमान रूप से हुए जीवन हानि पर केवल शोक प्रकट करना पर्याप्त नहीं है,” और उन्होंने मरने वाले लोगों के लिए “न्याय के माध्यम से जलवायु न्याय के प्रति सशक्त पहल करने” का आह्वान किया।

रविवार को संसद में अपने संबोधन के दौरान, रास्वपा के सांसद भी रहे लामिछाने ने कहा, “जलवायु न्याय के लिए अब हम जो लड़ाई लड़ने जा रहे हैं वह आसान नहीं होगी। अगर हम यह लड़ाई नहीं लड़े या हार गए, तो हम अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं होंगे।”

इस अवसर पर प्रधानमंत्री बालिंद्र शाह ‘बालेन’ भी सदन में मौजूद थे।

लामिछाने ने सभी दलों और सांसदों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय संकट को राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग न करें और एकजुट रहें।

“यह समय एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि विश्व के साथ एक स्वर में एक ही सवाल उठाने का समय है,” उन्होंने कहा।

एसियन पेन्ट्स यू–१८ फुटबॉल प्रतियोगिता भदौ २५ से शुरू, ३०० से अधिक विद्यालय प्रतिभागी

देशभर के ३०० से अधिक विद्यालयों की भागीदारी के साथ यू–१८ अंतरविद्यालय राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता भदौ २५ से सातों प्रदेशों में प्रारंभ हो रही है। नेपाल राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) की अनुमति से संचालित इस प्रतियोगिता का अनुमानित बजट ८१ लाख रूपये है और कुल पुरस्कार राशि १६ लाख रूपये से अधिक है। प्रदेश स्तरीय चयन के बाद छात्र और छात्रा वर्ग में कुल ६-६ टीमें असोज १६ को काठमांडू में होने वाले राष्ट्रीय फाइनल के लिए चुनी जाएंगी। २४ भदौ, काठमांडू।

‘एसियन पेन्ट्स चैंपियनशिप अंतरविद्यालय यू–१८ छात्र एवं छात्रा राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता २०८०’ आगामी भदौ २५ से शुरू हो रही है। यह प्रतियोगिता सातों प्रदेशों के विभिन्न खेल मैदानों में आयोजित होगी। आयोजकों के अनुसार, विद्यालय स्तर पर उभरती हुई फुटबॉल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना इसका मुख्य उद्देश्य है। प्रतियोगिता से पूर्व आयोजकों ने भदौ १० को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट और धादिङ क्षेत्र के जनधन के क्षतिग्रस्त होने पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए मृतकों को श्रद्धांजलि एवं प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।

प्रदेश स्तरीय चयन मुकाबले भदौ २५ से एकसाथ शुरू होंगे। कोशी प्रदेश में विराटनगर और इटहरी, मधेश प्रदेश में लालबन्दी, सिमरा एवं रौतहट, बागमती प्रदेश में चितवन और काठमांडू, गण्डकी प्रदेश में पोखरा एवं गोरखा, लुम्बिनी प्रदेश में घोराही, नेपालगंज और बुटवल तथा सुदूरपश्चिम प्रदेश में धनगढी में खेल आयोजित होंगे। कर्णाली प्रदेश में विद्यालयों की संख्या कम होने के कारण वहां की टीमें धनगढी में जाकर चयन मैच खेलेंगी, आयोजकों ने यह जानकारी दी।

प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि १६ लाख रूपये से अधिक है। छात्र और छात्रा दोनों वर्गों में विजेता टीम को समान रूप से १ लाख रूपये और उपविजेता टीमों को ५० हजार रूपये पुरस्कार मिलेगा। प्रतियोगिता के लिए विशेष ट्रॉफी तैयार की गई है। ट्रॉफी टूर के तहत नेपालगंज और धनगढी में प्रदर्शन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो चुका है, जबकि स्थगित हुए पोखरा और विराटनगर में असोज ३० और ३१ को ट्रॉफी टूर का आयोजन किया जाएगा, आयोजकों ने बताया। इसके साथ ही प्रतियोगिता के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए ‘एक गोल, एक पेड़’ अभियान भी चलाया जाएगा। प्रतियोगिता में जितने भी गोल होंगे, उतने पौधे लगाए जाएंगे, यह आयोजकों का संदेश है। एसियन पेन्ट्स मुख्य प्रायोजक है, जबकि बीवाइडी, एनसेल, सूर्यज्योति लाइफ इन्स्योरेन्स और मेघा इन्भेस्टमेन्ट बैंक सह-प्रायोजक एवं साझेदार हैं।

अमेरिका ने कनेडियन शराब, डेयरी उत्पादों और बड़े मोटरसाइकिलों पर प्रतिबंध की घोषणा की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनेडियन शराब, कुछ डेयरी उत्पादों और बड़े मोटरसाइकिलों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इस कदम से राजस्व शुल्क से शुरू हुआ व्यापार युद्ध और कठोर हो गया है। दशकों से जारी दोनों देशों के व्यापार संबंधों में इस निर्णय ने गंभीर तनाव पैदा किया है। इससे सीमा के पास के व्यवसायियों और उपभोक्ताओं पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। यह आयात प्रतिबंध 29 सितंबर से लागू होगा। इसका असर कनेडियन वस्तुओं को महंगा बनाने और अमेरिकी बाजार में उनकी पहुंच को रोकने का होगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह प्रतिबंध टैरिफ एक्ट 1930 की सेक्शन 338 के तहत लगाया है, जो अमेरिकी व्यापार के खिलाफ भेदभाव करने वाले देशों से सामान के आयात को रोकने का अधिकार राष्ट्रपति को देता है।

व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कनेडियन उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक के अतिरिक्त राजस्व शुल्क लगाने की जानकारी दी है। इसमें स्टील, एल्यूमिनियम, फर्नीचर और कागज सामग्री शामिल हैं। यह व्यवस्था 15 सितंबर से लागू होगी। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसके आर्थिक प्रभाव को सामान्य रूप में लेते हुए कहा, ‘ये प्रतिबंध उन उत्पादों पर लगाए गए हैं जहां कनेडा का अमेरिकी बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सा नहीं है या खरीदार घरेलू या अन्य विदेशी आपूर्ताओं की ओर मुड़ सकते हैं।’ साथ ही अमेरिका ने 50 प्रतिशत के राजस्व शुल्क सूची से सीमेंट, सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला नमक और कुछ अस्पताल के कागजात हटाए हैं।

पिछले महीने अमेरिका और कनेडा के बीच हुई वार्ता के असफल होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव तेजी से बढ़ा है। अमेरिका ने लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के कनेडियन सामानों पर 50 प्रतिशत का राजस्व शुल्क लगाया था, जबकि कनेडा ने भी समान राशि के अमेरिकी सामानों पर 50 प्रतिशत तक का कर लगाया। ट्रम्प ने आगामी वर्ष से कनेडियन ऑटोमोबाइल पर और अधिक शुल्क लगाने की चेतावनी दी है। सोमवार को उन्होंने कनेडियन विमान निर्माता कंपनी बमबार्डियर के जेट विमान अमेरिका में बेचने पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि इस विषय पर अभी विचार किया जा रहा है। ट्रम्प ने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के माध्यम से अधिकारियों को निर्देश दिया कि अमेरिकी सरकारी ठेकों से कनेडियन उत्पाद हटाए जाएं।

कनेडा द्वारा अमेरिकी शराब पर लगाए गए प्रतिबंध से अमेरिकी अधिकारी काफी असंतुष्ट हैं। व्यापार युद्ध के दौरान कई कनेडियन प्रांतों ने सरकारी मदिरापसल से अमेरिकी शराब हटा दी है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं, इसलिए व्यापार तनाव गहरा होने पर राजनीतिक और आर्थिक सीमाओं पर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। ट्रम्प के नए राजस्व शुल्क सेक्शन 338 पर आधारित हैं और यूएसएमसीए समझौते के अंतर्गत कुछ वस्तुओं को मुक्त नहीं रखते। इससे दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम बढ़ गया है। कनेडा ने शुरू में अमेरिकी लॉब्स्टर पर भी राजस्व शुल्क लगाया था, लेकिन अपने व्यापारियों पर नकारात्मक प्रभाव देखने के बाद उसे वापस लिया। अमेरिका में बमबार्डियर जेट पर प्रतिबंध के ट्रम्प के खतरे ने रिपब्लिकन सीनेटर जेरी मोरान का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कंसास के श्रमिकों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव के प्रति चेतावनी दी है।

बहुत गर्म पेय पदार्थों के सेवन से अन्ननली कैंसर का खतरा बढ़ सकता है

बहुत गर्म पेय पदार्थों का सेवन करने से अन्ननली कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, इसके बारे में चेतावनी जारी की गई है। नियमित रूप से बहुत गर्म चाय या कॉफी पीने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि अत्यंत गर्म पेय पदार्थ अन्ननली कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

लगभग 10 लाख लोगों पर किए गए इस अध्ययन ने गर्म पेय पदार्थों के सेवन और अन्ननली कैंसर के बीच संबंध के बारे में अब तक के सबसे बड़े सबूत प्रस्तुत किए हैं। चाय या कॉफी को ‘‘मध्यम गर्म’’ स्थिति में पीने वालों की तुलना में ‘‘बहुत गर्म’’ पेय पदार्थ पीने वालों में अन्ननली कैंसर का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक पाया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य कारकों के मुकाबले यह जोखिम कुल मिलाकर अभी भी कम ही है। अत्यंत गर्म पेय पदार्थों के भाप सहित सेवन करने से पेट तक जाने वाले मार्ग की कोशिकाओं की भीतरी सतह को नुकसान पहुंच सकता है।