२७ जेठ, काठमाडौँ। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से सटी सीमा क्षेत्र में विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमला किया है। इस सैन्य कार्रवाई में कम से कम २६ विद्रोही मारे गए हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बुधवार को इस घटना की पुष्टि करते हुए आधिकारिक जानकारी दी थी। तालिबान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के तीन प्रांतों में ये हवाई हमले किए हैं। इस हमले में ११ बच्चों सहित १३ आम नागरिकों की भी मौत हुई है, तालिबान ने यह दावा किया है।
२७ जेठ, काठमाडौं। स्टार खिलाड़ी एरिका गुरुङ सहित ८ कराते खिलाड़ी सितंबर-अक्टूबर २०२३ में जापान के आइची-नागोया में आयोजित हो रहे २०वें एशियाई खेलों के लिए चयनित किए गए हैं। नेपाल कराते महासंघ द्वारा आयोजित चयन प्रतियोगिता से ये ८ खिलाड़ी चुने गए हैं। एरिका, जिन्होंने चीन में सम्पन्न १९वें एशियाई खेलों में ऐतिहासिक रजत पदक जीता था, इस बार दूसरी बार एशियाई खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगी। वह कराते खेल में एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली पहली नेपाली खिलाड़ी हैं। हाल ही में उन्होंने विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लेकर पदक जीत कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। एरिका कराते वन प्रीमियर लीग में दो रजत पदक जीत चुकी हैं।
एरिका के अलावा, १९वें एशियाई खेलों में खेल चुके निरूपमा दोङ तामाङ और काता खिलाड़ी स्वनिम मानन्धर भी २०वें संस्करण के लिए चयनित हुए हैं। महिला कुमिते ६८ किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में एरिका प्रतिस्पर्धा करेंगी। वहीं ५० किलोग्राम भार वर्ग में पुष्पका लामा तथा ६८ किलोग्राम से कम वर्ग में निरूपमा दोङ तामाङ को चयन मिला है। पुरुष वर्ग में ५५ किलोग्राम में राकेश मानन्धर, ६० किलोग्राम में मीन बहादुर तामाङ और ८४ किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में तेन्जिङ शेर्पा चयनित हुए हैं। काता में पुरुष वर्ग के लिए स्वनिम मानन्धर और महिला वर्ग के लिए सानुमाया थिङ तामाङ चयनित हुए हैं। कराते टीम के प्रशिक्षक कुशल श्रेष्ठ और मन्डेकाजी श्रेष्ठ होंगे।
२७ जेठ, काठमाडौं । नेपाली महिला क्रिकेट टीम एसिया कप क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए चयनित नहीं हो सकी है। कुछ दिन पहले सम्पन्न एशियन गेम्स चयन में भी असफल रहने वाली यह टीम इस बार भी एसिया कप में जगह बनाने में नाकाम रही। मलेशिया में चल रहे एसीसी महिला प्रीमियर कप के क्वार्टरफाइनल में थाईलैंड से हार के बाद नेपाल एसिया कप चयन से बाहर हो गया।
बुधवार सुबह हुए क्वार्टरफाइनल मैच में नेपाल ५६ रनों से थाईलैंड के हाथों पराजित हुआ। थाईलैंड द्वारा दिए गए १३१ रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नेपाल २० ओवर में ७ विकेट खोकर मात्र ७४ रन ही बना सका। नेपाल के लिए रुबिना क्षेत्री ने सर्वाधिक २० रनों की अविजित पारी खेली। सोनी पाख्रिन ने १५, सीता रानामगर ने १२ और सम्झना खड़का ने ११ रन बनाए। अन्य बल्लेबाज दोहरे अंक तक नहीं पहुँच सके।
थाईलैंड की थिपात्चा पुथावङ ने ४ ओवर में ७ रन खर्च कर २ विकेट लिए, जबकि सुनिदा चतुरोङरतना और सुलिपर्न लाओमी ने समान रूप से २-२ विकेट लिए। फनिता माया ने भी १ विकेट लिया। पहले बल्लेबाजी करने वाली थाईलैंड ने २० ओवर में ४ विकेट खोकर १३० रन बनाए। थाईलैंड की नानापत कोन्चारोन्काइ ने अर्धशतक लगाते हुए ५१ गेंदों पर अविजित ६३ रन बनाए। फनिता माया ने २६ और चनिदा सुथिराङ ने १६ रन जोड़े। नेपाल के कविता कुँवर, रिया शर्मा और रुबिना क्षेत्री ने समान रूप से १-१ विकेट लिए।
नेपाली महिला टीम पिछले सप्ताह सम्पन्न हुए एशियन गेम्स चयन के निर्णायक मैच में चीन से पराजित होकर एशियन गेम्स के लिए चयनित नहीं हो पाई थी।
झापा के दमक नगरपालिका के वार्ड ९ और १० की सीमा क्षेत्र में स्थित जीर्ण सड़क की स्तरोन्नति न हो पाने के कारण स्थानीय लोगों ने सड़क पर धान रोपकर विरोध प्रदर्शन किया है। वर्षों से कीचड़, पानी और गड्ढों से भरी इस सड़क पर स्थानीय महिलाएं, पुरुष और किसान धान के बेर्ना लेकर स्थलीय रूप से प्रदर्शन में शामिल थे। उन्होंने सड़क को खेत का प्रतीक बनाकर धान रोपकर संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया है। सड़क निर्माण के लिए बार-बार आवाज उठाने के बावजूद किसी भी विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण स्थानीय लोग मजबूर होकर सांकेतिक विरोध में उतरने को विवश हुए हैं। बरसात शुरू होने के साथ ही सड़क की हालत कीचड़ भरी हो गई है और आम जनता के लिए आवागमन भी कठिन हो गया है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल किसान नगेंद्रमणि न्यौपाने ने जनप्रतिनिधियों पर चुनाव के समय ही जनता के घर पहुंचने और निर्वाचित होने के बाद समस्याओं को भूल जाने का आरोप लगाया। ‘हमने कई बार इस सड़क को बनाने की मांग की है’, उन्होंने कहा, ‘वार्ड, नगरपालिका, प्रदेश और संघीय सरकार के प्रतिनिधियों को भी बताया, लेकिन वर्षों बीतने के बावजूद सड़क की स्थिति वैसी ही बनी हुई है।’ न्यौपाने ने बताया कि सड़क अब खेत और सड़क के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया है, और इसी कारण विरोध स्वरूप धान रोपना पड़ा। ‘बीमारों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो गया है, बच्चे कीचड़ में गिरकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। विकास के कई भाषण सुने, लेकिन व्यवहार में केवल कीचड़ और धूल ही मिली है,’ उन्होंने आगे कहा।
सड़क की समस्या नई नहीं है और वर्षों से स्थानीय लोग इस कष्ट को झेल रहे हैं, ऐसा सुरेश धिमाल ने बताया। ‘बरसात में कीचड़ और सर्दियों में धूल होती है। सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि कई बार मोटरसाइकिल भी नहीं चल पाती,’ धिमाल ने कहा। उन्होंने बताया कि बच्चे स्कूल जाते हुए गिर जाते हैं, बुजुर्ग चल नहीं पाते। ‘हमें यह नहीं पता कि सड़क बनवाएगा कौन, लेकिन सड़क बननी चाहिए,’ उन्होंने स्पष्ट किया। स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तो एक-दूसरे पर डाल दी जाती है, यह उनकी शिकायत भी है।
सड़क की वजह से स्थानीय लोगों की दिनचर्या बहुत कठिन हो गई है, यह पदम भंडारी ने बताया। ‘हम वर्षों से इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। बरसात में घर से निकलना डरावना हो जाता है,’ उन्होंने कहा, ‘अगर कोई बीमार हो जाए तो एम्बुलेंस भी नहीं आ पाती, बच्चे कीचड़ में गिरते हुए स्कूल जाते हैं।’ जनता की सहनशीलता की परीक्षा बहुत हो चुकी है, यह केदार खतिवड़ा का बयान है। ‘यह सड़क समस्या एक-दो साल की नहीं है। बार-बार आश्वासन मिले लेकिन कोई काम नहीं हुआ,’ खतिवड़ा ने कहा, ‘हम जब कर देते हैं तो हम नागरिक होते हैं, सुविधा मिलने पर कोई याद नहीं करता।’
जनप्रतिनिधियों को जनता की पीड़ा समझनी चाहिए, यह भेषराज थापा का कहना है। उनके अनुसार, ‘चलने लायक सड़क हमारी सरल मांग है। आज सड़क पर धान रोपना हमारा आक्रोश मात्र नहीं, बल्कि राज्य के प्रति गंभीर प्रश्न भी है। आखिर कब तक जनता इसी तरह कष्ट झेलेगी?’ उन्होंने सवाल उठाया। स्थानीय निवासी सड़क की स्तरोन्नति और काला पट्टे के कार्य को तत्काल शुरू नहीं करने पर और अधिक सशक्त आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
२७ जेठ, काठमाडौं । नेपाली कांग्रेस ने बुधवार शाम तक चार लाख ५७ हजार ३६६ लोगों ने क्रियाशील सदस्यता अपडेट कर एनसीआईडी प्राप्त करने की जानकारी दी है। कांग्रेस महामन्त्री तथा सदस्यता व्यवस्थापन समितिका संयोजक प्रदीप पौडेल ने बुधवार शाम प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी साझा की। ‘नेपाली कांग्रेस की क्रियाशील सदस्यता अपडेट करने के योग्य कुल ७ लाख ८२ हजार २०९ सदस्यों में से आज की तिथि तक ४ लाख ५७ हजार ३ सय ६६ लोगों ने एनसीआईडी प्राप्त कर चुके हैं,’ विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘एक लाख २४ हजार ७४८ लोगों ने स्वयं अपडेट फॉर्म जमा कर अपडेट प्रक्रिया में हैं।’ जो लोग छूटे हैं, उन्हें कांग्रेस महामन्त्री पौडेल ने निर्धारित सीमा में क्रियाशील सदस्यता अपडेट करने का आह्वान किया है। उन्होंने विज्ञप्ति में सदस्यता अपडेट के लिए केवल एक दिन बचा होने और यह प्रक्रिया बिहीवार रात १२ बजे तक सीमित रहने का भी उल्लेख किया है।
स्पेन के मिडफील्डर पेड्री के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने स्पेन को फीफा विश्व कप 2026 के मुख्य दावेदारों में स्थापित किया है। वर्ष 2020 में बार्सिलोना क्लब से डेब्यू करने वाले पेड्री ने यूरो 2020 और कतर विश्व कप 2022 में स्पेन के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्पेन के कोच लुइस डे ला फुंते ने पेड्री को मैदान पर संतुलन और खेल के प्रवाह देने वाले एक पूर्ण खिलाड़ी के रूप में वर्णित किया है। 26 जेठ, काठमांडू। स्पेन फुटबॉल टीम के आक्रमण का नेतृत्व करने वाले पेड्री के प्रभावशाली प्रदर्शन ने ‘ला रोजा’ अर्थात् स्पेन के लिए आगामी विश्व कप से पहले आत्मविश्वासी टीम बनाई है। 23 वर्ष की उम्र में पेड्री ने बार्सिलोना और स्पेन के लिए उल्लेखनीय अनुभव इकट्ठा किया है। उन्होंने बार्सिलोना के लिए लगभग 250 और स्पेन के लिए 40 मैच खेले हैं, जिनमें से 31 मैच उन्होंने शुरुआती टीम से खेले हैं। पर उनकी अहमियत केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। पेड्री की असली जादू मैदान पर दिखाई देती है। तकनीकी रूप से निपुण खिलाड़ी, कैनेरी द्वीप से आए पेड्री ने स्पेन के पूर्व महान मिडफील्डर डेविड सिल्वा और जुआन कार्लोस वलेरोन की परंपरा को जारी रखा है। दूसरे डिवीजन क्लब लास पाल्मास से अपनी प्रतिभा दिखाने वाले उन्होंने बड़े मंच पर अपनी योग्यता प्रस्तुत की है। 27 सितंबर 2020 को बार्सिलोना के माध्यम से डेब्यू करने के लगभग छह साल बाद भी वे क्लब की प्रसिद्ध ‘टिकी-टाका’ शैली का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। उच्च डिवीजन में पहले सीज़न के बाद उन्होंने यूरो 2020 में शानदार प्रदर्शन कर स्पेन को सेमीफाइनल तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके बाद 18 महीनों में कतर विश्व कप 2022 में भी वे टीम के मुख्य खिलाड़ी थे। उन्होंने चारों मैचों में शुरुआत करते हुए अंतिम 16 में मोरक्को से पेनाल्टी शूटआउट में हारते हुए स्पेन की यात्रा समाप्त हुई। वर्ष 2024 में चोट के कारण कुछ समस्याएँ आईं, फिर भी उन्होंने स्पेन को यूरोपीय चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। यदि पेड्री अपनी लय बनाए रखते हैं तो स्पेन 19 जुलाई को न्यूयॉर्क–न्यू जर्सी स्टेडियम में आयोजित होने वाले विश्व कप फाइनल तक पहुँचने का मजबूत दावेदार होगा। स्पेन के कोच लुइस डे ला फुंते ने पेड्री को ‘‘पूर्ण खिलाड़ी’’ (कंप्लीट प्लेयर) कहा है। ‘पेड्री पूर्ण खिलाड़ी हैं और अत्यधिक पेशेवर हैं। जब वे गलती करते हैं तो वह बड़ी खबर होती है, क्योंकि वे अधिकांश समय सब कुछ सही करते हैं,’ उन्होंने कहा, ‘उनके खेल में शांति, संतुलन और प्रवाह है। वे अपने साथी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने की क्षमता रखते हैं। वे खास खिलाड़ी हैं।’ इसी प्रकार, स्पेन के दिग्गज एंड्रेस इनियेस्टा ने पेड्री को असाधारण खिलाड़ी बताया है। ‘वे विशेष रूप से इतने कम उम्र में असाधारण खिलाड़ी हैं। उनका खेल स्वाभाविक है और वे ज्यादा सोचते नहीं, बस खेलते हैं। मैदान पर उनका उत्साह और खेल के प्रति प्यार दिखता है। मुझे विश्वास है कि वे बार्सिलोना और स्पेन दोनों के प्रमुख खिलाड़ी बनेंगे,’ इनियेस्टा ने कहा। पेड्री ने 18 अगस्त 2019 को 16 वर्ष की उम्र में लास पाल्मास से प्रोफेशनल फुटबॉल में डेब्यू किया था। एक महीने बाद 19 सितम्बर को उन्होंने अपना पहला सीनियर गोल कर क्लब इतिहास के सबसे युवा गोलकर्ता बने। 27 सितंबर 2020 को बार्सिलोना के माध्यम से ला लीगा में डेब्यू किया और एक महीने के भीतर ही पहली बार शुरुआती टीम में स्थान बनाया। 20 अक्टूबर 2020 को हंगरी के फेरेनकवारोस के खिलाफ 5–1 की जीत में उन्होंने यूईएफए चैंपियंस लीग में डेब्यू करते हुए बार्सिलोना के लिए पहला गोल किया। उस समय टीम के कोच रोनाल्ड कोमैन थे। उन्होंने फीफा यू-17 विश्व कप 2019 में स्पेन की युवा टीम का प्रतिनिधित्व किया और क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे। यूरो 2020 में पेड्री 18 वर्ष, 6 महीने और 18 दिनों की उम्र में स्वीडन के खिलाफ खेलकर स्पेन के लिए यूरोपीय चैम्पियनशिप या विश्व कप में खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। कतर विश्व कप 2022 में भी वे मुख्य खिलाड़ी थे। चार वर्षों बाद, लुइस डे ला फुंते के नेतृत्व में भी पेड्री स्पेन की योजनाओं के केंद्र में हैं। विश्व फुटबॉल का सर्वोच्च उपाधि जीतने के अभियान में वे फिर से टीम के प्रमुख खिलाड़ी होंगे। स्पेन की सफल टीमें हमेशा एक मजबूत मिडफील्ड के इर्द-गिर्द बनती हैं। जावि, इनियेस्टा, जावी अलोंसो और सेस्क फाब्रेगास की पीढ़ी ने वह परंपरा बनाई है, और आज यह जिम्मेदारी रोड्रिगो, पेड्री, फाबियन रुइज, मिकेल मेरिनो और मार्टिन जुबिमेन्डी के कंधों पर है। लामिन यमाल की अप्रत्याशित प्रतिभा के जुड़ने से स्पेन फीफा विश्व कप 2026 के प्रमुख दावेदारों में एक माना जाता है।
२७ जेठ, काठमांडू। नेपाल राहत शिक्षक केंद्रीय समिति ने शिक्षामंत्री सस्मित पोखरेल को ६ बिंदुओं वाला मांग पत्र सौंपा है। राहत शिक्षक केंद्रीय समिति के अध्यक्ष नवीनसिंह धामी ने बुधवार को एक पत्र के माध्यम से शिक्षामंत्री पोखरेल को ये मांगें प्रस्तुत की हैं। ‘राहत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की सुनिश्चितता तथा न्यायोचित प्रबंधन संबंधी’ शीर्षक वाले पत्र में उल्लेख है कि २०६० साल से नेपाल के सामुदायिक विद्यालयों में राहत अनुदान कोटे के तहत कार्यरत राहत शिक्षक लगातार सेवा दे रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि राज्य की नीतियों और कार्यक्रमों ने राहत शिक्षकों को विद्यालय शिक्षा का अविभाज्य अंग मान्यता दी है।
फिर भी, लंबे समय से कार्यरत राहत शिक्षकों को प्रत्येक छह माह में मियाद वृद्धि या नवीनीकरण प्रक्रिया में अनावश्यक भय, असुरक्षा और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है। मांगें इस प्रकार हैं: १. राहत शिक्षकों को शिक्षा नियमावली के नियम ९७ (८) के तहत सामान्य संविदा शिक्षक समान व्याख्या कर बार-बार मियाद वृद्धि या नवीनीकरण प्रक्रिया में न रखा जाए। २. २०६० से सामुदायिक विद्यालयों में लगातार कार्यरत राहत शिक्षकों की विशेषता, अनुभव और योगदान को सम्मानित करते हुए सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ३. राहत शिक्षक प्रबंधन विषय को स्थानीय सरकारों की विभिन्न व्याख्याओं में न छोड़ा जाए, नेपाल सरकार एकरूप नीतिगत स्पष्टता प्रदान करे। ४. राहत शिक्षकों के हित, पेशागत प्रतिष्ठा तथा न्यायोचित प्रबंधन विधि, प्रक्रिया और कानूनी आधार पर किया जाए। ५. विद्यालय शिक्षा से जुड़े नए कानून निर्माण के दौरान राहत शिक्षकों का दीर्घकालीन, सम्मानजनक और न्यायपूर्ण प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। ६. राहत शिक्षकों में असुरक्षा, अन्योल और भय पैदा करने वाले निर्णय तथा निर्देश तत्काल रोके जाने के लिए संबंधित निकायों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
२७ जेठ, काठमाडौं। बर्दियास्थित टाइगर ट्र्याक इकोलजले विश्वप्रसिद्ध वास्तुकला पुरस्कार ‘आर्किटाइजर ए+ अवार्ड २०२६’ प्राप्त किया है। इस प्रतियोगिता में टाइगर ट्र्याक इकोलज ने ‘सस्टेनेबल हॉस्पिटैलिटी बिल्डिंग’ श्रेणी में ‘पॉपुलर च्वाइस विनर’ के रूप में विजेता बनने में सफलता हासिल की है। गैर-लाभकारी संस्था बिल्डिंग ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन की गई यह सतत पर्यटन संरचना स्थानीय थारू वास्तुकला, पर्यावरणहितैषी सामग्री और सामुदायिक कल्याण को महत्व देते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित करने में सक्षम हुई है।
सन २०२६ में निर्माण पूरा हुए इस लॉज का स्थान बर्दिया राष्ट्रीय निकुञ्ज और भारत के कतर्नियाघाटा वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ने वाले खाता कॉरिडोर के निकट है। लगभग ४ हजार २५० वर्ग फुट क्षेत्र में फैला यह लॉज पारंपरिक थारू शैली से प्रेरित है। इसमें आधुनिक कंक्रीट की जगह रैम्ड अर्थ (मिट्टी की दीवार), भूकंप-प्रतिरोधी स्टील रिबार संरचना और पुराने घरों से संग्रहित टेराकोटा टाइलों का उपयोग किया गया है।
सन १९७० के दशक में निकुञ्ज स्थापना के दौरान विस्थापित हुए थारू समुदाय वर्तमान में बफर ज़ोन में रह रहे हैं। इस क्षेत्र की लगभग एक लाख जनसंख्या वन्यजीवों और वनस्पतियों पर निर्भर है। इसी पृष्ठभूमि में वन्यजीव संघर्ष को कम करने और स्थानीय समुदाय की आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से टाइगर ट्र्याक इकोलज की स्थापना की गई है।
वन्यजीव हमले में अपने पिता को खो चुके हेमन्त आचार्य की पहल पर यह परियोजना आगे बढ़ी है। सामाजिक योगदान के तहत लॉज की आय का एक हिस्सा अकेली महिलाओं के वन्यजीव पीड़ित कोष में जमा किया जाता है, जो वन्यजीव हमले से परिवार खो चुकी महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमशीलता में आर्थिक सहायता प्रदान करता है। यह परियोजना समुदाय-आधारित एंटी-पोचिंग यूनिट (सीबीएपीयू) को भी वित्तीय समर्थन देती है। वर्तमान में इस यूनिट में ११९ गांवों से ३,३३६ युवा स्वयंसेवक सक्रिय हैं, जिनमें से ५५ प्रतिशत महिलाएं और ४५ प्रतिशत पुरुष हैं।
यह लॉज सतत वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें पर्यटक आवास, सामुदायिक केंद्र, कार्यालय, रिसेप्शन, भोजन कक्ष और कर्मचारी आवास की सुविधाएं उपलब्ध हैं। कम ऊर्जा खपत, स्थानीय सामग्रियों और जलवायु उपयुक्त डिज़ाइन के कारण इसे सतत वास्तुकला का एक प्रमुख मॉडल माना जाता है। टाइगर ट्र्याक इकोलज ने नेपाली पारंपरिक कौशल को वैश्विक मंच पर पेश करने, सतत पर्यटन को प्रोत्साहित करने, जैव विविधता संरक्षण करने और स्थानीय जीवन स्तर को ऊँचा उठाने की नई मिसाल स्थापित की है।
२७ जेठ, काठमांडू। फुटबॉल का महाकुंभ फिर आने वाला है। ११ जून से मेक्सिको के एस्टाडियो आज्टेका में शुरू होने वाला २०२६ फीफा विश्व कप विश्व के अरबों दर्शकों को एक जगह पर एकत्रित करेगा। इस बार का विश्व कप इतिहास में पहली बार तीन राष्ट्र—संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको—संयुक्त रूप से आयोजित कर रहे हैं। इस फुटबॉल महाकुंभ के केंद्र में हैं परिचित चेहरे, कोलंबियाई गायिका शकिरा। उन्होंने १६ साल पहले ‘वाका वाका (दिस टाइम फॉर अफ्रीका)’ गीत के माध्यम से पूरी दुनिया में पहचान बनाई थी। अब २०२६ में वह फिर से विश्व मंच पर खड़ी हैं और नाइजीरियाई सुपरस्टार बरना बॉय के साथ मिलकर नया गीत ‘दाइ-दाइ’ गा रही हैं।
साल २०१० का विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होने वाला था। फीफा को ऐसी गीत की आवश्यकता थी जो विश्व के सभी कोनों के दर्शकों को एक धागे में पिरो सके। उस समय शकिरा दक्षिण अफ्रीका से दूर उरुग्वे में स्थित अपने फार्म पर छुट्टियां मना रही थीं। फार्म से घर लौटते हुए उन्हें एक नया संगीत धुन का विचार आया और उन्होंने अंग्रेज़ी शब्दों के साथ उस धुन को गुनगुनाना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने सोनी म्यूजिक को फोन किया और उत्साहित होकर कहा, ‘मैंने अब तक का सबसे अद्भुत विश्व कप गीत लिखा है।’
‘वाका वाका’ की सफलता के बावजूद एक विवाद भी था। दक्षिण अफ्रीका विश्व कप के आयोजन के दौरान अफ्रीकी कलाकारों के बजाय एक कोलंबियाई गायिका को आधिकारिक गीत के लिए चुना जाना कई दक्षिण अफ्रीकियों के लिए असंतोष का कारण बना। पर मजेदार बात यह है कि फ्रेशलीग्राउंड को इस बात पर कोई अपमान महसूस नहीं हुआ। बरना बॉय को सह-कलाकार के रूप में शामिल करना एक जागरूक और रणनीतिक निर्णय प्रतीत होता है। फीफा पहली बार विश्व कप फाइनल में हाफटाइम शो का आयोजन कर रहा है और इसके लिए विश्व के तीन बड़े पॉप कलाकारों का चयन किया है।
पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 7 असोज (सितंबर-अक्टूबर) से फ्लाई दुबई की दैनिक नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने से यह पर्यटन शहर विश्व से सीधे और व्यापक रूप से जुड़ने लगेगा।
“फ्लाई दुबई दुबई को ट्रांजिट हब बनाकर विश्व के 300 से अधिक गंतव्यों के लिए उड़ान भरने जा रही है, और ये गंतव्य यूरोप, अमेरिका, कनाडा सहित हर जगह फैले हैं, इसलिए इसका विशेष महत्व है,” पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के महानिदेशक जगन्नाथ निरौल ने बताया।
पहले हिमालय एयरलाइंस सप्ताह में एक दिन पोखरा-ल्हासा उड़ान संचालित करता था, लेकिन वह लंबे समय तक निरंतर नहीं रह सका। अन्य समय में पोखरा से कुछ सीमित अंतरराष्ट्रीय चार्टर्ड उड़ानें ही संचालित होती थीं।
चीन के चेन्ज़ू से सिचुआन एयरलाइंस कई चार्टर्ड उड़ानें चलाती थी। इसी तरह भूटान से भी ऐसी उड़ानें होती थीं।
देश की ‘पर्यटन राजधानी’ के रूप में मानी जाने वाली पोखरा में २०७९ पुष (जनवरी 2023) में उद्घाटित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लंबे समय तक कोई नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान नहीं होने के कारण कई हितधारकों और स्थानीय व्यवसायियों ने निराशा जताई है।
पोखरा की तरह ही भैरहवा के गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कुछ एयरलाइंस ने पहले नियमित उड़ानें संचालित की थीं, लेकिन अब वह उड़ानें नहीं चल रही हैं।
पिछले समय में दोनों हवाई अड्डों से संचालित उड़ानों में ‘यात्रियों की कमी’ मुख्य समस्या रही है, यह विमान कंपनियों के अधिकारियों ने बताया है।
पोखरा क्या फर्क लाएगा?
पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चीन के एक्जिम बैंक से 21.5965 करोड़ अमेरिकी डॉलर ऋण लेकर बनाया गया है।
लेकिन इससे होने वाली आय न होने के कारण ऋण किस्त चुकाने में कठिनाई आ रही है और ब्याज तथा प्रतिबद्धता शुल्क का भुगतान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, विमानन अधिकारी बताते हैं।
महानिदेशक निरौल के अनुसार, नियमित उड़ानें पोखरा और आसपास के क्षेत्र को गंतव्य मानकर आने वाले पर्यटकों के खर्च और समय दोनों की बचत करेंगी।
“पहले हिमालय एयरलाइंस सप्ताह में एक बार उड़ान करता था, लेकिन ल्हासा रूट पर यात्री संख्या बहुत कम थी। अधिकतम यात्री होने पर भी वह आधी क्षमता भर पाता था,” उन्होंने कहा।
“हिमालय ने लगभग एक साल तक उड़ान चलाते हुए 130 सीटों में से अधिकतम 65 यात्री ही भर पाता था। अब ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण उड़ान बंद है।”
सरकार पोखरा और भैरहवा के हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दे रही है।
तस्बिर स्रोत, Reuters
तस्बिर की शीर्षक, सितंबर से फ्लाई दुबई पोखरा में नियमित उड़ानों की तैयारी में है
अंतरराष्ट्रीय हवाई पार्किंग, लैंडिंग एवं नेविगेशन शुल्क में पूरी छूट और ईंधन की कीमतों पर विशेष छूट देने की घोषणा भी पहले ही कर दी गई है।
“लेकिन फ्लाई दुबई की संभावना उस चीनी शहर में चल रही उड़ान से अधिक है,” निरौल ने कहा।
इसी बीच, कोई भारतीय एयरलाइन अभी तक पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान नहीं भरती। हालांकि हाल ही में वहां से भारत के लिए एक मेडिकल आपातकालीन उड़ान हुई है।
नेपाल की निजी एयर सेवा कंपनी बुद्ध एयर पोखरा से भारत के विभिन्न शहरों में नियमित उड़ान चलाने की इच्छा रखती है, लेकिन अभी इस दिशा में कोई कार्यान्वयन नहीं हुआ है।
भारतीय पर्यटकों की संख्या पोखरा और मुक्तिनाथ क्षेत्रों में अधिक होने के कारण यहां से उड़ानों के शुरू होने की संभावना अधिक मानी जा रही है। निरौल ने कहा, “यदि भारत के शहरों से पोखरा का सीधा संपर्क होता है, तो इस हवाई अड्डे की क्षमता भी जल्दी भर सकती है।”
भैरहवा में फिर से शून्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानें
पहले फ्लाई दुबई भैरहवा से भी उड़ान लेकर जाता था, लेकिन अब वे उड़ानें चल नहीं रही हैं।
भैरहवा हवाई अड्डे से यूएई की फ्लाई दुबई, कुवैत की जजीरा एयरवेज, थाईलैंड की थाई एयर एशिया और कतर एयरवेज ने उड़ानें भरती थीं।
सबसे लंबे समय तक थाई एयर एशिया ने वहां सर्दियों के मौसम में उड़ान भरी थी, जो गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के महाप्रबंधक श्याम किशोर साह के अनुसार था।
“हम आशा करते हैं कि यह उड़ान आगामी सर्दियों में निरंतरता पायेगी, मगर फिलहाल ईंधन की अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण कई उड़ानें काठमांडू से रद्द हो रही हैं,” उन्होंने बताया।
“अभी अन्य कोई एयरलाइन हमसे संपर्क में नहीं है।”
पहले भैरहवा में उड़ानें होती थीं, लेकिन फ्लाई दुबई और कतर एयरवेज ने स्वेच्छा से वहां उड़ान शुरू करने का निर्णय नहीं लिया था।
त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रखरखाव के दौरान संचालन अवधि सीमित रहने के कारण कई उड़ानें भैरहवा हवाई अड्डे को मोड़ी गई थीं, लेकिन कनेक्ट करने की जरूरत होने के कारण वे लंबे समय तक वहां नहीं रुक सकीं।
तस्बिर स्रोत, Bhairahawa Immigration Office
तस्बिर की शीर्षक, गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
कतर एयरवेज ने एक माह से भी ज्यादा वहां उड़ानें निरंतर नहीं चलाईं।
“थाई एयर एशिया का व्यवसाय अपेक्षाकृत अच्छा नहीं रहा। इसका एक मार्ग बैंकॉक से बिहारी गए यात्रियों के लिए था, जो बौद्ध सर्किट होते हुए लुम्बिनी जाने वाले पर्यटकों को सेवा देता था। कोरिया से लौटने वाले यात्री भी इसमें जुड़े थे, लेकिन नेपाल से सीधे आने वाले यात्रियों की संख्या कम थी,” महानिदेशक साह ने बताया।
“भैरहवा जाने वाली उड़ानें सप्ताह में दो-चार दिन होती थीं और प्रत्येक उड़ान में सामान्यतया 100 से अधिक यात्री होते थे, जबकि विमान की क्षमता लगभग 180 सीटों की थी और अधिकांश उड़ानों में 50 से कम यात्रियों की सवारी होती थी,” साह ने जोड़ा।
नेपाल एयरलाइंस और हिमालय एयरलाइंस ने काठमांडू से पर्याप्त यात्रियों के कारण भैरहवा के लिए ज्यादा ध्यान नहीं दिया, अधिकारी बताते हैं।
“अंतरराष्ट्रीय उड़ानें काठमांडू से बड़े ट्रैवल एजेंसियों द्वारा नियंत्रित होती हैं, जो राजधानी से बाहर नया बाजार बनाने के विचार में नहीं हैं, अन्यथा सुविधाओं के लिहाज से भैरहवा काठमांडू से बेहतर है,” महानिदेशक साह ने कहा।
“यहां करीब 15-20 मिनट का समय बचता है, जो काठमांडू की तुलना में ज्यादा है। सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप दिए गए छूट से छोटे विमान का उतरना कम से कम 10 लाख रुपये की बचत कराता है।”
महानिदेशक श्याम किशोर साह ने बताया कि भैरहवा में भारत के विभिन्न शहरों से नियमित चार्टर्ड उड़ानें हो रही हैं और बाकी मुद्दे सुलझने पर तकनीकी रूप से कोई बाधा नहीं होगी।
“असल में भैरहवा और पोखरा के लिए स्थायी उड़ानें वही होंगी जो भारत से आएंगी,” वे कहते हैं।
२७ जेठ, काठमाडौं। सुशील केडियाको नेतृत्व में विश्व भारती विद्यालय (डीएवी) ने लगातार दूसरी बार एशियन ई-लर्निंग के “जयकुमारनाथ शाह स्मृति” इंटरस्कूल यू-१६ क्रिकेट प्रतियोगिता का खिताब जीता है। मुलपानी क्रिकेट मैदान पर वर्षा से प्रभावित फाइनल मैच में डीएवी ने नेपाल पुलिस स्कूल को डीएलएस पद्धति से ७ विकेट से हराकर उपाधि हासिल की। उपाधि के साथ ही डीएवी ने १ लाख ५० हजार रुपये नकद पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि उपविजेता नेपाल पुलिस स्कूल को ७५ हजार रुपये का पुरस्कार मिला।
डीएवी ने इस प्रतियोगिता के दूसरे संस्करण में भी खिताब जीता था। पुलिस स्कूल द्वारा निर्धारित १०२ रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए डीएवी ने ४.१ ओवर में २ विकेट खोते हुए १७ रन बनाए थे, तब वर्षा के कारण खेल रोक दिया गया। बाद में बुधवार को खेल को १२ ओवरों में सीमित कर डीएलएस विधि के अनुसार डीएवी को ७० रन का लक्ष्य दिया गया। डीएवी ने १०.५ ओवर में ३ विकेट खोकर यह लक्ष्य पूरा किया और लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने में सफल रहा।
डीएवी की जीत में आरुष झा ने ३० गेंदों में ३ चौकों की मदद से नाबाद २६ रन बनाए। विराट जैसवाल ने २३ गेंदों में २२ रन जोड़े, जबकि प्रसिद्ध जैशी ने ६ रन बनाए। सत्यम बस्नेत २ रन पर आउट हुए और कमल शाही ३ रन पर नाबाद रहे। कमल शाही को ‘पिक पॉइंट प्लेयर ऑफ द मैच’ घोषित किया गया। पुलिस स्कूल के प्रियांशु किशोर राउत और सुनिल ठाकुर ने एक-एक विकेट लिया। पिछले दिन मंगलवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नेपाल पुलिस स्कूल ने निर्धारित २० ओवर में ८ विकेट खोकर १०१ रन बनाए थे।
पुलिस के मोहम्मद अब्बास साफी ने नाबाद ३३ रन बनाए जबकि श्याम बाबू ठाकुर ने १२ और आशुतोष मिश्र ने १० रन का योगदान दिया। डीएवी के कमल शाही ने ४ ओवर में मात्र ११ रन खर्च कर ४ विकेट लिए। कुञ्जन आचार्य और प्रसिद्ध जैशी ने समान रूप से २-२ विकेट हासिल किए। काठमांडू जिला क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता १९ जेठ से शुरू हुई थी जिसमें कुल २४ टीमों ने हिस्सा लिया था।
प्रतियोगिता के उभरते खिलाड़ी जेम्स स्कूल के स्वराज चौलागाईं घोषित किए गए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में १०३ रन बनाए और १२ विकेट लिए। उन्हें नगद ५ हजार रुपये और ‘लकर रूम’ की ओर से विशेष उपहार दिया गया। सैनिक आवासीय महाविद्यालय के राजदीप आचार्य को उत्कृष्ट बल्लेबाज चुना गया, जिन्होंने ४ मैचों में २३९ रन बनाए। उन्हें नगद ५ हजार रुपये, ‘लकर रूम’ की ओर से बल्ला, और ‘डार्क फैंटेसी’ की ओर से विशेष उपहार दिए गए।
डीएवी के कुञ्जन आचार्य को १३ विकेट के साथ उत्कृष्ट गेंदबाज घोषित किया गया। सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी डीएवी के प्रसिद्ध जैशी चुने गए, जिन्होंने २७३ रन और ७ विकेट लेकर टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें नगद १० हजार रुपये और ‘लकर रूम’ की ओर से क्रिकेट किट बैग दिया गया। विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भी आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए गए। समापन समारोह में मुख्य प्रायोजक एशियन ई-लर्निंग प्रा. लि. की निदेशक मीना लिम्बू त्रिपाठी मुख्य अतिथि थीं। नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) के सचिव पारस खड्का विशेष अतिथि थे, साथ ही ई-सेवा के ब्रांड ऑफिसर बिमोम डांगोल समेत अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। समारोह की अध्यक्षता काठमांडू जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष दिवाकर घले ने की।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि त्रिपाठी ने सफल आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि भविष्य में प्रायोजन जारी रहेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागी टीमों, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों को बधाई और धन्यवाद दिया। काठमांडू जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष दिवाकर घले ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले मुख्य प्रायोजक, सहयोजक संस्थाओं, अधिकारियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्यालय स्तर पर क्रिकेट विकास के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिताओं को आगे भी जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
२७ जेठ, काठमाडौं । व्यक्ति हत्या तथा डाँका संबंधित संघीय मामलों के फरार अभियुक्त गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तार किये गए में काभ्रे जिले के पाँचखाल नगरपालिका–४ के ३९ वर्षीय कृष्ण मगर शामिल हैं। उन्हें काठमाडौं उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम ने गिरफ्तार किया है।
कृष्ण मगर जेनजी आन्दोलन के दौरान केन्द्रीय कारागार सुन्धारा से फरार हुए थे। उन पर २०७८ असोज ६ को सिन्धुपाल्चोक के मेलम्ची नगरपालिका–१० सिम्ले फाँट में नेत्रप्रसाद दाहाल पर कोदालो वार करके हत्या करने का आरोप था। इसी मामले में उन्हें २०७९ पुस १८ को २५ वर्षों की कैद की सजा सुनाई गई थी। डाँका के अभियोग में भी उन्हें ७ वर्ष की कैद एवं ७० हजार रुपैयाँ जुर्माना लगाया गया था। गिरफ्तार होने के बाद उन्हें पुनः सुन्धारा कारागार भेज दिया गया है।
तस्वीर शीर्षक, राजा वीरेन्द्र और रानी ऐश्वर्य की हत्या के सात साल बाद नेपाल में राजतंत्र समाप्त किया गयालेख जानकारी
पुनः गृहमंत्री नियुक्त होने पर सुधन गुरुङ ने २५ वर्ष पुराने दरबार हत्याकांड की जांच करने की घोषणा की, जिससे इसके संभावित पहलुओं और प्रासंगिकता पर ध्यान गया है।
नेपाल में राजतंत्र समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के संसदीय दल के नेता ज्ञानेन्द्र शाही ने गृहमंत्री गुरुङ के इस निर्णय का स्वागत किया है।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि उस समय की जांच समिति ने ‘घटना के वास्तविक तथ्य’ सामने लाए, लेकिन वर्तमान जांच राजनीतिक विवाद बन सकती है।
राजदरबार हत्याकांड क्या है?
नेपाली राजनीतिक दृष्टिकोण से माओवादी नेतृत्व वाले संघर्षकाल २०५८ साल में तत्कालीन राजा वीरेन्द्र और उनके परिवार को नष्ट करने के लिए हुए दरबार हत्याकांड को आज भी कई लोग रहस्यमय मानते हैं।
जेठ १९, शुक्रवार रात नारायणहिटी राजदरबार में हुए इस हत्याकांड में राजा वीरेन्द्र और रानी ऐश्वर्य पर गोली चली। परिवार के सदस्यों को आधुनिक राइफल से गोली लगी, जिससे युवराज दीपेन्द्र गंभीर रूप से घायल हुए।
दीपेन्द्र को सैन्य अस्पताल में ले जाया गया जहां वे बेहोश होकर राजा बने लेकिन उसी स्थिति में उनकी मृत्यु हो गई।
जेठ १९ की रात में दीपेन्द्र के भाई अधिराजकुमार नीराजन और बहन अधिराजकुमारी श्रुति की भी मृत्यु हुई। राजा वीरेन्द्र की बहनें शांति और शारदा तथा छोटे भाई धीरेन्द्र भी मारे गए। राजपरिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार भी हत्याकांड का शिकार हुए।
दीपेन्द्र के उपचार के दौरान जेठ २२ की सुबह ३:४५ बजे उनकी मृत्यु हुई, इसके बाद राजा वीरेन्द्र के चाचा ज्ञानेन्द्र शाह ने राजगद्दी संभाली। घटना में उनकी पत्नी कोमल को भी गोली लगी थी।
राजा बनने के दिन ज्ञानेन्द्र शाह ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केशवप्रसाद उपाध्याय के अध्यक्षत्व में सभामुख तारानाथ रानाभाट और विपक्षी दल के नेता माधवकुमार नेपाल के साथ एक जांच समिति का गठन किया था।
हालांकि नेता नेपाल ने बाद में उस जांच समिति से इस्तीफा दिया। उपाध्याय और रानाभाट ने एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसे संक्षेप में सार्वजनिक किया गया।
रिपोर्ट में गवाहों के वर्णन के आधार पर तत्कालीन युवराज दीपेन्द्र को राजपरिवार पर गोली चलाने वाला बताया गया है।
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तस्वीर शीर्षक, सन् १९९८ में नेपाल भ्रमण पर आए तत्कालीन ब्रिटिश युवराज चार्ल्स के साथ राजा वीरेन्द्र और रानी ऐश्वर्य
अविश्वास और छानबीन के वादे
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दरबार हत्याकांड को राजनीतिक शक्ति हस्तक्षेप और साजिश की घटना मानकर देखा जाने लगा, जिससे जांच रिपोर्ट पर अविश्वास बढ़ा।
युद्धकालीन माओवादी नेता प्रचंड ने दरबार हत्याकांड को भी ‘साजिश’ बताया। शांति प्रक्रिया के बाद पहला निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर भी उन्होंने जांच करने का वादा किया।
नारायणहिटी दरबार संग्रहालय उद्घाटन समारोह में घोषणा किये जाने के बाद भी तीन बार प्रधानमंत्री बनने पर वह पूरा नहीं हो सका।
प्रधान संपादक देवप्रकाश त्रिपाठी के अनुसार जांच रिपोर्ट में कुछ भ्रम हो सकता है लेकिन लोग उस पर पूरी तरह विश्वास नहीं करते।
“इसे राजनीतिकरण करने की कोशिशें पहले भी होती रही हैं। प्रचार साजिश सिद्धांत पर आधारित रहा,” त्रिपाठी कहते हैं।
तत्कालीन जांच समिति की घटना विवरण सार्वजनिक करने के बाद भी निष्कर्ष न दे पाना इस विषय को आज भी प्रासंगिक बनाए रखता है।
“नेपाली जनता और विश्व के सामने मुख्य ध्यान इसी दरबार हत्याकांड पर था, और रहेगा,” त्रिपाठी कहते हैं।
“कई बातें पहले ही सार्वजनिक हो चुकी हैं, लेकिन नेपाली जनता को वास्तविकता से ज्यादा रहस्यमय बनाया गया है, इसलिए राज्य को इसे स्पष्ट करने की आवश्यकता है।”
चर्चा के लिए ‘केवल स्टन्ट’ है?
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तस्वीर शीर्षक, वर्तमान में नारायणहिटी राजदरबार संग्रहालय के रूप में संरक्षित है
पूर्व गृह सचिव खेमराज रेग्मी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर दूसरे सरकारों के अविश्वास के कारण अराजकता फैलने की चिंता जताई है।
“घटना के तथ्य पहले ही सामने आ चुके हैं। यह पता चल सकता है कि किसने क्यों और कैसे किया,” उन्होंने कहा।
लेकिन आम लोग जांच समिति की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं करते, ऐसा रेग्मी का मानना है।
सेना में हुई घटना को सीधे से नहीं बताया गया, बल्कि घुमावदार भाषा का उपयोग किया गया है, रेग्मी बताते हैं।
“पहले से सुलझे विषय को फिर से उठाकर स्टन्ट करना उचित नहीं होगा,” वे कहते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और सभामुख द्वारा प्रस्तुत जांच के तथ्यों को चुनौती देने वाला कोई नया प्रमाण नहीं आया है, कहते हैं रेग्मी। “अभी तक कोई विश्वसनीय नया प्रमाण नहीं मिला है।”
“बाहर फैली अफवाहें कल्पना पर आधारित हैं। उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोई भी जांच पूरी तरह नहीं हुई है। थके हुए विषय को फिर से उठाना केवल चर्चा पाने का स्टन्ट है।”
जांच के समय पर सवाल
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अब तक कई गवाह जीवित हैं और उनके बयान दर्ज हैं, जिससे दरबार हत्याकांड में जांच की संभावना बनी रहती है, बताते हैं त्रिपाठी।
“भवन अलग हो चुका है, लेकिन गंभीर रूप से घायल अभी भी जीवित हैं। परिवार के करीबी रिश्तेदारों को दीपेन्द्र के खिलाफ पूर्वाग्रह नहीं है,” वे कहते हैं।
अनावश्यक रूप से दरबार हत्याकांड की जांच उठने से संदेहवाद पैदा हुआ, बताते हैं त्रिपाठी।
“मुद्दा उठने का कारण यह है कि यह अचानक क्यों सामने आया? पुराने सरकार भी राजाओं की लोकप्रियता बढ़ने पर राजनीतिक असर के लिए इसका इस्तेमाल करते थे,” वे कहते हैं।
प्रचंड बार-बार जांच की बात करता है, लेकिन इसका एकमात्र मकसद पूर्व राजा को डرانा है, ऐसा त्रिपाठी मानते हैं।
पूर्व गृह सचिव रेग्मी भी “सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए” जांच उठाए जाने पर शक जताते हैं।
इस सामग्री से संबंधित वीडियो एवं सूचनाओं के लिए अनुसरण किया जा सकता है। साथ ही समाचार सुनने के लिए रेडियो पर सोमवार से शुक्रवार शाम पौने नौ बजे कार्यक्रम उपलब्ध है।
२७ जेठ, काठमाडौं । कर्तव्य ज्यान र चोरीको आरोपमा फलेवास नगरपालिका–५ का २८ वर्षीय कुशल पुरीलाई प्रहरीले पक्राउ गरेको छ। कुशल फलेवास नगरपालिका–५ को खानीगाउँमा बस्छन् भने मृतक ५२ वर्षीया सन्तु नेपाली, जो बागलुङ जैमिनी नगरपालिका–५ बिनामारेघरकी निवासी हुन्, आफ्नै कोठामा जेठ ८ गते मृत अवस्थामा भेटिएकी थिइन्। घटनाको अनुसन्धानको क्रममा जिल्ला प्रहरी कार्यालय पर्वतबाट खटिएको टोलीले कुशललाई मोदी गाउँपालिका–५ पातीचौरस्थित होटल प्रिन्सबाट पक्राउ गरेको छ।
प्रारम्भिक अनुसन्धानले देखाएको छ कि कुशलले सन्तु नेपालीमाथि कोदालो प्रहार गरी हत्या गरेको पुष्टि भएको छ। हत्यापछि मृतकले लगाएका सुनका सिक्री र मुन्द्राहरू चोरी गरिएको पनि खुलेको छ। प्रहरीले कुशलको साथबाट ८ थान सुनको मुन्द्रा बरामद गरेको छ। थप अनुसन्धानमा लुटिएका सुनका गहनाहरू कुश्मा नगरपालिका–५ दर्शनटोलका स्मृति गहना उद्योगका सञ्चालक रमेश कुमार श्रेष्ठलाई बेचेको पाइएको छ। प्रहरीले रमेशको गहना उद्योगमा गरेको तलासीमा मृतकले लगाएको १ थान सुनको सिक्री र २ थान मुन्ड्रा पनि फेला पारेर उनलाई पनि पक्राउ गरेको छ। दुवैलाई जिल्ला अदालत पर्वतबाट म्याद अनुमति लिएर आवश्यक अनुसन्धान जारी राखिएको छ।
औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों द्वारा वर्षों से उपयोग किए जा रहे जमीन, भवन से लेकर बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का बकाया होने के कारण सरकार ने जेठ २५ को ७ दिनों के भीतर भुगतान कर बकाया साफ करने का आदेश जारी किया, जिसके बाद उद्योगों के बीच विरोध उत्पन्न हो गया।
देश के १० औद्योगिक क्षेत्रों में ६३५ उद्योग एवं संस्थाओं के कुल ८८ करोड़ ४५ लाख रुपये के बकाया का विवरण औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड ने सार्वजनिक किया है।
यदि भुगतान नहीं किया गया तो बिजली काटने सहित कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी जा रही है।
किसका कितना बकाया?
दस औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे अधिक बकाया बालाजु औद्योगिक क्षेत्र के १५१ उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों का है, जिनका बकाया ४३.९ करोड़ रुपये है, सरकार के आंकड़े बताते हैं।
इसके अलावा हेटौँडा औद्योगिक क्षेत्र के १३१ उद्योगों का बकाया २०.९ करोड़ रुपये तथा पाटन औद्योगिक क्षेत्र के ९४ उद्योगों का बकाया १०.१ करोड़ रुपये है।
पोखरा और बुटवल औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योगों का लगभग साढ़े ४ करोड़ से थोड़ा अधिक बकाया है, जबकि भक्तपुर औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों का बकाया १.७१ करोड़ रुपये है। नेपालगंज औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों का बकाया १.३४ करोड़ रुपये है, और धरान, वीरेन्द्रनगर तथा गजेन्द्र नारायण सिंह औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योगों का क्रमशः ७१ लाख, साढ़े ६ लाख और ६३ लाख रुपये बकाया है।
इनमें से जमीन का किराया ही ८२ करोड़ से अधिक बकाया है।
किराए का विवाद केंद्र में
तस्वीर स्रोत, Prabhat Poudel
तस्वीर का कैप्शन, औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग सस्ते किराए पर जमीन, भवन और अन्य सुविधाएं प्राप्त करते हैं
२०७५ साल में किराए में वृद्धि को लेकर विवाद शुरू हुआ है।
नेपाल औद्योगिक क्षेत्र प्रबंधन लिमिटेड के सूचना अधिकारी वासुदेव सोडारी के अनुसार, उस वर्ष जमीन के किराया की दर में वृद्धि की गई थी।
पचहत्तर साल पहले लिमिटेड ने बालाजु के जमीन किराए को १६ हजार रुपये प्रति रोपनी से बढ़ाकर ८१ हजार रुपये कर दिया था। अन्य क्षेत्रों में भी इसी दर से वृद्धि हुई। हर साल ५ प्रतिशत की दर से किराया बढ़ने से बालाजु में अब यह लगभग १ लाख १३ हजार रुपये हो गया है, सोडारी ने बताया। यह दर काठमांडू क्षेत्र की तुलना में काफी कम है, उन्होंने कहा।
“लेकिन पचहत्तर साल में उद्योगियों ने इस वृद्धि के विरोध में न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने उद्योगियों के पक्ष में फैसला दिया था, पर उसे लागू नहीं किया जा सका। बाद में उनासी साल असार २२ से इसे बिल के रूप में लागू करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले के खिलाफ भी उद्योगियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की,” सोडारी ने कहा।
तस्वीर स्रोत, Prabhat Poudel
तस्वीर का कैप्शन, देश भर के सभी १० औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों का बकाया है
सर्वोच्च न्यायालय ने किराए की बढ़ोतरी को पूर्व प्रभावी मानते हुए पचहत्तर साल से लागू न करने और केवल उनासी साल असार २२ से लागू करने का आदेश दिया तथा नियमित किराया पुनः समीक्षा करने को कहा।
फैसले के विरोध में सरकार ने पुनः समीक्षा का आवेदन किया, लेकिन निर्णय के बिना अचानक किराया बढ़ा दिया गया जिससे उद्योगी असंतुष्ट हैं।
“हमारा मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार ही कार्यवाही होनी चाहिए। सरकार पुनः समीक्षा मांग रही है, लेकिन तब तक पुराने आदेश का पालन होना चाहिए,” नेपाल औद्योगिक क्षेत्र उद्योग महासंघ के अध्यक्ष एजाज आलम ने कहा।
अपनी मांग पूरी न होने पर उद्योगी पुनः अदालत जाने की तैयारी में हैं।
पुरानी किराया दर के आधार पर ७ दिन की सूचना जारी होने के बावजूद पुनः समीक्षा के फैसले तक सरकार का यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ माना जा रहा है।
“पचहत्तर से उनासी साल तक पुराने किराये पर और उसके बाद नई दर अनुसार भुगतान करना हमारी मांग है, अन्यथा हमें फिर से अदालत जाना पड़ेगा।”
उन्होंने बताया कि अधिकांश उद्योग बिजली और पानी के शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, केवल जमीन किराया ही बकाया है।
सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों के सुचारू प्रबंधन के लिए नए किराया दर आवश्यक बताया है और अन्यथा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विवादित बकाया राशि का विवरण
कुल बकाया राशि: ८८.४५ करोड़ रुपये
जमीन किराया बकाया: ८२.०७ करोड़ रुपये
भवन किराया बकाया: २.२० करोड़ रुपये
बिजली शुल्क बकाया: ३.८९ करोड़ रुपये
पानी शुल्क बकाया: २१.१८ लाख रुपये
विभिन्न बकाया: ७.२४ लाख रुपये
सबसे अधिक बकाया: बालाजु औद्योगिक क्षेत्र (४३.९ करोड़ रुपये)
सबसे कम बकाया: वीरेन्द्रनगर औद्योगिक क्षेत्र (६.६२ लाख रुपये)
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