Skip to main content

लेखक: space4knews

विदेश में स्थायी निवास अनुमति लेकर कार्यालय में अनुपस्थित दो कर्मचारियों से स्पष्टीकरण की मांग

३ असार, काठमाडौं । भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयले विदेशी देशको आवासीय अनुमति लिएर लामो समयदेखि कार्यालयमा अनुपस्थित रहेका दुई कर्मचारीहरूलाई स्पष्टीकरण बुझाएको छ। मन्त्रालयले सूचना जारी गर्दै अध्ययन वा असाधारण बिदा समाप्त भए तापनि कार्यालयमा उपस्थित नभई विदेशमै बसोबास गरिरहेको भन्दै उनीहरूमाथि कानुनी प्रक्रिया अघि बढाइरहेको बताएको छ।

सूचनाअनुसार मन्त्रालयमा कार्यरत दुई कम्प्युटर अपरेटर अध्ययन र असाधारण बिदा सकिसकेपछि पनि धेरै समयदेखि कार्यालयमा अनुपस्थित रहेका छन्। मन्त्रालयले सम्बन्धित देशको स्थायी तथा अस्थायी आवासीय अनुमति लिएको पत्ता लगाएको छ। निजामती कर्मचारी पदमा रहँदा पनि विदेशी मुलुकको आवासीय अनुमति लिन वा आवेदन दिन नपाउने नियम छ।

स्वीकृत बिदा समाप्त भएको ३० दिनभित्र कार्यालयमा उपस्थित हुनुपर्ने ऐन अनुसार अनुपस्थित रहेको हुँदा निजामती सेवा ऐनको उल्लङ्घन गरेको भन्दै उनीहरूलाई स्पष्टीकरण सोधिएको हो। मन्त्रालयका अनुसार निजामती सेवा ऐन, २०४९ बमोजिम उनीहरूलाई आगामी सरकारी सेवा का लागि अयोग्य ठहर गरी कारबाही अघि बढाउनुपर्ने अवस्था देखिएको छ र १५ दिनभित्र चित्तबुझ्दो प्रमाण र आधारसहित सफाइ पेश गर्न भनिएको छ।

तोकेको म्याद भित्र स्पष्टीकरण नपेस गरेको वा पेस गरिएको स्पष्टीकरण असन्तोषजनक भए थप कानुनी कारबाही अघि बढाइने मन्त्रालयले जनाएको छ। मन्त्रालयले कार्यालयमा अनुपस्थित रहेर विदेशमा बसोबास गरिरहेका साथै लामो समयदेखि सम्पर्कविहीन रहेका अन्य कर्मचारीहरूको स्थिति पनि अध्ययन तथा खोजी कार्य तीव्र बनाएर अगाडि बढाइरहेको छ। भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्री प्रतिभा रावलले निजामती सेवामा अनुशासन र जवाफदेहितालाई थप मजबुत बनाउन यस्ता गतिविधिहरूमा निगरानी बढाएको उल्लेख गरेकी छन्।

बुद्ध की जन्मभूमि से शांति का संदेश फैलाएं

मैं क्रोध से भरे मिसाइल लेकर चल रहा हूँ, यदि तुम में शक्ति है तो शांति स्थापित कर दो। मैं क्रोध में जल रहा हूँ, कहीं कोई गलती न कर जाऊं, इस विनती के साथ! मुझे गीत के अर्थ समझाओ। क्रोध और अहंकार की ज्वाला जल रही है, स्वयं को समझते हुए! अमृतमय वचन से उस ज्वाला को शांत करो। मैं तुम्हारे सच्चे ऋण की पूरी भरपाई करूंगा, बिना किसी जमानत के!

कृपया किस्तों में मुहैया कर दो। मैं धन और पद के लिए संघर्ष कर रहा हूँ, चाहे गलती हुई हो! प्रतिष्ठा की महिमा समझाओ। हार और जीत का दर्द सह रहा हूँ, यदि तुम सक्षम हो तो युद्ध विराम की घोषणा कर दो। बोलने, लिखने और व्यवहार में क्यों असफल हो रहा हूँ, यह बताने वाले लोग! सफल होने के तरीके सिखाओ। मैं समस्याओं के घेरे में हूँ, कृपा करके सहायता करो!

ढक्कन खोल दो। मैं अतीत और भविष्य की घटनाओं को याद करके चिंतित हूँ, यदि क्षमता हो तो! अंधकार को दूर करो। मैं हर दिन कुछ नए आशा के साथ जी रहा हूँ, शक्ति दो! लक्ष्य और मंजिल की पहचान कराओ। जीवन के रंगमंच पर अभिनय कर रहा हूँ, अनुभव कराओ!

सांसारिक मोह को समझाओ। लोभ और पाप तुम्हारे मन की सीमाएं तोड़ सकते हैं, यदि हिम्मत हो तो! दीवार खड़ी करो। झूठी घटनाएं बनाता हूँ, परिस्थितियों के अनुसार, अगर यह तुम्हें भाए! झूठ का वर्गीकरण करो। मैं स्वयं को अच्छा बनाने के लिए अनावश्यक प्रयास कर सकता हूँ, नम्रता के साथ! वास्तविकता समझाओ। स्वर्ग और नर्क के दोधार में उलझा हुआ हूँ, मोक्ष पाने के लिए!

मंत्र का जाप करो। बुद्ध की भूमि में जन्मे होने पर गर्व है मुझमें और सभी नेपाली में! आइए विश्व में शांति का संदेश फैलाएं।

विश्वकप २०२६: मुकाबले का पूर्वावलोकन और प्रमुख खिलाड़ी

३ असार, काठमाडौं। फिफा विश्वकप २०२६ के तहत समूह ‘एल’ का प्रतिष्ठित मुकाबला कनाडा के ओंटारियो स्थित टोरंटो स्टेडियम में होने जा रहा है, जहाँ अफ्रीकी मजबूत टीम घाना और उत्तर अमेरिकी टीम पनामा आमने-सामने होंगी। दोनों टीमों के लिए यह मुकाबला विश्वकप की अच्छी शुरुआत करने और समूह में अपनी स्थिति मजबूत करने का सुनहरा अवसर है। घाना के लिए २०२६ की शुरुआत जटिल और चुनौतीपूर्ण रही है, इसलिए वे इस बड़े मंच पर अपनी प्रतिष्ठा पुनः स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी तरफ, खुला और आक्रामक फुटबॉल पसंद करने वाली पनामा हाल के मैचों में अपने सुधार के चलते उच्च आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी। अस्थिर प्रदर्शन और कमजोर डिफेंस के बीच दोनों टीमें ३ अंक के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा करेंगी।

हेड-टू-हेड और हालिया फॉर्म की दृष्टि से यह घाना और पनामा के बीच पहला लाइव मैच होगा। विश्वकप के मंच पर ये दो राष्ट्र कभी आमने-सामने नहीं आए हैं। हालांकि, क्षेत्रीय इतिहास को देखें तो घाना ने विश्वकप में कोनकाकाफ क्षेत्र की टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसमें तीन मैचों में से दो में वह विजेता रहा है। पनामा ने विश्वकप में एकमात्र अफ्रीकी टीम ट्यूनीशिया के खिलाफ मुकाबला किया, जिसमें २०१८ में २-१ से हार मिली थी। पिछले पांच मैचों में, घाना कमजोर फॉर्म और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहा है। मार्च में ऑस्ट्रिया के खिलाफ ५-१ की शर्मनाक हार के बाद घाना ने जर्मनी और मेक्सिको से भी हार झेली। हालांकि, वेल्स के खिलाफ अंतिम क्षणों में बराबरी का गोल कर उसने लगातार हार का रिकॉर्ड तोड़ा। अब तक, घाना ने चार हार और एक ड्रॉ खेला है। पनामा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ब्राजील के खिलाफ ६-२ की भारी हार में डिफेंस कमजोर नजर आया, लेकिन उसने डोमिनिकन रिपब्लिक को ४-२, दक्षिण अफ्रीका को २-१ से हराया और बोस्निया के साथ बराबरी कर विश्वकप की तैयारी पूरी की है।

देखने योग्य खिलाड़ी
घाना
एंटोइन सेमेन्यो (फॉरवर्ड): इंग्लिश प्रीमियर लीग की मैनचेस्टर सिटी के युवा फॉरवर्ड सेमेन्यो घाना के आक्रमण के प्रमुख हथियार हैं। मैदान में उनकी अथक दौड़ और शारीरिक ताकत उल्लेखनीय है। अग्रिम पंक्ति में नेतृत्व करने के साथ-साथ विंग से रक्षा लाइन के पीछे कट करने की उनकी बहुमुखी शैली पनामा की रक्षा को चुनौती देगी और साथियों के लिए जगह बनाएगी।
मोहम्मद कुदुस (विंगर): प्रीमियर लीग के स्टार मोहम्मद कुदुस घाना के सबसे विस्फोटक और रचनात्मक खिलाड़ी हैं। घाना के खेल की लय और आक्रमण उनकी ड्रिब्लिंग और ‘विजन’ पर निर्भर रहेगा। टीम यदि लय खोजने में संघर्ष करती है तो कुदुस का व्यक्तिगत प्रदर्शन पनामा के कमजोर डिफेंस में भेद कर निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इनाकी विलियम्स (स्ट्राइकर): उनकी गति, मजबूत शारीरिक संतुलन और रक्षा की पंक्ति के पीछे दौड़कर गोल करने की कला ने विलियम्स को घाना का मुख्य गोलकर्ता बनाया है। वह टीम के गोल सूखे को खत्म करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

पनामा
अडाल्बर्टो कैरास्किया (मिडफिल्डर): अमेरिकी मेजर लीग फुटबॉल (MLS) क्लब ह्यूस्टन डायनामो के मुख्य मिडफिल्डर कैरास्किया पनामा टीम का दिल हैं। मैदान के मध्यभाग से खेल की गति और रणनीति पर नियंत्रण करते हुए फॉरवर्ड्स को सटीक ‘थ्रू-पास’ देना उनकी खासियत है। घाना की मजबूत मिडफील्ड से मुकाबला करने में उनका प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा।
इस्माइल डियाज (फॉरवर्ड): पनामा के मुख्य आक्रमणकारी डियाज गोल करने में दक्ष हैं। हाल के मैचों में उन्होंने पनामा की गोल बरसात में कमज़ोर डिफेंस को दबाव में रखकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
माइकल मुरिलो (डिफेंडर): बेसिक्टास से पेशेवर फुटबॉल खेलने वाले अनुभवी राइट-बैक मुरिलो पनामा की रक्षा प्रणाली के मेरुदंड हैं। वह डिफेंस संभालने के साथ-साथ दाएँ विंग से तेज़ आक्रमण करते हुए क्रॉस करने में माहिर हैं, जो घाना के विंगर्स को रोकने में दोनों भूमिकाएँ निभाएंगे।

निजी विद्यालयों को ‘शत्रु’ न मानें, राज्य की भूमिका महत्वपूर्ण है

नेपाल के शैक्षिक इतिहास में निजी क्षेत्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्व में निजी क्षेत्र की मजबूत उपस्थिति न होने के कारण नेपाल के बच्चे दार्जिलिंग, कालिंगपोंग सहित भारत के विभिन्न शहरों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाते थे, यह परिस्थिति हम भुला नहीं सकते। अब वह स्थिति नहीं है। इसलिए निजी विद्यालयों को राज्य द्वारा अनदेखा किया जा सकता है, लेकिन नजरअंदाज करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। आज शहर की गलियों से लेकर गांव के कोनों तक मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में शिक्षा दिलाने के लिए अपने आहार पर भी कटौती करते हैं। यह केवल इच्छा नहीं बल्कि राज्य की कमजोर शैक्षिक उपलब्धि के प्रति मौन विरोध और अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए निवेश है। परन्तु हाल के समय में ‘नियमन’ के नाम पर निजी विद्यालयों पर अत्यधिक हस्तक्षेप से न केवल इस क्षेत्र बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा की गुणवत्ता संकट में पड़ने का खतरा नज़र आता है।

हम निजी विद्यालय क्यों चुनते हैं? अभिभावकों द्वारा निजी विद्यालय चयन करना आवेग नहीं, बल्कि बाध्यता है। मुख्यतः गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रभावशाली प्रबंधन के कारण निजी विद्यालय चुने जाते हैं। सरकारी विद्यालयों में बड़ी रकम खर्च होती है, शिक्षक प्रशिक्षित होते हैं और सुविधाएं भी कम नहीं हैं, पर वहां ‘उत्तरदायित्व’ की कमी दिखती है। निजी विद्यालयों में अभिभावक शुल्क का भुगतान करते हैं, इसलिए उनमें स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं – मेरा बच्चा क्या सीख रहा है? शिक्षक कब आते हैं? अनुशासन कैसा है? निजी विद्यालय के संचालक और शिक्षक इन बातों को समझते हैं और अच्छे परिणाम तथा अनुशासित वातावरण बनाये रखने के लिए जिम्मेदार रहते हैं। यदि वे असफल होते हैं तो अभिभावकों के पास विकल्प बदलने का डर हमेशा बना रहता है। यह ‘प्रतिस्पर्धात्मक दबाव’ ही निजी विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण बनाता है। यहां पढ़ाई व्यवस्थित होती है, शिक्षक चौबीसों घंटे निगरानी करते हैं और अंग्रेज़ी माध्यम से बच्चे विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का आत्मविश्वास प्राप्त करते हैं।

कुछ लोग सोचते हैं कि निजी विद्यालय अधिक मुनाफा कमाते हैं। हाल फिलहाल ‘कमाते हैं नहीं, लूटते हैं’ की धारणा भी प्रचलित है। लेकिन वास्तविकता का एक और पहलू भी है। निजी विद्यालयों को राज्य से कोई अनुदान प्राप्त नहीं होता। भवन का किराया, बिजली-पानी, तकनीकी उपकरण, यातायात तथा सबसे महत्वपूर्ण पक्ष- शिक्षकों और कर्मियों की तनख्वाह ये सब खर्च विद्यार्थी से लिए गए शुल्क से चलता है। शिक्षकों और कर्मचारियों को सेवा सुविधाएं देना आवश्यक है। जब सरकार शुल्क तय करती है, छुट्टियां निर्धारित करती है, और शिक्षकों की सुविधाओं को सीमित करने का प्रयास करती है, तो वह विद्यालय ‘निजी’ कैसे रह सकता है? निजी का अर्थ ही ‘स्व-प्रबंधन’ है। यदि स्रोतों के स्वतंत्र प्रबंधन में राज्य हस्तक्षेप करता है तो इससे सीधे गुणवत्ता को नुकसान पहुंचता है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए गुणस्तरीय शिक्षक आवश्यक हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षक को टिकाए रखने के लिए बाज़ार अनुकूल वेतन देना पड़ता है। सरकार शुल्क पर अत्यधिक अंकुश लगाती है जिससे संसाधन कम होते हैं। इसके कारण विद्यालय अच्छे शिक्षक नहीं रख पाते। नतीजा स्वरूप दक्ष जनशक्ति पलायन होता है और शिक्षा का स्तर गिरता है। हालिया हस्तक्षेप और व्यावहारिक संकट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान सरकार की कुछ नीतियां शिक्षा सुधार के लिए नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र को निरुत्साहित करने के लिए हैं। स्कूलों को इंधन बचत के बहाने रविवार को अवकाश देने जैसे उपाय किए जा रहे हैं। इससे प्रतिवर्ष लगभग १०० दिन ही कक्षा चलती हैं और पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए स्कूलों को सुबह ९ बजे से शाम ५ बजे तक संचालित होना पड़ता है।

पंद्रह वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सुबह ९ बजे से शाम ५ बजे तक स्कूल में रखना कितना व्यावहारिक है? यह निर्णय बच्चों की भूख और मानसिक आराम का सम्मान नहीं करता। ९ से ५ बजे के इस कैद से बच्चे शिक्षा के प्रति उत्साहित होने की बजाय थके और परेशान हो रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन न होने से दीर्घकालीन रूप से बच्चों की रचनात्मक क्षमताओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

वैशाख के पहले सप्ताह से शुरू होने वाले निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम को सरकारी अवकाशों ने अस्थिर बना दिया है। रविवार की छुट्टियां हों या अन्य आकस्मिक छुट्टियां, इससे विद्यालय की वार्षिक शैक्षिक योजना अस्त-व्यस्त हो जाती है। कभी स्थानीय सरकार तो कभी प्रदेश या संघीय सरकार द्वारा छुट्टियां घोषित करने पर सभी सरकारी निर्णयों का निजी विद्यालयों को पालन करना पड़ता है, जिससे उनकी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लग जाता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सरकार ने स्रोतों पर नियंत्रण कर दिया है जिससे निजी विद्यालयों के प्रबंधन को चुनौती मिलती है। शुल्क नियंत्रण से सरकार निजी विद्यालयों के आर्थिक संसाधनों पर प्रभाव डालने का प्रयास कर रही है, जो प्रबंधन में बड़ी समस्या है।

सभी निजी विद्यालयों की स्थिति समान नहीं हो सकती, पर ऋण लेकर निवेश करने वाले संचालक आज मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत पीड़ा झेल रहे हैं। सरकार को पहले अपने सरकारी विद्यालयों के स्तर में सुधार करना चाहिए। जब सरकारी विद्यालय उत्कृष्ट होंगे, तो लोग स्वाभाविक रूप से वहां आकर्षित होंगे। वर्तमान में कुछ सरकारी विद्यालय उत्कृष्ट हैं। जब वे विश्वास जीतेंगे, निजी विद्यालय स्वयं ही स्थानांतरित या पुनर्परिभाषित होंगे। लेकिन सरकारी विद्यालयों को सुधारे बिना निजी स्कूलों पर अधिक अंकुश लगाना ‘शैक्षिक पलायन’ को जन्म देगा। यदि नेपाल में निजी विद्यालय बंद या गुणवत्ता खो देते हैं तो अभिभावक फिर से अपने बच्चों को भारत के दार्जिलिंग, देहरादून या अन्य शहरों में भेजने पर मजबूर होंगे। इससे अरबों नेपाली रुपये विदेश प्रवाहित होंगे और बच्चे अपनी जमीन और संस्कृति से दूर शिक्षा ग्रहण करेंगे।

अब आगे का रास्ता क्या है? निजी शिक्षा वैकल्पिक है, इसे किसी पर अनिवार्य नहीं किया गया है। जो लोग प्रभावशाली और सुचारू प्रबंधन चाहते हैं, वे निजी विद्यालय चुनते हैं। राज्य का काम निजी क्षेत्र को ‘शत्रु’ की दृष्टि से नहीं, बल्कि ‘सहयोगी’ के रूप में देखना है और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माहौल को बनाना है। सरकार को नियमन अवश्य करना चाहिए, लेकिन वह नियमन शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के हित में होना चाहिए। सरकारी अनुगमन और नियमन किसी पक्ष को प्रताड़ित करने के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदार बनाने के लिए होना चाहिए। संसाधन सुनिश्चित न होने पर निवेश नहीं होगा, और निवेश के बिना विकास संभव नहीं। निजी विद्यालयों पर अत्यधिक हस्तक्षेप न तो विद्यार्थियों के हित में है और न ही अभिभावकों के। इससे नेपाल का शिक्षा क्षेत्र और अस्थिर और कमजोर बनेगा। राज्य को इस पर समय रहते गंभीर होना आवश्यक है। प्रतिबंध लगाकर नहीं, अवसर और उचित नीतियों से ही शिक्षा में क्रांति लाई जा सकती है।

ट्रम्पकी चेतावनी- इरानसँगको सम्झौता अन्तिम होइन, उचित व्यवहार नगरे पुनः बम आक्रमण गरिने

३ असार, काठमाडौं । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्पले इरानसँग भएको सम्झौतामा पुगेको सहमति अन्तिम नभएको बताएका छन् । जी–७ शिखर सम्मेलनमा बोल्दै उनले यस्तो बताएका हुन् । ‘यदि ऊ (इरान) ठीक तरिकाले व्यवहार गरेन भने हामी फेरि सिधै उसकै टाउकोमाथि बम प्रहार गर्नेछौं,’ ट्रम्पले स्पष्ट पारे ।

मंगलबार मात्रै उनले इरानसँगको सम्झौताअनुसार अब कहिल्यै परमाणु हतियार नहुने दाबी गरेका थिए । यसअघि पाकिस्तानसहितका देशहरूको मध्यस्थतामा अमेरिका र इरानबीच जारी युद्ध रोक्ने सहमति प्राप्त भएको थियो । त्यसअनुसार शुक्रबार स्वीट्जरल्यान्डमा दुई देशबीच सम्झौतामा हस्ताक्षर गरिने तय भएको छ ।

डोल्पामा ट्याक्टरबाट खसेर एक व्यक्ति घायल

३ असार, डोल्पा । डोल्पामा चलिरहेको ट्याक्टरबाट खसेर एक व्यक्ति घाइते भएका छन्। घाइते व्यक्ति त्रिपुराकोट नगरपालिका-२ रुमका २७ वर्षीय निखिल थापा हुन्। खदाङबाट तारजाली बोकेर त्रिपुराकोटतर्फ आउँदै गरेको कर्णाली प्रदेश ०२-०५६६ त ००१ नम्बरको ट्याक्टरबाट खसेर उनी घाइते भएका थिए।
प्रहरीका अनुसार त्रिपुरासुन्दरी नगरपालिका-९ धाउन्ने स्थित भेरी करिडोर सडकखण्डमा बुधबार राति १ बजे ट्याक्टरबाट खसेर घाइते भएका थापालाई उपचारका लागि जिल्ला अस्पताल दुनै पठाइएको थियो। त्यहाँबाट उनलाई थप उपचारका लागि नेपालगञ्जस्थित भेरी अस्पताल पठाइएको जिल्ला प्रहरी कार्यालयका सूचना अधिकारी पदम रावलले जानकारी दिएका छन्।
थापा निदाएका कारण सन्तुलन गुमाएर अचानक ट्याक्टरबाट खसेको हुनसक्ने प्रहरीको भनाइ छ। ट्याक्टर चालक त्रिपुरासुन्दरी नगरपालिका-२ रुमका २९ वर्षीय नरेन्द्र थापालाई नियन्त्रणमा लिएर आवश्यक अनुसन्धान भइरहेको प्रहरीले जनाएको छ।

पिन्टरेस्ट ने छोटे व्यवसायों के लिए दो नई एआई विज्ञापन सुविधाएँ जारी कीं

पिन्टरेस्ट ने छोटे और मध्यम व्यवसायों (एसएमबी) को लक्षित करते हुए अपनी आय बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित दो नई विज्ञापन सुविधाएँ जारी की हैं। कंपनी ने अपनी मौजूदा ‘परफॉर्मेंस प्लस’ तकनीक को और बेहतर करते हुए ‘परफॉर्मेंस प्लस न्यू कस्टमर एक्विजिशन’ और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शॉपिफाई के लिए ‘वान-क्लिक परफॉर्मेंस प्लस शॉपिंग’ सुविधा लॉन्च की है।

पहली सुविधा ‘परफॉर्मेंस प्लस एनसीए’ विज्ञापनदाताओं को नए ग्राहकों को खोजने और उन्हें पहुंचने में खर्च के बजट को नियंत्रित करने की खास क्षमता प्रदान करती है। इसके अंतर्गत छोटे व्यवसाय अपने पुराने या मौजूदा ग्राहकों का डेटा सिस्टम में अपलोड करके एआई के लिए नए मानदंड सेट कर सकते हैं। फिर पिन्टरेस्ट की एआई प्रणाली पुराने ग्राहक की रुचि और व्यवहार से मेल खाने वाले नए संभावित ग्राहकों को स्वचालित रूप से पहली बार विज्ञापन दिखाएगी। पिन्टरेस्ट के अनुसार, इसके आंतरिक परीक्षण में नए ग्राहक जोड़ने की दर (कन्वर्जन) में औसतन 64 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

दूसरी सुविधा खासतौर पर उन व्यवसायियों के लिए लाई गई है जो ई-कॉमर्स साइट शॉपिफाई का उपयोग करते हैं। ‘वान-क्लिक शॉपिंग’ तकनीक की मदद से व्यापारी पिन्टरेस्ट के ‘ऐड्स मैनेजर’ या सीधे शॉपिफाई अकाउंट से एक क्लिक में नया विज्ञापन अभियान शुरू कर सकेंगे। इसमें विज्ञापन के लिए आवश्यक बेहतरीन सेटिंग्स स्वचालित रूप से डिफ़ॉल्ट रूप से सेट हो जाती हैं। इस साल की पहली तिमाही में अपेक्षित से कम आय मिलने के बाद पिन्टरेस्ट ने छोटे व्यवसायों और अंतरराष्ट्रीय बाजार को ध्यान में रखते हुए यह नई एआई विज्ञापन रणनीति अपनाई है।

रास्वपा अधिवेशनः क्या रवि लामिछाने और बालेन शाह के अलग-अलग गुट बन गए हैं?

प्रतिनिधिसभा चुनाव प्रचार के दौरान रवि लामिछाने और वालेन्द्र शाह बालेन

तस्वीर स्रोत, Reuters

आगामी हफ़्ते पार्टी महाधिवेशन की तैयारी में लगी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के जारी जिला एवं प्रदेश अधिवेशनों में पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने और वरिष्ठ नेता वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ समर्थक गुटबंदी के आरोप लगने लगे हैं।

कोशी प्रदेश के अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार गोमा (सरिन) तामांग ने गुटबंदी के कारण अपनी हार की शिकायत की है। सुनसरी क्षेत्र 1 से दो चुनावों में रास्वपा की उम्मीदवार रही और प्रदेश की कार्यवाहक अध्यक्ष भी रह चुकीं तामांग ने पार्टी अधिवेशन में दो धड़ों के बीच दिख रही “गुटबंदी” पर चर्चा की।

हालांकि पार्टी के निर्वाचन आयोग प्रमुख भुवन केसी ने शीर्ष नेताओं के नाम लेकर गुट बनाकर प्रतिस्पर्धा पर प्रतिबंध लगने की बात कही है।

तीन साल पहले स्थापित रास्वपा रविवार से चितवन के भरतपुर में अपना पहला महाधिवेशन कर रहा है। इस महाधिवेशन में संस्थापक अध्यक्ष रवि लामिछाने को कोई चुनौती नहीं दी गई है।

भदौ माह के जेएन जेनरेशन आंदोलन के बाद फागुन में हुए संसदीय चुनाव में करीब दो तिहाई बहुमत हासिल करने वाली पार्टी अब अधिकांश जिला और प्रदेशों में नेतृत्व चुनने के लिए अधिवेशन आयोजित कर रही है।

न्यूनतम सेवा सुविधा नदिने रोजगारदातालाई नेपाली श्रमिक नपठाउने निर्णय : श्रम मन्त्री रामजी यादव

३ असार, काठमाडौं । युवा, श्रम तथा रोजगारमन्त्री रामजी यादवले न्यूनतम सेवा सुविधा नदिने रोजगारदातालाई नेपाली श्रमिक नपठाउने निर्णय गरेका छन्। प्रतिनिधि सभा बैठकमा सांसदहरूको प्रश्नको जवाफ दिंदै मन्त्री यादवले वैदेशिक रोजगारीमा जाने श्रमिकलाई न्यूनतम तलब, सम्मानजनक श्रम र अन्य सेवा सुविधा नदिने रोजगारदातालाई श्रमिक नपठाउने नीति रहेको स्पष्ट पार्नुभएको छ। यस विषयमा उहाँले जेनेभा मा आयोजित ११४औँ अन्तर्राष्ट्रिय श्रम सम्मेलनका क्रममा अन्तर्राष्ट्रिय समुदायलाई जानकारी गराउनुभएको बताइएको छ।

‘गत हप्ता जेनेभा भ्रमणको क्रममा मैले अन्तर्राष्ट्रिय समुदायको अघि आफ्नो कुरा दृढतापूर्वक राखें, जसअनुसार रोजगारदाताले हाम्रा श्रमिकलाई मर्यादित काम, न्यूनतम सेवा सुविधा तथा सम्झौताका अनुसार काम दिन सक्दैनन् भने ती रोजगारदाता जुनसुकै देशका भए पनि हामी श्रमिक पठाउँदैनौं,’ मन्त्री यादवले बताएका छन्। मन्त्रालयले गन्तव्य मुलुकको भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रहेको बताएको छ। रोजगारदाता र गन्तव्य मुलुकका सरकारसँग साझेदारी तथा समन्वय बढाउने उपायहरू खोजिरहेको उहाँले जानकारी दिनुभयो।

‘गन्तव्य मुलुकका रोजगारदातालाई एकीकृत मोडेलमा समावेश गराउँदैछौं, ताकि उनीहरू हाम्रो दायरा भित्र रहून्,’ मन्त्री यादवले थप टिप्पणी गर्नुभयो। वैदेशिक रोजगारीको डिजिटलाइजेसन सम्बन्धी प्रतिवेदनमा काम अगाडि बढिरहेको छ र यसको कार्यान्वयन प्रक्रिया सुरु भइसकेको उहाँले बताए। २०६५ सालदेखि थन्किएका पुराना मुद्दाका फाइलहरू व्यवस्थित गर्ने अभियान चलाइरहेको उल्लेख गर्दै मन्त्री यादवले हालसम्म १० हजारभन्दा बढी फाइलहरू डिजिटलाइज गरी वर्गीकरण गरिसकेको र असार महिनाभरि १५ हजार मुद्दा टुंग्याउने लक्ष्यसहित काम भइरहेको जानकारी दिनुभयो।

इंग्लैंड और क्रोएशिया महत्वपूर्ण मुकाबले में आमने-सामने


फीफा विश्व कप 2026 की ट्रॉफी जीतने की मजबूत दावेदारी के साथ ‘‘इट्स कमिंग होम’’ के ऐतिहासिक नारे के बीच यूरोपीय दिग्गज इंग्लैंड आज टेक्सास के मैदान में अपनी विश्व कप यात्रा शुरू कर रहा है, जहाँ उसका सामना परिचित प्रतिद्वंदी क्रोएशिया से होने जा रहा है।

1966 में पहली बार विश्व चैंपियन बनने वाली इंग्लैंड के लिए 60 वर्षों से लंबी उपाधि उपेक्षा को तोड़ने का यह सबसे सुनहरा मौका है। मुख्य कोच थॉमस ट्यूचेल की टीम के चयन को लेकर समर्थकों में कुछ मतभेद हैं, लेकिन क्वालिफाइंग चरण में शत-प्रतिशत जीत का रिकॉर्ड रखने वाली इस टीम को उपाधि की मुख्य दावेदार माना जा रहा है।

कोच ट्यूचेल ने कहा, “हमारे पास सपना देखने का अधिकार है, लेकिन हम भ्रमित नहीं होना चाहते।” वहीं, कभी अंडरडॉग मानी जाने वाली क्रोएशिया अब विश्व फुटबॉल की सबसे निरंतर प्रदर्शन करने वाली टीमों में से एक बन गई है, जिसने 2018 में उपविजेता और 1998 तथा 2022 के विश्व कप में तीसरा स्थान हासिल कर अपनी मजबूती साबित कर रखी है।

40 वर्ष की उम्र में अपना पांचवां और अंतिम विश्व कप खेल रहे कप्तान लुका मोड्रिच के जादुई नेतृत्व में क्रोएशिया एक बार फिर इंग्लैंड के सपने को चकनाचूर करने की कोशिश में है।

हीड-टू-हीड और हालिया फॉर्म

इंग्लैंड और क्रोएशिया के बीच यह कुल 12वां मुकाबला है। पहले 11 मैचों में इंग्लैंड ने 6 बार जीत हासिल की है, जबकि क्रोएशिया ने 3 मैच जीते हैं और 2 मैच ड्रॉ रहे हैं।

विश्व कप के इतिहास में ये दोनों टीमें इससे पहले तीन बार आमने-सामने आ चुकी हैं, जिनमें 2018 रूस विश्व कप सेमीफाइनल मुकाबला सबसे चर्चित रहा; जहां क्रोएशिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया और इंग्लैंड के विश्व कप जीतने के सपने को खत्म किया।

पिछले 5 मैचों के संदर्भ में इंग्लैंड ने 3 जीत, 1 हार और 1 ड्रॉ का परिणाम हासिल किया है। हाल के मैत्रीपूर्ण मुकाबलों में इंग्लैंड ने कोस्टा रिका और न्यूजीलैंड को हराते हुए अच्छी मनोदशा के साथ टेक्सास पहुंचा है।

मार्च में जापान के खिलाफ अप्रत्याशित हार का सामना हुआ था, लेकिन इसके पहले टीम ने उरुग्वे से ड्रॉ खेला था और विश्व कप क्वालीफाइंग में अल्बानिया को हराया था।

दूसरी ओर, क्रोएशिया ने अपनी पिछली पांच मैचों में 3 जीत और 2 हार का सिलसिला रखा है। क्रोएशिया की फॉर्म में कुछ उतार-चढ़ाव दिखे हैं। हाल की वार्म-अप मैच में स्लोवाकिया को हराया, लेकिन क्रोएशिया बेल्जियम और ब्राजील के खिलाफ लगातार हार का सामना कर चुका है। इससे पहले कोलंबिया और मोंटेनेग्रो के खिलाफ जीत दर्ज की थी।

देखने लायक खिलाड़ी

इंग्लैंड

हैरी केन (स्ट्राइकर) : इंग्लैंड के कप्तान और सर्वकालिक उच्चतम गोलकर्ता 32 वर्षीय हैरी केन अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं। जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए पिछले सीजन 51 मैचों में 61 गोल का रिकॉर्ड बनाकर लगातार दूसरी बुंडेसलीगा ट्रॉफी जीतने वाले केन के बारे में क्रोएशियाई कोच ज़ल्को डालिच ने उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर के रूप में माना है। क्वालीफाइंग चरण में टीम के नेतृत्व करने वाले केन की ‘क्लिनिकल फिनिशिंग’ क्रोएशियाई रक्षा तोड़ने की महत्वपूर्ण चाबी होगी।

जुड बेलिंगहैम (मिडफिल्डर) : स्पेन के दिग्गज रियल मैड्रिड के मुख्य स्टार 22 वर्षीय जुड बेलिंगहैम इंग्लैंड के मिडफील्ड का मुख्य इंजन हैं। मैदान के मध्य भाग में गेंद नियंत्रण करना, शारीरिक रूप से मजबूत खेल दिखाना और अचानक विपक्षी बॉक्स में जाकर गोल करना उनकी विश्व स्तरीय ‘बॉक्स-टू-बॉक्स’ शैली है। क्रोएशिया के प्रख्यात मिडफील्ड के खिलाफ नियंत्रण बनाए रखना उनके प्रदर्शन का निर्णायक पहलू होगा।

ट्रेभो चालोबा (डिफेंडर) : न्यूकैसल यूनाइटेड के राइट-बैक टीनो लिव्रामेंटो ने रविवार को कंसास सिटी के प्रशिक्षण सत्र में घुटने की चोट के कारण विश्व कप से बाहर होना पड़ा, जिसके कारण उनका स्थान भरने के लिए ट्रेभो चालोबा को आकस्मिक रूप से टीम में लिया गया है। क्रोएशिया के तेज़ पेसिंग विंगर्स को रोकने और इंग्लैंड की रक्षा को मजबूत करने में चालोबा की भूमिका इस मैच में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

क्रोएशिया

लुका मोड्रिच (मिडफिल्डर) : क्रोएशिया के कप्तान लुका मोड्रिच 40 वर्ष की उम्र में भी राष्ट्रीय टीम के ‘दिल’ हैं। कोच डालिच ने उन्हें मैदान के अंदर अपना ‘दायाँ हाथ’ बताया है। रियल मैड्रिड के इस स्टार का यह अंतिम विश्व कप अभियान है। मैदान के मध्य भाग से मैच की गति और लय को अपने इशारे पर नियंत्रित करने की उनकी जादुई क्षमता और सेट-पीस पर सटीक क्रॉस देना इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ा चुनौती होगा।

जोस्को गुंडोगान (डिफेंडर) : इंग्लिश प्रीमियर लीग चैंपियन मैनचेस्टर सिटी के मुख्य डिफेंडर जोस्को गुंडोगान क्रोएशिया की रक्षा की मजबूत चट्टान हैं। विश्व के प्रमुख और आधुनिक डिफेंडरों में से एक माने जाने वाले 24 वर्षीय गुंडोगान प्रीमियर लीग में खेलते हैं, इसलिए उन्हें हैरी केन के खेल शैली की पूरी जानकारी है। केन जैसे गोल मेकर को बॉक्स में नियंत्रित करना गुंडोगान की मुख्य जिम्मेदारी होगी।

आंद्रे क्रामारीच (फॉरवर्ड) : जर्मन क्लब हॉफ़ेनहाइम से पेशेवर फुटबॉल खेल रहे अनुभवी स्ट्राइकर आंद्रे क्रामारीच क्रोएशिया की आक्रमक पंक्ति के मुख्य हथियार हैं। 90 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके क्रामारीच बॉक्स के भीतर मौके का फायदा उठाने और चतुराईपूर्ण बॉडी पोज़िशनिंग के लिए जाने जाते हैं। इंग्लैंड की रक्षा को काउंटर अटैक में दबाव में रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

साङ्ला के अनोखे तथ्य: फेफड़े न होने पर भी सांस लेने की क्षमता, सिर कटने पर भी जीवित रह सकने का अद्भुत गुण

हममें से कई लोग घर में साङ्ला देखकर डर या घिन महसूस करते हैं। दुनिया भर में साङ्ला की 4,600 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 30 प्रजातियाँ ही मानव आवास क्षेत्र या घरों में दिखाई देती हैं। इस छोटे जीव की ताकत को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। यह पृथ्वी पर आए चार बड़े महाविनाशों को सहन कर चुका है और परमाणु बम के प्रकोप को भी झेल चुका है। लाखों वर्षों पुरानी साङ्ला की इतिहास डायनासोर से भी पुरानी मानी जाती है। सन 1865 में वैज्ञानिक सैमुअल हबर्ड स्कडर ने अमेरिका की कोयला खान में करीब 30 करोड़ वर्ष पुराने साङ्ला के पंखों के जीवाश्म खोजे थे। उस समय उन पंखों की लंबाई 4 से 7 सेंटीमीटर के बीच थी। सन 2018 में लंदन स्थित इम्पीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों ने उन 30 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्मों का त्रि-आयामी (3D) वर्चुअल मॉडल तैयार किया, जिससे उस समय के साङ्ला की वास्तविक शारीरिक संरचना समझना आसान हुआ।

साङ्ला की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी अद्भुत जीवित रहने की क्षमता है। इसने पृथ्वी पर आए चार बड़े महाविनाशों को भी झेला है।लेट डेवोनियन महाविनाश लगभग 360 मिलियन साल पहले समुद्र में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण लगभग 75 प्रतिशत प्रजातियां खत्म हो गईं, लेकिन साङ्ला बच गया। पर्मियन-ट्रायासिक महाविनाश लगभग 250 मिलियन साल पहले हुआ, जिसमें साइबेरिया में विशाल ज्वालामुखी विस्फोट, अम्लीय वर्षा और पर्यावरणीय विनाश के कारण समुद्री जीवों के 95 प्रतिशत तथा स्थलीय जीवों के 70 प्रतिशत प्रजातियां नष्ट हो गईं। साङ्ला दलदल के नीचे छिपकर तथा सड़े हुए पदार्थ खाकर जीवित रहने में सफल रहा। ट्रायासिक-जुरासिक महाविनाश लगभग 200 मिलियन साल पहले हुआ, जिसमें भारी ज्वालामुखी गतिविधि के कारण करीब 80 प्रतिशत जीव लुप्त हो गए, लेकिन साङ्ला फिर से जीवित रहने में सक्षम रहा।

साङ्ला का शरीर अन्य जीवों की तुलना में काफी अलग होता है। इसका शरीर तीन मुख्य भागों में विभाजित होता है: सिर, पीठ और पेट। सिर में दो आंखें होती हैं जो लगभग 360 डिग्री तक का दृश्य क्षेत्र देख सकती हैं। इसके साथ दो एंटीना भी होते हैं जो सेंसर के रूप में कार्य करते हैं। साङ्ला का हृदय 13 कक्षों में विभाजित होता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि साङ्ला में फेफड़े नहीं होते; यह शरीर के किनारों पर स्थित छोटे छिद्र (स्पाइरैकल) के माध्यम से सांस लेता है। इसके रक्त में हीमोग्लोबिन न होने के कारण रक्त लाल नहीं बल्कि सफेद या पीले रंग का होता है। सिर कट जाने के बाद भी साङ्ला जीवित रह सकता है क्योंकि इसकी स्नायु प्रणाली सिर्फ सिर तक सीमित नहीं होती; इसके शरीर के विभिन्न हिस्सों में न्यूरल केंद्र होते हैं, जिनकी वजह से शरीर के किसी भी हिस्से को क्षति पहुंचने पर भी अन्य भाग कार्य कर सकते हैं।

मेस्सी: विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना के स्टार ने पहली हैट्रिक के साथ कई रिकॉर्ड बनाए

विश्व कप 2026 में गोल करने के बाद प्रसन्न मुद्रा में जश्न मनाते अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी

तस्वीर स्रोत, Getty Images

तस्वीर की कैप्शन, लियोनेल मेस्सी पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने छह विश्व कप खेले हैं

फुटबॉल के महान खिलाड़ियों के लिए 17 जून एक विशेष दिन साबित हुआ। कई शानदार प्रदर्शन हुए, लेकिन सभी की नजर अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी पर टिकी रही।

फ्रांस के किलियन एमबाप्पे और नॉर्वे के एर्लिंग होलंड ने दो-दो गोल करके धमाल मचा दिया था, लेकिन कुछ ही घंटों में मेस्सी ने अपनी चमक का परचम लहराया।

अल्जीरिया के खिलाफ की गई हैट्रिक के बाद मेस्सी ने विश्व कप में सबसे अधिक 16 गोल का संयुक्त रिकॉर्ड कायम किया। साथ ही उम्र बढ़ने के बावजूद उच्च स्तर पर खेलकर अपनी क्षमता साबित की।

कैंसास में सूर्यास्त के समय 38 वर्षीय मेस्सी छह विश्व कप में खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। इस रिकॉर्ड को बनाने में उन्होंने पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो को एक दिन से पीछे छोड़ा।

मेस्सी ने 2006 में जर्मनी में 18 साल की उम्र में विश्व कप में पदार्पण किया था। 20 साल बाद उन्होंने अर्जेंटीना के लिए अपना 200वां मैच खेला। खेल उत्कृष्ट रहा, जिसमें उन्होंने अपनी फुर्ती और दक्षता दिखायी।

पुर्तगाल और कांगो पहली बार आमने-सामने, रोनाल्डो का प्रदर्शन कैसा होगा?

3 आसार, काठमांडू। फीफा विश्व कप 2026 के तहत टेक्सास के मैदान पर आज एक बेहद प्रत्याशित और रोमांचक मुकाबला होने जा रहा है, जहाँ यूरोपीय महाशक्ति पुर्तगाल और अफ्रीकी महाद्वीप की आश्चर्यजनक टीम कांगो डीआर आमने-सामने होंगी। इतिहास में पहली बार विश्व कप उपाधि हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने वाली पुर्तगाल ने क्वालीफाइंग चरण में शानदार प्रदर्शन किया है; जहां उन्होंने 6 मैचों में मात्र 20 गोल दागे और अपनी जगह सुनिश्चित की। वहीं, 52 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद सन् 1974 के बाद पहली बार विश्व कप के मुख्य मंच पर वापसी करने वाली कांगो डीआर उच्च मनोबल के साथ मैदान में उतरेगी। मेक्सिको में हुए विश्व कप प्ले-ऑफ प्रतियोगिता के फाइनल में जमैका को 1-0 से हराकर इतिहास रचने वाली कांगो इस बड़े मंच पर यूरोपीय विजेता को स्तब्ध कर नई इबारत लिखने को तैयार है।

हेड टू हेड और हालिया प्रदर्शन के आधार पर फीफा विश्व कप के इतिहास में ये दोनों राष्ट्र पहली बार आमने-सामने हो रहे हैं। समग्र अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल इतिहास में भी पुर्तगाल और कांगो डीआर के बीच अब तक कोई आधिकारिक सीनियर स्तर का मैच नहीं हुआ था। इसलिए टेक्सास में ये मुकाबला स्वयंपर ऐतिहासिक शुरुआत होगा। क्वालीफाइंग चरण में शानदार आक्रमण रिकॉर्ड और फीफा रैंकिंग के अनुसार पुर्तगाल मजबूत दावेदार नजर आता है, लेकिन प्ले-ऑफ से आई कांगो डीआर की कड़ी रक्षा व्यवस्था और जुझारू अफ्रीकी खेल शैली पुर्तगाल को कड़ी चुनौती दे सकती है। पुर्तगाल ने हाल के 5 मैचों में कोई हार नहीं दर्ज की है, जिसमें 4 जीत और 1 बराबरी शामिल है, जबकि कांगो ने 2 जीत, 2 हार और 1 बराबरी खेली है।

मैच के मुख्य खिलाड़ी पुर्तगाल के कप्तान और स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं, जिन्हें विश्व फुटबॉल के महानतम व्यक्तित्वों में माना जाता है। क्वालीफाइंग चरण के 6 मैचों में महत्वपूर्ण गोल करने वाले 41 वर्षीय रोनाल्डो का यह छठा विश्व कप है। उनकी खेल समझ और सटीक गोल करने की कला कांगो डीआर की रक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बनने वाली है। दूसरी ओर, कांगो डीआर के योआन विसा (फ़ॉरवर्ड) और चांसल म्बेम्बा (डिफेंडर) भी महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से हैं।

यह मैच विश्व कप इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने की उम्मीद लगाए हुए है।

जोर्डन पहली बार विश्व कप में हिस्सा लेकर ऑस्ट्रिया से हारा

३ असार, काठमांडू। ऑस्ट्रिया ने फीफा विश्वकप-२०२६ में विजयी शुरुआत की है। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम में बुधवार को हुए पहले मैच में ऑस्ट्रिया ने जोर्डन को ३-१ से हराया। ऑस्ट्रिया की जीत में रोमानो श्मिड और मार्को अर्नाटोविक ने एक-एक गोल किए जबकि एक गोल उपहार के रूप में मिला।

मैच के २०वें मिनट में रोमानो ने गोल कर ऑस्ट्रिया को अग्रता दिलाई। लेकिन ५०वें मिनट में अली ओलवान ने गोल करते हुए जोर्डन को बराबरी दिला दी। मैच के ७६वें मिनट में जोर्डन के याजान अलरब ने आत्मघाती गोल कर ऑस्ट्रिया को फिर से बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ के इन्जुरी समय में जोर्डन के एक खिलाड़ी के हाथ पर गेंद लगने पर ऑस्ट्रिया को पेनाल्टी मिली, जिसे मार्को ने सफलतापूर्वक गोल में बदला।

इस जीत के साथ ऑस्ट्रिया ने ३ अंक जोड़कर समूह ‘जे’ में दूसरे स्थान पर कब्जा किया है। समान ३ अंकों के साथ अर्जेंटीना गोल अंतर के आधार पर शीर्ष स्थान पर है। जोर्डन और अल्जीरिया दोनों अभी तक बिना अंक के हैं। आठवीं बार विश्व कप खेल रहे ऑस्ट्रिया ने सन् १९५४ के विश्व कप में तीसरा स्थान हासिल किया था। ऑस्ट्रिया ने सन् १९९८ के बाद २८ वर्षों में पहली बार विश्व कप में वापसी की है। एशियाई देश जोर्डन पहली बार विश्व कप के मैदान पर पहुंचा है।

ऑस्ट्रिया ने जॉर्डन के खिलाफ फिर से बढ़त बनाई

३ जून, काठमाडौँ। फीफा विश्व कप २०२६ की क्वालीफिकेशन प्रक्रिया के तहत, ऑस्ट्रिया ने जॉर्डन के खिलाफ फिर से बढ़त हासिल कर ली है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलिफोर्निया में सान फ्रांसिस्को वे एरिया एरिना में जारी इस मैच के ७६वें मिनट में जॉर्डन के यजान अलराब ने आत्मघाती गोल किया, जिससे ऑस्ट्रिया ने दूसरी बार बढ़त बनाने में सफलता पाई।

मैच के प्रारंभिक चरण में, २०वें मिनट में रोमानो श्मिड ने गोल करके ऑस्ट्रिया को पहली बार बढ़त दिलाई थी। लेकिन, दूसरे हाफ के ५०वें मिनट में अली ओलवान ने गोल कर जॉर्डन को बराबरी पर ला दिया था।