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लेखक: space4knews

मनाङ में यार्सागुम्बा संग्रहण प्रक्रिया शुरू

१६ वैशाख, मनाङ। मनाङ में औषधीय जड़ी-बूटी यार्सागुम्बा का संग्रहण प्रक्रिया शुरू हो गई है। बुधवार से यार्सागुम्बा संग्रहण प्रारंभ किया गया है। संरक्षण क्षेत्र प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं नासों–८ के वार्ड अध्यक्ष याद घले ने जानकारी दी कि यहां के कई खार्कों में यार्सागुम्बा पाया जाता है, फिर भी संग्रहण नासों गाउँपालिका–८ ताचैस्थित नाम्ग्या लेक से शुरू किया गया है। ‘यार्सा मिलने वाले नजदीकी खार्क से संग्रहण शुरू हुआ है। संग्रहकर्त्ताओं ने बताया है कि पहले की तुलना में उत्पादन में गिरावट आई है,’ उन्होंने कहा, ‘यह समस्या के रूप में विकसित हो रही है।’

संरक्षण क्षेत्र प्रबंधन नियमावली २०५३ और संरक्षण प्रबंधन निर्देशिका २०५६ के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय निकुञ्ज, आरक्षण, संरक्षण क्षेत्र और मध्यवर्ती क्षेत्रों में यार्सागुम्बा प्रबंधन (संग्रहण और ओसार-पोसार) निर्देशिका २०८० तथा अन्य संबंधित कानूनों का पालन कर अन्नपूर्णा संरक्षण क्षेत्र आयोजन इलाका संरक्षण कार्यालय से यार्सागुम्बा तथा अन्य जड़ी-बूटियों के संग्रहण के लिये अनुमति प्राप्त करने के बाद ही संरक्षण प्रबंधन समिति द्वारा संग्रहकर्त्ताओं को उनके कार्यक्षेत्र के भीतर संग्रहण पुर्जी प्रदान की जाती है।

जिले की सभी स्थानीय तह के अंतर्गत आने वाले संरक्षण क्षेत्र के वनक्षेत्रों में यार्सागुम्बा संग्रहण की अनुमति दी जाती है, जबकि जिला बाहरी नेपाली नागरिकों के संग्रहण की अनुमति अन्नपूर्ण संरक्षण क्षेत्र आयोजन (एक्याप) इलाका संरक्षण कार्यालय मनाङ की देख-रेख में संरक्षण प्रबंधन समिति ही देती है। कार्यालय की अनुमति मिलने के बाद ही संग्रहकर्त्ता खार्क में जाने का अधिकार रखते हैं। मनाङ के साथ-साथ लमजुङ, गोरखा और धादिङ के लोग यार्सागुम्बा संग्रहण के लिए मनाङ के लेक आते हैं।

नार्पाभूमि के खार्क में केवल जिले के नागरिकों को यार्सागुम्बा संग्रहण की अनुमति दी जाती है, बाहरी जिले के नागरिकों को अनुमति का प्रावधान नहीं है। ‘‘भौगोलिक रूप से विकट होने के कारण सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नार्पाभूमि के खार्क में यार्सागुम्बा संग्रहण की अनुमति नहीं दी गई है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘अन्य स्थानीय तह के खार्क, जैसे खाङ्सार, हुलाकी ओडार और पिसाङ सहित जिले के सभी खार्कों में यार्सागुम्बा संग्रहण की अनुमति दी गई है।’

केवल स्थानीय लोगों द्वारा संग्रहण किए जाने पर खार्क की सुरक्षा में आसानी की अपेक्षा की जा रही है। अन्नपूर्णा संरक्षण क्षेत्र आयोजन (एक्याप) इलाका कार्यालय मनाङ के संयोजन में संरक्षण क्षेत्र प्रबंधन समिति द्वारा यार्सागुम्बा संग्रहण की अनुमति मिलने के बाद ही खार्क जाने की व्यवस्था है। नाम्ग्या खार्क में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी जिलों से आए व्यक्तियों को भी संग्रहण की अनुमति दी जाती है। सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी कृष्णप्रसाद पौडेल ने बताया कि जिले के भीतर यार्सागुम्बा संग्रहण का मौसम शुरू होने के साथ सुरक्षा प्रबंधों को कड़ाई से लागू किया गया है। –रासस

चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन १९ वैशाख को होने वाला है

समाचार सारांश

  • नेपाल एडवेंचर रनिंग महासंघ 19 वैशाख को दिन चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन आयोजित करने जा रहा है।
  • प्रतियोगिता में खुली श्रेणी में 36 किलोमीटर और यू-20 के लिए 7 किलोमीटर की दौड़ शामिल है, जिसमें 250 से अधिक खिलाड़ी भाग लेने की उम्मीद है।
  • खुली 36 किलोमीटर दौड़ के विजेता को 1 लाख रुपए का पुरस्कार मिलेगा और प्रतियोगिता का कुल बजट 28 लाख 11 हजार रुपए है।

16 वैशाख, काठमांडू। नेपाल एडवेंचर रनिंग महासंघ (एनएआरएफ) के आयोजन में चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन आगामी 19 वैशाख शनिवार को आयोजित किया जाएगा।

बुधवार को काठमांडू में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजन खत्री ने बताया कि राष्ट्रीय खेलकूद अधिनियम के अनुसार हर साल राष्ट्रीय प्रतियोगिता करनी होती है और इसी तहत इस वर्ष चाँगुनारायण राष्ट्रीय ट्रेल रन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

महासंघ ने बताया कि साहसिक और पर्यटन खेल के रूप में एडवेंचर रनिंग को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाना, खेल को विकसित करना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उभारने के उद्देश्य से यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।

प्रतियोगिता में खुली श्रेणी के लिए 36 किलोमीटर और यू-20 (20 वर्ष से कम उम्र के लिए) के लिए 7 किलोमीटर की दौड़ शामिल है। खुली श्रेणी में महिला और पुरुष दोनों 36 किलोमीटर की दौड़ में प्रतिस्पर्धा करेंगे, जबकि यू-20 श्रेणी में महिला और पुरुष 7 किलोमीटर दौड़ेंगे। प्रारंभ में दूरी 38 किलोमीटर निर्धारित की गई थी, लेकिन तकनीकी टीम के निरीक्षण के बाद इसे 36 किलोमीटर पर संशोधित किया गया है, खत्री ने बताया।

ट्रेल रन का मार्ग कच्चे और पक्के रास्ते, चढ़ाई-उतराई वाले मार्गों, वन और जंगल के अंदर हाइकिंग ट्रैक को शामिल करते हुए बनाया गया है। 36 किलोमीटर की दौड़ चाँगुनारायण मंदिर से शुरू होकर त्रिशुल डाँडा, तेलकोट, श्री पंच महालक्ष्मी मंदिर, कार्तिके व्यू प्वाइंट, नगरकोट व्यू टावर, मुहान पोखरी, पानी मुहान और पाइपलाइन रोड होते हुए चाँगुनारायण नगरपालिका में समाप्त होगी। 7 किलोमीटर की दौड़ चाँगुनारायण मंदिर से शुरू होकर त्रिशुल डाँडा होते हुए चाँगुनारायण नगरपालिका में समाप्त होगी।

प्रतियोगिता में 250 से अधिक खिलाड़ियों के भाग लेने की अपेक्षा है।

खुली 36 किलोमीटर महिला और पुरुष वर्ग के विजेता को 1 लाख रुपए, दूसरा स्थान पाने वाले को 75 हजार रुपए और तीसरे को 50 हजार रुपए पुरस्कार के रूप में मिलेंगे। चौथे स्थान को 25 हजार, पांचवें को 10 हजार और छठे से दसवें स्थान तक के खिलाड़ियों को प्रति खिलाड़ी 3 हजार रुपए पुरस्कार दिया जाएगा।

यू-20 श्रेणी में 7 किलोमीटर दौड़ के प्रथम विजेता को 30 हजार रुपए, दूसरे को 20 हजार रुपए और तीसरे को 10 हजार रुपए पुरस्कार दिया जाएगा। चौथे स्थान को 5 हजार, पांचवें को 3 हजार और छठे से दसवें स्थान तक के खिलाड़ियों को प्रति व्यक्ति 1 हजार रुपए पुरस्कार मिलेगा। पुरस्कार राशि पर लागू कानून अनुसार 15 प्रतिशत कर कटौती की जाएगी।

पहली बार आयोजित की जा रही इस प्रतियोगिता को बागमती प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय, राष्ट्रीय खेलकूद परिषद, प्रदेश खेलकूद विकास परिषद बागमती, चाँगुनारायण नगरपालिका, भक्तपुर जिला खेलकूद विकास समिति, टोयोटा कंपनी और 14 पिक्स आउटडोर सहित कई संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। प्रतियोगिता का अनुमानित बजट 28 लाख 11 हजार रुपए रखा गया है।

महासंघ ने बताया कि ट्रेल रनिंग में नेपाल के पास बड़ी संभावनाएँ हैं और आगामी दिनों में नियमित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं भी आयोजित करने की योजना है।

‘‘नई सरकार ने भी अल्ट्रा/ट्रेल रन जैसे साहसिक खेलों को प्राथमिकता दी है। अब महासंघ भी हर साल निश्चित राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना बना रहा है। इस खेल में बहुत संभावनाएं हैं लेकिन अभी बहुत काम बाकी है,’’ वरिष्ठ उपाध्यक्ष खत्री ने कहा।

‘‘हम यह योजना बना रहे हैं कि हर साल अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा रेस आयोजित की जाए। दूसरी ओर नेपाल में हर साल 25-30 रेस होती हैं, जिनमें से कुछ रेस आयोजकों का हमारे साथ सहयोग है। नेपाल पर्यटन बोर्ड भी तीन रेस आयोजकों के साथ वार्ता कर आगामी योजनाएं तैयार कर रहा है,’’ खत्री ने बताया।

भन्सारमा एमआरपी अनिवार्य गरिएपछि जाँचपास ठप्प, नाकामा रोकिए १ हजार कन्टेनर

भन्सार में एमआरपी अनिवार्य होने पर जाँच पास रुका, सीमा नाकों पर एक हजार से अधिक कंटेनर अटके

१६ वैशाख, काठमाडौं। सरकार द्वारा १५ वैशाख से विदेश से आयात होने वाले सामानों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) लेबल लगाना अनिवार्य किए जाने के बाद अधिकांश आयातित सामान के भन्सार जाँच पास ठप्प हो गए हैं।

३० चैत को वाणिज्य विभाग ने सूचना जारी कर घरेलू उत्पादित तथा आयातित तैयार वस्तुओं पर १५ वैशाख से एमआरपी लेबल अनिवार्य करने की व्यवस्था की जानकारी दी थी।

निर्धारित अवधि के अनुसार मंगलवार से बिना एमआरपी के कोई भी सामान भन्सार जाँच पास नहीं हो रहा है, भन्सार कार्यालयों ने पुष्टि की है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम २०७५ की धारा ६ की उपधारा ३ के मुताबिक नेपाल में उत्पादित वस्तुओं पर उत्पादक और विदेश से आयातित सामग्री पर आयातकर्ता द्वारा अनिवार्य रूप से नेपाली या अंग्रेज़ी भाषा में एमआरपी अंकित करना आवश्यक है।

कानून के अनुसार, ऐसी वस्तुएं जिनके लेबल पर मूल्य स्पष्ट न हो, वे बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हो सकतीं। मूल्य निर्धारण में सभी कर शामिल करके एमआरपी निर्धारित करना अनिवार्य है।

वस्तु के लेबल पर मूल्य के साथ-साथ वस्तु का वजन, उत्पादन तिथि, बैच नंबर, उपभोग की अंतिम तिथि और संभावित नकारात्मक प्रभावों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।

हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मशीनरी सामानों पर गारंटी या वारंटी अवधि अंकित करनी होती है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली वस्तुओं पर चेतावनी संदेश या चित्र लगाना अनिवार्य है।

अवैध या नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यवसायियों को तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, हालांकि इसका क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

सरकार ने शासकीय सुधार के १०० बिंदुओं वाली कार्यसूची में बाजार के प्रभावी नियमन और एमआरपी के अनिवार्य कार्यान्वयन को प्राथमिकता दी है।

३० चैत २०८२ को वाणिज्य विभाग ने घोषणा की थी कि १५ वैशाख २०८३ से एमआरपी लागू किया जाएगा। इसमें खाद्य और तैयार वस्तुओं पर ब्रांड और एमआरपी अनिवार्य करने की व्यवस्था शामिल है।

देश के प्रमुख भन्सार नाकों जैसे वीरगंज, भैरहवा, विराटनगर, रसुवा, नेपालगंज, कांकड़भिट्टा पर बिना एमआरपी वाले सामानों का भन्सार जाँच पास पूरी तरह ठप्प है।

भन्सार में जाँच पास न होने के कारण एक हजार से अधिक कंटेनर जमा हैं, सिर्फ वीरगंज में ही ६ सौ कंटेनर रोक गए हैं।

जरूरी और औद्योगिक सामग्री को बिना रोके भन्सार नाकों से पार करने की अनुमति दी जा रही है, भन्सार कार्यालयों की ओर से बताया गया है।

चार भन्सार कार्यालय प्रमुखों ने कहा कि ताजा सब्जियां, फल और लेब परीक्षण अवधि में मौजूद औद्योगिक सामग्री की भन्सार जाँच पास नियमित रूप से हो रही है।

वीरगंज भन्सार के अधिकारी उदयसिंह विष्ट का कहना है कि मानकों के अनुरूप न होने वाले सामानों का भन्सार जाँच पास नहीं हो सकता और आयातकर्ता एमआरपी लगाने के तरीके को लेकर अनिश्चितता में हैं।

भैरहवा भन्सार प्रमुख हरिहर पौडेल ने बताया कि केवल एमआरपी वाले सामानों की ही भन्सार जाँच पास हो रही है।

रसुवा भन्सार के सूचना अधिकारी ठाकुर गौतम के अनुसार, बिना एमआरपी के २० कंटेनर रोके गए हैं और व्यवसायी भन्सार प्रज्ञापनपत्र भरने से इनकार कर रहे हैं।

विराटनगर भन्सार प्रमुख उमेश श्रेष्ठ ने कहा कि व्यवसायी नियम न मानें तो बिना एमआरपी वाले सामानों को भन्सार से छोड़ा नहीं जाएगा।

सरकार ने उपभोक्ताओं को ठगी से बचाने के लिए भन्सार नाकों पर एमआरपी और लेबल अनिवार्य किया है, लेकिन व्यवसायी पूर्व तैयारी के अभाव और अस्पष्ट कार्यप्रणाली के कारण विरोध कर रहे हैं।

व्यवसायियों ने उद्योग मंत्री और वाणिज्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन सरकार एमआरपी लागू करने से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

नेपाल समुद्र पार निर्यात संघ ने कहा है कि बिना पूर्व तैयारी और पूर्वाधार के अचानक नियम लागू होने से माल ठप्प हो गया है और व्यवसायी तनाव में हैं।

संघ के महासचिव जयन्त अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने एमआरपी लागू करने में व्यवसायियों की सहमति नहीं ली।

अग्रवाल ने कहा, ‘हमने यह नियम तकनीकी और व्यवहारिक रूप से असंभव बताते हुए वाणिज्य विभाग को लिखित में बताया था, लेकिन बिना हमारी सहमति सामान रोक दिया गया।’

‘नेपाल के लिए विदेशी कंपनियां अलग पैकेजिंग नहीं करतीं’

महासचिव अग्रवाल ने कहा कि नेपाल एक छोटा बाजार है इसलिए विदेशी कंपनियां अलग एमआरपी वाले पैकेज बनाकर नहीं भेजतीं, यह बात सरकार को समझ नहीं आ रही।

उन्होंने कहा, ‘विदेशी कंपनियां हमारे लिए अलग लेबल बनाकर सामान भेजती ही नहीं हैं, और जब सामान भन्सार पहुंचता है तो उनका मूल्य भिन्न होता है।’

भन्सार में व्यवसायियों के पास खुद एमआरपी लगाने की पूर्वाधार नहीं है, साथ ही डेमरेज और विलंब शुल्क बढ़ने के कारण लागत और महंगी हो जाएगी।

इससे व्यवसायी मानसिक तनाव में हैं, कुछ सामान जलयान में यात्रा कर रहे हैं और एलसी खुल जाने के बावजूद समस्या बढ़ गई है।

व्यवसायी नियम मानने के पक्ष में हैं, लेकिन उसकी व्यवहारिक क्रियान्वयन की आवश्यकता बताते हैं।

महासचिव अग्रवाल ने मांग की, ‘पहले वस्तुओं का वर्गीकरण करें फिर गोदाम आने के बाद एमआरपी लगाने की व्यवस्था करें।’

‘भन्सार में जुर्माना देकर सामान नहीं छोड़ा जा सकता’

वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरिप्रसाद गौतम ने कहा कि एमआरपी भन्सार में लगाना पूरी तरह से अव्यावहारिक है।

उन्होंने कहा, ‘कंटेनर खोलकर एक-एक यूनिट पर एमआरपी कैसे लगाया जाएगा? विदेशी निर्माता हमारी छोटी बाजार के लिए अलग पैकेज नहीं बनाते।’

गौतम ने कहा कि एमआरपी ने भौगोलिक दूरी और परिवहन लागत को नजरअंदाज किया है, जिससे वीरगंज में महंगी ढुलाई वाले वस्तुओं की मूल्य निर्धारण में समस्या आ रही है।

डॉलर विनिमय दर में दैनिक उतार-चढ़ाव और कृषि उत्पाद मूल्य में बदलाव के कारण भी एमआरपी निर्धारित करना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि भन्सार में जुर्माना देकर सामान छुड़ाना उचित नहीं होगा।

एमआरपी नीति केवल दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर लागू होनी चाहिए, यह सुझाव उन्होंने दिया है।

स्वयं के गोदाम में लेबल लगाने की मांग मोरंग व्यापार संघ की

मोरंग उद्योग व्यापार संघ ने मांग की है कि माल गोदाम में पहुंचने के बाद ही एमआरपी लगाई जाए।

संघ के अध्यक्ष अनुपम राठी ने विस्तार से बताया, ‘भन्सार बिंदु पर एमआरपी तय करने से लागत और मूल्य निर्धारण में समस्या आती है।’

उन्होंने कहा कि भन्सार पर २८ प्रतिशत कर लगता है, आंतरिक परिवहन और विक्रेता के मार्जिन जोड़ने से एमआरपी निर्धारित करना कठिन हो जाता है।

राठी ने उपभोक्ता संरक्षण के उद्देश्य का समर्थन किया, लेकिन कार्यान्वयन में व्यावहारिकता पर जोर दिया।

सरकारी संस्थाओं में समन्वय की कमी

नेपाल राष्ट्रीय व्यवसायी महासंघ ने बताया कि सरकारी संस्थाओं के बीच कम समन्वय के कारण व्यवसायी असमंजस में हैं।

अध्यक्ष मनोजबाबु श्रेष्ठ के अनुसार, वाणिज्य विभाग, भन्सार विभाग और अर्थ मंत्रालय तीनों की नीतियां भिन्न होने से माल की जाँच पास ठप्प पड़ी है।

उन्होंने कहा कि वाणिज्य विभाग ने उपभोक्ता हित घटाया है, जबकि भन्सार विभाग एमआरपी बिना जाँच पास नहीं देने की कड़ी नीति पर अडिग है।

भन्सार विभाग ने मूल्य संदर्भ पुस्तिका को हटाकर एमआरपी के आधार पर मूल्यांकन करने का प्रयास किया है।

श्रेष्ठ ने चेताया कि जब वस्तुएं भन्सार से गोदाम और खुदरा व्यापारी तक पहुंचती हैं, तब परिवहन लागत और मार्जिन जुड़ जाता है, इसलिए एमआरपी पर कर लगाना अव्यवहारिक है।

उन्होने कहा कि अधिक भन्सार दरों से राजस्व घटेगा और चोरी निकासी बढ़ने का खतरा है।

महासंघ ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम २०७५ के विरोध में कहा कि सभी वस्तुओं पर नियम लागू करने की कोशिश हो रही है जो अनुचित है।

श्रेष्ठ ने बताया कि अधिनियम में केवल अति आवश्यक वस्तुएं और औषधियां पर एमआरपी लागू करने का प्रावधान है, फिर भी सभी मालों पर असर करने का प्रयास हो रहा है।

८ वर्षों तक अनदेखी के बाद अब अचानक कार्यान्वयन में समस्या

सिद्धार्थ उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष नेत्र आचार्य ने कहा कि ८ वर्षों तक लागू नहीं किए गए इस कानून को अचानक लागू करने से संकट उत्पन्न हुआ है।

आचार्य ने कहा कि भन्सार एजेंट और आयातक अब काम करने में असमर्थ हैं और पूर्व सूचना न मिलने की शिकायत की है।

एलसी खुलें और माल रास्ते में हो, उस पर भन्सार में एमआरपी की मांग न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि छोटे व्यवसायी विभिन्न सप्लायर से भिन्न सामान एक ही कंटेनर में लाते हैं, जिससे एमआरपी लगाने में समस्या पैदा होती है।

सरकार का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन कार्यान्वयन कमजोर है, आरोप लगाया।

राज्य के कानून को चुनौती देने की छूट नहीं : विभाग

वाणिज्य विभाग के निदेशक नरहरी तिवारी ने स्पष्ट किया कि सरकार एमआरपी के अनिवार्य कार्यान्वयन पर दृढ़ है।

उन्होंने कहा कि सभी आयातकों को कानून का पालन करना होगा और कानून तोड़ने वालों को कोई छूट नहीं दी जाएगी।

तिवारी ने कहा कि कड़ाई से कानून लागू होगा और बिना एमआरपी का कोई सामान बाजार में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर वाणिज्य मंत्रालय तक चर्चा हो चुकी है और सरकार इस फैसले पर अडिग है।

नई प्रणाली में व्यवसायी थोड़ी असुविधा महसूस कर सकते हैं, लेकिन कानून के पालन की आवश्यकता है, उन्होंने कहा।

एमआरपी लगे स्टिकर या टैग के बिना आयातित वस्तुओं को भन्सार से जाँच पास नहीं किया जाएगा, और इससे मूल्य नियंत्रण में मदद मिलेगी, विभाग का विश्वाश है।

इरान का युरेनियम कब्जा करना अमेरिका के लिए कितना खतनाक है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इरान के संवर्धित युरेनियम को सैन्य ऑपरेशन के माध्यम से कब्जा करने को अपनी मुख्य रणनीतिक प्राथमिकता बना लिया है। इरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित युरेनियम मौजूद है, जिसे 90 प्रतिशत तक बढ़ाकर परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी गुप्त भूमिगत परमाणु केंद्र पर हमला करके अमेरिकी सेना द्वारा इस संवर्धित युरेनियम को हासिल करना शुरू में असंभव लग सकता है, लेकिन हाल ही में आई रिपोर्टों में ट्रम्प ने इसे अपनी प्राथमिकता बताया है।

इरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए ट्रम्प इस भंडार को जब्त करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि सैन्य विशेषज्ञ और पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी इसे न केवल कठिन बल्कि अत्यंत जोखिमपूर्ण परायण मानते हैं। इस मिशन के लिए अमेरिकी सेना को बड़ी संख्या में स्थल सेना तैनात करनी होगी और पूरा ऑपरेशन कुछ दिनों तक नहीं बल्कि हफ्तों तक चल सकता है। रणनीतिक विकल्पों की खोज के तहत ट्रम्प प्रशासन ने इरान पर दबाव बनाने के लिए विभिन्न सैन्य विकल्प खुले रखे हैं।

वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में इरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित युरेनियम था, जिसे तत्काल 90 प्रतिशत तक पहुंचाकर परमाणु हथियारों के स्तर पर ले जाया जा सकता है। इसके अलावा, इरान के पास लगभग 1,000 किलोग्राम 20 प्रतिशत संवर्धित युरेनियम और 8,500 किलोग्राम 3.6 प्रतिशत संवर्धित युरेनियम भी है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस संबंध में कोई निश्चित निर्णय लेने से इनकार किया है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अपने 82वीं वायुसेना डिवीज़न का उपयोग करके इस्फहान और नतान्ज के आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित कर सकता है। इसके बाद विशेष रूप से प्रशिक्षित सैन्य बल भूमिगत सुरंगों में जाकर युरेनियम को निकालने का प्रयास करेंगे। युरेनियम आमतौर पर गैस के रूप में बड़े धातु कंटेनरों में संग्रहीत रहता है, लेकिन सुरंगों में पहुँचने और फोहड़ हटाने के लिए भारी उपकरणों की आवश्यकता पड़ेगी। इस प्रक्रिया में अमेरिकी सेना को लगातार गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र लुम्बिनी समारोह में शामिल नहीं होंगे

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने २५७०वीं बुद्ध जयंती समारोह में हिस्सा नहीं लेने की सूचना लुम्बिनी विकास कोष को टेलीफोन के माध्यम से दी है। बुद्ध जयंती समारोह वैशाख १८ गते बुटवल में आयोजित होने वाला है। सभापति डोलप्रसाद अर्याल मुख्य अतिथि और मंत्री गणेश पौडेल विशिष्ट अतिथि होंगे, यह जानकारी लुम्बिनी विकास कोष के कार्यकारी सदस्य श्याम रोक्काले ने साझा की।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) बुद्ध जयंती समारोह में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले, लुम्बिनी विकास कोष ने संकेत दिया था कि प्रधानमंत्री शाह २५७०वीं बुद्ध जयंती समारोह में उपस्थित रहेंगे। लेकिन आज प्रधानमंत्री के सचिवालय ने विकास कोष के अधिकारियों को फोन कर बुद्ध जयंती समारोह में उनकी उपस्थिति नहीं रहने की सूचना दी है। रोक्काले ने बताया कि समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सभापति डोलप्रसाद अर्याल रहेंगे और संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री गणेश पौडेल विशिष्ट अतिथि होंगे।

ओपेक से यूएई के बाहर निकलने का पेट्रोलियम बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सफेद अरबी पोशाक पहने एक व्यक्ति 'इनोक' अंकित हरे रंग के ड्रमों के सामने चलते हुए

तस्वीर स्रोत, Getty Images

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक से अचानक बाहर निकलना एक बड़ा घटनाक्रम है। यूएई 1971 में देश के गठन से पहले ही इस संगठन का सदस्य था।

ओपेक मुख्य रूप से तेल निर्यात करने वाले खाड़ी देशों का संगठन है। दशकों से यह संगठन कच्चे तेल के मूल्य नियंत्रण के लिए उत्पादन घटाने या बढ़ाने और सदस्य देशों को कोटे आवंटित करने का काम करता रहा है। 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान ओपेक ने विश्व ऊर्जा नीति में अहम भूमिका निभाई थी।

ओपेक में सऊदी अरब का प्रभुत्व तो है, लेकिन यूएई के पास अतिरिक्त तेल उत्पादन की दूसरी सबसे बड़ी क्षमता है। इसका मतलब यूएई एक महत्वपूर्ण “स्विंग उत्पादक” था, जिसके पास तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उत्पादन बढ़ाने की क्षमता थी।

इसी कारण यूएई ने अपनी स्थिति पर पुनर्विचार किया और वह अपनी निवेश क्षमता के अनुसार उत्पादन करना चाहता था।

ओपेक के तय कोटे के अनुसार यूएई का दैनिक तेल उत्पादन 30 से 35 लाख बैरल तक सीमित था। अन्य सदस्यों की तुलना में यूएई को राजस्व में अधिक नुकसान झेलना पड़ता था।

ओडीआई में नेपाल के शीर्ष ऑर्डर बैटर्स का निरंतर निराशाजनक प्रदर्शन

नेपाल ने ICC विश्व कप क्रिकेट लीग–2 के अंतर्गत घरेलू मैदान में ओमान के सामने डीएलएस विधि के तहत 102 रन से हार का सामना किया है। नेपाल ने 306 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 36 ओवर 5 गेंदों में 7 विकेट खोकर सिर्फ 155 रन बनाए। 22 मैचों में 6 जीत के साथ नेपाल 14 अंक लेकर सातवें स्थान पर है, जिससे टॉप 4 में जगह पाना कठिन होता जा रहा है। 16 वैशाख, काठमाडौं।

ICC विश्व कप क्रिकेट लीग–2 की श्रृंखला में नेपाल का कमजोर प्रदर्शन जारी है। घरेलू मैदान पर खेले गए इस मैच में नेपाल बुधवार को ओमान से 102 रन से पराजित हुआ। हार की मुख्य वजह बल्लेबाजी रही। ओमान द्वारा दिए गए 306 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नेपाल 36 ओवर 5 गेंदों में 7 विकेट खोकर केवल 155 रन बना पाया। कप्तान रोहित पौडेल के साथ ओपनर्स आसिफ शेख और कुशल भुर्तेल के निराशाजनक प्रदर्शन से टीम को झटका लगा। रोहित 10, आसिफ 19 और कुशल केवल 1 रन पर आउट हुए।

नेपाल के पिछले 10 ODI मैचों में इन तीन बल्लेबाजों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। कप्तान रोहित ने 10 मैचों में केवल एक शतक लगाया है और बाकी 9 मैचों में 40 रन भी नहीं बना पाए हैं। ओपनर्स कुशल और आसिफ की स्थिति भी समान है। कुशल ने पिछले 10 ODI में मात्र एक अर्धशतक बनाया है। वहीं, आसिफ किसी भी मैच में अर्धशतक नहीं बना पाए हैं।

नेपाल घरेलू मैदान पर अभी अगले 6 मैच और खेलेगा जबकि बाकी 8 मैच विदेश में खेलना होगा। लीग 2 में नेपाल ने अब तक 22 मैच खेले हैं और केवल 6 में जीत हासिल की है। इस बार घरेलू मैदान पर खराब प्रदर्शन के कारण लीग 2 के शीर्ष 4 में जगह बनाने की चुनौती और भी बढ़ गई है।

खानेपानी डिभिजनका तत्कालीन प्रमुखविरुद्ध डेढ करोडको भ्रष्टाचार मुद्दा

खानेपानी विभाग के पूर्व प्रमुख किशोरीप्रसाद यादव पर डेढ़ करोड़ के भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने खानेपानी विभाग के तत्कालीन प्रमुख किशोरीप्रसाद यादव के खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप में मामला दर्ज किया है। आयोग के अनुसार, २०४७ असार ३१ से २०८० पुष ९ तक यादव की आय और खर्च में एक करोड़ ४६ लाख रुपये अधिक स्रोत बिना पुष्टि के पाए गए हैं। यादव की पत्नी निर्मला कुमारी के नाम पर दर्ज संपत्ति भी जब्त करने तथा जेल की सजा देने की मांग की गई है।

खानेपानी तथा सरसफाई डिवीजन कार्यालय, कलैया के तत्कालीन कार्यवाहक कार्यालय प्रमुख किशोरीप्रसाद यादव पर लगभग डेढ़ करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में अख्तियार ने मुकदमा दायर किया है। २०४७ असार ३१ से २०८० पुष ९ तक के उनके कार्यकाल की जांच में उसने स्रोत नखुले हुए संपत्ति अर्जित करने का तथ्य सामने आया है।

अख्तियार के अनुसार, यादव की वैधानिक आमदनी कुल तीन करोड़ ४६ लाख २१ हजार रुपये थी। जांच अवधि के दौरान यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खर्च में जमीन खरीद, मकान निर्माण, शेयर खरीद, वाहन खरीद, शिक्षा खर्च तथा अन्य खर्च शामिल पाए गए हैं। कुल आय की तुलना में कुल व्यय एक करोड़ ४६ लाख ८१ हजार २२५ रुपये ९० पैसे अधिक पाया गया है।

अख्तियार ने गैरकानूनी रूप से अर्जित इस संपत्ति को यादव की पत्नी निर्मला कुमारी के नाम पर होना बताया है और उनकी संपत्ति जब्त, जुर्माना, एवं जेल की सजा की मांग की है। इसके अलावा उनके खिलाफ अन्य मामलों में भी अतिरिक्त जांच जारी है।

खानेपानी डिभिजनका तत्कालीन प्रमुखविरुद्ध डेढ करोडको भ्रष्टाचार मुद्दा

खानेपानी डिविजन के तत्कालीन प्रमुख किशोरीप्रसाद यादव पर डेढ़ करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा दर्ज

समाचार सारांश

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  • अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने किशोरीप्रसाद यादव पर डेढ़ करोड़ रुपये के बराबर भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।
  • 2047 असार 31 से 2080 पुष 9 तक यादव की आय-व्यय में 1 करोड़ 46 लाख से अधिक स्रोत अनपुष्ट पाए गए हैं, यह अख्तियार ने बताया है।
  • अख्तियार ने यादव की पत्नी निर्मला कुमारी की नाम पर मौजूद संपत्ति जब्त करने तथा जेल की सजा देने की मांग की है।

16 वैशाख, काठमाडौं। खानेपानी एवं सफाई विभाग, कलैया के तत्कालीन कार्यवाहक प्रमुख किशोरीप्रसाद यादव पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के बराबर भ्रष्टाचार के आरोप में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने मुकदमा दर्ज किया है।

यादव की सेवा अवधि 2047 असार 31 से 2080 पुष 9 तक के दौरान जांच में उनकी आय के स्रोत नखुले पाए जाने के आधार पर बुधवार को विशेष अदालत में भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई दर्ज हुई है।

अख्तियार के अनुसार यादव की वैध आय में वेतन, भत्ते, घर बिकवाली की आय, ऋण-सापटी, ब्याज आय, कृषि से आय, तथा पुत्र एवं पत्नी की आय समेत कुल 3 करोड़ 46 लाख 21 हजार रुपये दर्ज हैं।

इसी जांच अवधि के दौरान यादव एवं उनके परिवार के सदस्यों के व्यय में जमीनी खरीदी, मकान निर्माण, शेयर ख़रीद, वाहन खरीद, अध्ययन खर्च, ऋण चुकाना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीद एवं आंतरिक सजावट आदि सहित कुल 4 करोड़ 93 लाख 2 हजार 626.99 रुपये खर्च किए गए हैं।

कुल आय की तुलना में कुल व्यय 1 करोड़ 46 लाख 81 हजार 225.90 रुपये अधिक होने की वजह से स्रोत पुष्ट न हो पाने की बात अख्तियार ने कही है। इस अवैध संपत्ति को यादव की पत्नी निर्मला कुमारी के नाम पर भी पाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2059 के तहत ज़ब्ती, जुर्माना और जेल सज़ा की मांग की गई है।

अख्तियार ने यादव की पत्नी निर्मला कुमारी की नाम पर संपत्ति जब्त करने की भी अदालत से मांग की है। उनके विरुद्ध अन्य मामलों में भी जांच अभी जारी है।

पार्टी की एकता लोकतंत्र और देश के लिए महत्वपूर्ण है: एनपी साउद

१६ वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के नेता एनपी साउद ने पार्टी की एकता को लोकतंत्र और देश से गहरा जुड़ा बताया और सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संस्थापन समूह के बाहर के धुम्बाराही में जारी बैठक में यह बात कही। साउद ने कहा, “पार्टी की एकता से लोकतंत्र जुड़ा है, देश जुड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए हमें सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन मैंने उनकी सकारात्मक सोच नहीं देखी।”

साउद ने कहा कि यदि संस्थापन समूह में सकारात्मक सोच नहीं दिखती है तो बाहर के समूह को सामूहिक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब जब सकारात्मक सोच नहीं दिख रही है तो क्या किया जाए, इस संदर्भ में हमें सामूहिक रूप से निर्णय लेना चाहिए। हम सब सामूहिक रूप से एक जगह हैं।”

साउद ने यह भी उल्लेख किया कि उनके पास दो विकल्प हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास केवल दो विकल्प हैं। पहला विकल्प यह है कि जो वर्तमान स्थिति है, उसे जैसा है वैसा स्वीकार कर पार्टी के आंतरिक प्रक्रिया को संघर्ष के रूप में लेकर १५वें महाधिवेशन में जाना।” उन्होंने वैकल्पिक रास्तों की कठिनाइयों पर चर्चा करते हुए नेपाली कांग्रेस (प्रजातान्त्रिक) के गठन के समय के अनुभव को भी याद किया।

हावाहुरी से विद्यालय की छत उड़ी, पढ़ाई-लिखाई प्रभावित

म्याग्दी के धौलागिरि गाउँपालिका–१ गुर्जास्थित जनकल्याण माध्यमिक विद्यालय की छत हावाहुरी से उड़ जाने के बाद पढ़ाई-लिखाई पर प्रभाव पड़ा है। विद्यालय के कक्षा कक्ष भवन की जस्तापाता की छत उड़ने से कक्षा संचालन के लिए कक्ष की कमी हो गई है, इसका जानकारी प्रधानाध्यापक न्याउली छन्त्याल ने दी। इस विद्यालय में कक्षा १० तक लगभग २०० विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

अन्नपूर्ण गाउँपालिका के शिख और घार क्षेत्रों में पड़ी आंधी के कारण बरखेबाली और हिबंदी फसलों को भी नुकसान पहुँचा है। आंधी के बाद आई बाढ़ से सड़क, पेयजल और सिंचाई संरचनाओं को भी क्षति हुई है, ये जानकारी अन्नपूर्ण गाउँपालिका के अध्यक्ष भारतकुमार पुन ने दी। भुरुङ–तातोपानी, दाना, नारच्याङ, शिख, घार और हिस्तान क्षेत्र के जनजीवन भी हावाहुरी, बारिश और आंधी के कारण प्रभावित हुए हैं।

अस्ट्रेलियाई विमान हादसा: दो लोगों की मौत, 11 घायल

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड के पैराफील्ड एयरपोर्ट पर उतरते समय विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें दो लोगों की मृत्यु हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस हादसे में एक पायलट और एक यात्री की मौत हुई है। घायलों में अन्य 11 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

आपातकालीन सेवाओं ने बचाव और राहत कार्य के लिए आसपास के क्षेत्र को खाली करवा दिया है, जैसा कि पुलिस द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया है। पुलिस के अनुसार, एक घायल की हालत गंभीर है जबकि बाकी सामान्य चोटों के शिकार हैं। विमानस्थल के चीफ इंस्पेक्टर एंड्रयू मैकरेकन ने ABC न्यूज को बताया कि उड़ान के थोड़ी देर बाद विमान ने एयरपोर्ट से संपर्क खो दिया, जिसके बाद यह दुखद हादसा हुआ।

दुर्घटना के बाद उस क्षेत्र में घना काला धुआं फैल गया, जिसके कारण अग्निशमन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह दी है। ऑस्ट्रेलियाई ट्रांसपोर्ट सेफ्टी ब्यूरो ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है।

नेपाली सेनाका गतिविधिहरू र विवादित विषयमा वैचारिक विचार

नेपालमा आमनिर्वाचनपछि गठन भएको सरकारले जिम्मेवारी सम्हालेको यता नयाँ सरकारको कार्यशैली र गति विभिन्न दृष्टिकोणबाट समीक्षा र छलफल भइरहेको छ। यस क्रममा, नेपाली सेनाका पछिल्ला गतिविधि र तिनप्रति देखिएका प्रतिक्रियामा समेत चासो वृद्धि भएको छ। सार्वजनिक बहस र टिप्पणी निम्त्याएका सेनाका हालका कदमहरूलाई लिएर दुई भिन्न मतहरू देखिएका छन्। एक तर्फका पक्षले सेनाले अनावश्यक विवादबाट टाढा रहँदै आफ्नो भूमिका निर्वाह गर्नुपर्ने तर्क गर्छन् भने अर्कोतर्फकाले बारम्बार राजनीतिक परिवर्तन स्वीकृत गर्दै आएको राष्ट्रिय सेनालाई विवादमा नतान्नुपर्ने दाबी गर्छन्।

प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ नेतृत्वको सरकारले काठमाडौं उपत्यकाका केही सुकुम्बासी बस्तीहरूमा अवैध घरहरू हटाउँदा सम्बन्धित जिल्लाका सैनिक गणहरूले त्यहाँका सुकुम्बासीहरूको विवरण माग्दै स्थानीय तहहरूलाई पत्राचार गरेको तथ्यहरू हालै सार्वजनिक भएका थिए। नेपाली सेनाले आफ्ना संगठन र नेतृत्वविरुद्ध ‘तथ्यहीन सूचना र अभिव्यक्ति’ फैलिन थालेपछि ‘नियमित निगरानी भइरहेको’ र ‘त्यस्ता कार्य गर्नेहरू कानुनी कारवाहीको दायरामा पर्ने’ उल्लेख गर्दै सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी गरेको थियो। सेनाका प्रवक्ताले संविधान र कानुनअनुसार संगठनले आफ्नो काम गरिरहेको र सुकुम्बासी विवरण सङ्कलन सम्भावित विपद्को पूर्वतयारीका लागि गरिएको स्पष्ट पारेका छन्।

पछिल्लो विवाद के हो? सरकारले देशका विभिन्न स्थानमा अवैध घरटहरा भत्काउने कार्य जारी राख्दा नेपाली सेनाले सुकुम्बासी क्षेत्रको विवरण उपलब्ध गराउन सम्बन्धित निकायहरूलाई पत्राचार गरेको जानकारी सार्वजनिक भयो। यस कदमको पक्ष र विपक्षमा सामाजिक सञ्जालमा विभिन्न धारणा व्यक्त भइरहेका छन्, तर सरकारबाट अहिलेसम्म कुनै औपचारिक जवाफ आएको छैन। बुधबार नेपाली सेनाले विज्ञप्ति जारी गर्दै जनाए अनुसार आफ्ना स्थानीय इकाइहरूले जिम्मेवारी क्षेत्रभित्र सम्भावित विपद् घटनामा सुरक्षा फौज तैनाथ गराएर उद्धार, राहत वितरण र पुनर्स्थापनालाई सहज बनाउन ‘सम्भावित जोखिम नक्साङ्कन’का लागि तथ्याङ्क अद्यावधिक गरेको हो।

महिला कबड्डी टीम का स्वागत, कांस्य पदक के साथ स्वदेश लौटे खिलाड़ी

नेपाली महिला कबड्डी टीम ने छठे एशियाई बीच खेलकूद प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतते हुए १६ वैशाख को देश वापसी की है। टीम का युवा एवं खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल, राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहता तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर भव्य स्वागत किया। नेपाल ने समूह ‘बी’ में अपराजित रहते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश किया था जहां उसे श्रीलंका के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

१६ वैशाख, काठमांडू। छठे एशियाई बीच खेलकूद के अंतर्गत महिला कबड्डी में कांस्य पदक प्राप्त करने वाली नेपाली टीम बुधवार को स्वदेश लौटी। टीम का युवा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल, राष्ट्रीय खेलकूद परिषद के सदस्य-सचिव रामचरित्र मेहता, नेपाल कबड्डी संघ के पदाधिकारी, खिलाड़ी, प्रशिक्षक तथा परिवारजन ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल पर उनका जोरदार स्वागत किया।

चीन के सान्या में आयोजित इस खेलकूद प्रतियोगिता में २३ अप्रैल से २७ अप्रैल तक महिला कबड्डी का आयोजन हुआ। नेपाल ने समूह चरण में बिना किसी हार के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। समूह ‘बी’ में नेपाल ने चाइनीज ताइपेई, थाईलैंड और बांग्लादेश को पराजित करते हुए विजेता के रूप में सेमीफाइनल पहुँचा। सेमीफाइनल में नेपाल को श्रीलंका से हार का सामना करना पड़ा।

खिलाड़ी टीम में मानमति विष्ट (कप्तान), अनुजा कुलुङ राई (उप कप्तान), रविना चौधरी, सिर्जना थारु, मीना नेपाली और नानुमाया पराजुली शामिल हैं। प्रशिक्षण कार्य रतिया राजवंशी कर रही हैं। अखिल नेपाल कबड्डी संघ के महासचिव अरविन्दकुमार झा भी टीम के साथ नेपाल लौटे हैं। चीन के हांगझोउ में आयोजित १९वें एशियाई खेलकूद में भी महिला कबड्डी टीम ने कांस्य पदक जीता था। उस समय इस बीच खेलकूद में भाग लेने वाली मीना और नानुमाया के अलावा चार अन्य खिलाड़ी टीम में शामिल थे।

हेटौंडाका सबै वडामा सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी, उपमहानगरसँग छैन वास्तविक तथ्याङ्क

हेटौंडाका सबै वडामा सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी, उपमहानगरमा तथ्यांक अभाव

हेटौंडा उपमहानगरपालिकाका १९ वटै वडामा २१० भूमिहीन दलित, १७४३ भूमिहीन सुकुमवासी र ३७९० अव्यवस्थित बसोबासी छन्। भूमि समस्या समाधान आयोगले २०७७ र २०७८ मा संकलन गरेको १२ हजारभन्दा बढी निवेदनको विवरण जनशक्ति अभाव र कागजातको कमीका कारण प्रविष्ट गर्न नसकेको छ। उपमहानगरपालिकाले भूमि व्यवस्थापनलाई प्राथमिकतामा नराखेका कारण र कर्मचारीको निरन्तरता नभएकाले लगत संकलन र अभिलेख व्यवस्थापनमा समस्या आएको छ। १६ वैशाख, हेटौंडा।

उपमहानगरका १९ वटै वडामा भूमिहीन सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी छन्। संघीय सरकारले भूमिहीन सुकुमवासीको समस्या समाधानका लागि गठन गरेको आयोगले संकलन गरेको तथ्यांक र उपमहानगरको भूमि व्यवस्थापन शाखाले गरेको आन्तरिक सर्वेक्षणअनुसार उपमहानगरका सबै वडामा यी समुदायका सदस्यहरू रहेका छन्। नगरका बाँकी वडामा पनि समुदायस्तरमै सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी रहेको भूमि व्यवस्थापन शाखा प्रमुख लक्ष्मण अधिकारीले जानकारी दिएका छन्।

भूमि व्यवस्थापन शाखाका अनुसार हेटौंडाका १२ वटा वडामा ५ हजार ७४३ जना भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी छन्। यो तथ्यांक २०७७ र २०७८ मा भूमि समस्या समाधान आयोगले वडा कार्यालयमार्फत निश्चित समयमा संकलन गरेको लगत विवरण हो। अधिकारीले भने, ‘१२ हजार बढीको निवेदन परेको रहेछ। म पछि मात्रै यो शाखामा आएको हुँ। लगत प्रविष्ट यति मात्र भएको हो। बाँकी निवेदनको विवरण जनजाति आन्दोलनका बेला जल्यो, प्रविष्ट गर्न सकिएन।’

उपमहानगरको प्रारम्भिक अनुसन्धानबाट १९ वटै वडामा बसोबास गर्ने सबैलाई वास्तविक भूमिहीन सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी नभएको पाइएको छ। उपमहानगरको प्राथमिकतामा नपरेको भूमि व्यवस्थापनमा हेटौंडा उपमहानगरपालिकामा सबै वडामा सुकुमवासी र अव्यवस्थित बसोबासी रहेको बताइन्छ, तर वास्तविक तथ्यांक त्यहाँ उपलब्ध छैन। भूमि व्यवस्थापनलाई प्राथमिकतामा नल्याई हेटौंडा उपमहानगरले काम नगरेको देखिन्छ।