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लेखक: space4knews

ग्रान्डी स्टार्स फ़ाइनल में पहुँची

समाचार सारांश

समीक्षित।

  • पाँचवीं नखिपोट खुली बास्केटबॉल प्रतियोगिता के महिला वर्ग में ग्रान्डी स्टार्स ने बलर्स को ६१–२२ से हराकर फाइनल में जगह बनाई।
  • ग्रान्डी की विनामनि योञ्जन ने १८ अंक बनाए।
  • पुरुष वर्ग में आईएमएस कीर्तिपुर, इंजीनियरिंग, नेपाल आर्मी और बूढानीलकण्ठ सेमीफाइनल में पहुंचे हैं।

२८ जेठ, काठमांडू। पाँचवीं नखिपोट खुली पुरुष एवं महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता के महिला वर्ग में ग्रान्डी स्टार्स ने इस गुरुवार फाइनल में प्रवेश किया है।

नखिपोट में आयोजित नखिपोट यूथ क्लब के कवर हाल में ग्रान्डी ने बलर्स को ६१–२२ के विशाल अंतर से पराजित किया। विजेता टीम की विनामनि योञ्जन ने १८ अंक जोड़े। ग्रान्डी ट्रेनिङ ग्रान्ड और बूढानीलकण्ठ से विजेता के साथ उपाधि के लिए भिड़ेगी।

पुरुष वर्ग में आईएमएस कीर्तिपुर ने डा एरी को ७३–६१ से हराया जबकि इंजीनियरिंग ने आईएसए नेपाल को ५८–५३ से, नेपाल आर्मी ने केवीसी हाउन्ड्स को ८९–७६ से, और बूढानीलकण्ठ ने टाइम्स को ४६–४२ से पराजित कर सेमीफाइनल स्थान सुनिश्चित किया है। कीर्तिपुर के अभिषेश सिंह और साइरस थापा मगर ने समान रूप से १६–१६ अंक बनाए, जबकि इंजीनियरिंग के समिर उप्रेती ने २१, आर्मी के प्रज्ज्वल महर्जन ने २४ और बूढानीलकण्ठ के विजय लामाले १५ अंक जोड़े।

सेमीफाइनल में नेपाल आर्मी का मुकाबला बूढानीलकण्ठ से होगा, जबकि इंजीनियरिंग कीर्तिपुर से भिड़ेगी। प्रतियोगिता में शुक्रवार को पुरुष वर्ग में दो और महिला वर्ग में एक, कुल तीन सेमीफाइनल मुकाबले खेले जाएंगे।

बजट कानून हो, माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का टेक्स्ट या एक्सेल का फॉर्मुला नहीं

समाचार सारांश

  • संसद में पंजीकृत आर्थिक विधेयक में वित्त मंत्रालय ने कर दरों में मनमाने रूप से संशोधन किया है।
  • संशोधन के तहत जलविद्युत, सिनेमा हॉल और निजी स्कूल शुल्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी कर छूट और अन्य सुविधाएं जोड़ी गई हैं।
  • वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने संसद में प्रस्तुत बजट को केवल तकनीकी त्रुटि सुधार करार देते हुए मीडिया पर आलोचना की है।

२८ जेठ, काठमांडू। बुधवार सुबह प्रतिनिधि सभा अर्थ समिति में वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा, ‘१६ पेज ग़ायब होने की बात लिखी गई, नेपाल के पत्रकार माइक्रोसॉफ्ट वर्ड इस्तेमाल कर सकते हैं या नहीं, मुझे नहीं पता। थोड़ा सा एक मिलीमीटर खींचने पर लगभग १५-२० पेज ऊपर-नीचे हो सकते हैं। आप लोगों के बच्चे से भी पूछ सकते हैं। अगर आप खुद वर्ड इस्तेमाल करते हैं तो पता चलेगा। …आपको समझाने के बाद एक भी बदलाव नहीं हुआ है।’

संसद में प्रस्तुत बजट में मनमाने ढंग से कर दरों में संशोधन किए जाने के बाद मीडिया ने इसे उजागर किया। लेकिन वित्त मंत्री ने इस गलती को उजागर करने वाले मीडिया को गिरोह तक कह दिया।

क्या सच में संसद में पंजीकृत आर्थिक विधेयक में वित्त मंत्रालय को ‘एक मिलीमीटर भी’ बदलाव करने की अनुमति है? वित्त मंत्री ने संसद की समिति में किए गए संशोधनों की सूची भी पेश की है। क्या पंजीकृत विधेयक में मंत्रालय द्वारा मनमाना संशोधन करना और संसद सचिवालय को सूचित करना उचित है?

इन विषयों को समझने के लिए अभी चल रहे विवाद और बजट प्रक्रिया की जानकारी जरूरी है, जिसे हम आगे विस्तार से देखेंगे।

जलविद्युत परियोजना को वैट से छूट, ईवी कारों पर कर छूट, सिनेमा हॉल खोलने वालों को 10 साल तक आयकर छूट, विद्यार्थियों के शिक्षा शुल्क पर अभिभावकों को कर छूट – ये सभी व्यवस्थाएं प्रारंभिक बजट में नहीं थीं, बाद में जोड़ी गईं। ये तकनीकी त्रुटि नहीं, बड़े कर सम्बंधित संशोधन हैं जो इस विवाद का केंद्र हैं।

इस वजह से बजट की व्यवस्थाएं जन-हितैषी या विकास पर केंद्रित हैं या नहीं, उससे अधिक विवाद कर दरों में मनमाने बदलाव पर केंद्रित है।

इस विषय पर चार मुख्य प्रश्न महत्वपूर्ण हैं:

१. क्या बजट, जो वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है और संसद में पंजीकृत विधेयक होता है, उसमें मंत्रालय संशोधन कर सकता है?

२. वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट और वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध बजट में क्या अंतर हैं और इसका किसे लाभ या नुकसान?

३. क्या वित्त मंत्री के कथन अनुसार सिर्फ सामान्य त्रुटि सुधारी गई है या मूल सामग्री में परिवर्तन हुआ है?

४. क्या यह पहली बार है जब ऐसी मनमानी संशोधन हुए हैं या इससे पहले भी होता रहा है?

अब वर्तमान विवाद से शुरू करते हैं।

संसद में प्रस्तुत बजट क्या था और मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर क्या बदल दिया?

१५ जेठ को वित्त मंत्री वाग्ले ने बजट और आर्थिक विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जिसे आधिकारिक दस्तावेज़ माना गया। इसका संशोधन अधिकार केवल संसद का है।

लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसके अगले दिन अपनी वेबसाइट से बजट फाइलें हटाकर पुनः अपलोड करने, फिर हटाने का काम कम से कम चार बार किया। केवल फाइल ही नहीं, सात शीर्षकों में कर दरों में मनमाने बदलाव किए गए।

कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं:

वित्त मंत्री ने पहले ही संसद में संशोधनों की जानकारी दी है और हम यह स्पष्ट करेंगे कि इन संशोधनों का क्या असर होता है।

१. बिजली में वैट छूट: छोटे से लेकर बड़े व्यवसाय तक

संसद सचिवालय में पंजीकृत विधेयक की अनुसूची १ में यह स्पष्ट था कि घरेलू उपभोक्ताओं को महीने में ५० यूनिट तक बिजली पर वैट छूट मिलेगी, पर व्यावसायिक पक्ष को वैट देना होगा।

यह प्रावधान प्रारंभिक विधेयक में वेबसाइट पर दिखता था।

लेकिन तीसरे संशोधन के बाद वेबसाइट पर प्रावधान बदलकर कुछ इस प्रकार हुआ:

संशोधित प्रावधान:

‘विद्युत् शक्ति के कारोबार करने वाले व्यवसाय से विद्युत् शक्ति के ही कारोबार करने वाले व्यवसाय को बेची गई बिजली पर छूट मिलेगी।’ अर्थात्, जलविद्युत उत्पादक विद्युत प्राधिकरण को बेचने वाली बिजली पर वैट नहीं देना होगा, पर घरेलू उपभोक्ता ५० यूनिट से ऊपर बिजली उपयोग करने पर वैट देंगे।

सामान्य जनता को भी कर देना पड़ेगा, जबकि उत्पादक वैट नहीं देंगे। उत्पादक दावा करते रहे हैं कि वैट लागू होने से बिजली उत्पादन पर लागत कम होगी।

२. नए सिनेमा हॉल को १० साल तक आयकर छूट

यह व्यवस्था संसद में प्रस्तुत बजट में नहीं थी, पर बाद में वेबसाइट पर संशोधित कर जोड़ी गई। महानगर क्षेत्र के बाहर खुले सिनेमा हॉल को १० साल तक कर छूट दी गई।

यह ग्रामीण या उपनगर क्षेत्रों में फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने जैसा दिखता है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर कर लगा रखा है जबकि मनोरंजन उद्योग को इतनी लंबी छूट देना नीति के विरुद्ध है।

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कई विषयों का उल्लेख किया, लेकिन इनमें यह विषय आर्थिक विधेयक में नहीं था।

३. निजी विद्यालय शुल्क में आयकर छूट

संसद में पंजीकृत विधेयक में यह छूट नहीं थी, पर मंत्रालय ने संशोधन में इसे आयकर अधिनियम की अनुसूची १ में जोड़ा कि अभिभावक शिक्षा शुल्क का २५ प्रतिशत या २५ हजार रुपये तक कर में कटौती कर सकते हैं।

आसान भाषा में, अभिभावक अपने शैक्षिक खर्च का २५ हजार रुपये तक आय से घटाकर कर दे सकते हैं।

यह व्यवस्था मूल बजट में नहीं थी, संशोधित दस्तावेज में जोड़ी गई।

४. ब्रिफकेस, वॉलेट, सूटकेस के कस्टम दर में दोगुनी वृद्धि

पहले इन पर १५ प्रतिशत कस्टम लगती थी, अब वित्त मंत्रालय ने इसे बढ़ाकर ३० प्रतिशत कर दिया है। यह भी मूल बजट में नहीं है, वेबसाइट पर जोड़ा गया है।

५. ईवी वाहनों पर सड़क निर्माण शुल्क में भिन्नता

आर्थिक विधेयक में सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर ५ प्रतिशत शुल्क था, लेकिन बाद में संशोधन कर ईवी वाहनों में २० लाख रुपये तक की क्षमता वाले वाहनों पर मात्र २.५ प्रतिशत शुल्क लगाने की व्यवस्था जोड़ी गई।

यह बड़ा कस्टम मूल्य वाले वाहनों को बड़ी छूट देगा। वित्त मंत्री ने पूरी बजट रिपोर्ट में कोई बदलाव नहीं होने का दावा किया है।

६. स्वच्छ पूर्वाधार निवेश शुल्क में छूट

ईवी वाहनों से अंतःशुल्क खत्म कर नए स्वच्छ पूर्वाधार निवेश शुल्क में छूट दी गई है। यह भी विधि के दायरे में आने वाला विषय है।

७. पेट्रोल पर राशि या प्रतिशत?

आर्थिक विधेयक में पेट्रोल और डीजल पर १० प्रतिशत हरित कर था, लेकिन संशोधन में इसे मात्र रु १० शुल्क करने का प्रावधान जोड़ा गया। यह बदलाव मनमाने गलती मात्र नहीं है।

क्या संसद में पंजीकृत बजट में वित्त मंत्री संशोधन कर सकते हैं?

बजट केवल वित्त मंत्री का भाषण नहीं, बल्कि संसद में पंजीकृत कानून है। यह देश के आर्थिक नियमों को बाध्य करता है। यह माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के टेक्स्ट या एक्सेल के फॉर्मूला जैसा नहीं है। संसद में प्रस्तुत विधेयक में वित्त मंत्री एक भी शब्द, पूर्णविराम या कॉमा नहीं बदल सकते। लेकिन वाग्ले ने सात- सात बड़े संशोधन किए, जिससे विवाद हुआ।

उन्होंने कहा, ‘पहले के मंत्री भी ऐसा करते थे।’ लेकिन इतिहास में जब ऐसा होता है तो मीडिया सवाल उठाता है, कुछ मंत्रियों ने इस्तीफा दिया और संसदीय जांच समितियां भी बनीं।

डा. रामशरण महत, डा. युवराज खतिवडा, भरतमोहन अधिकारी, विष्णु पौडेल जैसे मंत्रियों के समय भी पत्रकारों ने सवाल करना बंद नहीं किया और वे जवाबदेह भी रहे। किसी पत्रकार को गिरोह का सदस्य होने का प्रमाण नहीं मिला।

वित्त मंत्री ने वरिष्ठ पत्रकार और सांसद सुम्निमा उदास को भी नजरअंदाज किया है, जिन्होंने सवाल उठाकर सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित की है।

नेपाली समाज में कहा जाता है – शिक्षित होना और जागरूक होना अलग बात है। एक अनपढ़ सासू मां बड़ी परिवार संभाल सकती हैं, जबकि पीएचडी प्राप्त पोती-नाती परिवार में कलह ला सकती हैं। वित्त मंत्री को अपनी भूमिका की वास्तविकता समझने का समय आ गया है।

पत्रकार गिरीसहित ६ व्यक्तियों को ८ करोड़ रूपए का भुगतान कर जमानत पर रिहा करने का आदेश

जेठ २७, पोखरा। पोखराका मित्रमिलन बचत तथा ऋण सहकारी संस्था लिमिटेड के ठगी प्रकरण में पूरक अभियोग लगे ६ व्यक्तियों को धरौटी पर रिहा करने का आदेश कास्की जिला अदालत ने दिया है।

जिला न्यायाधीश श्यामप्रसाद श्रेष्ठ की अदालत ने मंगलवार को प्रतिवादियों से दावा किए गए बिगो के बराबर नगद या बैंक जमानत लेकर रिहा करने का आदेश दिया।

६ व्यक्तियों से कुल ८ करोड़ २४ लाख ६२ हजार २०३ रुपए का बिगो दावा किया गया था। कास्की जिला अदालत के सूचना अधिकारी रामबहादुर किसान ने बताया कि बिगो के बराबर राशि जमा कर रिहा करने का आदेश हुआ है।

अदालत ने सहकारी के धन हिनामिना में शामिल भरत भट्टराई से ३ करोड़ ५१ लाख ६३ हजार २०४ रुपए बिगो भरने को कहा है।

पत्रकार अर्जुन गिरी के लिए ३ करोड़ १८ लाख ६ हजार २५२ रुपए का बिगो तय किया गया है। सहकारी के उपाध्यक्ष विजय लम्साल से ६३ लाख ११ हजार २३३ रुपए भरकर रिहा करने का आदेश हुआ है।

सहकारी के शेयर सदस्य और संचालन समिति से सम्बंधित राजु बराल से ३६ लाख ८० हजार २३९ रुपए, राष्ट्रिय सहकारी बैंक के कर्मचारी संतोष घिमिरे से ३१ लाख १ हजार २७५ रुपए और शेयर सदस्य बुद्धिसागर पौडेल से २४ लाख रुपए का बिगो तय किया गया है।

बचतकर्ताओं का पैसा वापस करने की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए उन्होंने अपनी चल-अचल व पैतृक संपत्तियों से भी रकम लौटाने को तैयार रहने की बात कही है, जो आदेश में उल्लेखित है।

सहकारी ठगी का मामला २०८० साल में अदालत में दायर किया गया था। अध्यक्ष रमण पौडेल, व्यवस्थापक किरण अधिकारी समेत वे फिलहाल पुर्पक्ष के लिए जेल में हैं।

अदालत ने बिगो अलग करने के बाद पूरक अभियोग दायर करने का आदेश दिया था। विशेषज्ञों से प्रत्येक प्रतिवादी के बिगो का खुलासा कराया गया और ऋणी को भी प्रतिवादी बनाया गया, जिससे आगे के अभियोग लगाए गए, क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बयान दिया।

कुछ लोगों ने सक्षम राशि भी जांच के दौरान जमा कराई है, यह जानकारी जिला न्यायधिवक्ता कमला काफ्ले ने दी।

मित्रमिलन सहकारी में बचतकर्ताओं के पैसों के हिनामिने की शिकायत के बाद नेपाल सरकार ने सहकारी ठगी का केस दर्ज किया। पहले दायर मामले में ये आरोपी २०८० मंसिर के आसपास गिरफ्तार होकर जेल में बंद थे।

मित्रमिलन सहकारी प्रकरण में गण्डकी प्रदेश के पूर्व सहकारी रजिस्ट्रार उदयबहादुर पराजुली को उच्च अदालत पोखरा के आदेश पर २० लाख रुपए धरौटी देकर २०८० चैत में रिहा किया गया था।

अदालत के आदेश में उल्लेख है कि वे लंबे समय से जेल में थे, लेकिन मामले की अंतिम सुनवाई और गवाहों के बयान अभी बाकी हैं।

अदालत ने आदेश में बताया कि प्रतिवादियों ने सहकारी से जुड़ी कारोबार, शेयर सदस्यता तथा संचालन समिति में होने को स्वीकार किया, परंतु सहकारी ठगी का दोष अस्वीकार किया।

वे बचतकर्ताओं के पैसे वापस करने के लिए अपनी चल-अचल व पैतृक संपत्तियों से दायित्व उठाने को तैयार हैं, यह भी बयान आदेश में शामिल है।

आदेश में यह निष्कर्ष निकाला गया कि प्रतिवादी भागने, सबूत मिटाने या जांच प्रभावित करने का कोई खतरा फिलहाल नहीं है। अदालत ने सहकारी ऐन संशोधन के तहत सहकारी ठगी मामलों में मिलापत्र की व्यवस्था तथा राशि लौटने की संभावना को भी ध्यान में रखा है।

मित्रमिलन बचत तथा ऋण सहकारी में बचतकर्ताओं के पैसे वापस न मिलने, निक्षेपकों की मांग पूरी न होने और संस्थान की वित्तीय स्थिति खराब होने की शिकायतें सामने आने के बाद मामला उजागर हुआ। बचतकर्ताओं की शिकायत पर जांच शुरू हुई।

जांच में सहकारी के धन जोखिम में होने, संचालन और प्रबंधन स्तर के लोगों की भूमिका पर सवाल उठने तथा बचतकर्ताओं को पैसा वापस न मिला पाने पर सहकारी ठगी का मामला दर्ज किया गया। बाद में विस्तृत जांच से कुछ अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आई, इसलिए पूरक अभियोग दायर किए गए।

जांच रिपोर्ट में सहकारी की बचत राशि सुरक्षित न होने, निक्षेपकों के पैसों पर खतरा होने और वित्तीय कारोबारी अनियमितताओं का उल्लेख था। बचतकर्ताओं को वापस रकम नहीं मिलने के कारण शिकायतकर्ताओं की दावों को आधार बनाकर अभियोजन शुरू किया गया।

अदालत ने पूरक अभियोग की सुनवाई में प्रतिवादियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी खुलने, बिगो चुकाने की प्रतिबद्धता जताने तथा मामला अंतिम परिणाम तक पहुंचने में समय लगने के कारण निरंतर हिरासत आवश्यक नहीं समझी।

अगर धरौटी या बैंक जमानत नहीं दी गई तो प्रतिवादियों को पूर्ववत् जेल में ही रखने और कास्की कारागृह भेजने का आदेश दिया गया।

मित्रमिलन सहकारी में ऋणियों को भी विपक्षी बनाकर पूरक अभियोग लगाया गया। इस सहकारी में ६० लोगों को विपक्षी बनाकर पूरक अभियोजन दर्ज किया गया था।

मित्रमिलन सहकारी प्रकरण में ७१४ बचतकर्ताओं ने ३१ करोड़ ७८ लाख रुपए वापस न मिलने की शिकायत की, जिसके आधार पर संचालक, पदाधिकारी, कर्मचारी और ऋणियों सहित शुरु में ३३ लोगों के खिलाफ सहकारी ठगी का मामला दर्ज हुआ था। बाद में ६ और लोगों के खिलाफ पूरक अभियोग दायर कर ८ करोड़ २४ लाख ६२ हजार २०३ रुपए का बिगो दावा किया गया।

फिफा विश्वकप 2026 का उद्घाटन समारोह संपन्न

मेक्सिको के एस्टेका स्टेडियम में एक विशेष समारोह आयोजित कर फिफा विश्वकप 2026 का औपचारिक उद्घाटन किया गया है। उद्घाटन समारोह के बाद इसी स्टेडियम में सह-आयोजक मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच विश्वकप का पहला मैच शुरू हुआ है। उद्घाटन कार्यक्रम में मेक्सिकी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हुए शाकिरा, बर्ना बॉय और जे बाल्विन समेत कई अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने संगीत प्रस्तुति दी।

29 जेठ, काठमांडू। फिफा विश्वकप 2026 के उद्घाटन कार्यक्रम के सफल समापन की जानकारी मिली है। मेक्सिको के एस्टेका स्टेडियम में विविध संगीत प्रस्तुतियों के साथ विश्वकप का औपचारिक उद्घाटन किया गया। उसी स्टेडियम में सह-आयोजक मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच विश्वकप का पहला मुकाबला शुरू हुआ। उद्घाटन समारोह में मेक्सिकन संस्कृति, परंपरा और कला को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर आदिवासी कलाकारों की प्रस्तुति, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ संगीत जगत के अंतरराष्ट्रीय और लैटिन अमेरिकी स्टार कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। समारोह में शाकिरा, बर्ना बॉय, जे बाल्विन, टाइला, अलेजान्द्रो फर्नांडेज़, बेलिंडा, डैनी ओसुन, लिला डाउन्स, लास एंजेल्स अजूल्स और मन जैसे प्रतिष्ठित कलाकारों ने संगीत प्रस्तुत किया।

मैं राष्ट्रभक्त हूँ

मैं हिमाल की तरह अटल हूँ, मैं पहाड़ की तरह अविरल हूँ, मैं तराई की तरह निश्चल हूँ। मैं नेपाली माँ के रक्त हूँ। मैं देशभक्त हूँ। मैं राष्ट्रभक्त हूँ। पूर्वजों ने इसी मिट्टी से प्रेम किया। पूर्वजों ने इसी भूमि की पूजा की। पूर्वजों द्वारा सिखाए रास्ते पर मैं चल रहा हूँ। मातृभूमि के लिए मैं सशक्त हूँ। मैं देशभक्त हूँ। मैं राष्ट्रभक्त हूँ। राष्ट्र की सेवा ही मेरा धर्म है। राष्ट्र की सेवा ही मेरा कर्म है। राष्ट्र की सेवा ही मेरा अंतिम मर्म है। मातृभूमि के लिए मैं सशक्त हूँ। मैं देशभक्त हूँ। मैं राष्ट्रभक्त हूँ।

कार्यकारी अध्यक्ष के अभाव में धितोपत्र बोर्ड के कार्य ठप्प, शेयर बाजार अस्थिर

नेपाल धितोपत्र बोर्ड में करीब दो महीने से कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति न होने के कारण शेयर बाजार और बोर्ड के नियमित कार्य ठप हैं। सिफारिश समिति ने जेठ ४ को चार नाम सिफारिश किए थे, लेकिन मंत्रिपरिषद ने २५ दिन तक अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है। अध्यक्ष के अभाव में नए शेयर जारी करने की स्वीकृति, बोनस शेयर सूचीकरण और वित्तीय संस्थाओं के मर्जर प्रक्रिया भी रुकी हुई है। २८ जेठ, काठमांडू। सरकार द्वारा नेपाल धितोपत्र बोर्ड (सेबोन) के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति न कर पाने से पूंजी बाजार में व्यापक अस्थिरता फैल गई है। प्रशासनिक प्रमुख भी होने वाले अध्यक्ष के न होने पर बोर्ड के नियमित कार्य प्रभावित हो रहे हैं और पूंजी बाजार में नकारात्मक संदेश जा रहा है।

जनआंदोलन के बाद हुए आम चुनाव में स्पष्ट बहुमत के साथ स्थापित राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों को अध्यादेश के माध्यम से हटाया गया। सरकार के अध्यादेश लाने से कुछ दिन पहले ही धितोपत्र बोर्ड के अध्यक्ष सन्तोष नारायण श्रेष्ठ ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने लगभग दो महीने पहले अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है। श्रेष्ठ के इस्तीफा देने के बाद सरकार ने अध्यक्ष नियुक्ति के लिए सिफारिश समिति का गठन किया। समिति ने नाम सिफारिश करने के २५ दिन बाद भी बोर्ड को नेतृत्व नहीं मिल पाया है। समिति द्वारा नाम सिफारिश के बाद भी मंत्रिपरिषद की पाँच बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अध्यक्ष नियुक्ति नहीं हो सकी है। सिफारिश समिति ने जेठ ४ को डॉ. नवराज अधिकारी, विनय देव आचार्य, मुकुंद कुमार क्षेत्री और डॉ. गोपाल प्रसाद भट्ट के नाम सिफारिश किए थे।

सरकार द्वारा तय समय में अध्यक्ष नियुक्ति के लिए नाम सिफारिश करने वाली समिति के सदस्य भुवनकुमार दाहाल ने बताया, “सरकार को नाम भेजे जाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में देरी के कारणों की जानकारी सरकार ही देगी।” सरकार के प्रवक्ता व शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने भी सार्वजनिक रूप से अध्यक्ष नियुक्ति प्रक्रिया में देरी स्वीकार की है। बोर्ड में कार्यकारी अध्यक्ष के अभाव में शेयर निवेशकों का मनोबल कमजोर हुआ है, जो नेपाल स्टॉक एक्सचेंज (नेप्से) के दैनिक कारोबार में भी स्पष्ट दिखाई देता है। नए सर्वसाधारण निर्गम तथा हकप्रद शेयर की स्वीकृति नहीं हो पा रही है।

इसी प्रकार, कुछ कंपनियों द्वारा बोनस शेयर बोर्ड में दर्ज न कराने के कारण नेप्से में उन शेयरों का सूचीकरण रुका हुआ है। बोर्ड के कर्मचारी कहते हैं कि विभिन्न लाइसेंसिंग प्रक्रियाएं भी बोथपत्र बोर्ड में ठप हैं। एक मर्चेन्ट बैंकर के अनुसार, “बोनस शेयर वार्षिक साधारण सभा से पारित होकर कंपनी द्वारा सरकार को कर सहित जमा किया जाता है, और निवेशकों की पूंजी भी नियमित रूप से बोर्ड में दर्ज होती है, लेकिन बोर्ड से दर्जि प्रमाण पत्र न मिलने के कारण नेप्से में सूचीकरण रुका हुआ है।”

उक्त मर्चेन्ट बैंकर ने कहा, “सभी प्रक्रियाएँ पूरी हो जाने के बाद भी पत्र न मिलने पर सूचीकरण रोका जाने से निवेशक अपनी भागीदारी को दूसरे बाजार में बेच तक नहीं पा रहे हैं।” एक अन्य मर्चेन्ट बैंकर के अनुसार, सामूहिक निवेश कोष योजनाओं के विस्तार के प्रयास भी ठप्प हैं। अध्यक्ष न होने के कारण आधा दर्जन से अधिक मर्चेन्ट बैंकर ने सामूहिक निवेश कोष योजनाओं के आकार बढ़ाने के लिए बोर्ड में आवेदन किया है, लेकिन वे रुके हुए हैं। पोखरा फाइनान्स और समृद्धि फाइनान्स के मर्जर को राष्ट्र बैंक ने ३० दिनों में पूरा करने को कहा था, फिर भी धितोपत्र बोर्ड ने इसे रोका हुआ है। अध्यक्ष की स्वीकृति के बिना मर्जर समाप्त नहीं हो पाने के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है, मर्चेन्ट बैंकरों का कहना है।

वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधि को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने को कहा गया है, लेकिन बोर्ड के एक कर्मचारी के अनुसार काम नहीं हो रहा है। “कानून के अनुसार नियुक्त व्यक्ति को काम करना चाहिए था, लेकिन मंत्रालय का प्रतिनिधि अभी तक नहीं आया है और काम रुका हुआ है। पहले बजट निर्माण में व्यस्तता थी, अब भी वह नहीं आए हैं,” उन्होंने बताया। अध्यक्ष न होने के कारण बोर्ड औपचारिक रूप से वार्षिकोत्सव भी मनाने में असमर्थ रहा है। अधिकांश नियमित कार्य ठप हैं। कर्मचारियों के प्रशिक्षण भी रुके हुए हैं। कार्यकारी निर्देशक द्वारा संभव कार्यों को छोड़कर सभी कार्य ठप हैं। बोर्ड के कर्मचारी कहते हैं, “धितोपत्र कानून के तहत पूर्णकालिक कार्यकारी अध्यक्ष को अधिक अधिकार मिलते हैं। गैर-कार्यकारी अध्यक्ष रहने से कई कार्य रुके हैं। अध्यक्ष ही दैनिक प्रशासन का प्रमुख होता है, इसलिए अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यों में प्रभाव आना स्वाभाविक है।”

नेपाली बास्केटबल टीम सर्बिया के लिए रवाना होने को तैयार

सर्बिया में जेठ 28 से असार 2 तक आयोजित होने वाले वर्ल्ड स्कूल बास्केटबल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए नेपाली टीम सर्बिया के लिए रवाना होने वाली है। राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहताले टीम को विदाई दी है। टीम में आठ खिलाड़ी शामिल हैं, जबकि टीम प्रमुख राजकुमार कार्की और प्रशिक्षक प्रेमसुन्दर भी साथ हैं।

सर्बिया के स्कूल स्पोर्ट्स फेडरेशन के आयोजन में होने वाली इस प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों में आकार श्रेष्ठ, अद्वभित्य अग्रवाल, विपिन पोखरेल, खाईङ लिङ, आनंद पोखरेल, प्रयास थापा, सुशांत यादव और बर्दान मल्ल शामिल हैं। टीम शुक्रवार को प्रस्थान करेगी, जिसमें प्रमुख राजकुमार कार्की और प्रशिक्षक प्रेमसुन्दर भी उपस्थित रहेंगे।

ट्रम्प ने कहा– आज रात इरान पर बड़ा हमला हो सकता है, इरान ने २२ देशों को खतरे का संकेत देते हुए चेतावनी दी

२८ जेठ, काठमाडौं । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज रात इरान पर बड़े हमले की संभावना जताई है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर उन्होंने दावा किया कि अमेरिका आज रात इरान पर कड़ा हमला करेगा। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका आज रात इरान पर जोरदार हमला करेगा। इरान की नौसेना, वायुसेना, रडार, हवाई रक्षा प्रणाली और अधिकांश आक्रमणकारी क्षमताएं पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।’
इसके साथ ही ट्रम्प ने कहा है कि निकट भविष्य में अमेरिका इरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग और अन्य तेल से जुड़े बुनियादी ढांचों पर नियंत्रण स्थापित करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इरान के तेल और गैस बाजारों पर भी अमेरिकी पूर्ण प्रभुत्व कायम रहेगा।
वहीं, ट्रम्प के इस बयान के बाद इरान ने अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व के २२ देशों को चेतावनी देते हुए अपनी भूमि पर इरानी नागरिकों को निशाना बनाने से रोकने का आग्रह किया है।

सरकार होल्डिङ सेन्टरका विस्थापितहरुलाई तीन प्रकारको बीमा सेवा प्रदान गर्न तयारीमा

२८ जेठ, काठमाडौं। प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद्को कार्यालयले काठमाडौं उपत्यकाका होल्डिङ सेन्टरमा बसोबास गरिरहेका विस्थापित सुकुमवासीलाई दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा र जीवन बीमा सेवा प्रदान गर्न तीव्र तयारी गरेको जानकारी दिएको छ। सरकारले तोकेको होल्डिङ सेन्टरमा आश्रय लिइरहेका ‘भूमिहीन तथा अव्यवस्थित बसोबासी’लाई यी बीमा कार्यक्रमहरू लागू गर्ने तयारीमा छ।

प्रधानमन्त्री कार्यालयको सहजीकरणमा पूर्वाधार विकास मन्त्रालयले होल्डिङ सेन्टरमा आश्रय लिने नागरिकहरूलाई सामूहिक तथा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा साथै बालबालिकाका लागि बाल शैक्षिक योजनाको समेत सुविधा उपलब्ध गराउने योजना बनाएको छ। यसका लागि प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय, अर्थ मन्त्रालय, पूर्वाधार विकास मन्त्रालय, भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरिबी निवारण मन्त्रालय, सङ्घीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालय, नेपाल बीमा प्राधिकरण, राष्ट्रिय बीमा कम्पनी, राष्ट्रिय जीवन बीमा कम्पनी लिमिटेड, स्वास्थ्य बीमा बोर्ड र नेपाल राष्ट्र बैंकले आवश्यक तयारी पूरा गरेका छन्।

हाल काठमाडौं उपत्यकाभित्रका ६ वटा होल्डिङ सेन्टरमा करिब १,४८८ जना विस्थापितहरूले आश्रय लिइरहेका छन् भने त्यसमध्ये ९५ प्रतिशतभन्दा बढीको डिजिटल लगत संकलन भइसकेको छ। बीमा कार्यक्रमको सम्पूर्ण लागत र प्रिमियम खर्च सरकारले व्यहोर्नेछ र त्यसका लागि आवश्यक स्रोत पनि सुनिश्चित गरिएको छ। सरकारले यो कार्यक्रमलाई कम्तीमा १० वर्षसम्म निरन्तरता दिने नीति बनाएको छ।

विश्वकप: भू-राजनीति का नया अखाड़ा

एक ओर लाखों प्रवासियों को निकाले जाने जैसी कड़ी नीतियां और दूसरी ओर विश्वकप आयोजन के जरिए अन्य देशों का स्वागत करने वाले द्वैध चरित्र के बीच ट्रम्प और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो के लेनदेन पर आधारित संबंध विश्व फुटबॉल को कहाँ ले जा रहे हैं? न्यू जर्सी के मेटलाइफ़ स्टेडियम में हुए फाइनल मैच में पेरिस सेंट-जर्मेन को हराकर चेल्सी ने फीफा क्लब वर्ल्ड कप का खिताब जीता। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2026 के फीफा विश्वकप और 2028 के ओलंपिक की तैयारियों के लिए व्हाइट हाउस में अलग-अलग कार्यदल बनाए हैं। अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा सुनिश्चित करने और नई प्रवासी नीतियों को लागू करने के लिए खेल स्टेडियमों में भी सुरक्षा एजेंटों को तैनात किया है। 28 जेठ, काठमांडू। जुलाई 2025 में न्यू जर्सी के मेटलाइफ़ स्टेडियम में फीफा क्लब विश्वकप का फाइनल मुकाबला संपन्न हुआ। चेल्सी ने पेरिस सेंट-जर्मेन (पीएसजी) को हराकर ट्रॉफी जीती। लेकिन उसी दिन स्टेडियम के अंदर और बाहर के दृश्य दर्शाते थे कि यह प्रतियोगिता सिर्फ फुटबॉल का उत्सव नहीं है। मैदान पर बनाए गए ऊंचे मंच पर चेल्सी के कप्तान रिस जेम्स ट्रॉफी थामे खड़े थे, उनके साथी खिलाड़ी आस-पास जमा थे। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फान्टिनो के साथ ट्रॉफी हस्तांतरित करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मंच पर रुके रहे। इन्फान्टिनो चुपचाप बाहर निकल चुके थे। कुछ क्षण के लिए समारोह में घबराहट दिखी। चेल्सी के खिलाड़ी एक-दूसरे को देख रहे थे। राष्ट्रपति के मंच से उतरने की प्रतीक्षा में वे असमंजस में थे। अंत में गोलकीपर रॉबर्ट सांचेज ने कप्तान जेम्स को ट्रॉफी ऊपर उठाने का संकेत दिया। इसके बाद चेल्सी की टीम अपने कप्तान के इर्द-गिर्द झूमा। लेकिन खुशी भरे उस क्षण में ट्रम्प भी वहां मौजूद थे, मानो वे टीम के एक सदस्य हों। प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित कोल पाल्मर ने बाद में कहा, ‘म जानते थे वह यहाँ आएंगे, लेकिन हम नहीं जानते थे कि ट्रॉफी उठाने तक वे मंच पर रहेंगे, इसीलिए मैं थोड़ा असहज था।’ यह घटना यहीं खत्म नहीं हुई। एक वीडियो में इन्फान्टिनो ने ट्रम्प को एक मेडल दिया, जिसे ट्रम्प ने तुरंत अपनी जैकेट की जेब में डाल लिया। इतना ही नहीं, चेल्सी ने जो ट्रॉफी उठाई थी, वह असली नहीं, नकली निकली। ट्रम्प ने असली ट्रॉफी को ‘ओवल ऑफिस’ में रखने की योजना बनाई। समारोह में महाधिवक्ता पैम बॉन्डी और आंतरिक सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे। नोएम उन अधिकारियों में से हैं जो प्रवासियों पर कड़ी कार्रवाई के पक्षधर हैं। एक खेल समारोह में ‘मागा’ स्टाइल की शानदार झलक देखने को मिली। ट्रम्प और फीफा के बीच यह करीबी रिश्ता समझने के लिए हमें एक दशक पहले जाना होगा। 2015 के मई में अमेरिकी न्याय विभाग ने विश्व फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया। अमेरिकी आदेश पर स्विस पुलिस ने ज्यूरिख के ‘बोर ओ लैक’ होटल में फीफा कांग्रेस के दौरान छापा मारा। सात वरिष्ठ फुटबॉल अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। वहीं FBI और IRS ने मियामी स्थित ‘कनकाकाफ’ के मुख्यालय पर भी छापा मारा। कुल 14 लोगों पर धोखाधड़ी, घूसखोरी और संपत्ति शोधन के आरोप थोपे गए, जिन पर 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की रिश्वत लेने का आरोप था। जांच का केंद्र विश्वकप आयोजित करने के अधिकारों और मीडिया अधिकारों के वितरण के दौरान रिश्वत लेने का दावा था। अमेरिकी न्याय विभाग ने फीफा को एक आपराधिक संगठन बताया और दर्जनों अधिकारियों पर अभियोग लगाया। 2018 और 2022 के विश्वकप रूस और कतर को देने के फैसलों की गहन जांच हुई। जांचकर्ताओं के मुताबिक इन फैसलों में वोट खरीदने और आर्थिक प्रलोभन देने की बातें सामने आईं। इस कांड के चलते लंबे समय तक फीफा के अध्यक्ष रहे सेप ब्लैटर को इस्तीफा देना पड़ा। फरवरी 2016 में जियानी इन्फान्टिनो को फीफा का नया अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने सुधार और पारदर्शिता का एजेंडा लेकर एशियाई फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष शेख सलमान बिन इब्राहिम अल-खलिफाई को हराया। जीत के बाद उन्होंने कहा था, ‘मैं आप सभी का अध्यक्ष बनना चाहता हूं। फीफा ने दुख और संकट के दौर देखे हैं, लेकिन अब वे दिन खत्म हो चुके हैं।’ नौ महीने बाद, नवंबर 2016 में डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए। FBI की जांच ने पिछले दशक में फीफा को एक अंतरराष्ट्रीय अपराध का उदाहरण माना था। अमेरिका ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की इच्छा जताई थी। लेकिन ट्रम्प प्रशासन का नजरिया पूरी तरह अलग था। फीफा को अलग करने के बजाय ट्रम्प प्रशासन ने इसके नेतृत्व के साथ काम करने का रास्ता अपनाया। 2017 की शुरुआत से ही ट्रम्प और उनकी सरकार ने एक नए लक्ष्य पर काम करना शुरू किया—2026 फीफा विश्वकप की मेजबानी का अवसर पाना। ट्रम्प ने स्वयं कहा था, ‘वे मेरे से इस अभियान में जुड़ने के लिए लगातार फोन कर रहे थे। जब मैंने विश्वकप शब्द सुना, तो मैं इसके लिए तैयार हो गया।’ लेकिन इस महत्वाकांक्षा के सामने एक बड़ी बाधा थी। जनवरी 2017 में ट्रम्प द्वारा हस्ताक्षरित विवादित ‘मुस्लिम प्रतिबंध’ (कार्यकारी आदेश 13769) ने सात मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमेरिका जाने से रोक दिया था। इस आदेश की चारों ओर भारी आलोचना हुई। यूरोपीय फुटबॉल के सर्वोच्च निकाय यूईएफए के अध्यक्ष एलेक्जेंडर सेफेरिन ने कहा था कि ट्रम्प का यह कदम अमेरिका की विश्वकप दावेदारी को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था, ‘अगर राजनीतिक या लोकप्रियता बढ़ाने वाले फैसलों की वजह से खिलाड़ी आ नहीं पाए तो विश्वकप नहीं हो सकता।’ उस समय इन्फान्टिनो की भी यही राय थी। उन्होंने कहा था कि ‘विश्वकप में प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली टीमों को आयोजक देश में प्रवेश की अनुमति होना अनिवार्य है। अन्यथा विश्वकप नहीं हो सकता।’ इस बाधा को हटाने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने फीफा को पत्र लिखा, जिसमें आश्वस्त किया गया कि ‘विश्व के सभी योग्य खिलाड़ी, अधिकारी और प्रशंसक बिना किसी भेदभाव के अमेरिका आ सकेंगे।’ प्रशासन ने मुस्लिम प्रतिबंध नीति को वापस लिया और एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया। ट्रम्प ने इसे शुरुआती प्रतिबंध का ‘थोड़ा नरम और राजनीतिक रूप से सही संस्करण’ बताया। 10 अप्रैल 2017 को संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ने विश्वकप की मेजबानी की संयुक्त दावेदारी पेश की। इस दावेदारी को सुनिश्चित करने में ट्रम्प के दामाद और वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुश्नर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास करते हुए सऊदी और बहरीन के नेताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत की। 2017 में सऊदी अरब के एक गुप्त दौरे के दौरान कुश्नर ने सऊदी यूवराज मोहम्मद बिन सलमान से लंबी बातचीत की और अन्य खाड़ी देशों को मोरक्को की जगह अमेरिका-कनाडा-मैक्सिको की संयुक्त दावेदारी का समर्थन करने के लिए राजी किया। कुश्नर ने अमेरिकी फुटबॉल फेडरेशन को व्हाइट हाउस में कई बार निमंत्रण भी दिया। अंततः 13 जून 2018 को रूस के मास्को में हुए 68वें फीफा कांग्रेस में संयुक्त दावेदारी ने 134 मतों से जीत हासिल की; मोरक्को को केवल 65 मत मिले। दावेदारी जीताने के साथ-साथ प्रतियोगिता की अंतिम व्यवस्था में कुश्नर की भूमिका भी रहित। ‘द एथलेटिक’ के अनुसार, उन्होंने फीफा अध्यक्ष इन्फान्टिनो, क्षेत्रीय राजनेताओं और न्यू यॉर्क के व्यवसायियों के बीच रणनीतिक बैठक आयोजित की, जिसका उद्देश्य न्यू जर्सी के मेटलाइफ़ स्टेडियम को 2026 विश्वकप फाइनल का मुख्य स्थल बनाना था। सितंबर 2019 में इन्फान्टिनो के साथ हेलिकॉप्टर पर जाते समय ट्रम्प ने मीडिया से कहा था, ‘हमें मेरा दूसरा कार्यकाल बढ़ाना पड़ेगा क्योंकि 2026 के लिए दो साल और चाहिए। मुझे उम्मीद है कि आप मुझे 2026 में याद करेंगे।’ 20 जनवरी 2025 को ट्रम्प फिर से राष्ट्रपति बने। कार्यकाल के पहले दिन उन्होंने वाशिंगटन के ‘कैपिटल वन एरिना’ के बीच बने अस्थायी डेस्क पर बैठकर कई कार्यकारी आदेश जारी किए। यह एरिना वाशिंगटन विजार्ड्स और वाशिंगटन कैपिटल्स का घरेलू मैदान है। लगभग 20,000 समर्थकों ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया। इससे साफ हुआ कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में खेलों की बड़ी भूमिका होगी। व्हाइट हाउस लौटने के कुछ महीनों में उन्होंने सुपर बाउल, डेटोना 500, एनसीएए रेसलिंग चैंपियनशिप, UFC फाइट्स और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल फाइनल जैसी बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। अक्टूबर 2025 तक, अर्थात् ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के 10 महीनों के भीतर, उन्होंने 10 बड़ी खेल प्रतियोगिताओं में सहभागिता दर्ज की और पांच खेल संबंधित कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर भी किए। पिछले राष्ट्रपतियों के मुकाबले उन्होंने खेलों को न केवल औपचारिक उपस्थिति या नरम कूटनीति के लिए, बल्कि सक्रिय एजेंडा के तौर पर अपनाया। वे शीतयुद्धकालीन ‘राष्ट्रपति शारीरिक परीक्षण’ को फिर से जीवित कर चुके हैं। उन्होंने 2026 फीफा विश्वकप और 2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए व्हाइट हाउस में अलग-अलग कार्यदल बनाए हैं। मई 2025 में बनाए गए ‘विश्वकप 2026 कार्यदल’ की पहली बैठक की अध्यक्षता भी ट्रम्प ने की। इस कार्यदल के प्रमुख वे स्वयं हैं जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वांस, आंतरिक सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम सहित उनकी अधिकांश मंत्रिपरिषद के सदस्य शामिल हैं। बैठक में ट्रम्प ने दावा किया कि 2026 का विश्वकप इतिहास का ‘सबसे बड़ा, सुरक्षित और असाधारण फुटबॉल टूर्नामेंट’ होगा। उपराष्ट्रपति वांस ने विश्वकप देखने आने वाले पर्यटकों के लिए सीमा निर्धारण की बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि वे यहां आएं, जश्न मनाएं और खेल देखें लेकिन खेल खत्म होने के बाद वे अपने देश वापस जाएं।’ यह नीति ट्रम्प प्रशासन की प्रमुख प्रवासी नीति का प्रतिबिंब है। मंत्री नोएम के नेतृत्व में अमेरिकी आप्रवास और सीमा प्रबंधन एजेंसियां विभिन्न शहरों, धार्मिक स्थलों और पार्किंग क्षेत्रों में छापेमारी कर रही हैं। अप्रैल 2025 तक ट्रम्प प्रशासन ने दावा किया है कि 140,000 से अधिक लोगों को देश से निकाल दिया गया है। आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय ने अगस्त में कहा कि 1.6 मिलियन ‘अवैध विदेशी’ अमेरिका छोड़ चुके हैं। यह सख्त प्रवासी नीति फुटबॉल मैदानों तक फैल गई। क्लब विश्वकप के दौरान ICE एजेंट स्टेडियम में भी मौजूद थे। ICE प्रवक्ता ने ‘द मियामी हेराल्ड’ को बताया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत आंतरिक सुरक्षा और न्याय मंत्रालय के साथ मिलकर खेल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करेंगे। कुछ मामलों में प्रशासन पुराने 1798 के ‘एलियन एनिमी एक्ट’ का इस्तेमाल कर संदिग्ध अवैध प्रवासियों को बिना कानूनी प्रक्रिया के देश से निकाल रहा है। सौ से अधिक लोगों को एल साल्वाडोर की उच्च सुरक्षा जेल भेजा गया है। फीफा अध्यक्ष इन्फान्टिनो ने मार्च 2025 में ट्रम्प से कहा था, ‘अमेरिका विश्व का स्वागत करेगा। लाखों लोग आएंगे, और हम पूरी दुनिया को खुशी और आनंद देंगे। हर आने वाले को सुरक्षा और स्वागत महसूस कराना जरूरी है।’ ट्रम्प की विश्वकप नीति ने अमेरिका की विदेश नीति को नई दिशा दी है। विश्लेषकों का कहना है कि ‘अमेरिकी विदेश विभाग अपना नाम बदलकर ‘खेल विभाग’ भी रख सकता है।’ सरकारी दस्तावेजों और अधिकारियों से बातचीत में यह स्पष्ट है कि विश्वकप को विदेश विभाग द्वारा एक बड़ी प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है। दस्तावेजों में ‘स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी प्लेबुक’ शामिल है जो विश्वकप, ओलंपिक जैसे बड़े खेलों को अमेरिका की ‘सॉफ्ट पावर’ बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाए, इसके निर्देश देता है। इसमें ट्रम्प की कुछ सामाजिक नीतियों को भी आगे बढ़ाने का जिक्र है। दिसंबर में विदेश विभाग कर्मियों को 9 पृष्ठों वाला ‘स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी प्लेबुक’ वितरित किया गया था, जिसमें ‘खेलों का दशक’ नामक अवधारणा को कैसे उपयोग में लाना है, लिखा है। इस दौरान 2026 विश्वकप, 2028 और 2034 के ओलंपिक सहित अन्य महत्वपूर्ण खेल आयोजित होंगे। विश्वभर में अमेरिकी दूतावास और कूटनीतिक कार्यालय अपने स्टाफ की संख्या बढ़ा रहे हैं ताकि प्रशंसकों के लिए वीजा प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। ‘फीफा पास’ नामक एक नई वीजा प्रणाली विकसित की जा रही है, जो टिकटधारकों को वीजा साक्षात्कार में प्राथमिकता देगी। हालांकि, विदेश विभाग को दोहरे संकट का सामना है। यमन के पूर्व अमेरिकी राजदूत जेराल्ड फिअरस्टिन ने कहा, ‘विदेश विभाग के सामने दो तरह के दर्शक हैं—पहले वे विदेशी दर्शक जिन्हें स्वागत करना चाहते हैं, और दूसरे ट्रम्प प्रशासन के प्रवासी विरोधी।’ मंत्रालय को इन दोनों विरोधाभासी दृष्टिकोणों के बीच संतुलन बनाना होगा। ट्रम्प और इन्फान्टिनो का रिश्ता सिर्फ निजी दोस्ती से ज्यादा राजनीतिक गठबंधन है। इन्फान्टिनो ने ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया, ओवल ऑफिस में मुलाकात की और उनके साथ मध्य पूर्व की यात्रा भी की। ‘प्ले द गेम’ रिपोर्ट ने इन दोनों के संबंधों का विस्तृत विश्लेषण किया है, इन्फान्टिनो को महत्वाकांक्षी और चालाक राजनीतिक व्यक्तित्व बताया गया है। उन्होंने 2018 के विश्वकप के लिए क्रेमलिन से साझेदारी की, 2022 के कतर संस्करण के लिए समर्थन लिया और बाद में सऊदी अरब के शासक मोहम्मद बिन सलमान के साथ संबंध बनाए। सऊदी के आर्थिक सहयोग पर आधारित इन्फान्टिनो बड़े पैमाने पर क्लब विश्वकप जैसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रहे हैं। इन्फान्टिनो और ट्रम्प के बीच रिश्ता एक लेन-देन पर आधारित है जिसमें दोनों पक्षों को लाभ होता है। इन्फान्टिनो को अमेरिका में फीफा के लिए ट्रम्प का आशीर्वाद चाहिए जबकि ट्रम्प को एक विश्वव्यापी महोत्सव चाहिए जिसे वे अमेरिकी जीत के रूप में प्रचारित कर सकें। ट्रम्प के लिए 2026 विश्वकप एक बेहतरीन मंच है। इससे उन्हें विश्व को अमेरिका लाने का श्रेय मिलेगा, अमेरिका को विश्व के अपरिहार्य मेजबान के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा और वे यूरोप या लैटिन अमेरिका की तुलना में अमेरिकी महानता को उजागर कर पाएंगे। एनएफएल खिलाड़ियों के विरोध के बाद वे ट्रम्प की नजर में खलनायक हो गए थे, लेकिन विश्वकप उन्हें इसका उल्टा एक प्रतीक देगा। विदेशी खिलाड़ी और प्रशंसक अमेरिका आएंगे और चाहे वे चाहें या न चाहें, यहां की महानता की सराहना करेंगे। इस योजना में अमेरिका का नेतृत्व विश्व खेल निकायों में स्थापित करने का इरादा है ताकि चीन और रूस जैसे विरोधी देशों को अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों का नेतृत्व लेने से रोका जा सके। पिछले सितंबर में कुछ विदेशी मीडिया ने दावा किया था कि ट्रम्प प्रशासन यूरोपीय प्रयासों के खिलाफ इजरायल को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से हटाने की कूटनीति करेगा। विदेश विभाग के एक अधिकारी ने ‘स्काई न्यूज’ को बताया, ‘इजरायल की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को विश्वकप से प्रतिबंधित करने की किसी भी कोशिश को रोकने के लिए अमेरिका हर संभव कदम उठाएगा।’ यह सब गतिविधियां विश्व फुटबॉल समुदाय में असंतोष बढ़ा रही हैं। विश्वभर के फुटबॉल खिलाड़ियों के संगठन ‘फीफा प्रो’ ने 2025 के क्लब विश्वकप के बाद कड़ा बयान जारी किया था— ‘फुटबॉल को जिम्मेदार नेतृत्व चाहिए, शासक नहीं।’ यह बयान फीफा अध्यक्ष इन्फान्टिनो द्वारा खिलाड़ियों की भलाई पर चर्चा में अपनी संस्था को बाहर रखने पर जारी किया गया। यह इन्फान्टिनो के तानाशाह प्रवृत्ति का साफ संकेत है। ट्रम्प की कठोर नीतियां और सरकारी खर्च कटौती ने देश की 2026 विश्वकप को सफलतापूर्वक आयोजित करने की क्षमता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ‘यूएस ट्रैवल एसोसिएशन’ के अनुसार अमेरिका का हवाई परिवहन नेटवर्क विश्वकप और 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक के दौरान आने वाले पर्यटकों के भारी दबाव को संभालने में सक्षम नहीं है। फरवरी 2025 में एसोसिएशन ने रिपोर्ट जारी करते हुए सुरक्षा सुधार, हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली के आधुनिकीकरण और वीजा प्रक्रिया में सुधार की मांग की। इस बीच, ट्रम्प ने अपने सह-आयोजक और सबसे करीबी पड़ोसी देशों कनाडा और मैक्सिको के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ दिया है। सह-आयोजक देशों के साथ चल रही यह व्यापार युद्ध विश्वकप के भावना के खिलाफ है। कूटनीतिक तनाव सुरक्षा समन्वय में बाधा उत्पन्न कर सकता है। विदेश विभाग की ‘स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी प्लेबुक’ अमेरिकी कूटनीतिज्ञों को आगामी खेल आयोजनों का फायदा उठाकर व्यापारिक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसके माध्यम से विदेश में रह रहे नागरिकों को खेल आयोजनों के जरिये जोड़ा जाए। कूटनीतिज्ञों को अमेरिका के ब्रांड को सपोर्ट करने के लिए सुपर बाउल जैसे बड़े खेल आयोजन भी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नवम्बर में विश्वभर के दूतावासों को भेजे पत्र में ट्रम्प का पसंदीदा खेल ‘अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप’ (UFC) का हवाला दिया और अमेरिकी कूटनीतिज्ञों को अमेरिका और उसकी संस्कृति के प्रदर्शन के लिए इससे प्रेरणा लेने को कहा। पत्र में अधिकारीयों को ‘रचनात्मक बनने’ का आग्रह भी किया गया है। कार्यदल के प्रमुख रूडी जियुलियानी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अमेरिका आने वाले कई लोगों के मन में देश के बारे में गलतफहमी है, लेकिन हमें उन्हें असली संयुक्त राज्य अमेरिका दिखाने का सुनहरा अवसर मिला है।’

बास्केटबॉल संघ और लिनिंग के बीच 4 वर्षों के लिए समझौता नवीनीकरण, राष्ट्रीय टीम की नई जर्सी जारी

समाचार सारांश

संपादकीय रूप से समीक्षा की गई।

  • नेपाल बास्केटबॉल संघ और चीनी खेल सामग्री निर्माता कंपनी लिनिंग के बीच प्रायोजन समझौता चार वर्षों के लिए नवीनीकृत हुआ है।
  • समझौते के अनुसार लिनिंग, नेपाल की राष्ट्रीय महिला, पुरुष और यू-18 बास्केटबॉल टीमों को आवश्यक सभी खेल सामग्री उपलब्ध कराएगा।
  • समझौते के नवीनीकरण के साथ राष्ट्रीय टीम के कप्तानों ने नई जर्सी भी जारी की।

28 जेठ, काठमांडू। नेपाल बास्केटबॉल संघ (नेबा) ने चीनी खेल सामग्री उत्पादन कंपनी लिनिंग के साथ प्रायोजन समझौता नवीनीकृत किया है।

नेबा ने शुक्रवार को लिनिंग नेपाल के आधिकारिक विक्रेता चाइना ट्रेडिंग कंपनी (CTC) के साथ प्रायोजन समझौता चार वर्षों के लिए बढ़ाया।

दोनों पक्षों के बीच 2022 में चार साल का समझौता हुआ था, जिसे जारी रखते हुए इसे आगे चार वर्षों तक नवीनीकृत किया गया है, यह जानकारी नेबा अध्यक्ष भीमसिंह गुरुङ ने दी।

समझौते पर नेपाल बास्केटबॉल संघ के अध्यक्ष भीमसिंह गुरुङ और चाइना ट्रेडिंग कंपनी (CTC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेन महर्जन ने हस्ताक्षर किए।

समझौता कार्यक्रम में राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य सचिव रामचरित्र मेहता, युवा तथा खेलकूद मंत्रालय के सलाहकार सिद्धि व्यंजनकार, और राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान उपेन्द्रमान सिंह भी मौजूद थे।

समझौते के अनुसार लिनिंग नेपाल के सीनियर राष्ट्रीय महिला और पुरुष टीमों के साथ-साथ यू-18 उम्र वर्ग की टीम को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जर्सी सहित सभी खेल सामग्री उपलब्ध कराएगा।

समझौता समारोह में नेपाली राष्ट्रीय बास्केटबॉल टीम के नए लाल, नीले और सफेद रंग के जर्सी भी जारी किए गए।

नेपाली राष्ट्रीय बास्केटबॉल पुरुष टीम के कप्तान सदिश प्रधान, महिला टीम की कप्तान अनुशा मल्ल और लिनिंग के ब्रांड एंबेसडर तथा राष्ट्रीय महिला फुटबॉल टीम की कप्तान एंजिला सुब्बा ने जर्सी का अनावरण किया।

नेबा अध्यक्ष भीमसिंह गुरुङ ने लिनिंग के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि यह बास्केटबॉल को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बास्केटबॉल खेल को प्राथमिकता नहीं देती और इसके लिए आवश्यक कोच और संसाधनों की कमी है।

 

सहमति के बाद बीपी प्रतिष्ठान के मेडिकल ऑफिसर पुनः कार्यरत हुए

बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के आंदोलनरत मेडिकल हाउस ऑफिसर और निम्मित्त उपकुलपति के बीच चार मुद्दों पर सहमति बनने के बाद वे फिर से काम पर लौट आए हैं। हाउस ऑफिसरों ने वेतन कम होने का आरोप लगाते हुए २५ जेठ से उपकुलपति कार्यालय परिसर में धरना देकर आंदोलन किया था। प्रतिष्ठान में पदाधिकारियों की नियुक्ति और कार्यकारी समिति के गठन के बाद पहली बैठक में उनके मांगों के समाधान के लिए सिफारिश करने की सहमति बनी है।

२८ जेठ, सुनसरी। आंदोलनरत मेडिकल हाउस ऑफिसर समूह और बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान के निम्मित्त उपकुलपति के बीच गुरुवार को चार बिंदुओं पर सहमति हुई। सहमति के बाद हाउस ऑफिसर फिर से कार्यरत हो गए। प्रतिष्ठान के निम्मित्त उपकुलपति डॉ. इन्द्र लिम्बू के अनुसार, पदाधिकारियों की नियुक्ति और कार्यकारी समिति (कास) के गठन के बाद पहली बैठक में इस संबंध में सिफारिश की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में बीपी प्रतिष्ठान बिना पदाधिकारी के संचालन में है और कास भी अभी तक गठित नहीं हुआ है। उनकी मांगों के समाधान के लिए पूर्णकालीन पदाधिकारी और कास का अधिकार क्षेत्र जरूरी है, इसलिए पदाधिकारी नियुक्ति और कास गठन के बाद सिफारिश की जाएगी।’ मेडिकल ऑफिसरों का कहना था कि उन्हें केवल ३४ हजार ५०० रुपए आधारभूत वेतन मिलता है, जो वर्तमान आर्थिक स्थिति, कार्यभार और पेशेवर जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है, इसलिए वे आंदोलनरत थे।

हाउस ऑफिसरों ने २५ जेठ से उपकुलपति कार्यालय परिसर में धरना दिया था। सहमति के अनुसार, नेपाल सरकार द्वारा राष्ट्रसेवक कर्मचारियों को दिया जाने वाला २०८२ साल साउन से लागू तीन हज़ार रुपए वेतन वृद्धि भत्ता प्रतिष्ठान के सभी शिक्षक और कर्मचारियों को अभी तक नहीं मिला है, जिसे अब सभी को उपलब्ध कराने और हाउस ऑफिसरों को भी देने की सिफारिश की जाएगी। दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति पर निम्मित्त उपकुलपति डॉ. लिम्बू, विभागीय प्रमुख जैसे कि सर्जरी विभाग प्रमुख प्राडा शैलेश अधिकारी, स्त्री एवं प्रसूति विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सूर्यप्रसाद रिमाल, हाउस ऑफिसर डॉ. पूजन पोखरेल, डॉ. प्राग्रेस महतो, डॉ. विवेक मिश्र और निदेशक यादव ने हस्ताक्षर किए हैं।

समस्याग्रस्त दुई सहकारीका १३२ ऋणीहरूको नाम सार्वजनिक

२८ जेठ, काठमाडौं । समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले समस्याग्रस्त घोषित हाम्रो नयाँ कृषि र कृषि विकास बहुउदेश्यीय सहकारी संस्था लिमिटेडका १३२ ऋणीहरूको नामावली सार्वजनिक गरेको छ। ती मध्ये हाम्रो नयाँ कृषि सहकारीका १२ र कृषि विकास बहुउदेश्यीय सहकारीका १२० ऋणीहरू रहेका छन्। समितिले गत वैशाख २३ गतेको निर्णयअनुसार उक्त नामावली सार्वजनिक गरेको जानकारी दिएको छ।

समितिले उपलब्ध ऋण विवरणका आधारमा नामावली सार्वजनिक गरिएको बताएको छ। यस क्रममा साविकमा ऋण चुक्ता गरिसकेका तर नामावलीमा नाम समावेश भएका व्यक्तिलाई प्रमाणसहित उपस्थित हुनसमेत आग्रह गरिएको छ। साथै, ऋण तिर्न बाँकी रहेका ऋणीहरूलाई समितिको कार्यालयमा सम्पर्क गरी यथाशीघ्र ऋण चुक्ता गर्न सूचित गरिएको छ। अन्यथा प्रचलित कानुनअनुसार असुली प्रक्रिया अघि बढाइने समितिले चेतावनी दिएको छ। समस्याग्रस्त सहकारी व्यवस्थापन समितिले सहकारीको रकम फिर्ता गराउने तथा बचतकर्ताको हित संरक्षण गर्ने उद्देश्यले ऋणीहरूको विवरण सार्वजनिक गरिएको स्पष्ट पारेको छ। –रासस

फीफा विश्वकप 2026 से जुड़ी पूरी जानकारी

फीफा विश्वकप 2026 में हिस्सा लेने वाली टीमों की संख्या 48 पहुँची है और कुल 104 मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको मिलकर यह विश्वकप 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक चलेगा। नेपाल में फीफा विश्वकप 2026 का सीधा प्रसारण हिमालय स्पोर्ट्स टीवी और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग डीगो एप के माध्यम से उपलब्ध होगा।

विश्व फुटबॉल का सबसे बड़ा महाकुंभ फीफा विश्वकप 2026 करीब आ चुका है। इस बार कई नए पहलुओं को पेश किया जाएगा। आयोजक देशों की संख्या 3 से बढ़कर 48 टीमों ने प्रतिस्पर्धा करनी है और कुल 104 मुकाबले होंगे, जो अब तक के सबसे अधिक हैं। दुनिया भर के विभिन्न देशों से क्वालीफाई कर 48 देशों ने विश्वकप में प्रतिस्पर्धा के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है और फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह चरम पर है।

फीफा विश्वकप 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर यहां प्रस्तुत हैं। फीफा विश्वकप 2026 जून 11, 2026 को प्रारंभ होगा। फाइनल मुकाबला 19 जुलाई, 2026 को आयोजित किया जाएगा। 48 टीमें और 104 मैचों के बाद नए विश्व विजेता की घोषणा की जाएगी।

संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको मिलकर यह पुरुष विश्वकप आयोजित करने जा रहे हैं। नेपाल में हिमालय स्पोर्ट्स टीवी और डीगो एप के जरिए इसका सीधा प्रसारण होगा। दर्शक यहां से मैच, स्कोर, तालिका और हाइलाइट्स आसानी से देख सकेंगे।

चितवन में कुत्ते को उपयोगकर्ता की आकस्मिक गर्भनिरोधक दवा देना विवाद का कारण बना

चितवन के सौराहा में कुत्ते के उपचार के दौरान मनुष्यों द्वारा प्रयुक्त आकस्मिक गर्भनिरोधक गोली खिलाए जाने और उसके बाद कुत्ते की मृत्यु होने की घटना सार्वजनिक हुई है। 28 जेठ, काठमांडू। कुत्ते के इलाज में गलत दवाइयों और प्रक्रियाओं के उपयोग के कारण जनमत निर्माण हुआ है। कुत्ते की इच्छामृत्यु (युथेनाइजेशन) के दौरान तकनीशियनों द्वारा उपयोग की गई दवा गलत होने का आरोप लगा है। ऐसी दवाइयाँ कुत्ते को सहज मृत्यु प्रदान करने की बजाय अधिक पीड़ा दे सकती हैं, ऐसा बताया गया है।

चितवन में हुई इस घटना में कुत्ते को मनुष्य की आकस्मिक गर्भनिरोधक गोली खिलाए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। एनिमल नेपाल चितवन की फील्ड सुपरवाइजर दीपा केसी के अनुसार, यह कुत्ता सौराहा के एक व्यक्ति का स्वामित्व है। कुछ समय पूर्व कुत्ते का दूसरे कुत्ते से संपर्क हुआ था। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण मालिक उसे नजदीकी निजी क्लिनिक में उपचार के लिए ले गए थे। प्रारंभिक उपचार में क्लिनिक ने मनुष्यों के उपयोग के लिए आकस्मिक गर्भ निरोधक दवा ‘आईपिल’ और मल्टीविटामिन सुझाए थे।

कुत्ते के पेट फूलने पर गर्भधारण की आशंका जताई गई और परीक्षण में गर्भ की पुष्टि हुई, ऐसा मालिक ने बताया। लगभग 33 दिन का गर्भ होने के कारण उपचार और शल्यक्रिया के लिए कुत्ते को क्लिनिक में ले जाया गया था। लेकिन ऑपरेशन के दौरान कुत्ते की स्थिति अचानक बिगड़ गई और उसकी मृत्यु हो गई, यह जानकारी मिली है। शल्यक्रिया प्रारंभ में तकनीशियन ने की और बाद में डॉक्टर आए, ऐसा कुत्ते के मालिक ने बताया।

कुत्ते की मृत्यु के कारण स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम का अनुरोध किया गया था। शुरुआत में निजी तौर पर पोस्टमार्टम करने का प्रयास किया गया, लेकिन विभिन्न पक्षों ने इसे अस्वीकार किया। बाद में जिला पुलिस कार्यालय के समन्वय में पशु सेवा कार्यालय में पोस्टमार्टम करने पर सहमति बनी। हालांकि कानूनी प्रक्रिया और जिम्मेदारी को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है। इस घटना ने पशु चिकित्सा सेवा, निजी क्लिनिक की जिम्मेदारी और दवा उपयोग प्रक्रियाओं पर व्यापक बहस छेड़ दी है।