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लेखक: space4knews

मधेश के पर्यटन प्रचार के लिए ‘मधेश ट्रैवल मार्ट’ की शुरुआत

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आयोजन में मधेश प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार हेतु चार दिवसीय ‘मधेश ट्रैवल मार्ट’ शुरू किया गया है। नाट्टा मधेश प्रदेश के अनुसार इस मार्ट में नेपाल और भारत के 200 से अधिक पर्यटन व्यवसायी और सम्बंधित हितधारक शामिल होंगे। इस मेला का उद्देश्य मधेश के आठों जिलों के सांस्कृतिक एवं पर्यटन क्षेत्रों को भारतीय बाजार में बढ़ावा देना है। 28 जेठ, बारा।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आयोजन में गुरुवार से मधेश ट्रैवल मार्ट शुरू हुआ। मार्ट के आयोजन से संबंधित जानकारी नेपाल एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल्स एंड टूर ऑपरेटर (नाट्टा) मधेश प्रदेश ने गुरुवार को बाराको सिमरा में पत्रकार सम्मेलन में दी। वीरगंज, बारा और जनकपुर में अलग-अलग आयोजित इस कार्यक्रम में मधेश प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रचार के साथ स्थानीय व्यंजन और संस्कृति को प्राथमिकता दी गई है, जिसका संयोजन नाट्टा मधेश प्रदेश कर रहा है।

नाट्टा मधेश के अध्यक्ष मोहन शर्मा ने शुक्रवार को वीरगंज में औपचारिक उद्घाटन के बाद जनकपुर तक विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पत्रकार सम्मेलन में प्रदान की। ‘बारा–पर्सा समेत मधेश के आठों जिलों की संस्कृति और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़कर कार्यक्रम आयोजित किया गया है,’ शर्मा ने बताया। वीरगंज महानगरपालिका और बर्दिबास नगरपालिक के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का सचिवालय बाराको जितपुरसिमरा उपमहानगरपालिका में स्थित है।

चार दिन तक चलने वाले मार्ट में स्थानीय तहों की भी सह-निवेशिता है, ऐसा आयोजकों ने जानकारी दी। ‘नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय तहों की सह-निवेशी में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है,’ नाट्टा मधेश प्रदेश के अध्यक्ष शर्मा ने कहा। मार्ट में नेपाल और भारत के विभिन्न शहरों से 200 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें पर्यटन व्यवसायी, पर्यटक, कंटेंट क्रिएटर और टूर ऑपरेटर शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आंतरिक रूप से मधेश के पर्यटन स्थलों को भारतीय पर्यटन बाजार में बढ़ावा देना है।

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्का उपाध्यक्षको रूपमा विशाल श्रेष्ठले पदबहाली गरे

राष्ट्रिय खेलकुद परिषद्को उपाध्यक्षमा नवनियुक्त विशाल श्रेष्ठले पदबहाली गरी खेलकुद विकासमा योगदान पुर्‍याउने विश्वास व्यक्त गरेका छन्। उनलाई साथै सदस्यहरू मोनालिसा खम्बु, सिक्का सुवाल श्रेष्ठ, शक्तिप्रसाद गौचन र पवन शाहीलाई परिषद्ले स्वागत गरेको छ। परिषद्को सदस्य सचिव रामचरित्र मेहताले नयाँ पदाधिकारीहरूलाई खेलकुदको पछिल्लो अवस्था तथा आगामी योजनाबारे जानकारी गराएका छन्। २८ जेठ, काठमाडौं।
नेपाल सरकारले विशाल श्रेष्ठलाई बुधबार उपाध्यक्षमा नियुक्त गरेको थियो। पदबहाली समारोहमा उपाध्यक्ष श्रेष्ठले खेलमैदानबाट व्यवस्थापकीय जिम्मेवारीमा आएर सबैको सहकार्यबाट खेलकुदको विकासमा योगदान दिने विश्वास व्यक्त गरे। परिषद्को सदस्य सचिव रामचरित्र मेहताले उपाध्यक्ष श्रेष्ठसहित नवनियुक्त सदस्यहरू मोनालिसा खम्बु, सिक्का सुवाल श्रेष्ठ, शक्तिप्रसाद गौचन र पवन शाहीलाई हार्दिक स्वागत गर्दै खेलकुदको पछिल्लो अवस्था सम्बन्धमा जानकारी गराउनु भयो। कार्यक्रममा शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालयका प्रमुख सल्लाहकार सिद्धि ब्यञ्जनकार र परिषद्का विभागीय तथा शाखा प्रमुखहरू पनि उपस्थित थिए।

आइफोन के प्रभाव से अमेरिका और विश्व में जन्मदर में उल्लेखनीय गिरावट

संयुक्त अध्ययन से पता चला है कि अमेरिका में 2007 में आइफोन के आविष्कार के बाद से जन्मदर में 22 प्रतिशत की गिरावट आई है। सामान्यतः किसी देश की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ जन्मदर घटती है, लेकिन पिछले दो दशकों में विश्व के विभिन्न देशों में सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग रहीं, बावजूद इसके जन्मदर लगभग समान गति से घट रही है। अमेरिका के राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो के अध्ययन के अनुसार 1980 से 2007 तक अमेरिका में प्रजनन दर स्थिर थी, लेकिन 2007 के बाद इसमें निरंतर गिरावट देखी गई है। 2024 तक यह दर 22 प्रतिशत घटकर प्रति 1000 महिलाओं पर 54 हो गई है।

आइफोन की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में जन्मदर में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। अनुसंधान में 2007 से 2011 तक अमेरिका के उन क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया जहां एटी एंड टी नेटवर्क के माध्यम से आइफोन उपलब्ध कराया गया था। परिणामों से पता चला कि आइफोन की अधिक उपलब्धता वाले क्षेत्रों में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में जन्मदर 4.5 से 8 प्रतिशत तक और 20 से 24 वर्ष की महिलाओं में 3.2 से 6.6 प्रतिशत तक घट गई है। 2007 से 2011 के बीच 15 से 44 वर्ष की आयु वर्ग में कुल जन्मदर गिरावट का अनुमानित 33 से 52 प्रतिशत हिस्सा आइफोन के प्रभाव के कारण हो सकता है।

जन्मदर में गिरावट के कारणों पर शोधकर्ताओं का कहना है कि स्मार्टफोन के बढ़ते प्रयोग ने लोगों के सामाजिक व्यवहार में बड़ा बदलाव लाया है। लोगों की आमने-सामने बातचीत में कमी आई है और यौन गतिविधियां भी घट गई हैं। साथ ही, ऑनलाइन अश्लील सामग्री का बढ़ता उपयोग और डिजिटल मनोरंजन ने जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। स्मार्टफोन ने युवाओं को गर्भनिरोधक और गर्भपतन संबंधी सूचनाएं आसानी से उपलब्ध करवाना भी संभव बनाया है। यह प्रभाव न केवल अमेरिका तक सीमित है, बल्कि विश्वव्यापी भी है। सिनसिनाटी विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों द्वारा 128 देशों में किए गए अध्ययन में समान परिणाम सामने आए हैं। अलग-अलग स्वास्थ्य प्रणालियों, धर्मों, कानूनों और आर्थिक स्थितियों के बावजूद स्मार्टफोन के व्यापक उपयोग के पश्चात जन्मदर में तेज गिरावट दर्ज की गई है।

स्क्रीन टाइम बढ़ने से सामाजिक सहभागिता में कमी आई है। 2003 में लोग प्रतिदिन औसतन 68 मिनट आमने-सामने बातचीत करते थे, जो 2019 तक घटकर 38 मिनट रह गई है, यह लगभग 44 प्रतिशत की कमी है। इसी प्रकार कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों पर बिताने वाला समय दैनिक 22 मिनट से बढ़कर 96 मिनट हो गया है, जो 336 प्रतिशत वृद्धि है। शोधकर्ता टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि आइफोन या स्मार्टफोन अकेले जन्मदर में गिरावट के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, लेकिन यह गिरावट का एक महत्वपूर्ण कारण जरूर हैं। विश्व के कई विकसित और विकासशील देशों में जन्मदर लगातार घट रही है। अमेरिका में प्रजनन दर अब ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। कनाडा में 2024 में प्रति महिला प्रजनन दर 1.25 रही, जो जापान, सिंगापुर और स्पेन जैसे देशों के अनुरूप है। चीन ने 2016 में अपनी एक संतान नीति समाप्त कर दी थी। जापान और दक्षिण कोरिया ने जन्मदर बढ़ाने के लिए भारी धनराशि खर्च की है, लेकिन उल्लेखनीय सफलता हासिल नहीं हो पाई है। इसी बीच भारत और ब्राजील जैसे मध्यम आय वाले देशों में भी जन्मदर तीव्र गति से कम हो रही है।

रोल्पामा मिनी ट्रक दुर्घटनामा एक जनाको मृत्यु

२८ जेठ, दाङ । रोल्पामा बिहीबार बिहान मिनी ट्रक दुर्घटना हुँदा एक जनाको घटनास्थलमै मृत्यु भएको छ। बल्लेखोलादेखि आलु बोकेर पोखरातर्फ जाँदै गरेको रा १ ख ३०४५ नम्बरको मिनी ट्रक संचालन हुँदै गर्दा अचानक सडक भासिएर दुर्घटना भएको हो। माडी गाउँपालिका–१ पात्लेस्थित बल्ले–झिनुवाभित्री सडकमा उक्त ट्रक दुर्घटना भएको थियो।

दुर्घटनामा सल्यानको बागचौर नगरपालिका–४ दुदिलाबोट निवासी ४७ वर्षीय चन्द्रबहादुर बस्नेतको मृत्यु भएको जिल्ला प्रहरी कार्यालय रोल्पाका प्रहरी निरीक्षक सुनिल थापाले जानकारी दिए। ट्रक चालक घाइते छन्। –रासस

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मृत्यु

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मृत्यु हो गई है। भारत सरकार ने घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख को तलब कर विरोध दर्ज कराया है। अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी उल्लंघन के आरोप में इरान से तेल ढुलाई कर रहे जहाज पर हमला किया है। 28 जेठ, काठमाडौं।

ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। प्रारंभ में लापता बताए गए इन तीन भारतीय नागरिकों के शव मिलने की जानकारी भारत के बंदरगाह, जलमार्ग तथा यातायात मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को दी है। सोनोवाल ने ट्वीट में लिखा है, ‘यह हमारे लिए अपरिहार्य क्षति है। इस कठिन समय में मोदी सरकार दुखी परिवारों के साथ दृढ़ता से खड़ी है। मृतक परिवारों को आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उद्धार किए गए चालक दल के सदस्यों को तुरंत स्वदेश लौटाने तथा मृतक नाविकों के शव जल्द भारत लाकर अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने के निर्देश मैंने संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।’

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख को तलब कर हमले की कड़ी निंदा की। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो कूएरा कजाकिस्तान यात्रा पर होने के कारण अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख जेसन मिक्स को बुलाया गया था। अमेरिकी हमले में फंसे भारतीय नागरिकों को ओमानी सेना ने सुरक्षित रूप से बचाकर निकाला है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि पलाऊ झंडे वाला सेटेबेलो टैंकर इरान से तेल की ढुलाई करके नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था, जिस कारण उस पर हमला किया गया। कमांड की जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘अमेरिकी सेना ने बार-बार चेतावनी देने के बाद भी चालक दल ने अवहेलना की, जिसके कारण एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन को लक्षित कर सटीक हथियार प्रहार किया।’

इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री व्यापार मार्ग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने 13 अप्रैल से इरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी शुरू की थी। तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव, समुद्री व्यापार सुरक्षा और विदेशी संघर्षों में फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिलहाल इरान और अमेरिका के बीच तनाव घटने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका ने इरान पर दोबारा हमला शुरू कर दिया है। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा इरान पर सैन्य हमला करने के बाद शुरू हुआ था, जिसमें इरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई थी। जवाबी कार्रवाई में इरान ने इज़राइल और अमेरिका के खाड़ी क्षेत्रीय सहयोगी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। इसके बाद संघर्ष तेजी से फैला और मार्च में लेबनान भी इसके प्रभाव में आ गया। अप्रैल में अमेरिका और इरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की सहमति दी थी, लेकिन लगातार आरोप-प्रत्यारोप, नए हमलों और बढ़ती अविश्वास के कारण यह युद्धविराम कमजोर पड़ गया है और बड़े सैन्य टकराव का खतरा जारी है।

तीन बार विश्वकप आयोजन करने विश्व का एकमात्र स्टेडियम ‘एस्टाडियो अज्टेका’

मेक्सिको का एस्टाडियो अज्टेका स्टेडियम दुनिया का पहला ऐसा स्टेडियम बनने जा रहा है जिसने तीन अलग-अलग फीफा विश्वकप उद्घाटन मैचों की मेजबानी की है। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के संयुक्त आयोजन में 11 जून 2026 से शुरू होने वाले इस फीफा विश्वकप में 48 टीमें भाग लेंगी। ऐतिहासिक एस्टाडियो अज्टेका मैदान पर उद्घाटन मैच में मेजबान मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका आमने-सामने होंगी।

विश्व फुटबाल के इतिहास में कुछ मैदान केवल खेलने की जगह नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास के रूप में स्थापित होते हैं। मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में स्थित एस्टाडियो अज्टेका फुटबाल की दुनिया में ऐसा ही एक प्रमुख तीर्थस्थल है। इस स्टेडियम ने तीन फीफा विश्वकप (1970, 1986 और 2026) की सफल मेजबानी कर विश्व का पहला स्टेडियम बनने का गौरव प्राप्त किया है।

1970 के फीफा विश्वकप में, जब पेले के स्वर्ण युग के दौरान मेक्सिको ने पहली बार विश्वकप की मेजबानी की, तो अज्टेका स्टेडियम प्रतियोगिता का मुख्य केंद्र था। इस मैदान पर 31 मई 1970 को आयोजित उद्घाटन मैच में मेजबान मेक्सिको और सोवियत संघ के बीच मुकाबला हुआ, जो प्रतिस्पर्धात्मक रूप से बिना गोल के ड्रॉ रहा।

2026 के फीफा विश्वकप में, जो आधुनिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा, अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के संयुक्त आयोजन में 11 जून 2026 से विश्वकप का औपचारिक प्रारंभ होगा, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इस प्रतियोगिता के साथ ही अज्टेका स्टेडियम फीफा विश्वकप इतिहास में तीन अलग-अलग संस्करणों के उद्घाटन मैचों की मेजबानी करने वाला विश्व का पहला स्टेडियम बन जाएगा।

बाल बालिकाओं का खेलने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं है

नेपाल की नीतियां खेल आधारित शिक्षण को शामिल करती हैं, लेकिन व्यवहार में अभिभावक और विद्यालय खेल और पढ़ाई को अलग-अलग ढंग से समझते हैं। बच्चों के समग्र विकास के लिए खेल को सीखने का आधार मानते हुए विद्यालय की गुणवत्ता मापने के नजरिए में बदलाव आवश्यक है। ‘बच्चे खेलते-खेलते सीखते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खेल में बच्चे कैसे सीखते हैं, यह सीखना जरूरी है।’ – ओ. फ्रेड डोनाल्डसन। ११ जून को अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे 2024 से औपचारिक रूप से मान्यता दी है। यह दिवस विश्वभर के बच्चों के खेलने के अधिकार और खेल के महत्व को याद दिलाता है। खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, सीखने और स्वस्थ बाल्यकाल का आधार है।

हर वर्ष इस दिवस के अवसर पर मैं, जो प्रारंभिक बाल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हूं, अपने आप से सवाल करता हूं – क्या हमारे बच्चे वास्तव में खेल पा रहे हैं? नेपाल की नीतियां, पाठ्यक्रम और प्रारंभिक बाल विकास संबंधी निर्देशों को देखने पर जवाब सकारात्मक लगता है। खेल आधारित सीखना, बाल-केंद्रित शिक्षा, अनुभव से सीखने जैसे विषय स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। लेकिन स्कूल, शिक्षक और अभिभावकों के रोज़मर्रा के समन्वय में ऐसा महसूस होता है कि हमने खेल के महत्व को केवल कागजों पर मान्यता दी है, व्यवहार में पूरी तरह से लागू नहीं कर पाए हैं। विद्यालय संचालन के अनुभव ने मुझे बार-बार यह महसूस कराया है। हर अभिभावक अपने बच्चे का उज्जवल भविष्य चाहता है। शिक्षक भी बच्चे की अच्छी शिक्षा की कामना करते हैं। विद्यालय का उद्देश्य भी इसी दिशा में होता है। लेकिन कभी-कभी बेहतर भविष्य की चिंता में हम बच्चों की वर्तमान जरूरतों को कम आंकेते हैं।

कुछ समय पहले एक अभिभावक से बातचीत हुई। उन्होंने पूछा, ‘मेरा बच्चा पूरे दिन खेलता है, पढ़ाई कब करेगा?’ उनके सवाल में प्यार और चिंता दोनों थे, लेकिन यह हमारे समाज में एक सोच को भी दर्शाता है। बहुत से लोग खेल और पढ़ाई को दो अलग चीज़ें मानते हैं। खेल को मनोरंजन और पढ़ाई को शिक्षा के रूप में देखते हैं। लेकिन प्रारंभिक बाल्यावस्था में हकीकत अलग होती है। बच्चों के लिए खेल ही सीखने का माध्यम है। जब बच्चे मित्रों के साथ भूमिका निभाकर खेलते हैं, वे भाषा सीखते हैं। जब ब्लॉक जोड़ते हैं, तो आकार, संतुलन और गणितीय सोच विकसित होती है। समूह में खेलते समय वे बारी-बारी का इंतजार करना, सहयोग और समस्या समाधान करना सीखते हैं। ये कौशल भविष्य के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण आधार हैं। लेकिन वर्तमान परिवेश प्रारंभिक शिक्षा के प्रति अभिभावकों और विद्यालय दोनों की अपेक्षाओं को बदल रहा है।

दुनिया से जुड़ने, अंतरराष्ट्रीय भाषा के महत्व और भविष्य की चिंता के कारण कई अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे कम उम्र से अक्षर पहचानना, लिखना और भाषा का प्रयोग सीखें। यह स्वाभाविक भी है। विद्यालय भी इन्हीं अपेक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से कभी-कभी खेल, कहानी, गीत, अभिनय और अनुभव आधारित शिक्षण का महत्व पर्याप्त रूप से नज़र नहीं आता। मुझे लगता है समस्या इच्छा या प्रतिबद्धता की नहीं, बल्कि सीखने की प्रकृति के बारे में साझा समझ की कमी है। हम सभी चाहते हैं कि बच्चे अच्छी शिक्षा पाएं। लेकिन प्रारंभिक वर्षों में सीखने के कई महत्वपूर्ण पहलू खेल के अंदर ही छिपे होते हैं, जिन पर व्यापक संवाद और जागरूकता की आवश्यकता है। खेल को पढ़ाई से अलग न मानकर सीखने के आधार के रूप में देखने की संस्कृति को मजबूत करना जरूरी है।

एक और महत्वपूर्ण विषय है बाहरी वातावरण में होने वाली शिक्षा। आज कई बच्चे अपना अधिक समय चार दीवारों के अंदर बिताते हैं। लेकिन सीखने की दुनिया कक्षा से कहीं बड़ी होती है। मिट्टी में खेलने, पौधों को देखने, पानी के साथ प्रयोग करने, खुले आसमान के नीचे दौड़ने या प्रकृति के साथ समय बिताने से जो अनुभव मिलते हैं, वे किसी किताब से संभव नहीं। शिक्षा क्रांति में कहा गया है— श्रेष्ठ शिक्षण कुछ हद तक बाहर ही मिलता है। सच कहूं तो बच्चों के लिए प्रकृति ही खुला स्कूल है। नेपाल जैसे प्राकृतिक विविधताओं वाले देश में आउटडोर लर्निंग के अवसर ज्यादा हैं। विद्यालय का मैदान, बगीचा, सामुदायिक खुला स्थान, खेत-खलिहान या गांव का परिवेश अपनी-अपनी जगह सीखने के स्रोत बन सकते हैं। लेकिन हम अभी भी शिक्षा को काफी हद तक किताब, कॉपी और कक्षा तक सीमित कर रहे हैं।

तो नीति और व्यवहार में दूरी क्यों है? मेरे अनुभव के अनुसार इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। बहुत से अभिभावकों को यह जानकारी नहीं है कि खेल से शिक्षा मिलती है। अधिकतर शिक्षक खेल को महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन इसे रोज़ाना शिक्षण प्रक्रिया में प्रभावी रूप से जोड़ने के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता होती है। विद्यालय अभिभावकों की अपेक्षाओं और बच्चों की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दूरी को कम करने के लिए सभी का साझा प्रयास जरूरी है। अभिभावकों को खेल को समय की बर्बादी नहीं, बल्कि सीखने का माध्यम समझना होगा। विद्यालय को बच्चों के समग्र विकास को प्राथमिकता देनी होगी। शिक्षकों को निरंतर व्यावसायिक सहायता चाहिए। नीति निर्माताओं को भी कक्षा में खेल आधारित शिक्षण हो रहा है या नहीं, ध्यान देना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यालय की गुणवत्ता मापने के नजरिए में बदलाव लाना। अच्छा विद्यालय वह नहीं है जहां बच्चे जल्दी बोलना या अंग्रेजी सीख लें, बल्कि वह जगह है जहां बच्चे खुश रहें, सवाल पूछ सकें, गलतियां कर सकें, खोज कर सकें और खेलते-खेलते सीखें। अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मैं सभी अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यालयों और संबंधित पक्षों से आग्रह करूंगी – बच्चों को खेलने दें। मिट्टी में खेलने दें। कहानियां सुनने दें। गीत गाने दें। सवाल पूछने दें। दौड़ने दें। प्रकृति से जुड़ने दें। क्योंकि बच्चे केवल खेलते ही नहीं, वे सीख रहे हैं और अपना भविष्य बना रहे हैं। शायद उसी दिन हम कह सकेंगे – खेलने का अधिकार अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर बच्चे के दैनिक जीवन में भी नजर आने लगा है। (रति शर्मा, विद्यालय नेतृत्व, शिक्षक क्षमता विकास और बाल केंद्रित सीखने के क्षेत्र में कार्यरत हैं।)

लेखा समिति की बैठक में भन्सार पारदर्शिता पर केंद्रित चर्चा

समाचार सारांश संचालनात्मक समीक्षा की गई। सार्वजनिक लेखा समिति की बैठक में विद्युतीय सवारी साधनों के भन्सार जाँचपास और कर दर पुनरावलोकन के विषय में चर्चा हुई। सांसद गणेशसिंह ठगुन्ना ने विद्युतीय सवारी साधनों को दी गई कर छूट पर संसदीय जांच की मांग की है। बैठक में सांसदों ने भन्सार चोरी नियंत्रण, पारदर्शी कर प्रणाली और भन्सार पूर्वाधार सुधार पर जोर दिया। २८ जेठ, काठमांडू। सार्वजनिक लेखा समिति की आज की बैठक में विद्युतीय सवारी साधन (इवी) के भन्सार जाँचपास प्रक्रिया, कर प्रणाली की पारदर्शिता, नीतिगत स्थिरता तथा भन्सार प्रबंधन सुधार के विषय मुख्य रूप से उभरे। समिति सदस्यों ने इन इवी के लिए भन्सार जाँचपास और कर दर में बदलाव से लेकर भन्सार मूल्यांकन प्रक्रिया तक के मुद्दों का पुनरावलोकन आवश्यक होने पर बल दिया। उन्होंने भन्सार प्रबंधन और सुधार के लिए विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए। सांसद आरेन राई ने विद्युतीय सवारी साधनों पर लागू कर व्यवस्थाओं के बारे में जनता को स्पष्ट जानकारी देने की आवश्यकता बताई। सांसद बुद्ध रत्न महर्जन ने कहा कि केवल जनता पर कर का बोझ बढ़ा कर देश की समृद्धि संभव नहीं है। उसी तरह, सांसद महेन्द्रबहादुर शाही ने व्यवसाय में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताते हुए भन्सार पूर्वाधार सुधार सहित अन्य विषयों पर ध्यान देने का आग्रह किया। सांसद यज्ञबहादुर बोगटी ने भन्सार कार्यालयों को सुविधाजनक बनाने की जरूरत पर भी प्रकाश डाला, जबकि अन्य सदस्य गणेशसिंह ठगुन्ना ने विद्युतीय सवारी साधन को दी गई कर छूट पर संसदीय जांच आवश्यक होने की बात कही। सांसद रुकेश रञ्जित ने कहा कि कर नीति व्यवसाय-मित्रवत होनी चाहिए। सांसद विक्रम थापा ने बजट के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। सांसद गोविन्द पन्थी ने भन्सार चोरी नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और मजबूत संरचना की आवश्यकता बताई। सांसद मनीष झाले ने आयात-निर्यात वस्तुओं की जांच, कर निर्धारण और महसूल वसूली को व्यवस्थित बनाने पर बल दिया। रासस

छ्यादी घ्याङ: हेलम्बु का उभरता पर्यटक स्थल

समाचार सारांश

  • हेलम्बु गाउँपालिका ने जेष्ठ २४, २०८३ (७ जून, २०२६) को दिन समुद्र तल से ४,२०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित नए पर्यटक क्षेत्र छ्यादी घ्याङ के मैदानी भाग में कार्यपालिका बैठक आयोजित की।
  • बैठक में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने, हिमनद संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने तथा जलवायु परिवर्तन को कम करने के निश्चय के साथ इस क्षेत्र को एक नए पर्यटक गंतव्य के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया।

हेलम्बु के नए पर्यटक स्थल छ्यादी घ्याङ की खोज के लिए हमारी यात्रा काठमांडू के बौद्ध से शुरू हुई, मेलम्ची होते हुए हेलम्बु जाने वाले मार्ग से। यह यात्रा केवल भ्रमण नहीं थी, बल्कि प्रकृति की अनूठी सुंदरता और शांति की खोज थी।

हेलम्बु गाउँपालिका के भीतर स्थित घोप्टे घ्याङ में स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने के बाद हमने हेलम्बु हिमालयन ग्रेट ट्रेल पर पदयात्रा शुरू की। यात्रा मार्ग के कुछ हिस्से नव-निर्मित होने के कारण यह सफर सहज रहा।

 

कुछ समय के बाद रास्ता चढ़ाई पर जाकर जंगल की ओर मुड़ा। यह क्षेत्र लाङटाङ राष्ट्रीय निकुञ्ज के अंतर्गत आता है और घने जंगलों से घिरा हुआ है। रास्ते में विभिन्न रंग-बिरंगे फूलों ने स्वागत किया। यहाँ विभिन्न प्रजाति के रोडोडेंड्रोन फूल भी मिलते हैं, जिनमें से कुछ सफेद रोडोडेंड्रोन अब भी खिले थे, जिससे मार्ग और भी मनोहर लग रहा था।

फूलों पर मधुमक्खियों को अमृत-संग्रह करते देखना वाकई मनमोहक था। जंगल में विभिन्न प्रकार के पक्षियों की चहचहाहट से जीवन का संचार हुआ। शांतिपूर्ण वातावरण, पक्षियों के गीत और हरियाली ने हमारी थकान मिटाई और हृदय को आनंदित किया।

लगभग सात घंटे की पदयात्रा के बाद हम थरिपाती पहुंचे, जहाँ रहने के लिए अच्छे होटलों की सुविधा उपलब्ध है। इस क्षेत्र से प्रसिद्ध गोसाईकुण्ड भी पहुंचा जा सकता है। वहाँ से दो घंटे की यात्रा ने हमें छ्यादी घ्याङ तक पहुँचाया।

समुद्र तल से ४,२०० मीटर ऊंचाई पर स्थित छ्यादी घ्याङ हेलम्बु का नया पर्यटक गंतव्य है। जेष्ठ २४, २०८३ को इस स्थान के मैदान में हेलम्बु गाउँपालिकाले ऐतिहासिक कार्यपालिका बैठक की थी। इस बैठक में क्षेत्र को नए पर्यटन केंद्र के रूप में मान्यता देने का निश्चय किया गया और इसकी मुख्य प्राथमिकताएं घरेलू पर्यटन को बढ़ावा, हिमनद संरक्षण, तथा जलवायु परिवर्तन नियंत्रण रखी गईं।

छ्यादी घ्याङ की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी दृश्य, घने जंगल और शांत वातावरण इसे ट्रैकिंग के लिए उपयुक्त बनाते हैं। हिमनद के निकट होने के कारण यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

इस यात्रा ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि हेलम्बु में और भी कई खूबसूरत गंतव्य हैं जिन्हें उचित विकास के माध्यम से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन में वृद्धि की जा सकती है।

हम आश्वस्त हैं कि छ्यादी घ्याङ जैसे क्षेत्र नेपाल के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएंगे।

छ्यादी घ्याङ

वर्ल्डकप २०२६: एआई सक्षम फुटबल के कारण उपयोग हो रहा है

इस वर्ष के वर्ल्डकप में एआई युक्त फुटबॉल का उपयोग क्यों हो रहा है? आगामी हफ्तों में शुरू होने वाली वर्ल्डकप फुटबॉल प्रतियोगिता में विभिन्न नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। फीफा ने इस विषय में जानकारी दी है। इनमें सबसे प्रमुख आकर्षण तकनीकी फुटबॉल है।

संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको, और कनाडा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस प्रतियोगिता में उपयोग किया जाने वाला फुटबॉल अत्याधुनिक तकनीक युक्त होगा। फीफा के अनुसार, यह सामान्य फुटबॉल की तरह दिखेगा और महसूस होगा, लेकिन इसमें विशेषताएँ हैं। ‘ट्रायओंडा’ नामक स्मार्ट फुटबॉल में लगे सेंसर्स वाले चिप इसे विशिष्ट बनाते हैं।

फीफा के अनुसार, यह फुटबॉल प्रति सेकंड ५०० बार डेटा एकत्रित करने में सक्षम है, जो हर छोटी-मोटी गतिविधि की निगरानी में मदद करता है। फुटबॉल में अकसर विवाद पैदा करने वाले हैंडबाल, ऑफसाइड जैसी गलतियों की पहचान में और रेफरी तथा अधिकारियों को सही निर्णय लेने में एआई समर्थित इस फुटबॉल से सहायता मिलने की उम्मीद है।

लप्से खोलामा पहिरो गिरने से दिक्तेल–चखेवा सड़क अवरुद्ध

२८ जेठ, खोटाङ। मध्यपहाडी लोकमार्ग के अंतर्गत खोटाङ जिले में स्थित दिक्तेल–चखेवा सड़कखंड पहिरो की वजह से पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका–८ बुवासुङ और लामीडाँडा को जोड़ने वाली लप्से (पंखु) खोलामा कल रात गिरा पहिरो सड़क को पूरी तरह से बंद कर दिया है। स्थानीय शिक्षक दिलीपचन्द्र राई के अनुसार, जेठ २७ की रात गोपिनी नायपा सामुदायिक वन क्षेत्र के अन्दर स्थित लामीडाँडाको ढाँडखर्क से आई पहिरो ने सड़क को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।

लेदो और माटी सहित आई इस पहिरो ने निचले इलाके की सड़कों, नालों और अन्य संरचनाओं को भी क्षति पहुंचाई है। सड़क को क्षति पहुंचने के कारण भोजपुर से काठमांडू आने-जाने वाले तथा दिक्तेल, बानाचुङ होते हुए भोजपुर की ओर जाने वाले पूर्वी शहर के सभी आवागमन वाले वाहन भी रुक गए हैं। दिक्तेल रुपाकोट मझुवागढी नगरपालिका ने क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के लिए डोजर और स्कावेटर के साथ जनशक्ति तैनात करने की जानकारी दी है।

इस क्षेत्र में पहले भी लगातार पहिरो गिरने की घटनाएं होती रही हैं, जिससे समस्या कायम है। गत जेठ २३ की सुबह लप्से खोलामा आई बाढ़ की वजह से सड़क बह गई थी और नौ घंटे तक यातायात ठप हो गया था। लप्से खोलामा २०७३ साल में पक्की पुल निर्माण का योजना था, लेकिन ठेकेदार की देरी के कारण पुल का निर्माण कार्य अब तक अधूरा है। खोलामा पुल ना होने के कारण बरसात के समय यात्रियों, मालवाहक वाहनों, एम्बुलेंस, मोटरसाइकिल और पैदल यात्रियों को भी लंबा समय रुकना पड़ता है।

फिफा विश्वकप फुटबल २०२६: प्रत्येक टोलीको जर्सी कस्तो छ? क्विज खेल्नुहोस्

फिफा विश्वकप २०२६ मा ४८ टोलीहरू प्रतिस्पर्धा गर्नेछन्। यी टोलीका खेलाडीहरूले विभिन्न रङ र डिजाइन भएका जर्सीहरू लगाएर मैदानमा आफ्नो प्रस्तुति दिइनेछ।

ग्रान्डी स्टार्स और ट्रेनिङ ग्राउन्ड सेमीफाइनल में पहुँचे

समाचार सारांश

  • ग्रान्डी स्टार्स और ट्रेनिङ ग्राउन्ड ने पाँचवीं नखिपोट खुला बास्केटबॉल प्रतियोगिता में महिला वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
  • पुरुष वर्ग में केभीसी हाउण्ड्स और डा एरी ने अपनी जीत से क्वार्टरफाइनल में स्थान बनाया है।
  • डिफेंडिंग चैंपियन नेपाल आर्मी, कीर्तिपुर, इंजीनियिरिंग, टाइम्स और बूढानीलकण्ठ भी पुरुष वर्ग के क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे हैं।

२७ जेठ, काठमाडौं। ग्रान्डी स्टार्स और ट्रेनिङ ग्राउन्ड ने पाँचवीं नखिपोट खुला पुरुष और महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता में बुधवार को महिला वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। दोनों टीमों ने सहज जीत के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश किया है।

नखिपोट स्थित आयोजनकर्ता नखिपोट यूथ क्लब के कवर हॉल में ग्रान्डी ने आईएसए नेपाल को ६१-११ के बड़े अंतर से हराया। ग्रान्डी की विनामनी योञ्जन ने १२ अंक प्रदान किए। चारों क्वार्टर में बढ़त बनाते हुए ग्रान्डी ने क्रमशः २०-४, १२-३, १९-४ और १०-० का स्कोर हासिल किया।

ग्रान्डी समूह ‘ए’ की विजेता बनकर सेमीफाइनल में पहुँची है। तीन टीम वाले इस समूह में लगातार दो हार से आईएसए नेपाल प्रतियोगिता से बाहर हो गया। एक मैच जीतने वाली बूढानीलकण्ठ समूह की उपविजेता बनकर सेमीफाइनल में सम्मिलित हुई।

युनिसा से १५ अंक लेकर ट्रेनिङ ग्राउन्ड ने एनसीसीएस को ६५-९ के अंतर से पराजित किया। पहले क्वार्टर में ही १८-२ की बढ़त बनाकर ट्रेनिङ ग्राउन्ड ने अंत तक अपनी बढ़त को बनाए रखा और क्रमशः १२-४, १२-० और २३-३ के स्कोर से मैच खत्म किया। तीन टीमों वाले समूह ‘बी’ से ट्रेनिङ ग्राउन्ड विजेता बनकर सेमीफाइनल में पहुंचा है, जबकि बलर्स उपविजेता बनकर सेमीफाइनल में जगह बनाने में सफल रहा।

पुरुष वर्ग में केभीसी हाउण्ड्स ने सोलोलाई ८७-८५ और डा एरी ने बलर्स को ७४-४८ से हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह बनाई। केभीसी के पासाङ मास्के ने ३४ और डा एरी के विक्रम डंगोल ने ३३ अंक बनाए जो उत्कृष्ट प्रदर्शन था।

इसके साथ ही डिफेंडिंग चैंपियन नेपाल आर्मी, कीर्तिपुर, इंजीनियिरिंग, टाइम्स और बूढानीलकण्ठ पुरुष वर्ग के क्वार्टरफाइनल में प्रवेश कर चुके हैं।

सिरहामें भूमिहीन दलित परिवारों को 12 हाते ट्रैक्टर वितरित

सिरहा के नवराजपुर गाउँपालिका में भूमिहीन दलित परिवारों को खेतीपाती में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 8 लाख 42 हजार 953 रुपये मूल्य के 12 हाते ट्रैक्टर वितरित किए गए हैं। स्थानीय गाउँपालिका, दलित जनकल्याण युवा क्लब और मेनोनाइट सेंट्रल कमिटी के सहयोग से संचालित परियोजना के तहत 304 भूमिहीन सदस्यों को लाभ हुआ है। पड़ोसी वरियारपट्टि गाउँपालिकाके 4 वडाओं के 8 समूहों को भी 5 लाख 61 हजार 968 रुपये मूल्य के हाते ट्रैक्टर सौंपे गए हैं। 28 जेठ, सिरहा।

सिरहा के दक्षिणी सीमावर्ती नवराजपुर गाउँपालिका में भूमिहीन दलित परिवारों को खेती में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 12 हाते ट्रैक्टर वितरित किए गए हैं। ‘एकीकृत जीविकोपार्जन तथा कृषि सुधार परियोजना’ के अंतर्गत पाँच वडाओं के 38 कृषक समूहों में से 12 समूहों को हाते ट्रैक्टर प्रदान किए गए हैं। इस परियोजना में गाउँपालिका, दलित जनकल्याण युवा क्लब और मेनोनाइट सेंट्रल कमिटी ने सहयोग किया है।

क्लब के अध्यक्ष उमेकुमार विसुन्के ने बताया कि 12 समूहों में शामिल 304 सदस्य इन्हें बारी-बारी से उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा, “हाते ट्रैक्टर के साथ-साथ इंजन, गियर तेल और डीजल भी उपलब्ध कराए गए हैं।” परियोजना के तहत भूमिहीन दलित परिवारों को लीज पर ली गई जमीन में अनाज और सब्जी की खेती करने और आय के लिए किराना सहित घूमने वाले कपड़ों की दुकान संचालित करने में भी सहायता दी गई है।

सामाजिक परिचालक सन्तोषकुमार विसुन्के के अनुसार, हाते ट्रैक्टर संचालन के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया गया है और प्रत्येक समूह में एक चालक नियुक्त किया गया है। स्थानीय सुलेना सदाय के अनुसार, परियोजना के माध्यम से वार्षिक 41 हजार 100 रुपये में लीज पर ली गई दो विघा पाँच कठ्ठा से अधिक जमीन पर 10 भूमिहीन परिवार खेती कर रहे हैं। खेती से परिवार की खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ बचत भी शुरू हो गई है। इसी प्रकार, पड़ोसी वरियारपट्टि गाउँपालिका के चार वड़ों के आठ समूहों को 5 लाख 61 हजार 968 रुपये मूल्य के हाते ट्रैक्टर उपलब्ध कराए गए हैं, परियोजना संयोजक लालप्रसाद पोखरेल ने बताया। उनके अनुसार, लीज पर उपलब्ध कराई गई जमीन पर खेती करके भूमिहीन दलित परिवार अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं। वरियारपट्टि गाउँपालिका-3 के वडाध्यक्ष विनोदकुमार यादव ने कहा कि भूमिहीन दलित परिवारों के सुरक्षित आवास, बाल-बालिकाओं की शिक्षा, सफाई और सामाजिक सुधार के लिए वडास्तर से भी पहल की जा रही है।

फीफा विश्वकप 2026: इतिहास का सबसे बड़ा फुटबॉल महाकुंभ आज से शुरू

फीफा विश्वकप के लगभग एक शताब्दी पुराने इतिहास में 23वां संस्करण अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक माना जा रहा है। विश्वकप शुरू होने से पहले ही इस संस्करण ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फीफा विश्वकप 2026 का 23वां संस्करण आज रात मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच उद्घाटन मैच के साथ उत्तरी अमेरिका में शुरू हो रहा है। इतिहास में पहली बार तीन देशों में आयोजित होने वाले इस विश्वकप में रिकॉर्ड 48 टीमें 104 मैच खेलेंगीं। इस बार फीफा विश्वकप का कुल पुरस्कार राशि 65 करोड़ 50 लाख अमेरिकी डॉलर निर्धारित की गई है, जिसमें विजेता को 5 करोड़ डॉलर पुरस्कार मिलेगा। 28 जेठ, काठमांडू।

फुटबॉल विश्व का सबसे चर्चित खेल है, जिसे विश्वव्यापी खेल भी कहा जाता है। दुनिया के 200 से अधिक देशों में फुटबॉल खेला जाता है, जो इसकी लोकप्रियता को स्पष्ट करता है। फुटबॉल की लोकप्रियता वैश्विक है और इस खेल का विश्वकप हमेशा विशेष चर्चा का विषय होता है। अभी मुख्य चर्चा का केंद्र फीफा विश्वकप 2026 है, जो आज रात से उत्तरी अमेरिका में शुरू हो रहा है। मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक एस्तादियो एज़्टेका में घरेलू समर्थकों के सामने मेक्सिको दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उद्घाटन मैच खेलेगा। नेपाली समयानुसार यह मैच आधी रात 12:45 बजे शुरू होगा।

यह विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा महोत्सव, विश्व खेलों का सबसे बड़ा प्रतियोगितापूर्ण आयोजन, और विश्व भर के अरबों समर्थकों की भावनाओं को समेटने वाला फीफा विश्वकप का 23वां संस्करण है। मेक्सिको दक्षिण अफ्रीका को घरेलू मैदान पर मेजबानी देकर फीफा विश्वकप 2026 का औपचारिक आरंभ करेगा। विश्व भर के हजारों खिलाड़ी अब अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में विश्वकप के लिए जुट रहे हैं। लाखों दर्शक सीधे स्टेडियम में मैच देखने के लिए तैयार हैं, वहीं करोड़ों दर्शक विभिन्न माध्यमों से फुटबॉल का आनंद ले रहे हैं। फीफा विश्वकप की ट्रॉफी जीतने के एकलौते सपना को लेकर 48 टीमें इस फुटबॉल महाकुंभ की तैयारी में जुटी हैं।