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लेखक: space4knews

धनुषा में १३७ किलो गाँजासहित दो गिरफ्तार

१८ वैशाख, जनकपुरधाम। धनुषा से १३७ किलो गाँजा सहित दो व्यक्ति गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति धनुषा के मुखियापट्टी मुसहरनिया गाउँपालिका-६ लक्ष्मीपुर के २६ वर्षीय गणेशकुमार यादव और ४३ वर्षीय जितेन्द्रकुमार यादव हैं। शुक्रवार सुबह साढ़े ४ बजे के करीब लक्ष्मीपुर के बर्थिंग सेंटर के पास प्लास्टिक में लिपटे ५ (पांच) बोरे में रखा गाँजा बरामद किया गया, इसकी जानकारी धनुषा के पुलिस प्रवक्ता डिएसपी गणेश बम ने दी। दोनों को १३७ किलो गाँजा के साथ भारतीय नंबर प्लेट बीआर ३२ डी ५८९२ नंबर की मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया है। साथ में मौजूद २ मोबाइल फोन सहित दोनों को हिरासत में लेकर आगे की जांच जारी है, जिला पुलिस कार्यालय धनुषा ने बताया।

ईरान ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के माध्यम से नई शर्तें रखीं

18 वैशाख, काठमांडू। ईरान ने अमेरिका के साथ वार्ता के लिए पाकिस्तान के माध्यम से नई शर्तें प्रस्तुत की हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उनकी ओर से पाकिस्तान के माध्यम से नई शर्तें भेजी गई हैं। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है और इसी संदर्भ में गुरुवार शाम ईरान की शर्तें प्रस्तुत की गईं, बकाय ने बताया।

बकाय ने गुरुवार शाम एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा कि ईरान की मुख्य प्राथमिकता युद्ध को रोकना और स्थायी शांति स्थापित करना है। इसी क्रम में, अमेरिका के साथ जारी विवाद को समाप्त करने के लिए विश्व के कई देशों ने मध्यस्थता करने की चाह जताई, लेकिन पाकिस्तान ने इस राह में मध्यस्थता की जिम्मेदारी स्वीकार की है, उन्होंने कहा।

राष्ट्रपतिलाई जुक्ति लगाउने उक्साउने प्रतिपक्षलाई प्रश्न 

राष्ट्रपति से अध्यादेश रोकने का आग्रह करने वाले विपक्ष के कदम पर उठे सवाल

सरकार ने प्रतिनिधिसभा के अधिवेशन को स्थगित कर अध्यादेशों के जरिए शासन करने की कार्यशैली अपनाई है और राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने तीन अध्यादेश जारी कर चुके हैं। विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से अध्यादेश रोकने का आग्रह किया है, लेकिन संविधान राष्ट्रपतিকে ऐसा अधिकार नहीं देता है और इस कदम को लोकतंत्र के विरोधी माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विपक्ष को रचनात्मक विरोध और वैकल्पिक नीतियां प्रस्तुत करते हुए ही लोकतंत्र को जीवित रखना चाहिए, जिसके लिए संवाद और नैतिक शक्ति आवश्यक है।

१८ वैशाख, काठमांडू। सरकार ने प्रतिनिधिसभा के अधिवेशन को समाप्त कर अध्यादेशों के सहारे शासन चलाने का मार्ग चुना है। यद्यपि यह नेपाल की संसदीय परंपरा में कोई नई बात नहीं है और संविधान में भी अध्यादेश लाने को हमेशा गैरसंवैधानिक नहीं कहा जा सकता। शुक्रवार शाम तक राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने तीन अध्यादेश जारी कर दिए हैं जबकि शेष पांच अध्यादेशों को रोक कर परामर्श ले रहे हैं। अध्यादेशों के माध्यम से शासन करने की सरकार की यह शैली सार्वजनिक मंच पर आलोचना का विषय बनी हुई है।

वैशाख १७ को निर्धारित अधिवेशन के बुलाए जाने के २४ घंटों के भीतर अचानक स्थगित किए जाने और अध्यादेशों का सहारा लेने से सरकार की लोकतांत्रिक संस्कृतियों और मंशा पर सवाल उठते हैं। इसके अतिरिक्त, जेष्ठ जन आंदोलनों के बाद भी पुरानी सोच और व्यवहार की पुनरावृत्ति को लेकर नागरिकों में सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार जब अध्यादेश लाने के कारण और उद्देश्य के बारे में स्पष्ट और प्रभावी संवाद नहीं कर रही है, तब विरोध के स्वर तीव्र हो रहे हैं। संसद को दरकिनार करने इस प्रवृत्ति को आगे बढ़ाने के प्रयास से, पिछले समय की तरह ही जनता में प्रणाली की विश्वसनीयता खोने का भय है।

हालांकि, पहले अध्यादेश लाने वाली वर्तमान विपक्षी शक्तियां अब सरकार के इस कदम को गैरसंवैधानिक बता रही हैं। वे राष्ट्रपति से अध्यादेशों को रोकने का आग्रह भी कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने बुधवार को बैठक के बाद जारी बयान में कहा, ‘सम्माननीय राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिश किए गए अध्यादेश संसद को दरकिनार करने की मंशा से प्रसारित हुए हैं, अतः हम निवेदन करते हैं कि इन्हें स्वीकार न करें।’

पर सभी बातें साफ होनी चाहिए – संसद को रोक कर अध्यादेश के जरिए शासन चलाने वाले सत्तापक्ष के कदम की तुलना में राष्ट्रपति से अध्यादेश रोकने का आग्रह करने वाला विपक्ष का कदम लोकतंत्र के लिए और भी हानिकारक है। एक शक्तिशाली सत्ताधारी को सुधारने के लिए संख्या में कमजोर विपक्ष का ऐसा रुख उसे और कमजोर करता है। ऐसी स्थिति में विपक्षी दलों के पास सरकार से सवाल करने के लिए नैतिक शक्ति होनी चाहिए क्योंकि संख्या की दृष्टि से वे बेहद कमजोर हैं। यह नैतिक शक्ति पिछली कमजोरियों को सुधारकर, आंतरिक लोकतंत्र स्थापित कर और उचित व्यवहार के साथ सवाल पूछकर ही हासिल हो सकती है। संवैधानिक दृष्टि से राष्ट्रपति को अध्यादेश रोकने का अधिकार नहीं है।

लोकतंत्र एक मूल्य प्रणाली है। लेकिन विपक्ष द्वारा राष्ट्रपति से यह आग्रह करना उसी मूल्य प्रणाली की सीमा को लांघने जैसा है। उल्लेखनीय है कि ‘बदला हुआ कांग्रेस’ कार्यालय में गगन थापा और विश्वप्रकाश शर्मा द्वारा चुने गए संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे के नेतृत्व में यह आग्रह किया गया है।

साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा

इलाम साहित्य महोत्सव–२०८३ के पहले दिन कविता, आख्यान, पत्रकारिता और पर्यटन विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। पर्यटन के वैभव संबंधी सत्र में पर्यटन व्यवसायी अमिर राई ने राज्य की पर्यटन प्रचार कार्यशैली में असंतोष व्यक्त किया। महोत्सव में ५० हजार रुपये का हाङयुकजुनिता साहित्यिक पुरस्कार सुन्दर कुरूप को प्रदान किया गया। १८ वैशाख, इलाम। शुक्रवार को इलाम के बड़े टुँडिखेल से शुरू हुई सांस्कृतिक झांकी गौतम बुद्ध सभाहल पहुंचकर पूर्ण उत्सव में परिवर्तित हो गई। यह उत्सव साहित्यकारों के केन्द्रित होने के बावजूद राष्ट्र के विभिन्न विषयों पर चल रही बहस इसे और व्यापक बना रही है।

इलाम साहित्य महोत्सव–२०८३ इलाम में प्रारंभ हुआ है। महोत्सव के पहले दिन कविता, आख्यान, पत्रकारिता और पर्यटन संबंधित मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। ‘विरासत से रिल्स तक’ शीर्षक के तहत कविता के विभिन्न संदर्भों पर चर्चा हुई। विनोदविक्रम केसी, रमेशचन्द्र अधिकारी, समदर्शी काइला एवं रिमा केसी ने कविता लेखन की वर्तमान स्थिति और आगामी संभावनाओं पर अपने विचार रखे। वालिका थपलियाले इस सत्र का संचालन किया। कविता सत्र के बाद ‘डिजिटल मासु भात और हम पत्रकार’ विषय में ऑनलाइनखबर के प्रधान संपादक बसंत बस्नेत ने संवाद प्रस्तुत किया।

‘पर्यटन का वैभव: समृद्धि की आधारशिला’ सत्र में नेपाल में पर्यटन विकास की संभावनाओं, अवसरों और चुनौतियों पर बातचीत हुई। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण करते हुए पर्यटन अवसंरचना निर्माण पर बल दिया। इस सत्र में पर्यटन कार्यालय काकरिभिट्टाका अधिकारी निरोज कट्टेल, उद्योग वाणिज्य संघ इलाम की पूर्व अध्यक्ष सुसिला सापकोटा, पर्यटन व्यवसायी अमिर राई और पत्रकार गिरिराज बाँस्कोटा ने चर्चा की। आख्यान और उपआख्यान में केशव दाहाल, उमा सुवेदी, अमर न्यौपाने, श्याम सिंघक के साथ शैलेन्द्र अधिकारी ने बहस की। विभिन्न विषयों पर चर्चा के बाद गजल साझ का आयोजन हुआ।

गजल साझ में योगनीधि भटराई, जिआर न्यौपाने, पवित्रा प्रयत्न, भुइमान्छे, लोकेन खतिवडा, सागर बगर और सिंधु निरौलाले प्रस्तुतियाँ दीं। आयोजक नगर साहित्य कला संगीत प्रतिष्ठान इलाम के अध्यक्ष प्रकाश थामसुहाङ ने बताया कि शनिवार को भी विभिन्न सत्र आयोजित होंगे। सम्मान एवं विमोचन कार्यक्रम के अंतर्गत ५० हजार रुपये का हाङयुकजुनिता साहित्यिक पुरस्कार सुन्दर कुरूप को प्रदान किया गया। साथ ही राधिका नेम्वाङ स्मृति पुरस्कार कविता नेपाल को दिया गया।

दिनेश डिसी और गायक पुष्पन प्रधान को इलाम नगरपालिक ने सम्मानित किया। इसी दौरान सगरमाथा आरोही जुनिता सुब्बा की कविता संग्रह “प्रिय आत्मन” एवं प्रतिष्ठान की स्मारिका का विमोचन किया गया। साहित्य महोत्सव में पर्यटन संबंधी चिंताएं भी उठीं। ४२०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित पाँचथर और ताप्लेजुङ के सीमावर्ती क्षेत्र में बाहरी जिलों से आकर कंचनजंगा क्षेत्र में होटल व्यवसाय संचालित करना साहसिक होता है। झापा के अमिर राई पांचथर–ताप्लेजुङ सीमा स्थित तिम्बुङ पोखरी क्षेत्र में छह वर्षों से होटल व्यवसाय चला रहे हैं, जहां दुर्लभ ‘केन्जो’ फूल पाया जाता है।

पांचवें संस्करण के इलाम साहित्य महोत्सव के तहत ‘पर्यटन का वैभव, समृद्धि की आधार’ विषय पर पत्रकार गिरिराज बाँस्कोटा के संयोजन में हुई चर्चा में पैनल सदस्य अमिर राई ने राज्य की पर्यटन प्रचार कार्यशैली पर असंतोष जताया। ऊँचे हिमालयी क्षेत्र में वर्ष भर केवल चार महीने व्यापार संभव होने की स्थिति के बीच पर्यटन व्यवसायी की चुनौतियों और राज्य की दूरदर्शिता की कमी पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। स्थानीय से लेकर प्रदेश सरकार तक पर्यटन के लिए बजट खर्च करने को ‘बालू में पानी डलाने जैसा’ बताते हुए उन्होंने अपनी आपत्ति जाहिर की। दूसरी पैनलिस्ट सुशीला सापकोटा ने डिजिटल माध्यम से पर्यटन प्रचार ना होने पर व्यवसायी पिछड़ने का खतरा बताया।

राज्य विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से होमस्टे संचालन में बजट खर्च कर रहा है, लेकिन व्यवसायी खुद सक्रिय नहीं होंगे तो आर्थिक लाभ प्राप्त करना संभव नहीं होगा, ऐसा उनका मानना था। पर्यटन कार्यालय झापा के अधिकारी निरोज कट्टेल ने कहा कि सरकार ऐसे पर्यटन को प्रभावी बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने हाल ही में भारत के पश्चिम बंगाल से इलाम, पाँचथर और ताप्लेजुङ में पर्यटकों की संख्या बढ़ने का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमावर्ती दार्जिलिंग के टूर ऑपरेटरों के साथ सहयोग कर क्रॉस-बॉर्डर पर्यटक लाना संभव होगा।

मेची सीमा शुल्क कार्यालय से अलैंची निर्यात में वृद्धि, चाय निर्यात में कमी

१८ वैशाख, भद्रपुर (झापा) । मेची सीमा शुल्क कार्यालय से चालू आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के चैत मसान्त तक अलैंची निर्यात में ४१.५८ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सीमा शुल्क कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में १० अरब ७० करोड़ ७ लाख १८ हजार रुपए के अलैंची का निर्यात हुआ है। चालू वर्ष के नौ महीनों में ५,२९५ मेट्रिक टन अलैंची निर्यात हुआ है, यह जानकारी मेची सीमा शुल्क कार्यालय के सूचना अधिकारी ईश्वरकुमार हुमागाईं ने दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष २०८१/८२ के समान अवधि में अलैंची निर्यात ६ अरब २५ करोड़ १२ लाख ६१ हजार रुपए के बराबर था।

इसी तरह, सीमा शुल्क कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के नौ महीनों में चाय निर्यात में २६.७३ प्रतिशत की गिरावट आई है। इस अवधि में २ अरब ५८ करोड़ १९ लाख ८५ हजार रुपए के चाय का निर्यात हुआ है। पिछली वर्ष २०८१/८२ की इसी अवधि में चाय निर्यात ३ अरब २७ करोड़ २० लाख ७२ हजार रुपए के बराबर था, यह सूचना अधिकारी हुमागाईं ने बताया। कार्यालय के अनुसार निर्यात होने वाली मुख्य वस्तुओं में वेनियर सीट का निर्यात ३०.८८ प्रतिशत, छुर्पी का ३०.३५ प्रतिशत बढ़ा है, जबकि प्लाईवुड का ३७.७३ प्रतिशत, अम्रिसो का ३७.३३ प्रतिशत, फलामे पत्ते का निर्यात १७४७.८१ प्रतिशत और मोलासिस का ३६१.३५ प्रतिशत वृद्धि हुई है। हालांकि, सिमेंट क्लिंकर का निर्यात शत-प्रतिशत गिरा है। मेची सीमा शुल्क कार्यालय से चालू वर्ष २०८२/८३ के चैत मसान्त तक कुल १९ अरब ४३ करोड़ ३५ लाख ३२ हजार रुपए के माल-सामान का निर्यात हुआ है।

इरानी विदेशमंत्री का व्यंग्य: ‘इजरायल फर्स्ट’ नीति का अर्थ है ‘अमेरिका लास्ट’

१८ वैशाख, काठमाडौं । इरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में हुए युद्ध पर हुए खर्च को लेकर अमेरिका की कथित झूठी रिपोर्ट पर तंज कसा है। इससे पहले, अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने इरान से जारी संघर्ष में अमेरिका द्वारा २५ अरब डॉलर खर्च किए जाने की बात कही थी। शुक्रवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए इरानी विदेशमंत्री अराघची ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय द्वारा वास्तविक लागत को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया।

‘पेंटागन झूठ बोल रहा है। नेतन्याहू (इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू) के इस जुए की वजह से अमेरिका को अब तक सीधे १०० अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है,’ अराघची ने एक्स पर लिखा, ‘यह राशि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय द्वारा बताए गए खर्च से चार गुना अधिक है।’ अराघची ने बताया कि अमेरिकी करदाताओं पर अप्रत्यक्ष लागत और भी अधिक है। ‘हर अमेरिकी परिवार पर प्रतिमाह ५०० डॉलर का अतिरिक्त खर्च आ रहा है। यह खर्च तीव्र गति से बढ़ रहा है,’ उन्होंने कहा। अराघची ने यह भी कहा कि ‘इजरायल फर्स्ट’ नीति का मतलब वास्तव में ‘अमेरिका लास्ट’ है।

युद्ध खर्चबारे अमेरिकाले झुट बोल्यो : इरानी विदेशमन्त्री

इरानी विदेशमंत्री ने अमेरिकी युद्ध खर्च को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया

इरानी विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर इरान के साथ युद्ध की लागत को लेकर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स के माध्यम से कही है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने दावा किया था कि अमेरिका ने इरान के साथ युद्ध में २५ अरब डॉलर खर्च किए हैं। अराघची ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘पेंटागन झूठ बोल रहा है। नेतन्याहू की योजना के कारण अब तक अमेरिकी…

श्रम का सम्मान और सुरक्षा कब होगी?

१८ वैशाख, काठमाण्डौ। वैशाख १८ अर्थात् १ मई, विश्वभर के श्रमिकों के हक-अधिकार के लिए जागरूकता का दिन है।

‘आठ घंटे काम, आठ घंटे मनोरंजन और आठ घंटे आराम’ का नारा सन १८८६ में अमेरिका के शिकागो से शुरू हुआ था, लेकिन २०८३ तक नेपाल में यह नारा अधिकांश के लिए केवल एक प्यारा सपना ही बना हुआ है।

आज विश्व स्तर पर १३७वां अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाए जाने के बीच काठमाण्डौ के चौराहों से लेकर खाड़ी की मरुस्थलीय क्षेत्रों तक फैले नेपाली श्रमिकों का एक ही सवाल है — ‘हमारे मुद्दों पर सरकार कब गंभीर होगी?’

नेपाल के संविधान और श्रम ऐन २०७४ ने श्रमिकों के अधिकारों को बेहतरीन तरीके से परिभाषित किया है, लेकिन उनके क्रियान्वयन में काफी कमजोरियाँ नजर आती हैं।

श्रम तथा आव्रजन विशेषज्ञ डॉ. जीवन बानियाँ के अनुसार नेपाल में नीति सुधार हुए हैं, लेकिन उसका लाभ वास्तविक श्रमिक तक पहुँच नहीं पाया है।

‘नीतिगत रूप में कई परिवर्तन हुए हैं, आईएलओ के मानकों और हमारे श्रम ऐन ने श्रमिक अधिकारों को संबोधित किया है, लेकिन व्यवहार में समस्याएँ हैं,’ वे बताते हैं। ‘कम से कम वेतन १९,५०० तो तय किया गया है, लेकिन अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक इस वेतन से वंचित हैं, विशेष रूप से कृषि और छोटे प्रतिष्ठानों में काम करने वाले पुरुष एवं महिलाएं ५ से १० प्रतिशत अधिक जोखिम में हैं।’

वानियाँ बताते हैं कि नेपाल का श्रम प्रशासन अभी भी केन्द्रित है। बागमती प्रदेश के श्रम कार्यालय द्वारा कितने जिलों या प्रतिष्ठानों का निरीक्षण संभव है, यह सवाल बनता है।

श्रम निरीक्षकों की संरचना कमजोर है। प्रतिष्ठान द्वारा की जाने वाली श्रम ऑडिट भी विश्वसनीय नहीं है। ऐसी प्रवृत्ति है कि १०० कर्मचारियों वाले स्थल ३० व्यक्तियों का विवरण दिखाकर बाकी को सामाजिक सुरक्षा से वंचित कर देते हैं।

विश्वव्यापी तौर पर करीब २९ लाख लोग कार्य से संबंधित दुर्घटना में अपनी जान गंवाते हैं। ४० करोड़ २ लाख लोग कार्य से जुड़ी दुर्घटना, रोग और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

राष्ट्रिय व्यवसायजन्य सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रोफाइल २०७८ के अनुसार नेपाल में २०१० से २०१९ के बीच ३९४ कार्यस्थल दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें ४६ लोगों की मृत्यु हुई।

श्रम और व्यवसायजन्य सुरक्षा विभाग की २०८० की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार २०७८ से २०८० की अवधि में ९५ दुर्घटनाएं हुईं। सामाजिक सुरक्षा कोष ने २०८० में २,८८३ मामलों के लिए दुर्घटना तथा अपंगता योजना के तहत मुआवजा उपलब्ध कराया।

नेपाल के श्रम विशेषज्ञ रामेश्वर नेपाल के अनुसार नीति निर्माण प्रक्रिया ‘त्रुटिपूर्ण’ है, जो श्रमिकों के भविष्य को निर्धारित करती है।

‘नीति आवश्यकताओं के अनुरूप और संबंधित पक्षों की सलाह से बननी चाहिए, लेकिन यहाँ तो सिंहदरबार में कमरे में बैठकर नीति बनाई जाती है,’ वे कहते हैं।

नेपाल में बेरोजगारी का एक अनूठा विरोधाभास दिखाई देता है। एक ओर सरकार के मंत्री श्रमिकों की कमी को लेकर ठेकेदारों की आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी ओर रोजाना हजारों युवा त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से श्रम बेचने विदेश जाते हैं।

‘२०७५ में प्रतिदिन लगभग १२ सौ लोग जाते थे, अब यह संख्या २४ सौ से अधिक हो गई है। पाँच वर्षों में वैदेशिक रोजगार समाप्त करने के सरकार के वादे केवल कागज पर साबित हुए,’ नेपाल कहते हैं।

वे सोचते हैं कि बेरोजगारी का असली माप वैदेशिक रोजगार की संख्या है। ‘जब तक स्वरोजगार को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा और श्रमिकों को छह माह दफ्तर-दफ्तर का चक्कर लगाना पड़ेगा, तब तक स्थिति नहीं बदलेगी,’ उनका कहना है।

नेपाल ट्रेड यूनियन महासंघ (जिफन्ट) के अध्यक्ष विनोद श्रेष्ठ श्रम बाजार की एक कड़वी तस्वीर पेश करते हैं। ‘आज स्थिति ऐसी है कि पिता मजदूर की तलाश में जाते हैं, बेटा नौकरी की खोज में, परंतु शाम को घर लौटने पर न पिता को मजदूर मिलता है, न बेटे को नौकरी,’ वे कहते हैं।

ये विडंबना मर्यादित रोजगार की कमी का परिणाम है। श्रेष्ठ के अनुसार न्यूनतम वेतन से परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं होता, इसलिए युवाओं का यहां रहना मुश्किल होता है, वे केवल ‘सांस चलती रहे’ कहने के लिए ही रहते हैं।

दूसरी ओर, उद्योगपतियों की सोच में भी कमी है। ‘उद्योगपति श्रमिकों को दिए जाने वाले वेतन को निवेश नहीं, खर्च मानते हैं; मशीन और जमीन में निवेश करना पसंद करते हैं, लेकिन व्यक्ति में निवेश करने से डरते हैं,’ वे कहते हैं।

श्रम मंत्रालय को राजनीतिक दलों और सरकार द्वारा हमेशा ‘अपरिपक्व मंत्रालय’ माना जाता है, श्रेष्ठ बताते हैं। ‘किसी अन्य मंत्रालय न मिलने पर ही श्रम मंत्रालय लेने की सोच रहती है। जब समाज रोबोटिक्स, फिनटेक और एआई के युग में है, हमारी श्रम नीतियां अभी भी पुराने युग की सीमित सोच में फंसी हैं,’ वे कहते हैं।

श्रमिकों की समस्याएं पारंपरिक तरीकों से हल नहीं होंगी। श्रमिक दिवस सिर्फ एक औपचारिक कैलेंडर इवेंट बन कर रह गया है, वह आंतरिक रोज़गार पर जोर देते हैं।

‘श्रम का सम्मान ही देश विकास की नींव है’ की भावना को अपनाते हुए सभी क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए उचित वेतन, सम्मानजनक कार्यस्थल और श्रमिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री रामजी यादव ने सभी पेशे और वर्ग के श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला बताया और सबके योगदान का सम्मान, मूल्यांकन और कृतज्ञता व्यक्त करने की संस्कृति मजबूत करने पर बल दिया।

श्रम विशेषज्ञ नेपाल ने श्रम प्रशासन को स्थानीय स्तर तक विस्तारित करने की वकालत की और स्थानीय तहों को श्रमिकों का पंजीकरण और वेतन विवाद समाधान का कानूनी अधिकार दिए जाने की जरूरत बताई।

इसके अलावा अनौपचारिक क्षेत्र और स्वरोजगार श्रमिकों के लिए सरकार को ‘कस्ट शेयरिंग’ अवधारणा लागू कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना चाहिए, उनका जोर है।

डॉ. बानियाँ के अनुसार, नए स्टार्टअप को दर्ता के समय भारी सामाजिक सुरक्षा शुल्क के बजाय शुरुआती वर्षों में कर में छूट और आसान ऋण की व्यवस्था करनी चाहिए।

साथ ही, निजी क्षेत्र के साथ समन्वय कर आवश्यक कौशल का प्रशिक्षण देना और श्रमिकों को सम्मानजनक माहौल में कार्य करने को सुनिश्चित करना आवश्यक है।

वैदेशिक रोजगार से भेजे गए रेमिटेंस पर देश निर्भर नहीं रह सकता, क्योंकि देश के ८० प्रतिशत रेमिटेंस खाद्य, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च हो रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि हमारी सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक संस्थाएं विफल हैं, विशेषज्ञों का विश्लेषण है।

इसलिए श्रम का सम्मान केवल १ मई के भाषण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष ३६५ दिन श्रमिकों के जीवन और कार्यस्थलों में दिखना चाहिए, यही इनका निष्कर्ष है।

सुकुमबासी बस्तियों के पालतू पशु आवासहीन, सरकार को चाहिए तत्काल ध्यान

काठमांडू के बल्खु, बालाजु और शंखमुल क्षेत्रों की सुकुमबासी बस्तियों को हटाने के दौरान वहां आश्रित पालतू पशु बिना आवास के रह गए हैं। पशु सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. आभास पौडेल ने बताया कि डोजर चलाने से कुछ पशुओं को चोटें आई हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ा है। पशु चिकित्सक टीम घायलों का उपचार कर रही है, वहीं पशु कल्याण संस्थाएं दीर्घकालीन प्रबंधन के लिए सरकार से तत्परता दिखाने का सुझाव दे रही हैं। १८ वैशाख, काठमांडू।

काठमांडू के बल्खु, बालाजु और शंखमुल के नदी किनारे स्थित सुकुमबासी बस्तियों को हटाने के दौरान मानवों के सुरक्षित स्थानांतरण के बावजूद, उन समुदायों के आश्रित पशु आवासहीन हो गए हैं। अधिकांश कुत्ते, बिल्ली जैसे पालतू जानवर इन समुदायों पर आश्रित थे और भोजन और आवास प्राप्त करते थे, लेकिन अब उनके स्थानांतरण के बाद ये पशु असहाय स्थिति में हैं।

घर और झोपड़ियां गिरने तथा डोजर चलाए जाने से कई पशुओं को चोटें लगी हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हुई है, बतलाते हुए पशु सेवा विभाग के वरिष्ठ पशु विकास अधिकारी एवं पशु कल्याण फोकल अधिकारी डॉ. आभास पौडेल ने बताया। आज पशु सेवा विभाग, नेपाल वेटेरिनरी एसोसिएशन, वेटेरिनरी अभ्यासकर्ता संघ नेपाल सहित कई संस्थाओं से आए पशु चिकित्सकों की टीम घायलों का प्राथमिक उपचार कर रही है।

टीम प्रभावित क्षेत्रों में बचाए गए और फंसे हुए पशुओं की स्थिति का अध्ययन कर रही है। घायलों तथा बीमार पशुओं के उपचार, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और प्रबंधन की स्थिति का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। पशुओं के उद्धार और भोजन व्यवस्था के लिए स्नेहाज केयर, एनिमल नेपाल, ऑल फॉर रेन, टीएफसी नेपाल और कैट जैसे पशु कल्याण संगठनों एवं पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ विभाग सहयोग कर रहा है। तत्काल राहत और उद्धार कार्यों के बावजूद, इन क्षेत्रों के पशुओं के पुनर्वास और स्थायी प्रबंधन के लिए लंबी अवधि की योजनाएं बनाना सरकार के लिए अनिवार्य है, ऐसा उन्होंने ज़ोर दिया है।

सुकुमवासी बस्तीकी वृद्धा– ‘बागमतीमै मरौं भन्या नपाइने भो’

सुकुमवासी बस्ती की वृद्धा – ‘बागमती में ही मरना चाहती हूँ’

समाचार सारांश

  • शंखमुल के नजदीक बागमती के किनारे ५० वर्षों से रहने वाली वृद्धा सीता श्रेष्ठ की बस्ती शुक्रवार को डोजर द्वारा खाली कराई गई।
  • सीता श्रेष्ठ ने बताया कि वह और उनका परिवार कमरे की तलाश में भटक रहा है, केवल लालपूर्जा मिलने का आश्वासन मिला है।
  • सरकार द्वारा काठमांडू के नदी किनारे की सुकुमवासी बस्तियों को तेजी से खाली करवाया जा रहा है और बस्ती के लोग अनिश्चित भविष्य में हैं।

१८ वैशाख, काठमांडू। शंखमुल के पास बागमती के किनारे शुक्रवार दोपहर वृद्ध महिला सीता श्रेष्ठ मिलीं। उन्होंने बागमती के किनारे पचास वर्ष से अधिक समय बिताया है। जब उन्होंने वहां बसना शुरू किया था, तो आसपास केवल खेत ही थे, घर बने नहीं थे।

उनके परिवार में बेटा, बहू और पोता हैं। अचानक शुक्रवार दोपहर को उस बस्ती में डोजर पहुंच गया, जहां सीता दशकों से रह रही थीं।

‘मैंने जमीन नहीं खरीदी है, कहां जाऊं? कमरा भी नहीं मिल रहा। कहां जाऊं, पता नहीं।’ मधुर स्वर में उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की।

उनके अनुसार, पिछले कुछ दिनों से उनका बेटा कमरे की खोज में भटक रहा है, लेकिन अभी तक उसे कोई कमरा नहीं मिला है।

‘हम ही सुकुमवासियों को कमरे नहीं देते,’ उन्होंने कहा, ‘बहुत से लोग मुझे देख चुके हैं, मैं गीदड़ चराती हूं, घास काटने भी जाती हूं।’

सीता के अनुसार, कई लोगों ने लालपूर्जा मिलने का आश्वासन दिया था और समय-समय पर ट्याक्स भी भरने को कहा गया।

लेकिन किसे और कहां भुगतान किया गया, यह उन्हें पता नहीं चल पाया है।

‘अगर मैं बागमती में ही मरना चाहती हूं तो भी मरने नहीं देंगे, केवल सुख-शांति मिल जाए। मैं दुख सहुंगी, लेकिन मेरे बच्चे खुश रहें,’ उन्होंने कहा, ‘यहां केवल ट्याक्स देने का वादा ही किया गया, लेकिन पता नहीं किसे दिया गया।’

गीदड़ चराकर अपनी आजीविका चलाने वाली वे, सड़क के उस पार डोजर द्वारा बस्ती खाली किए जाने का दृश्य देख रही थीं। वे आज शाम के लिए अपने ठिकाने के बारे में अनजान हैं। सरकार तेजी से सुकुमवासी बस्तियों को खाली करवा रही है।

काठमांडू के नदी किनारों पर शुक्रवार से तेजी से बस्तियां खाली कराई जा रही हैं।

अपनी ही बस्ती में डोजर द्वारा घरों को तोड़े जाने पर बस्ती के लोगों की स्थिति अत्यंत दुखद है।

‘संविधान राष्ट्रपतिलाई अध्यादेशको वैधता परिक्षण गर्ने अधिकार दिएको छैन’

सरकारले डाकिएको संघीय संसद्को अधिवेशनलाई स्थगित गर्दै अध्यादेशमार्फत् १०० बुँदे कार्ययोजना लागू गर्न खोजिरहेको छ। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले दुईवटा अध्यादेश जारी गरेका छन् भने थप दुईवटा अध्यादेश रोक्दै परामर्श सुरु गरेका छन्। संवैधानिक कानुनविद् डा. चन्द्रकान्त ज्ञवालीका अनुसार राष्ट्रपतिले अध्यादेश रोक्नु संविधानको उल्लंघन हो र यसको जिम्मेवारी सरकारमै पर्नेछ। बिहीबार डाकिएको संघीय संसद्को अधिवेशन स्थगित गरी सरकारले जिल्लारूपमै राष्ट्रपति कार्यालयमा अध्यादेशहरू पेश गरिरहेको छ।

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले जारि गरेका दुईवटा अध्यादेश बाहेकका दुईवटा रोक्दै परामर्श आरम्भ गरिसकेका छन्। सरकारको यो कार्यशैलीलाई लिएर सार्वजनिक क्षेत्रबाट आलोचना निरन्तर भइरहेकै छ, जहाँ अध्यादेशमार्फत् शासन चलाउने योजनामा प्रश्न उठाइएको छ। यस सम्बन्धमा संवैधानिक विज्ञ डा. ज्ञवालीले भने, “सरकार प्रतिनिधिसभाबाट कुनै पनि विधेयक पारित गराउन सक्छ, तर प्रक्रिया लामो भएकाले समय लाग्न सक्छ।”

सरकारले १०० बुँदे कार्ययोजना ल्याएको छ, तर कानुनी जटिलताका कारण ती योजनाहरू तत्काल लागू गर्न सकिँदैन। डा. ज्ञवालीले बताए, “अध्यादेश जारी गर्न सरकारले आह्वान गरेको अधिवेशन स्थगित गर्नुपर्छ र त्यसपछि मात्र अध्यादेश जारी गर्न सकिन्छ।” उनले थपेका छन्, “संविधानले राष्ट्रपतिलाई अध्यादेशको संवैधानिकता परीक्षण गर्ने अधिकार दिएको छैन।”

राष्ट्रपतिले अध्यादेश रोक्नु भनेको मुलुकको कार्यकारी अधिकार हस्तान्तरण गर्नु सरह हो। त्यसैले, अध्यादेशसम्बन्धी जिम्मेवारी सरकारको हुन्छ र सरकार नै जवाफदेही रहन्छ। अध्यादेशमा प्रश्न उठेमा त्यसको जिम्मेवारी राष्ट्रपतिको नभइ सरकारको हुन्छ।

अधिक १९ चिकित्सकों के लाइसेंस निरस्त किए गए

नेपाल मेडिकल काउंसिल ने नेपाली नागरिकता त्याग कर विदेशी पासपोर्ट प्राप्त करने वाले १९ चिकित्सकों के लाइसेंस रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए हैं। काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सतीशकुमार देव ने बताया कि उन चिकित्सकों के नाम काउंसिल के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से हटाए गए हैं। जिन चिकित्सकों का लाइसेंस निरस्त किया गया है, उन्होंने ब्रिटिश, कनाडाई, अमेरिकी, न्यूजीलैंड, जर्मन, ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय नागरिकता ग्रहण करके नेपाली नागरिकता त्याग दी है।

१८ वैशाख, काठमाडौं। नेपाल मेडिकल काउंसिल ने अतिरिक्त १९ चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र (लाइसेंस) निरस्त किए हैं। काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सतीशकुमार देव ने जानकारी दी कि ये चिकित्सक नेपाली नागरिकता छोड़ चुके हैं। इससे पहले भी काउंसिल ने १७ चिकित्सकों के लाइसेंस निरस्त कर चुके हैं, जिन्होंने नेपाली नागरिकता त्याग कर विदेशी पासपोर्ट प्राप्त किया था।

डा. देव ने कहा, “नेपाली नागरिकता छोड़कर विदेशी पासपोर्ट प्राप्त करने वाले इन चिकित्सकों के लाइसेंस निरस्त कर दिये गए हैं और उनके नाम रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से भी हटाए गए हैं।” उन्होंने आगे बताया, “नेपाल मेडिकल काउंसिल अधिनियम २०२० और नियमावली २०२४, तथा नेपाल नागरिकता अधिनियम २०६३ के अनुसार, विदेशी पासपोर्ट रखने वाले १९ चिकित्सकों के नाम काउंसिल के रजिस्टर से निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।”

लाइसेंस निरस्त किए गए चिकित्सकों में वे शामिल हैं, जिन्होंने ब्रिटिश, कनाडाई, अमेरिकी, न्यूजीलैंड, जर्मन, ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय नागरिकता ली है। डॉ. सुमिंद्र पुन, डॉ. शैलेश कुमार जयसवाल, डॉ. भूपेश खड्का, डॉ. आरती रानाभाट, डॉ. रमेशराज पहारी, डॉ. संजोक घले, डॉ. ऋषिराज बराल, डॉ. प्रभु पांडे, डॉ. तृप्ति महर्जन और डॉ. सृजना श्रेष्ठ का लाइसेंस पहले ही निरस्त हो चुका है।

इसी प्रकार, डॉ. सुनिता विष्ट, डॉ. दीप मल्ल, डॉ. सौरव जिसी, डॉ. जेनीषा श्रेष्ठ, डॉ. प्रभास रेग्मी, डॉ. दीपिका ज्ञवाली, डॉ. हेमु चौरसिया, डॉ. समीक्षा शर्मा, और डॉ. मनोरमा पांडे को भी हाल ही में लाइसेंस निरस्त किया गया है।

अमेरिका के तकनीकी व्यापार में नया प्रस्ताव चीन में हलचल का कारण बना

१८ वैशाख, काठमाडौं । अमेरिका के नियामक संस्था ने तकनीकी व्यापार से जुड़ा एक नया प्रस्ताव सामने लाए जाने पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई है। खासतौर पर चीनी प्रयोगशालाओं को अमेरिकी बाजार के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच करने से रोकने की योजना के कारण द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताते हुए बीजिंग ने प्रतिकार का चेतावनी जारी की है। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (एफसीसी) ने गुरुवार को जो प्रस्ताव रखा है, उसके मंजूर होने पर स्मार्टफोन से लेकर कैमरों तक के उपकरण प्रभावित होंगे।

एफसीसी के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में अमेरिका में उपयोग किए जाने वाले लगभग ७५ प्रतिशत प्रमाणित उपकरणों की जांच चीन स्थित मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में होती है, जिससे इस प्रस्ताव का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ऐसा कदम “अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार प्रणाली को गंभीर रूप से कमजोर करेगा।” मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका अपने निर्णय पर अडिग रहता है, तो चीन अपने उद्यमों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगा।

चीन ने एफसीसी पर बार-बार चीनी कंपनियों और उत्पादों को लक्षित करने वाले प्रतिबंधात्मक कदम उठाने का आरोप लगाया है। मंत्रालय का दावा है कि ये कदम दोनों देशों के बीच मेहनत से स्थापित व्यापारिक स्थिरता को खतरे में डालते हैं और उच्च स्तरीय समझौतों के विपरीत हैं। एफसीसी ने कहा है कि इसका प्रस्ताव “राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर” बनाया गया है। इससे पहले भी विदेशी स्वामित्व या नियंत्रण वाली परीक्षण प्रयोगशालाओं को सीमित करने वाले नियम लागू किए जा चुके हैं।

नया प्रस्ताव अमेरिका को उन देशों में स्थित प्रयोगशालाओं की मान्यता रद्द करने का लक्ष्य देता है जिनके साथ समान व्यापार समझौते नहीं हैं। एफसीसी के अनुसार चीन के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं है। यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो चीनी प्रयोगशालाओं में परीक्षण और प्रमाणीकरण कराए गए उपकरणों को दो साल के भीतर अमेरिकी बाजार से हटाया जाएगा। इससे तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला, अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रथाओं और अमेरिका-चीन संबंधों में नए तनाव के संकेत मिलते हैं। विश्लेषकों के अनुसार यह केवल व्यापार संघर्ष नहीं, बल्कि रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का भी एक नया चरण है।

पेस्तोल र लागुऔषधसहित काठमाडौंबाट ४ जना पक्राउ – Online Khabar

काठमाडौं में पिस्तौल और प्रतिबंधित दवाओं सहित चार गिरफ्तार

काठमाडौं के विभिन्न स्थानों से पिस्तौल १ संख्या, मैगजीन ३ संख्या, गोली ६ राउंड तथा ट्रामाडोल १६ हजार ७५० टैबलेट के साथ चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार लोगों में बूढानीलकण्ठ नगरपालिका–५ के २३ वर्षीय कबिर देउला, ४२ वर्षीय सबिना पोडे, २६ वर्षीय सन्सार सिटौला और ललितपुर गोदावरी नगरपालिका–११ के २६ वर्षीय सुवास शाही शामिल हैं।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो कोटेश्वर से तैनात पुलिस ने इन्हें हथियार और प्रतिबंधित दवाओं के साथ गिरफ्तार किया है और आवश्यक जांच कर रही है। ১৮ वैशाख, काठमाडौं। पिस्तौल और प्रतिबंधित दवाओं के साथ चार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। काठमाडौं के विभिन्न स्थानों से पिस्तौल १ संख्या, उसी पिस्तौल की मैगजीन ३ संख्या, उसी पिस्तौल की गोली ४ राउंड, एसएलआर हथियार की गोली २ राउंड और नियंत्रित प्रतिबंधित दवा ट्रामाडोल १६ हजार ७५० टैबलेट के साथ ४ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार व्यक्तियों में बूढानीलकण्ठ नगरपालिका–५ निवासी २३ वर्षीय कबिर देउला, ४२ वर्षीया सबिना पोडे, २६ वर्षीय सन्सार सिटौला और ललितपुर गोदावरी नगरपालिका–११ निवासी २६ वर्षीय सुवास शाही शामिल हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो कोटेश्वर से तैनात पुलिस ने इन्हें उक्त हथियार और प्रतिबंधित दवाओं के साथ गिरफ्तार किया है। इस संबंध में पुलिस आवश्यक जांच कर रही है।

आख्यानकार शरण राई को भोजपुर प्रतिभा सम्मान और तेजेन्द्र गन्धर्व को प्रतिभा पुरस्कार प्रदान

भोजपुर प्रतिभा प्रतिष्ठान, बेलायत ने आख्यानकार शरण राई को भोजपुर प्रतिभा सम्मान और लोक गायक तेजेन्द्र गन्धर्व को प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित किया है। धरान स्थित कवि विमल गुरुङ स्मृति पुस्तकालय में आयोजित समारोह में राई को नगद १५ हजार और गन्धर्व को नगद ३५ हजार रुपये समेत ताम्रपत्र एवं दोसल्ला प्रदान किए गए।

समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार बम देवान तथा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष काङ्माङ नरेश ने राई और गन्धर्व को सम्मान पत्र प्रदान किए। १८ वैशाख को सुनसरी में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान, राई के आधा दर्जन आख्यान एवं लघुकथा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जबकि सारङ्गीवादक गन्धर्व के तीन दर्जन से अधिक लोक भाका गीत रिकॉर्ड हो चुके हैं।