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लेखक: space4knews

काठमा कुँदिएको कुमार विकको सपना – Online Khabar

काठमा कुरेदिएका कुमार विक के सपने

समाचार सारांश तेह्रथुम के म्याङलुङ नगरपालिका और फेदाप गाँवपालिका की सीमा पर खोरुङ्वा नदी के किनारे परंपरागत काठकुंदने की कला आज भी जीवित है। कुमार विक स्थानीय तकनीक का उपयोग करते हुए लकड़ी से पारंपरिक सामग्री तैयार कर रहे हैं और बाज़ार का विस्तार कर रहे हैं। इस कला के संरक्षण के लिए संरचनात्मक पहल और युवाओं को आकर्षित करने की योजना आवश्यक है। ६ वैशाख, तेह्रथुम। सुबह की पहली किरणें पहाड़ की गोद को रोशन कर रही थीं, तब खोरुङ्वा नदी के किनारे एक अलग ही दुनिया जीवंत हो रही थी। पानी की सरसराहट, ठंडी हवा का स्पर्श और लकड़ी को ठोकने वाले औजारों की ताल के बीच यहाँ श्रम की जीवंत संगीत बज रही थी। इसी संगीत के साथ कुछ हाथ अपने जीवन, सपनों और भविष्य को लकड़ी में उकेर रहे थे – नितांत, निःस्वार्थ और मौन। तेह्रथुम जिले के म्याङलुङ नगरपालिका और फेदाप गाँवपालिका की सीमा पर खोरुङ्वा नदी के किनारे सुबह की पहली धूप के साथ एक अलग ही संसार जागता है। थकी हुई लकड़ी के ढेर, उस पर आकार देने वाले हाथ और दिनभर चलते रहने वाले कौशल का अभ्यास – ये सब मिलकर एक जीवित परंपरा की कहानी कहते हैं। इसी माहौल में पिछले दो दशकों से अधिक समय से अपने जीवन को लकड़ी से जोड़कर रखने वाले हैं ताप्लेजुङ आठराैई त्रिवेणी गाँवपालिका–५ चाँगे के कुमार विक। उनके लिए लकड़ी केवल कच्चा माल नहीं, संभावनाओं का स्रोत है। नदी के पानी के बहाव से मोटर चलाकर लकड़ी को खुदना उनकी स्थानीय तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है। सीमित संसाधनों के बीच भी रचनात्मक सोच और अभ्यास से कैसे उत्पादक कार्य हो सकता है, यह उनसे सीखा जा सकता है। कुमार सुबह से लेकर शाम तक लकड़ी के साथ लगे रहते हैं, कभी छीलते हैं, कभी घिसते हैं, तो कभी नया आकार देते हैं। इसी लगातार अभ्यास ने उन्हें जिले में कुशल काठकुंदने वाले कारीगर के रूप में स्थापित किया है। उनके हाथ से निकले उत्पाद ग्रामीण जीवनशैली से गहरे जुड़े हैं। दूध जमाने के ठेकी, तेल रखने की चौथा, तोङ्वा रखने वाले बर्तन, खुर्पेटा जैसे सामानों में न केवल दैनिक इस्तेमाल की जरूरत है बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी जुड़ी हुई है। विशेषकर तोङ्वा से जुड़े उत्पादों की मांग अधिक है क्योंकि यह पूर्वी पहाड़ी समाज की जीवनशैली और आतिथ्य संस्कृति को दर्शाता है। इसी कारण उनके उत्पाद स्थानीय बाजार से शुरू होकर ताप्लेजुङ के फुङलिङ से लेकर तराई के अनेक स्थानों तक पहुँच रहे हैं। फोन पर ऑर्डर आने लगे हैं और इस पेशे से मिली आमदनी ने उनके परिवार को आर्थिक स्थिरता दी है। लेकिन इस यात्रा में चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। समय के साथ प्लास्टिक, स्टील और अन्य आधुनिक सामग्री के उपयोग बढ़ने से लकड़ी के पारंपरिक उत्पादों का उपयोग घट रहा है। सस्ते, आसान और टिकाऊ विकल्पों के आने से पुरानी कलाओं की उपेक्षा हो रही है। इसके अलावा, ग्रामीण युवाओं का रोज़गार की तलाश में शहर या विदेश जाना लगातार बढ़ रहा है। इस कारण पारंपरिक कारीगरी सीखने और उसे जारी रखने वाले जनशक्ति में कमी आ रही है। अगर कुमार विक जैसे अनुभवी कारीगरों के बाद नई पीढ़ी में इन कलाओं के प्रति रुचि न बढ़ी, तो कई वर्षों से संजोई गई ज्ञान, अभ्यास और अनुभव के साथ यह कला खत्म होने का खतरा है। कुमार स्वयं इस चिंता से अछूते नहीं हैं। स्कूल स्तर से स्थानीय कारीगरी और कौशल से परिचय कराने, ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देने और युवाओं के लिए आर्थिक प्रोत्साहन जैसी संरचनात्मक पहलों की आवश्यकता महसूस करते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, बाजार और तकनीक के साथ जोड़ने से नई पीढ़ी को आकर्षित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, लकड़ी के उत्पादों को आधुनिक जीवनशैली के अनुसार संशोधित करके बाजार में लाया जाए, तो मांग और बढ़ सकती है। साथ ही ग्रामीण पर्यटन के साथ इन कलाओं को जोड़ा जाना भी एक सशक्त विकल्प है। पर्यटकों को स्थानीय उत्पादन, हस्तकला और निर्माण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव दिलाने से आमदनी के नये रास्ते खुल सकते हैं। हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता भी इस पेशे को फिर से जीवित करने का आधार तैयार कर रही है। कुमार विक के हाथों में उकेरी गई हर आकृति में आत्मनिर्भरता और पहचान का गहरा अर्थ छिपा है। वे केवल लकड़ी के उत्पाद नहीं बना रहे, बल्कि एक परंपरा को बचा रहे हैं, एक जीवनशैली को संरक्षित कर रहे हैं और भविष्य की पीढ़ी के लिए संदेश छोड़ रहे हैं – मेहनत, कौशल और समर्पण से अपने ही मिट्टी में भविष्य बनाया जा सकता है। अगर समय रहते इन कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और पुस्तांतरण पर ध्यान दिया गया, तो खोरुङ्वा नदी के किनारे बजती इस श्रम संगीत को कभी थमने नहीं देना होगा। बल्कि यह धुन और भी अधिक हाथों से फैलेगी, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम बनाएगी।

वान यूआई ८.५ बीटा अपडेट के साथ गैलेक्सी एआई की नई सुविधाएं उपलब्ध

सैमसंग गैलेक्सी एस २५ सीरीज के लिए ‘वान यूआई ८.५’ के आगामी बीटा अपडेट के माध्यम से नई ‘गैलेक्सी एआई’ सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह अपडेट अप्रैल २०, २०२६ तक जारी किया जाएगा, जिसमें एडवांस्ड ऑडियो इरेजर, कॉल स्क्रीनिंग, क्रिएटिव स्टूडियो और फोटो असिस्ट जैसी AI सुविधाएं शामिल होंगी। सैमसंग ने पुष्टि की है कि ये सुविधाएं गैलेक्सी एस २४ सीरीज के फ्लैगशिप फोन्स पर भी उपलब्ध होंगी। ६ वैशाख, काठमांडू।

सैमसंग ने घोषणा की है कि उसने गैलेक्सी एस २६ सीरीज के साथ पेश किए गए नए ‘गैलेक्सी एआई’ फीचर्स को पुराने उपकरणों के लिए भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। खासकर गैलेक्सी एस २५ सीरीज के उपयोगकर्ता ‘वान यूआई ८.५’ के आगामी बीटा अपडेट के जरिए इन सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे। यह अपडेट अप्रैल २०, २०२६ के भीतर जारी होने की संभावना है।

इस अपडेट में शामिल प्रमुख AI सुविधाएं निम्नलिखित हैं: एडवांस्ड ऑडियो इरेजर, जो इंस्टाग्राम, नेटफ्लिक्स और यूट्यूब जैसे ऐप्स चलाते समय अनावश्यक शोर को कम करने में मदद करता है। उपयोगकर्ता ‘क्विक पैनल’ से सीधे इस सुविधा को सक्रिय कर आवाज़ के स्तर को समायोजित कर सकेंगे।

कॉल स्क्रीनिंग फीचर व्यस्तता के दौरान AI के माध्यम से कॉल रिसीव करेगा, कॉलर की पहचान और कॉल करने के उद्देश्य को पता लगाएगा। क्रिएटिव स्टूडियो एप की मदद से उपयोगकर्ता निमंत्रण कार्ड, स्टिकर और वॉलपेपर डिजाइन कर सकेंगे। फोटो असिस्ट का नया संस्करण टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर फोटो संपादित करने की अनुमति देगा। शुरू में ये सुविधाएं केवल एस २६ सीरीज तक सीमित रहने की चर्चा थी, लेकिन कंपनी ने पुष्टि की है कि ये सुविधाएं बाद में पुराने उपकरणों पर भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

बैतडी के सिगास गाउँपालिका–८ में टैक्टर दुर्घटना, एक की मौत

सिगास गाउँपालिका–८ के सानीगाड खोलामा टैक्टर दुर्घटना में २५ वर्षीय लोकेन्द्र बोहरा की मौत हो गई है। दुर्घटना में चालक समेत दो व्यक्ति टैक्टर पर सवार थे, और चालक दानबहादुर धामी सुरक्षित हैं। जिला प्रहरी कार्यालय के अनुसार, टैक्टर सड़क से लगभग ३०० मीटर नीचे खिसक गया था।

६ वैशाख, दसर्थचंद (बैतडी) । बैतडी के सिगास गाउँपालिका–८ के सानीगाड खोलामा आज हुए टैक्टर दुर्घटना में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है। सिगास गाउँपालिका–८ के लुपुण से बझाङ के देउलेख की ओर जा रहे सपप्र ०१ ००१ त १३८४ नम्बर के टैक्टर की दुर्घटना में सिगास–८ टोलखेत के २५ वर्षीय लोकेन्द्र बोहरा की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जिला प्रहरी कार्यालय के प्रवक्ता, प्रहरी निरीक्षक सुरज सिंह ने बताया कि टैक्टर में चालक सहित दो व्यक्ति सवार थे और बोहरा की मृत्यु हुई है। चालक सिगास गाउँपालिका–५ के लगभग ३० वर्षीय दानबहादुर धामी संपर्क में हैं, उन्होंने बताया।

सपनाको अर्थ के हो: संकेतहरू र यसको महत्त्व कत्तिको छ?

सपनाहरू के संकेत दिन्छन् र तिनलाई कति महत्त्व दिनु उपयुक्त हुन्छ? विभिन्न संस्कृतिका मानिसहरूले आफ्ना सपनाहरूको विश्लेषण फरक-फरक तरिकाले गर्दै आएका छन्। प्राचीन इजिप्ट, ग्रीस र बेबिलोनियन सभ्यतामा बासिन्दाहरूले सपनालाई जीवनका विभिन्न पाटोहरूसँग सम्बन्धित सन्देशका रूपमा लिने गर्थे। तर वास्तविकता के छ? के साँच्चै सपनाले हाम्रो बारेमा धेरै कुरा बताउन सक्छन्? यो भिडियो अवश्य हेर्नुहोस्।

२५वें आइटीएफ तेक्वान्दो राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नेपाल आर्मी टीम चैंपियन बनी

२५वें आइटीएफ तेक्वान्दो राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नेपाल आर्मी टीम ने १९ स्वर्ण सहित चैंपियन का खिताब जीता है। प्रतियोगिता में आर्मी के सुमन मरासिंगी मगर और रिना धिमाल को उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में घोषित किया गया है। यू-१५ आइटीएफ प्रतियोगिता में बागमती प्रदेश ने पहला स्थान प्राप्त किया है। ६ वैशाख, काठमांडू।

नेपाल अंतरराष्ट्रीय तेक्वान्दो महासंघ (एनआइटीएफ) के आयोजन में त्रिपुरेश्वर स्थित राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) के कवरहल में सम्पन्न दो दिवसीय प्रतियोगिता में आर्मी ने १९ स्वर्ण, ४ रजत और ९ कांस्य पदक जीतते हुए चैंपियन का खिताब पाया। इसी तरह, बागमती ने ७ स्वर्ण, १० रजत और ९ कांस्य सहित दूसरा स्थान हासिल किया जबकि एपीएफ ने ४ स्वर्ण, ७ रजत और ६ कांस्य के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया।

व्यक्तिगत स्तर पर भी आर्मी के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सुमन मरासिंगी मगर पुरुष वर्ग में और रिना धिमाल महिला वर्ग में उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित हुए हैं। सुमन ने ३ स्वर्ण और रिना ने ५ स्वर्ण पदक जीते हैं। विभिन्न विधाओं में खिलाड़ियों ने एकल स्पैअरिंग, एकल पैटर्न, समूह स्पैअरिंग, समूह पैटर्न तथा सेल्फ डिफेंस में प्रतिस्पर्धा की।

इसी प्रकार, दूसरे यू-१५ आइटीएफ प्रतियोगिता में बागमती प्रथम, लुम्बिनी द्वितीय और कर्णाली प्रदेश तृतीय स्थान पर रहे। बागमती ने ९ स्वर्ण, ५ रजत और ७ कांस्य पदक, लुम्बिनी ने ४ स्वर्ण, ६ रजत और ७ कांस्य तथा कर्णाली ने ४ स्वर्ण, ५ रजत और ७ कांस्य पदक जीते। यू-१५ वर्ग में पुरुषों में गण्डकी के सचिन कुमाल और महिलाओं में बागमती की आकृति नेपाल को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया। प्रतियोगिता में जूनियर और सीनियर स्तर पर पैटर्न और स्पैअरिंग कुल दो सौ से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया, यह जानकारी महासंघ के अध्यक्ष प्रवीन कुमार कार्की ने दी। इस प्रतियोगिता में सातों प्रदेशों के अलावा नेपाल आर्मी और सशस्त्र प्रहरी बल की एपीएफ सहित कुल ९ टीमें शामिल थीं।

स्थानीय तहको चुनाव केन्द्रित हुन खोज्दै रास्वपा – Online Khabar

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी स्थानीय तहको निर्वाचनमा केन्द्रित हुँदै

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी स्थानीय तहको निर्वाचनमा ध्यान केन्द्रित गर्दै उम्मेदवार क्लब गठन गर्ने तयारीमा छ। पार्टी केन्द्रीय समितिको बैठकमा स्थानीय तह उम्मेदवार क्लब गठन र आवेदन आह्वानसम्बन्धी विषयमा छलफल गरिनेछ। उम्मेदवार क्लबमा दर्ता भएका उम्मेदवारलाई पार्टीले प्रशिक्षण दिने र जिम्मेवारीबारे जानकारी गराउने योजना पनि बनाएको छ।

६ वैशाख, काठमाडौं। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) आगामी स्थानीय तहको निर्वाचनमा फोकस गर्दैछ। यसको हिस्साको रूपमा स्थानीय तहका उम्मेदवारहरूको लागि क्लब गठन गर्ने तयारी जारी छ। पार्टी प्रवक्ता मनिष झाकाका अनुसार, सोमबार पार्टी केन्द्रीय समितिको बैठक बसेर यस विषयमा निर्णय गरिनेछ। बैठक काठमाडौँको घन्टीघर वनस्थलीस्थित पार्टी केन्द्रीय कार्यालयमा आयोजना गरिने छ।

बैठकमा स्थानीय तह उम्मेदवार क्लब गठन र आवेदन आह्वानसम्बन्धी विषयहरूमा छलफल गरिनेछ। रास्वपा आगामी स्थानीय तह निर्वाचनको तयारीको भागको रूपमा उम्मेदवार छनोट प्रक्रियाका लागि उम्मेदवार क्लबको अवधारणा अघि बढाउने योजना बनाएको छ। पार्टी नेताहरूका अनुसार, उम्मेदवार क्लबले स्थानीय तहका उम्मेदवारहरूलाई विशेष प्राथमिकता दिनेछ।

पालिका तहमा उम्मेदवार बन्न इच्छुकहरूले उम्मेदवार क्लबमा आफ्नो नाम दर्ता गराउनेछन्। यसमा वडा अध्यक्ष, पालिका प्रमुख र कार्यकारी पदहरू समावेश छन्। २०७९ साल मंसिर ११ देखि १३ गतेसम्म महोत्तरीमा सम्पन्न केन्द्रीय र संसदीय दलको बैठकमा पार्टी सभापति रवि लामिछानेले नै उम्मेदवार क्लबको अवधारणा अघि सारेका थिए, जुन अवधारणालाई अहिले कार्यान्वयन गर्ने तयारी भइरहेको छ। उम्मेदवार बन्न चाहनेहरूलाई जिम्मेवारीमा पुगेपछि सम्हाल्नुपर्ने कार्यहरूको बारेमा जानकारी गराउनु यस अवधारणाको मुख्य उद्देश्य हो।

फेसबुक की मूल कंपनी मेटा 16 हजार कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में

मेटा कंपनी ने कुल 16 हजार कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई है। मेटा ने एआई तकनीक में लगभग 135 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करते हुए अपने भविष्य को ‘एआई-फर्स्ट’ बनाने की रणनीति अपनाई है। विश्व के प्रमुख तकनीकी कंपनियों में छंटनी की शुरुआत हो चुकी है। ओरेकल के बाद अब फेसबुक की मूल कंपनी मेटा ने भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग में गंभीर बदलाव का संकेत है। समाचार के अनुसार, कंपनी आगामी समय में लगभग 16 हजार कर्मचारियों को हटाने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में आगामी 20 मई को लगभग 8 हजार कर्मचारियों को विदा किया जाएगा।

कर्मचारी छंटनी का यह कदम मेटा के खर्चों में कटौती का प्रयास मात्र नहीं बल्कि एआई तकनीक की दिशा में रणनीतिक परिवर्तन के रूप में भी देखा जा रहा है। मेटा कंपनी पिछले कुछ समय से मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व में एआई क्षेत्र में अपनी प्रभुसत्ता स्थापित करने के लिए आक्रामक रूप से आगे बढ़ रही है। जेनेरेटिव एआई, मशीन लर्निंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और विशाल डेटा सेंटरों में अरबों डॉलर का निवेश कर मेटा ने अपने भविष्य को ‘एआई-फर्स्ट’ बनाने का स्पष्ट संकेत दिया है।

विश्लेषकों के अनुसार, कंपनी अपने कार्यबल को चुस्त और स्वचालित बनाने की रणनीति अपनाते हुए लगभग 10 प्रतिशत तक कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि मेटा कंपनी आर्थिक संकट के कारण छंटनी नहीं कर रही है। आर्थिक रूप से मजबूत होते हुए भी मेटा यह कदम उठा रही है। कंपनी की वार्षिक आय और मुनाफा दोनों उच्च स्तर पर होने के बावजूद लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए लागत संरचना में परिवर्तन आवश्यक है, यह विशेषज्ञों की राय है।

मेटा का निर्णय वास्तव में ‘कम लोग, ज्यादा उत्पादन’ नामक नई डिजिटल अर्थव्यवस्था के सिद्धांत के अनुरूप है। जहां पहले बड़ी संख्या में मानवशक्ति की आवश्यकता होती थी, वहीं अब एआई प्रणाली के माध्यम से कार्य तेज और सस्ते तरीके से पूरे किए जा रहे हैं। कर्मचारी छंटनी का यह कदम मेटा के लिए नया और पहला नहीं है। वर्ष 2022 और 2023 में कंपनी ने लगभग 21 हजार कर्मचारियों को हटाया था। लेकिन 2026 में शुरू हुई यह नई छंटनी की लहर और भी गहन और संरचनात्मक प्रतीत होती है।

तकनीकी क्षेत्र में व्यापक बदलाव, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर नए जोखिम के रूप में जनशक्ति की छंटनी की प्रवृत्ति केवल मेटा तक सीमित नहीं है। ओरेकल सहित अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियों ने भी हाल ही में हजारों कर्मचारियों को निकाला है। यह संकेत है कि अब विश्व भर का तकनीकी उद्योग एआई-प्रेरित पुनर्गठन के चरण में प्रवेश कर चुका है। विकासशील देशों में स्थित आउटसोर्सिंग श्रमिक, विशेषतौर पर एआई ट्रेनिंग और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े कार्यकर्ता, सबसे ज्यादा रोजगार असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विश्व स्तर पर कार्यस्थल से मानव जनशक्ति का विस्थापन इस तरह जारी रहा, तो यह एआई लेअफ ट्रैप की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में असंतुलन पैदा होने का खतरा है, जिसकी लेकर विशेषज्ञ गंभीर चिंता जता रहे हैं।

श्याम घिमिरे ने मौजूदा नेतृत्व पक्ष को पार्टी एकता कायम रखने की जिम्मेदारी बताई

नेपाली कांग्रेस के नेता श्याम घिमिरे ने पार्टी को एकजुट बनाने में वर्तमान में नेतृत्व कर रहे संस्थापन पक्ष की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि गगन थापाले सभी पक्षों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा और विशेष महाधिवेशन से बाहर रहे पक्षों को भी समेटना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पार्टी कमजोर स्थिति में है, इसलिए नेतृत्व को पार्टी को एकजुट कर आगे बढ़ाने में सभी को साथ देना होगा। ६ वैशाख, काठमांडू।

आज रविवार को शेरबहादुर देउवा समूह के पूर्व केन्द्रीय सदस्यों की बैठक में भाग लेते हुए घिमिरे ने यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘अब मुद्दा-मुलाकात का समय खत्म हो चुका है। राजनीतिक रूप से पार्टी को एकजुट कर आगे बढ़ना जरूरी है,’ इसके साथ ही उन्होंने जोड़ते हुए कहा, ‘गगनजी को सभी को समेट कर आगे बढ़ना होगा। विशेष महाधिवेशन से बाहर रहे सदस्यों को किस तरह शामिल किया जाए यह उनकी जिम्मेदारी है।’ उन्होंने यह भी कहा कि देउवा पक्ष को भी पार्टी की एकता को मजबूत करने के लिए कार्य करना चाहिए। ‘पार्टी फिलहाल कमजोर है। साथ ही वर्तमान संस्थापन पक्ष को ‘हमने जीत हासिल की है, हमारा समय हो चुका है’ वाली सोच छोड़कर पार्टी को एकजुट रूप में आगे बढ़ाना होगा और इसमें सभी को एक जैसा समर्थन देना होगा,’ उन्होंने बताया।

भारत को मिली बड़ी राहत कैसे संभव हुई?

समाचार सारांश एवं पूर्वावलोकन। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट एक माह बढ़ाकर भारत को बड़ी राहत प्रदान की है। साथ ही, ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है। मार्च 2026 में भारत ने रूसी तेल आयात को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 5.8 अरब डॉलर तक पहुंचाया है।

6 वैशाख, काठमांडू। अमेरिका ने पुनः ‘यू-टर्न’ लेते हुए रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट अवधि को एक महीने बढ़ा दिया है। ईरान के साथ तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही थीं, ऐसे में यह फैसला बाज़ार को स्थिर रखने का प्रयास माना गया है। कुछ दिनों पहले अमेरिकी वित्त मंत्री ने रूसी तेल पर छूट समाप्त करने की घोषणा की थी, लेकिन अब इसे पुनः बढ़ा दिया गया है, जो प्रशासन की नीतिगत बदलाव को दर्शाता है। आलोचकों ने इसे केवल ट्रम्प ही नहीं बल्कि उनकी पूरी टीम का ‘यू-टर्न’ बताया है। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की घोषणा की, जिससे कच्चे तेल की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत प्रति बैरल 90 डॉलर से नीचे आ गई है, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह लगभग 70 डॉलर थी।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने लेबनान में युद्धविराम के बाद सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट से आवागमन पूरी तरह खोलने की बात कही है। हालांकि, ट्रम्प ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट व्यापार एवं आवागमन के लिए खुला रहेगा लेकिन नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दूसरे चरण की संभावना है, जिसकी मध्यस्थता पाकिस्तान कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने विश्व के तीन देशों को छोड़कर सभी को 17 अप्रैल तक रूसी तेल समुद्री मार्ग से खरीदने पर प्रतिबंध लगाया है। यह छूट फ्रि और जहाजों पर लोड तेल को 16 मई तक खरीदने की अनुमति देती है। मार्च में भी ऐसी छूट दी गई थी जो 11 अप्रैल को खत्म हुई थी। नई ‘जनरल लाइसेंस 134 बी’ के तहत 17 अप्रैल 2026 तक जहाजों पर लोड रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन और बिक्री की अनुमति है, लेकिन ईरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा इसका हिस्सा नहीं हैं।

तेल बाजार पर करीब से नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने अमेरिकी फैसले को भारत के लिए बड़ी राहत बताया है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने कहा, ‘यह निर्णय अमेरिका के अंदर के जनलोक को ध्यान में रखकर लिया गया है, जिन्हें तेल की कीमत बढ़ने पर राजनीतिक प्रभाव महसूस होता है।’

नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं और ईरान के साथ युद्ध ने ट्रम्प की जनसमर्थन कम की है। तनेजा ने आगे कहा, ‘अमेरिकी प्रशासन का निर्णय भारत सहित अन्य देशों के लिए भी राहतकारक है। होर्मुज स्ट्रेट में अवरोध के कारण भारत को केवल एलपीजी और एलएनजी में समस्या हुई थी, लेकिन युद्ध 20 दिन से ऊपर चलता तो तेल की कमी हो सकती थी।’ भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है। पहले ज्यादा आयात खाड़ी देशों से था, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने सस्ते रूसी तेल में निवेश बढ़ाया। अमेरिकी टैरिफ के कारण आयात प्रभावित हुआ तो भारत ने फिर खाड़ी देशों से आयात बढ़ाया, लेकिन होर्मुज संकट ने समस्या खड़ी कर दी। भारत ने कभी रूसी तेल खरीद बंद नहीं किया और अमेरिकी छूट के बाद आयात और बढ़ा है। नरेंद्र तनेजा के अनुसार पिछले चार हफ्तों में रूसी तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दिल्ली के थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने रूस के साथ ऊर्जा सहयोग और बढ़ाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि एक महीने की छूट का बड़ा प्रभाव नहीं होगा क्योंकि यह छूट केवल पहले से लोड किए गए तेल के लिए है।

भारत का पेट्रोलियम मंत्रालय 41 देशों से तेल आयात करता है। नरेंद्र तनेजा के अनुसार अमेरिकी प्रतिबंध और होर्मुज संकट से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। हालांकि भारतीय तेल आयात का गणित थोड़ा जटिल है। अमेरिका और ब्राजील से भारत तक तेल आने में 50-60 दिन लगते हैं, रूस से 28 दिन और खाड़ी देशों से मात्र 5-7 दिन। तेल परिवहन के लिए विभिन्न आकार के टैंकर उपयोग होते हैं जो अपनी गति और आकार के आधार पर भिन्न होते हैं।

अमेरिका द्वारा छूट देने का मतलब यह है कि युद्ध के बावजूद समुद्र में मौजूद तेल टैंकरों को सप्लाई जारी रखने की अनुमति है। ये जहाज अमेरिका, ब्राजील, गुयाना, अंगोला जैसे देशों से आ रहे थे। युद्ध के दौरान जब तेल की कीमत 110 डॉलर थी तब भी भारत ने प्रति बैरल 140 डॉलर में तेल खरीदा था। भारत की विदेशी मुद्रा स्थिति और तेल उत्पादक देशों के साथ संबंध मजबूत हैं। एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति बाधित होने पर भारत ने अर्जेंटीना से तत्काल आपूर्ति की मांग की थी, जहाँ से जहाज आने में 58 दिन लगते हैं, फिर भी वहां से पर्याप्त आपूर्ति प्राप्त हुई।

एक यूरोपीय थिंक टैंक के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत ने रूसी तेल आयात 5.8 अरब डॉलर तक पहुंचा लिया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अनुसार मार्च 2026 में भारत ने मास्को से 371 मिलियन डॉलर का कोयला और 196 मिलियन डॉलर के बराबर पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए। मार्च 2022 के बाद से नई दिल्ली रूसी तेल का महत्वपूर्ण बाजार बन गया है। वर्ष 2024 में दैनिक लगभग 20 लाख बैरल तेल खरीदा गया था।

रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने भारत को तेल, एलपीजी और एलएनजी निर्यात विस्तार का भरोसा देते हुए भारत को विश्वसनीय साझेदार बताया है। सस्ता रूसी तेल वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितताओं के बीच लागत नियंत्रण और आपूर्ति स्थिरता बनाए रखने में मदद कर रहा है। भारत की रिफाइनरी पहले से प्रतिबंधों के चलते तैयार थीं और छूट मिलने के बाद फिर से खरीद शुरू कर दी है। इस बार छूट बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति और मजबूत हुई है।

अजय श्रीवास्तव ने सुझाव दिया है कि भारत को रूस के साथ लंबी अवधि (20 वर्ष) का समझौता करना चाहिए और अमेरिका के दबाव को अस्वीकार करना चाहिए।

नेपाली महिला भलिबल टोली की नई कप्तान कौन होंगी?

अस्ट्रेलिया प्रस्थान के बाद सफल कप्तान अरुणा शाही के न होने से अब नेपाली महिला भलिबल टीम का नेतृत्व कौन करेगा, इस दिशा में उत्सुकता बढ़ रही है। नेपाली राष्ट्रीय महिला भलिबल टीम काभा महिला भलिबल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली है, लेकिन कप्तान अरुणा शाही के अस्ट्रेलिया प्रस्थान के बाद नई कप्तान चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। अरुणा शाही ने 2019 से कप्तानी करते हुए नेपाल को एशियाई खेलों में पहली बार भेजने का गौरव प्राप्त कराया था, लेकिन अब वह टीम के नेतृत्व में नहीं हैं। नेपाल भलिबल संघ के अनुसार नई कप्तान का चयन टीम के निर्धारण के बाद और मुख्य कोच जगदिश भट्ट द्वारा अंतिम टीम चयन के बाद किया जाएगा। ६ वैशाख, काठमांडू।

नेपाली राष्ट्रीय महिला भलिबल टीम एक महीने बाद घरेलू मैदान पर काभा महिला भलिबल चैंपियनशिप खेलने जा रही है। सबसे सफल कप्तान अरुणा शाही के ऑस्ट्रेलिया चले जाने के कारण टीम की नई कप्तान कौन होगी, यह विषय अत्यंत चर्चा का केंद्र बन गया है। महिला भलिबल कैम्प में मौजूद 20 खिलाड़ियों की सूची में अरुणा शामिल नहीं होने के कारण नई कप्तान के चयन की संभावना निश्चित मानी जा रही है। वर्तमान में घरेलू मैदान पर नेपाली महिला टीम का नेतृत्व कौन करेगा, यह मुख्य सवाल बना हुआ है। अरुणा ने 2019 से टीम की कप्तानी करते हुए नेपाल को दक्षिण एशिया से लेकर सेंट्रल एशिया तक अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धि दिलाई हैं।

लगभग सात वर्षों की कप्तानी के बाद करियर के अंतिम चरण में पहुँच चुकी अरुणा अब राष्ट्रीय टीम की सेटअप में शामिल नहीं हैं। हाल के समय में कई नेपाली भलिबल खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया जाने लगे हैं। अनुभवी खिलाड़ी विदेश जाने की इस प्रवृत्ति को जारी रखे हुए हैं। पूर्व टीम की स्टार खिलाड़ियों सारस्वती चौधरी और प्रतिभा माली सहित कई खिलाड़ी वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय टीम की खिलाड़ी साफिया पुन और कविता भट्ट ने भी विदेश जाने का विकल्प चुना है। नेपाल भलिबल संघ ने काभा महिला भलिबल कैम्प शुरू करने से पहले ही अरुणा के दूसरे प्रतियोगिता के लिए ऑस्ट्रेलिया प्रस्थान की जानकारी दी थी। हालांकि, अध्यक्ष जितेन्द्र बहादुर चन्द ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने भलिबल संघ को पूर्व सूचना नहीं दी।

भेटिए पौराणिक मन्दिरका भग्नावशेष – Online Khabar

दार्चुला के मालिकार्जुन गाउँपालिका-6 उकु महल में 15वीं सदी के प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष मिले

दार्चुला के मालिकार्जुन गाउँपालिका-6 उकु महल क्षेत्र में 15वीं सदी के आसपास के प्राचीन मंदिर के भग्नावशेष पाए गए हैं। पुरातत्व विभाग ने उत्खनन के दौरान कलात्मक पत्थर, मूर्तियां, मंदिर के शिखर के आंशिक भाग, पत्थर की जलधारा और सिंह आकृतियों वाले पत्थर के अवशेष खोजे हैं। उकु महल क्षेत्र धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की योजना आगे बढ़ाई जा रही है। (6 वैशाख, दार्चुला)

उकु महल में 15वीं सदी के पौराणिक मंदिर के भग्नावशेष मिल चुके हैं। पुरातत्व विभाग की टीम, वरिष्ठ पुरातत्व अधिकारी हिमालकुमार उप्रेती के नेतृत्व में, उकु क्षेत्र में उत्खनन कार्य कर रही है। पुरातत्व अधिकारी हरिप्रसाद भुसाल के अनुसार, उत्खनन के दौरान बड़ी संख्या में कलात्मक पत्थरों, अलग-अलग मूर्तियों, मंदिर के शिखर के आंशिक भाग, पत्थर की जलधारा, बसाह और सिंह आकृति वाले पत्थर के अवयव भी मिले हैं।

उत्खनन के दौरान मिले पत्थरों को मापकर क्रमशः संख्यात्मक लेबलिंग की जा रही है। कुछ महत्वपूर्ण मूर्तियों को संग्रहालय संरक्षण के लिए काठमांडू के छाउनी संग्रहालय में भेजने की तैयारी की जा रही है। मालिकार्जुन गाउँपालिका-6 के वडाध्यक्ष गोकर्णसिंह धामी ने कहा कि उत्खनन कार्य सकारात्मक है, लेकिन बजट की कमी है।

दार्चुला के मुख्य जिल्ला अधिकारी अनिल पौडेल ने कहा कि उकु महल क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए सूबेभर महत्वपूर्ण है। गाउँपालिका अध्यक्ष हिरासिंह धामी के अनुसार, पुरातत्व विभाग पिछले दो वर्षों से निरंतर उत्खनन एवं शोध कार्य कर रहा है। उकु महल का इतिहास मध्यकालीन कत्युरी राजाओं की राजधानी के रूप में जाना जाता है।

नेपाल–भारत सीमा नाकों पर भन्सा नियम से रोटी-रोजगार में समस्या

सरकार ने जेठ १५ से नेपाल–भारत सीमा नाकों पर सौ रुपये से अधिक मूल्य वाले सामानों पर अनिवार्य भन्सा भुगतान का नियम लागू किया है। मधेस प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों ने भन्सा कड़ाई के कारण आर्थिक और सामाजिक समस्याओं में वृद्धि होने की बात कही है। सशस्त्र पुलिस मधेस प्रदेश के प्रमुख डीआईजी कृष्ण ढकाल ने कहा है कि इस नियम का पालन कराना राजस्व वृद्धि और कर भुगतान की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से है।

६ वैशाख, जनकपुरधाम। शनिवार दोपहर साढ़े ३ बजे के लगभग सिर पर चावल का बोरा लेकर भारतीय बाजार भीठामोड़ से नेपाल प्रवेश करते समय महोत्तरी, जलेश्वर की संगीता यादव घबराई हुई थीं। चावल समेत कुछ और सामान खरीदने के लिए सीमा पार गईं संगीता यादव को सौ रुपये से अधिक मूल्य वाले सामानों पर अनिवार्य भन्सा भुगतान का नियम वहीं पता चला, जिसके कारण उन्हें २० किलो के एक बोरे चावल के अलावा कोई सामान लेकर वापस जाना पड़ा। उन्होंने बताया, ‘दूर से वाहन का भाड़ा देकर बाजार पहुंची थी। वहां पहुंचकर ही पता चला कि भन्सा में कड़ाई की गई है। इसलिए सिर्फ एक बोरा चावल लेकर लौटना पड़ा। इस पर भी भन्सा देना पड़ेगा या नहीं, पता नहीं।’

सरकार ने नेपाल–भारत सीमा नाकों पर भन्सा वसूली में कड़ाई की है। सौ रुपये से अधिक मूल्य के सामान लाने पर अनिवार्य भन्सा भुगतान करने को कहा गया है और सशस्त्र पुलिस नाकों पर माइकिंग करके आम जनता को सूचित कर रही है। भन्सा महसूल ऐन, २०८१ की धारा १३ के उपधारा (३) के अधिकार का उपयोग करते हुए सरकार ने गत जेठ १५ से यह नियम लागू किया है, जबकि पहले इस पर कड़ाई नहीं थी। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद नाकों पर कड़ाई बढ़ गई है, जिससे सीमा क्षेत्र के लोग चिंतित हैं।

सस्ते सामान की लालसा में अधिकांश सीमावर्ती क्षेत्र के लोग भारतीय बाजार पर निर्भर हैं। संगीता यादव के अनुसार, ‘यदि नेपाली बाजार में सस्ते दाम में खाद्य सामग्री मिलती, तो हम जैसे गरीब लोग भारतीय बाजार क्यों जाते। सरकार ने यहां कोई सुविधा नहीं दी, उल्टा सख्त नियम लगाए हैं। सभी सामान महंगे हैं, गरीब लोग कैसे जियेंगे?’ उन्होंने सवाल किया।

सशस्त्र पुलिस मधेस प्रदेश प्रमुख डीआईजी कृष्ण ढकाल ने स्पष्ट किया कि पुलिस का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी निर्देशों का पालन कराना है। उन्होंने कहा, ‘हमारा उद्देश्य राजस्व वृद्धि और कर भुगतान की संस्कृति विकसित करना है। इसमें कोई समझौता संभव नहीं।’ हालांकि, इस नियम की राजनीतिक स्तर पर आलोचना हो रही है और सत्तारुढ़ दल के अंदर भी सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को देखते हुए नियम में पुनर्विचार की मांग उठने लगी है।

मानव बेचबिखन एवं अपांगता सम्बन्धी ऐन संशोधन विधेयकको मस्यौदामा सुझाव आह्वान

महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मन्त्रालयले मानव बेचबिखन तथा ओसारपसारसम्बन्धी ऐन र अपाङ्गता अधिकारसम्बन्धी ऐनको संशोधन मस्यौदामा सुझाव संकलन सुरु गरेको छ। मन्त्रालयले संशोधन विधेयकलाई अझ प्रभावकारी बनाउन विभिन्न प्रावधानहरू समावेश गरिएको जानकारी गराउँदै, सार्वजनिक मस्यौदामा यसै साताभित्र सरोकारवालाहरू र जनसामान्यबाट राय सुझावहरू मागेको छ। ६ वैशाख, काठमाडौं।

महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिक मन्त्रालयले दुईवटा ऐन संशोधन मस्यौदाको लागि सुझाव आह्वान गरेको छ। मन्त्रालयले मानव बेचबिखन तथा ओसारपसार (नियन्त्रण) ऐन, २०६४ र अपाङ्गता भएका व्यक्तिको अधिकारसम्बन्धी ऐन, २०७४ को संशोधन विधेयक तयार गरी सुझाव सङ्कलन प्रक्रिया सुरु गरेको छ। कानुनलाई अझ प्रभावकारी बनाउन विधेयकमा विभिन्न प्रावधानहरू समावेश गरिएकोले सरोकारवालाहरूबाट प्रतिक्रिया सङ्कलन गरिने भएकाले इच्छुक सबैलाई आफ्ना सुझाव दिन मन्त्रालयले अनुरोध गरेको छ।

इरान युद्ध के प्रभाव पर नेताओं के विचार

वासिंगटन डीसी बैठक

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विश्वव्यापी संकट के दो मुख्य केंद्र वर्तमान में हैं: इरान के दक्षिण में २४ मील चौड़ा होर्मुज जलमार्ग और सात हजार मील दूर व्हाइट हाउस।

इस सप्ताह दुनिया के अन्य देशों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन की आर्थिक तर्कधाराओं को सीधे सुनने का एक अनोखा अवसर मिला।

यह अवसर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की ‘वसंत बैठक’ के दौरान वाशिंगटन डीसी के पास व्हाइट हाउस से थोड़ी दूर आयोजित किया गया था।

मैंने प्रमुख शक्तिशाली देशों के ‘जी-सेवन’ के अधिकांश वित्त मंत्रियों, कुछ केंद्रीय बैंकों और दुनिया के कुछ अग्रणी अर्थशास्त्रियों से मुलाकात की, जहां अमेरिकी युद्ध निर्णय की अनुमानित लागत के कारण बाकी दुनिया असंतुष्ट नजर आई।

विशेष रूप से चांसलर राचेल रिव्स स्पष्ट थीं, जिन्होंने इस युद्ध को “मूर्खतापूर्ण” और “गलत” करार दिया। उन्होंने कहा, “यह युद्ध हमारा नहीं है।”

रास्वपाले बोलायो केन्द्रीय समिति बैठक – Online Khabar

रास्वपाले केन्द्रीय समिति बैठक का आयोजन किया

६ वैशाख, काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) ने केन्द्रीय समिति की बैठक का आयोजन किया है। पार्टी प्रवक्ता मनिष झाकाका अनुसार, यह बैठक कल (सोमवार) दोपहर ३ बजे आयोजित की जाएगी। सभापति रवि लामिछाने के निर्देशनानुसार पार्टी केन्द्रीय कार्यालय में यह बैठक होगी, इसकी जानकारी उन्होंने दी है।

इसके पहले, रास्वपा सचिवालय की बैठक आज आयोजित होगी। सचिवालय बैठक में जिला अधिवेशन कार्यविधि, बैंक खाता संचालन, केन्द्रीय आयोग, सलाहकार परिषद, संघीय नेतृत्व मंच और विभागों के मनोनयन के विषयों पर चर्चा की जाएगी।