अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) नेतृत्व ने अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फिफा) द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त होने का दावा किया है। एन्फा ने गुरुवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में महासचिव किरण राइ ने कहा, “फिफा ने पंकजविक्रम नेम्बाङ की कमिटी को आधिकारिक माना है। इसके अनुसार हम निलंबित हैं, बर्खास्त नहीं। बातचीत संभव है।” राइ ने सरकार के निर्देश के कारण खिलाड़ियों तथा कर्मचारियों के वेतन रोकने का उल्लेख करते हुए सरकार से स्पष्ट निर्देशन की मांग की।
राइ ने बुधवार को सरकार और अध्यक्ष नेम्बाङ के साथ हुई वार्ता को सकारात्मक न बताते हुए कहा, “या तो सरकार हमें स्पष्ट निर्देश देकर आगे बढ़ने से रोके। खिलाड़ियों के परिवारों की जिम्मेदारी किसकी होगी इस विषय पर एक समाधान निकालना होगा।” उन्होंने समस्या के समाधान में सरकार द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
महासचिव राइ ने आगे कहा, “कर्मचारियों को भी स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। अन्यथा उत्पन्न हुई समस्याओं को सुलझाकर आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के साथ वार्ता होने पर फिफा सहित त्रिपक्षीय बैठक प्रस्तावित की जा सकती है।
नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ और चट्टानों सहित हिमस्खलन की घटना में जलवायु परिवर्तन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, यह एक वैज्ञानिक अध्ययन में पता चला है।
अध्ययन की सहलेखिका और इम्पीरियल कॉलेज लंदन की जलवायु वैज्ञानिक डॉ. फ्रीडरिक ओटो ने कहा, “इस आपदा के लिए मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन ने निस्संदेह भूमिका निभाई है।”
वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यह आपदा बढ़ती हुई तापमान, सिकुड़ती हिमनदियों, पिघलता पर्माफ्रॉस्ट (गहरा जमा हुआ ठंडा जमिन) और पूर्व से मौजूद भौगर्भिक कमजोरियों के संयोजन से उत्पन्न “मिश्रित घटना” है।
नेपाली अधिकारियों ने तिब्बत होते हुए भोटेकोशी और निचले त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई बाढ़ में लापता लोगों की संख्या संशोधित कर 6,150 कर दी, इसी बीच यह निष्कर्ष प्रकाशित किया गया।
पहले सरकारी एजेंसियों ने लापता लोगों की संख्या केवल 5,179 बताई थी। नेपाली सरकार के आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या लगभग 1,400 है। हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।
अन्य कारण कौन कौन से हो सकते हैं
नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्र के नगरों और गांवों में भारी बाढ़ और पहाड़ी धंसाव के चलते हजारों घर बह गए और कई जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए।
वैज्ञानिक बताते हैं कि नेपाल की ओर वाले लैंगटांग लिरुंग पर्वत की चोटियों के नजदीक चट्टानों की दीवार और हिमनद टूटने से बाढ़ आई।
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण एजेंसी यूएसजीएस के आंकड़ों के अनुसार वहां गिरा मलबा उपत्यका के निकट 5.2 मैग्नीट्यूड के भूकंपीय कंपन का कारण बना।
गुरुवार को प्रकाशित वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की रिपोर्ट में उल्लेख है कि जलवायु परिवर्तन “पहली से मौजूद भौगर्भिक संवेदनशीलता को प्रभावित करने वाले कारणों में से एक” है, लेकिन यह इस आपदा का एकमात्र कारण नहीं है।
अध्ययन के अनुसार, मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन के कारण वर्तमान हिमस्खलन क्षेत्र में जुलाई और अगस्त का तापमान सामान्य से लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक था।
हिमनद वहां प्रति वर्ष आधा मीटर की दर से सिकुड़ रहे थे, जिससे उनकी दरार कमजोर होकर अस्थिरता बढ़ सकती थी।
पिछले अक्टूबर और नवंबर में भारी हिमपात ने वर्ष की शुरुआत में पिघले हुए पानी की मात्रा बढ़ा दी।
ये सभी कारक मिलकर “संयुक्त घटना” को और गंभीर बना सकते हैं, वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है।
2015 के भूकंप से भी ‘रिश्ता हो सकता है’
अध्ययन में 2015 में नेपाल में आए 7.8 मैग्नीट्यूड के भूकंप और उससे उक्त हिमस्खलनों ने पिघले हुए चट्टान को कमजोर किया हो सकता है।
हालांकि अधिकारी पुष्टि नहीं कर सके हैं कि वह भूकंप इस महीने आई विनाशकारी बाढ़ पर सीधे प्रभाव डालता है या नहीं।
इस रिपोर्ट के दूसरे सहलेखक और यूट्रेच्ट विश्वविद्यालय के पर्वतीय जलविज्ञ डॉ. वॉल्टर इमेर्जील ने यह क्षेत्र “भौगर्भिक रूप से अत्यंत संवेदनशील चट्टान” बताया।
उनके अनुसार, यह क्षेत्र संभवत: 2015 के भूकंप ने कमजोर बनाया था और हिमनद तथा पर्माफ्रॉस्ट पिघलने के बाद यह और अधिक अस्थिर हो गया है।
अध्ययन कैसे किया गया
यह अध्ययन अभी-peer reviewed यानी सहकर्मी समीक्षा की गई पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ है।
लेकिन, वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की वेबसाइट के अनुसार यह संस्था अपने अध्ययन के दौरान मौसम संबंधित घटनाओं का विश्लेषण करते हुए सहकर्मी समीक्षा की विधि का पालन करती है।
इस अध्ययन के निष्कर्ष पूर्व के ज्ञात तथ्यों से मेल खाते हैं।
कुछ विशेषज्ञ पहले भी बीबीसी को बता चुके थे कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान के कारण हिमस्खलन की आशंका थी।
डंडी विश्वविद्यालय के हिमनदी विशेषज्ञ डॉ. साइमन कुक ने पिछले महीने बीबीसी से कहा था कि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना मुश्किल है, लेकिन “जब जलवायु गर्म होता है तो उच्च हिमालयी क्षेत्र अस्थिर हो जाता है।”
उन्होंने बुधवार को बीबीसी को बताया कि वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन ने हालिया विपत्ति के कारणों पर “अत्यंत उपयोगी अध्ययन” किया है।
उनका कहना है कि अध्ययन ने “इस क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण है” यह स्पष्ट रूप से दिखाया है, लेकिन पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए अभी और काम करना बाकी है।
अधिकारियों को इस क्षेत्र की प्रक्रियाओं के बारे में और शोध करना होगा और साथ ही भविष्य में ऐसे घटनाओं का पूर्वानुमान कैसे किया जाए, इसे समझने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी प्रणाली पर काम जारी रखना होगा।
‘जलवायु न्याय’ के लिए प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क जा रहे हैं
विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाली अधिकारियों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास बढ़ाने का आह्वान किया है।
हालांकि नेपाल कम हरितगृह गैस उत्सर्जन करने वाला देश है, लेकिन जलवायु संकट के प्रभावों से सबसे अधिक जोखिम में है, यह अधिकारी बार-बार कहते रहे हैं।
आगामी हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री व्लेन्द्र शाह ‘बालेन’ हालिया आपदा और ‘जलवायु न्याय’ को लेकर चर्चा करेंगे, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री बनने के लगभग साढ़े छह महीने बाद यह उनका पहला विदेश दौरा होगा।
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१ असोज, काठमाडौं । स्मार्टफोन और छोटे वीडियो के बढ़ते उपयोग से लोगों को मुक्त कराने के लिए सिंगापुर सरकार ने किताब पढ़ने के लिए पैसे देने वाला अनोखा अभियान शुरू किया है। इसके तहत सिंगापुर सरकार ने ५ वर्षों की नेशनल रीडिंग मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत नागरिकों को रोजाना कम से कम १५ मिनट किताब पढ़ना होगा। पढ़े गए समय को सरकारी वेबसाइट पर दर्ज कराने पर अंक (प्वाइंट) मिलेंगे और इन अंकों के आधार पर नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में पुनः किताब पढ़ने की आदत बसाना है।
लगातार फोन चलाने और छोटे वीडियो देखने की आदत के कारण लोग लंबे समय तक किसी किताब या लेख पर ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ हो रहे हैं। सरकार इस आदत को बदलना चाहती है। इस योजना के तहत रोजाना कम से कम १५ मिनट पढ़ने पर २० वर्चुअल कॉइन दिए जाएंगे। दिन में एक बार ही पढ़े गए समय को दर्ज किया जा सकता है। यदि कोई लगातार ५० दिन तक रोजाना १५ मिनट पढ़ता है, तो उसके खाते में १,००० कॉइन जमा होंगे, जो लगभग १ सिंगापुर डॉलर (लगभग १२० नेपाली रुपये) के बराबर हैं। इस वर्ष सरकार ने कुल ७५ लाख रीडिंग मिनट्स पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग १ करोड़ ८२ लाख रुपये के पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। पढ़ाई को एक खेल जैसा बनाने के लिए सिंगापुर के नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड (एनएलबी) ने इस योजना में गेम-जैसे रिवार्ड सिस्टम को शामिल किया है। लोग क्राउडटास्क एसजी वेबसाइट पर जाकर रोजाना अपने पढ़ने के समय को दर्ज कर सकते हैं। जितना अधिक समय पढ़ा जाएगा, उतने अधिक कॉइन मिलेंगे जिन्हें नकद में बदला जा सकेगा। रील्स की जगह किताबें पढ़ने को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य है कि लोग अपने फोन पर लगातार रील्स और छोटे वीडियो देखने के बजाय कुछ समय किताब पढ़ने में बिताएं।
नेशनल लाइब्रेरी बोर्ड की प्रमुख मेलिसा टैम के अनुसार, छोटे वीडियो जल्दी जानकारी देते हैं लेकिन लगातार उन्हें देखने से दिमाग थक सकता है। किताब और लंबे लेख पढ़ने से ध्यान केंद्रित करने, सोचने और कल्पना करने की क्षमता विकसित होती है। इसलिए सरकार ने शुरुआत में रोजाना केवल १५ मिनट पढ़ने का लक्ष्य रखा है।
युवाओं में पढ़ाई अक्सर केवल परीक्षा पास करने तक सीमित रहती है। रिसर्च एनालिस्ट आइजैक निओ के अनुसार, बच्चों और युवाओं पर पढ़ाई और परीक्षाओं का बड़ा दबाव है। ऐसे में वे आमतौर पर सिर्फ परीक्षा में सफल होने के लिए पढ़ते हैं और मानसिक शांति तथा खुशी के लिए किताब पढ़ने की आदत कम होती जा रही है।
इसी कारण निओ ने सन् २०२५ में मॉडर्न मेन्स बुक क्लब की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को पुनः किताबों से जोड़ना है। क्या पैसे देकर पढ़ने की आदत डाली जा सकती है? इस योजना पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। मनोवैज्ञानिक चारिसा एनजी कहती हैं कि पैसे की प्रलोभन से वह लोग जो थोड़ी बहुत पढ़ने की रुचि रखते हैं, प्रेरित हो सकते हैं, लेकिन जिनमें किताबें पढ़ने की बिलकुल दिलचस्पी नहीं है, उन्हें केवल पैसे देकर लंबे समय तक पढ़ने के लिए प्रेरित नहीं किया जा सकता। फिर भी पुस्तक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक छोटे पुरस्कार से भी प्रेरणा मिल सकती है। किसी ने शुरुआत में पैसे के लिए पढ़ना शुरू किया तो बाद में उनकी रुचि जागृत हो सकती है। यानी सिंगापुर सरकार की यह योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ कुछ राशि वितरित करना नहीं, बल्कि लोगों को रोजाना कम से कम १५ मिनट फोन से दूर रख कर किताब के करीब लाना है।
समाचार की संपादकीय समीक्षा पर आधारित भी-डेम इंस्टिट्यूट की २०२६ लोकतंत्र रिपोर्ट में अमेरिका के लोकतंत्र सूचकांक में गिरावट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्तर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में अमेरिका समेत ४३ अन्य देशों का निरंकुशता की ओर बढ़ना बताया गया है, साथ ही विश्व के पाँच सबसे जनसंख्या वाले देशों—भारत, चीन, इंडोनेशिया और पाकिस्तान—को निरंकुश शासन में वर्गीकृत किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि ट्रम्प प्रशासन ने मीडिया, शिक्षा क्षेत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर गंभीर प्रहार किए हैं, जबकि न्यायालय निरंकुश कार्रवाइयों को रोकने में सक्षम हो सकता है। १ असोज, काठमाडौं। स्वीडन स्थित भी-डेम इंस्टिट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का लोकतंत्र सूचकांक निरंतर गिरावट पर है। प्रमुख लोकतंत्र विशेषज्ञ इस रिपोर्ट में कहते हैं, “आधुनिक इतिहास में अमेरिका का लोकतंत्र इतनी तेजी से गिरता हुआ पहले कभी नहीं देखा गया।” संस्थान ने अमेरिका में मीडिया और विपक्षी आवाज़ों को दबाने के लिए दबाव और धमकियों को लोकतंत्र के पतन के प्रमुख कारणों के रूप में चिन्हित किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्तर अमेरिका में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। भी-डेम की २०२६ वार्षिक ‘डेमोक्रेसी रिपोर्ट’ में अमेरिका और अन्य ४३ देशों के निरंकुशता की तरफ झुकाव का उल्लेख है। २०२ देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों के आधार पर यह ‘लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स’ तैयार करता है। इस वर्ष की रिपोर्ट नागरिकों के लिए निरंकुशता की लगातार बढ़ती चुनौती को चिंताजनक चित्र में प्रस्तुत करती है। भी-डेम विश्वविद्यालय गोथेनबर्ग में स्थित है और इसे यूरोपीय आयोग, विश्व बैंक तथा अन्य संस्थान आर्थिक रूप से समर्थन प्रदान करते हैं। दक्षिणपंथी आलोचक इस संस्थान को ‘सोरोस-फंडेड’ बताकर आलोचना करते हैं। भी-डेम के मूल्यांकन में विश्व के पाँच सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में भारत, चीन, इंडोनेशिया और पाकिस्तान निरंकुश शासन में शामिल हैं। पाँचवाँ देश अमेरिका है, जिसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में अपनी ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ की स्थिति खोकर ‘इलेक्टोरल डेमोक्रेसी’ में सीमित हो गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, ट्रम्प के पहले कार्यकाल ने इस बदलाव की नींव रखी थी जबकि दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रपति पद के केंद्रीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। उन्होंने बताया कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा घट गई है और रिपब्लिकन नियंत्रण वाली विधान सभा ने विधायकी नियंत्रण को कम किया है। भी-डेम रिपोर्ट में मीडिया सेंसरशिप को निरंकुश शासकों का प्रमुख उपकरण बताया गया है। इस वर्ष की रिपोर्ट में निरंकुशता की ओर बढ़ने वाले देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार कमजोर पड़ने वाला पहला क्षेत्र बताया गया है। अमेरिका और लगभग ४० अन्य देशों में मीडिया में ‘स्वयं सेंसरशिप’ एक बड़ी समस्या बन चुकी है। ट्रम्प नियमित रूप से समाचार संस्थाओं और अन्य निकायों पर उनके खिलाफ पूर्वाग्रह का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अभी भी कई अन्य देशों से बेहतर बनी हुई है। रिपोर्ट में ट्रम्प प्रशासन द्वारा मीडिया, शिक्षा क्षेत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर किए गए हमलों के प्रभावों को भी उजागर किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि अदालतें और सर्वोच्च न्यायालय ट्रम्प प्रशासन की निरंकुश कार्रवाइयों को चुनौती देने और उन्हें रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नेपाल फिफा यू-१५ विश्वकप और फेस्टिवल अजरबैजान २०२६ के समूह ‘डी’ में शामिल हो गया है। गुरुवार को जारी किए गए समूह विभाजन के अनुसार, नेपाल ब्राजील, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डिआर कंगो), एल साल्वाडोर, गिनी-बिसाउ और ट्यूनिशिया के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करेगा। समूह ‘डी’ में ब्राजील सबसे मजबूत टीम मानी जा रही है, जबकि नेपाल को अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और एशिया के बाहर के विभिन्न महाद्वीपों के टीमों के साथ खेलने का मौका मिलेगा। इस प्रतियोगिता का आयोजन अजरबैजान में किया जाएगा, जहां विश्वभर से आए टीमें विभिन्न समूहों में बांटी गई हैं। समूह ‘डी’ में मौजूद छह टीमों के बीच समूह चरण के मैचों का आयोजन होगा। समूह ‘डी’ की टीमें हैं: ब्राजील, डिआर कांगो, एल साल्वाडोर, गिनी-बिसाउ, ट्यूनिशिया और नेपाल।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुकूल नहीं माने गए प्रतिनिधि सभा नियमावली के दो नियमों को तुरंत लागू न करने का अंतरिम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट किया है कि एक ही दल संसदीय एक सदन में अपनी पकड़ के आधार पर अपनी इच्छानुसार संविधान संशोधन नहीं कर सकता। इस फैसले की व्याख्या संविधान विशेषज्ञों और राजनीतिक वैज्ञानिकों ने की है।
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी द्वारा जेठ १७ को पारित प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम १४०(११) और २५९ को तत्काल लागू न करने का अंतरिम आदेश जारी किया है। प्रधान न्यायाधीश सहित पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ के आदेश में कहा गया है, “नियम १५९ का प्रावधान संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होता है, नियमावली का लागू होना संवैधानिक प्रावधानों को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है और याचिकाकर्ता पक्ष के स्वार्थ में असंतुलन पैदा कर सकता है, इसलिए फिलहाल इसे लागू न करते हुए यथावत रखा जाए।”
राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के द्वारा प्रस्तुत प्रतिनिधि सभा नियमावली में दोनों सदनों के सभी सदस्यों की दो तिहाई बहुमत से पारित न करने का प्रावधान था। कांग्रेस की राष्ट्रिय सभा संसदीय दल की नेता कमलादेवी पन्त सहित अन्य ने इस नियमावली को द्विसदनीय व्यवस्था के विरुद्ध बताते हुए इसे रोकने के लिए संवैधानिक पीठ में रिट दायर की थी।
विपक्षी दलों द्वारा विरोध किए गए प्रतिनिधि सभा नियमावली २०८३ की धारा १४० (११) संविधान संशोधन विधेयक के कार्यविधि से संबंधित है, जबकि धारा २५९ इसे सांसदों के विशेषाधिकार से जोड़ती है। नए नियमावली की ये दोनों धाराएँ विवाद का मुख्य कारण बनीं और विपक्षी दलों ने प्रतिनिधि सभा में इनके खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था।
समाचार सारांश: एन्थ्रोपिक ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि इरान से जुड़े एक समूह ने अमेरिका में विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर अमेरिकी नौसेना को निशाना बनाने का प्रयास किया है। इस समूह ने क्लाउड-आधारित एआई के जरिए सार्वजनिक डेटा एकत्रित कर नौसेना की स्थिति और संभावित लक्ष्य निर्धारित करने की कोशिश की। एन्थ्रोपिक ने संबंधित खातों को ब्लॉक कर अमेरिकी सरकार को आवश्यक जानकारी प्रदान की है, जबकि विशेषज्ञों ने ऐसे घटनाओं के बढ़ने की संभावना जताई है।
१ असोज, काठमाडौं। सीबीएस न्यूज की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इरान से जुड़े एक समूह ने अमेरिकी नौसेना पर आक्रमण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर हमले की योजना बनाई। इस समूह ने अमेरिकी विकसित एआई तकनीक का उपयोग करते हुए नौसेना को निशाना बनाने का प्रयास किया।
यह रिपोर्ट पिछले सप्ताह एन्थ्रोपिक नामक कंपनी ने जारी की। एन्थ्रोपिक ने उक्त समूह की पहचान सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन इसे “जोखिम उत्पन्न करने वाला संगठन” बताया है। समूह ने इंटरनेट से सार्वजनिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए क्लाउड-आधारित एआई तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक के माध्यम से उन्होंने अमेरिकी नौसेना की स्थिति और संभावित लक्षित क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास किया।
एन्थ्रोपिक ने इन संबंधित खातों को ब्लॉक करते हुए अमेरिकी सरकार को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। अमेरिका के विरोधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभावी तरीके से हमला रणनीतियों में इस्तेमाल कर रहे हैं।
एन्थ्रोपिक के निष्कर्ष इरान के रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप हैं, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है। इरान अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष में तकनीक के व्यापक उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।
जम्मू के ‘व्हाइट नाइट कॉर्प्स’ ने उधमपुर के ब्रट्टल क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के सहयोग से संयुक्त अभियान चलाया है, जिसमें दो चरमपंथी मारे गए हैं। सेना ने बुधवार रात लगभग 9 बजे प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर यह अभियान शुरू किया गया था और खराब मौसम तथा कम दृश्यता के बावजूद खोज कार्य जारी है। मारे गए चरमपंथियों की पहचान और उनके संगठन के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि बाकी संभावित खतरों का पता लगाने के लिए सुरक्षा बलों को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है।
भारतीय सेना के जम्मू स्थित ‘व्हाइट नाइट कॉर्प्स’ ने एक्स मीडिया पर 16 और 17 सितंबर की मध्यरात्रि को उधमपुर के ब्रट्टल क्षेत्र में इस संयुक्त अभियान की जानकारी दी। चरमपंथियों की उपस्थिति से जुड़ी खुफिया सूचनाएं मिलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया था। सेना ने बताया, “अभियान अभी भी जारी है और क्षेत्र की खोज एवं निगरानी कार्रवाई चल रही है। शेष किसी भी खतरे की पहचान कर उसे समाप्त करने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।” उधमपुर जिले में भारतीय सेना का रणनीतिक ‘नॉर्दर्न कमांड’ स्थित है, साथ ही यहां एक एयर फोर्स बेस भी मौजूद है। पहलगाम में हुए हमले के जवाब में भारत ने पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।
अखिल नेपाल फुटबल संघ (एन्फा) ने सरकार द्वारा निलंबन फुक्त करने संबंधी कोई ठोस निर्णय न किए जाने की स्थिति में सोमवार से फिफा के निर्देशानुसार अपनी गतिविधियां पुनः सक्रिय करने का संकेत दिया है। एन्फा के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) इन्द्रमान तुलाधर ने अकादमी के बाल खिलाड़ियों की पढ़ाई, आवास और भोजन की व्यवस्था में बढ़ती समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार से तुरंत पहल करने का आह्वान किया है।
फिफा ने पिछले असार महीने में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण एन्फा को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से नेपाली फुटबाल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बाहर है। काठमांडू, १ असोज। तुलाधर ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अकादमी के खिलाड़ियों के भविष्य पर खतरा होने की बात कही और सरकार से त्वरित कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा, ‘यदि कल तक सरकार की ओर से सकारात्मक जवाब आता है तो साफ प्रतियोगिता में भाग लिया जा सकेगा, अन्यथा जटिलताएं बढ़ती जाएंगी इसलिए सोमवार से फिफा के निर्देशानुसार कार्यक्रम संचालित करने की तैयारी है।’
उन्होंने बाल खिलाड़ियों की पढ़ाई, आवास और भोजन में बढ़ती दिक्कतों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, ‘खिलाड़ियों को भूखा रखा जाना सही नहीं है।’ तुलाधर ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा निलंबन हटाने के लिए की जाने वाली किसी भी पहल में एन्फा पूरी तरह सहयोग करेगा। यदि प्रगति नहीं होती है तो फिफा के नियमों के अनुसार रोजाना फुटबाल गतिविधियां संचालित की जाएंगी। ‘सरकार की किसी भी पहल में हम साथ देंगे, नहीं तो फिफा के नियमों के अनुरूप दैनिक कार्यक्रम चलाएंगे,’ उन्होंने दोहराया।
फिफा ने पिछले असार में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण एन्फा को निलंबित कर दिया था, जिससे नेपाली फुटबाल को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से वंचित होना पड़ा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पले इरानसँग सम्भावित युद्ध अन्त्यतर्फ अघि बढिएको र तेहरानसँग प्रत्यक्ष वार्ता भइरहेको दाबी गरेका छन्। पत्रकारहरूसँग संवाद दिंदा ट्रम्पले तेहरानसँग सम्झौता गर्न तयार रहेको पुन: दोहोर्याएका छन्। तर, केही घण्टाअघि इरानी अधिकारीहरूले आफ्ना सबै सर्तहरू पूरा नभएसम्म शान्ति वार्ता पुनः सुरु नहुने बताएको थियो।
इरानी सशस्त्र बलका प्रमुख प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकार्चीले भने, “जनताले २०० रातको प्रतिरोधद्वारा शत्रुको रणनीति विफल पारेका छन्। सशस्त्र बलहरूले अन्तिम रक्तसम्म इरानको सुरक्षा गर्नेछन्।” ट्रम्पको यस अभिव्यक्तिसँगै इजरायललाई ६० हजार विनाशकारी बम उपलब्ध गराउने अमेरिकी तयारीको समाचार पहिले नै सार्वजनिक भइसकेको थियो।
ट्रम्प प्रशासनले इजरायललाई ९०७ किलो (२,००० पाउन्ड) तौलका ६० हजार अत्यधिक विनाशकारी बम बिक्रीको तयारी गरिरहेको छ। अरबौं डलरको यो प्याकेज अमेरिकी करदाताको पैसाबाट लागू हुनेछ। अमेरिकी सञ्चार माध्यमका अनुसार ट्रम्प प्रशासनले यसलाई स्वीकृति दिइसकेको छ र कङ्ग्रेसलाई अनौपचारिक रूपमा जानकारी गराएको छ। यो हतियार प्याकेज इजरायललाई दिइने सबैभन्दा ठूलो अमेरिकी प्याकेजहरूमध्ये एक हो।
अर्कोतर्फ, अमेरिकी सिनेटर क्रिस भ्यान होलेनले भनेका छन् कि इजरायललाई दिइने २.८ अर्ब डलरको हतियार प्याकेज रोक्ने प्रतिबद्धता जाहेर गर्दै हालको हिंसाकै बीच अमेरिकी फन्डिङको औचित्यमाथि प्रश्न उठाएका छन्।
भारत में एक कार द्वारा मोटरसाइकिल चालक को जानबूझकर टक्कर देने का नाटकीय वीडियो वायरल हुआ है। यह वीडियो बाइक पर लगे कैमरे द्वारा रिकॉर्ड किया गया है। घटना हरियाणा के गुरुग्राम, जो दिल्ली के नजदीक है, में घटी।
दुर्घटना के बाद शिवानी चौहान ने आरोप लगाया है कि कार चालक ने जानबूझकर उनका पीछा करते हुए टक्कर मारी। पुलिस ने कार चालक को हिरासत में ले लिया है। पहले उन पर लापरवाही से वाहन चलाने और दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालने का मुकदमा दर्ज था। बाद में उन पर जानलेवा हमला करने का आरोप भी जोड़ा गया है।
हालांकि, कार चालक के वकीलों ने सभी आरोपों का खंडन किया है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता में मार्क्स, लेनिन और हो ची मिन्ह के नाम पर बनी सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नामों को बदलने के लिए समीक्षा करने हेतु 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति दुर्गापूजा के बाद बैठक करेगी और भारतीय एवं बंगाली इतिहास, संस्कृति और विरासत के आधार पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी। समिति के सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के नेता तथागत राय ने लेनिन सड़कों का नाम देवप्रसाद घोष, कार्ल मार्क्स सड़कों का नाम माइकल मधुसूदन दत्त या रंगलाल बंद्योपाध्याय तथा हो ची मिन्ह सड़कों का नाम मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता में मार्क्स, लेनिन और हो ची मिन्ह के नाम पर बने सड़कों, पुलों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों के नामकरण एवं पुनर्नामांकन विषयक प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए राज्य सरकार ने 10 सदस्यीय सलाहकार समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता स्वामी प्रदीप्तानंद अर्थात् कार्तिक महाराज कर रहे हैं। समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत राय, मुख्यमंत्री के सलाहकार सुब्रत गुप्ता, कोलकाता महानगर पालिका की आयुक्त स्मिता पांडे समेत अन्य अधिकारी सदस्य हैं।
समिति के अध्यक्ष प्रदीप्तानंद के अनुसार, लेनिन, कार्ल मार्क्स और हो ची मिन्ह के नाम की सड़कों के नाम बदलने के विभिन्न प्रस्ताव आ रहे हैं। समिति सड़कों के नामों से जुड़े व्यक्तित्वों के भारतीय और बंगाली इतिहास, संस्कृति और विरासत से सम्बंध को भी अध्ययन करेगी। पहली बैठक दुर्गा पूजा के बाद आयोजित होगी और उसके बाद समिति संबंधित निकाय को अपनी सिफारिशें भेजेगी।
लेनिन के स्थान पर देवप्रसाद घोष का नाम रखने का प्रस्ताव समिति के सदस्य तथागत राय ने दिया है, जिसमें उन्होंने ‘लेनिन सड़कों’ के नाम को गणितज्ञ तथा भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष देवप्रसाद घोष के नाम से बदलने का सुझाव रखा है। कार्ल मार्क्स सड़कों के लिए बंगाली कवि का नाम रखने के प्रस्ताव के अनुसार, कोलकाता के खिदिरपुर स्थित ‘कार्ल मार्क्स सड़कों’ का नाम 19वीं सदी के प्रसिद्ध बंगाली कवि माइकल मधुसूदन दत्त या रंगलाल बंद्योपाध्याय के नाम से करने का प्रस्ताव है। हो ची मिन्ह सड़कों का नाम मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नाम पर बदलने का भी प्रस्ताव आया है। तथागत राय ने बताया है कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
अमेरिका में तीन वर्षों से अधिक समय के बाद पहली बार ब्याज दर में वृद्धि की गई है, और यह बढ़ती महंगाई को काबू करने के प्रयासों के तहत संभावित और बढ़ोतरी की संभावना को दर्शाता है। फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मत निर्णय के तहत ब्याज दर को ३.५-३.७५ प्रतिशत से बढ़ाकर ३.७५-४ प्रतिशत कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्याज दर घटाने की मांग करते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वार्श ने इस कदम के पीछे का कारण बताया कि “महंगाई बहुत अधिक है और लंबे समय से उच्च बनी हुई है,” और इस फैसले को “गंभीर और जिम्मेदार” बताया। घोषणा के बाद ट्रम्प ने वार्श का समर्थन किया, लेकिन फेड की बोर्ड को, जो ब्याज दर के फैसले में मतदान करता है, उन्होंने “विरोधी” कहा। उच्च ब्याज दरों के कारण ऋण लेना, घर खरीदने के लिए मोर्गेज और क्रेडिट कार्ड के लिए कर्ज लेना महंगा हो सकता है। लेकिन इससे बचत पर बेहतर रिटर्न भी मिल सकता है।
बुधवार को फैसले के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वार्श ने कहा कि फेड के नेतृत्व में “आशावादी दृष्टिकोण” होने के बावजूद महंगाई अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों की तरह फेडरल रिजर्व का लक्ष्य भी महंगाई को २ प्रतिशत या उससे कम रखना है। वार्श ने बताया कि अमेरिका में महंगाई “पांच वर्षों से अधिक समय से” इस लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इससे अमेरिकी मतदाताओं के लिए जीवनयापन की लागत संभालना गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
हालांकि, अमेरिका-इज़रायल युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा इरान पर शुरू किए गए संघर्ष के कारण थोक तेल के दामों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे ईंधन की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, जो अन्य कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बनी है। वार्श ने कहा, “तेल की कीमत या किराने की दुकानों पर मिलने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों पर सीधे असर नहीं डाला जा सकता,” लेकिन केंद्रीय बैंक पूरी अर्थव्यवस्था में मूल्य वृद्धि फैलने से रोकने की कोशिश कर सकता है। वार्श ने कहा कि रोजगार बाजार और अर्थव्यवस्था मजबूत होने के कारण फेड मूल्य स्थिर रखने के लक्ष्य पर केंद्रित है।
अमेरिका में तीन साल से अधिक समय बाद पहली बार ब्याज दरों में वृद्धि की गई है और यह बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने का प्रयास है, इसके और भी बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
फेडरल रिजर्व ने सर्वसम्मति से ब्याज दर को 3.5-3.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.75-4 प्रतिशत कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्याज दर घटाने की मांग करते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी, फिर भी यह फैसला लिया गया।
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष कैविन वार्श ने इस कदम का कारण बताया कि “महंगाई बहुत अधिक है और लंबे समय से उच्च बनी हुई है,” और इसे एक “गंभीर और जिम्मेदार” निर्णय बताया।
घोषणा के बाद ट्रम्प ने वार्श के प्रति समर्थन व्यक्त किया, लेकिन फेड के बोर्ड के सदस्यों को, जो ब्याज दर के फैसले में वोट देते हैं, उन्होंने “विरोधी” कहा।
ब्याज दर बढ़ने से ऋण, घर खरीदने के लिए लिए जाने वाले मॉर्गेज तथा क्रेडिट कार्ड के लिए उधार लेने वाले लोगों को अधिक खर्च करना पड़ सकता है। लेकिन इससे बचत में बेहतर रिटर्न हासिल हो सकता है।
बुधवार के फैसले के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वार्श ने कहा कि फेड के नेतृत्व में चिंता के बावजूद “आशावादी नजरिया” कायम है, पर महंगाई अब भी एक समस्या बनी हुई है।
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक जैसे फेडरल रिजर्व का भी लक्ष्य महंगाई को 2 प्रतिशत या उससे नीचे रखना है। वार्श ने बताया कि अमेरिका में महंगाई “पांच साल से अधिक समय से” इस लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है।
इसने अमेरिकी मतदाता के लिए जीवन यापन के खर्चों को वहन करना गंभीर चिंता का विषय बना दिया है। हालांकि, अमेरिका द्वारा ईरान के साथ प्रारंभ किए गए अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद थोक तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे ईंधन की कीमत भी तेजी से बढ़ी है, और इसके कारण कई अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं की कीमतों में भी वृद्धि हुई है।
उपभोक्ताओं पर प्रभाव
फेड “तेल के दाम हों या किराने की दुकानों पर मिलने वाले खाद्य पदार्थों के दाम, सीधे तौर पर प्रभावित नहीं कर सकता,” वार्श ने कहा। हालांकि, केंद्रीय बैंक महंगाई के व्यापक फैलाव को रोकने का प्रयास कर सकता है।
वार्श ने बताया कि रोज़गार बाजार और समग्र अर्थव्यवस्था मजबूत होने के कारण फेड मूल्य स्थिरता के लक्ष्य पर केन्द्रित है। साथ ही महंगाई कम होने पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सबसे अधिक लाभ होगा, उन्होंने यह भी कहा।
अधिकतर केंद्रीय बैंक महंगाई बढ़ने पर ब्याज दर बढ़ाते हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को खर्च कम करने और बचत बढ़ाने के लिए प्रेरित करना होता है, जिससे मुद्रास्फीति की गति धीमी होती है।
परन्तु ब्याज दर वृद्धि एक तरह से संतुलन का उपाय भी है, क्योंकि ज्यादा ब्याज दर व्यवसायों को नए निवेश में देरी करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है, जिससे आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है।
वार्श की नियुक्ति के समय डेमोक्रेट सांसदों ने उन्हें ट्रम्प के आकस्मिक प्रभाव से स्वतंत्र नहीं माना था। कई फेड विश्लेषकों ने भी उम्मीद की थी कि ट्रम्प के ब्याज दर घटाने के दबाव के जवाब में वार्श उनकी मांगों का पालन करेंगे। इससे पहले ट्रम्प ने वार्श के पूर्ववर्ती जेरोम पॉवेल की भी ब्याज दर न घटाने पर कड़ी आलोचना की थी।
बुधवार के ब्याज दर वृद्धि के निर्णय के संबंध में ट्रम्प को संदेश क्या जाएगा, इस सवाल पर वार्श ने मुस्कुराते हुए कहा: “राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।”
बाद में ट्रम्प ने मीडिया से कहा, “मैं कैविन पर भरोसा करता हूं, लेकिन आपको पता है कि उनके पास एक काफी कठोर बोर्ड है।”
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मैनचेस्टर यूनाइटेड ओल्ड ट्रैफर्ड में ब्राइटन से ३–२ से हारकर ईएफएल कप के तीसरे चरण से बाहर हो गया है। शिया लेसी और मेसन माउंट के गोलों से यूनाइटेड ने २–० की बढ़त ली थी, लेकिन ब्राइटन ने चार गोल करके जीत हासिल की। ओल्ड ट्रैफर्ड में दो गोल की बढ़त लेकर हारना यूनाइटेड के लिए १९७६ के बाद पहली बार हुआ है। १ असोज, काठमाडौं।
दो गोल की बढ़त बनाए रखने में नाकाम रहने के कारण मैनचेस्टर यूनाइटेड इंग्लिश फुटबॉल लीग (ईएफएल) कप के तीसरे चरण से बाहर हो गया है। घरेलू मैदान ओल्ड ट्रैफर्ड में दो गोल की बढ़त बनाये रखने वाला यूनाइटेड ब्राइटन से ३–२ हारकर प्रतियोगिता से विदा हुआ। मैच के आठवें मिनट में युवा खिलाड़ी शिया लेसी ने सीनियर टीम से अपना पहला स्टार्टिंग मैच में गोल कर यूनाइटेड को बढ़त दिलाई। दो मिनट बाद मेसन माउंट ने दूसरा गोल किया और यूनाइटेड २–० से आगे बढ़ गया था।
लेकिन पहले हाफ के इंजुरी समय में चारालाम्पोस कोस्टुलास ने गोल कर ब्राइटन को खेल में वापस लाया। दूसरे हाफ में ६५वें मिनट में कप्तान पास्कल ग्रोस ने बराबरी का गोल किया जबकि चार मिनट बाद कोस्टुलास की पास पर मैक्सिम डे कुइपर ने निर्णायक गोल कर ब्राइटन को जीत दिलाई। यूनाइटेड के मुख्य कोच माइकल कैरिक ने ७२वें मिनट में ब्रूनो फर्नांडीस को मैदान में उतारा, लेकिन टीम बराबरी का गोल नहीं कर पाई। इस हार के साथ ही यूनाइटेड ने घरेलू कप में लगातार तीसरी बार ब्राइटन से हार झेली है। साथ ही ओल्ड ट्रैफर्ड में दो गोल की बढ़त लेकर हारना यूनाइटेड के लिए १९७६ के बाद पहली बार है।
गुजरात रात के अन्य मैचों में फ्लिटवुड ने शेफील्ड यूनाइटेड को १-० से हराया, जबकि एस्टन विला ने कोवेंट्री को ३-१ से पराजित किया। एवर्टन ने वुल्वरहैम्प्टन को १-० से मात दी।