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लेखक: space4knews

रास्वपा काठमाडौं महानगर समितिको सभापतिमा पन्त निर्वाचित

समाचार सारांश

Generated by OK AI. Editorially reviewed.

  • राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के काठमाडौं महानगरपालिकाको सभापति कमल प्रसाद पन्त ‘शशि’ २५६ मत सहित निर्वाचित हुए।
  • प्रतियोगी गणपति लाल श्रेष्ठ को १७९ मत प्राप्त हुए, जबकि महानगर अधिवेशन में कुल ५२७ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

१९ जेठ, काठमाडौं। राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के काठमाडौं महानगरपालिकाको सभापतिमा कमल प्रसाद पन्त ‘शशि’ निर्वाचित हुए हैं।

रास्वपाले काठमाडौं महानगर समितिको अधिवेशन गतकाल आयोजित किया था।

अधिवेशन में २५६ मतों के साथ पन्त सभापतिमा निर्वाचित हुए। सभापतिमा तीन उम्मीदवार थे।

सभापति का अन्य उम्मीदवार गणपति लाल श्रेष्ठ को १७९ मत प्राप्त हुए। पन्त २०७९ से काठमाडौं महानगर समितिको संयोजक के रूप में कार्यरत थे।

सम्पदा क्षेत्र में सक्रिय श्रेष्ठ ने रास्वपा में प्रवेश कर महानगर सभापतिमा प्रतिस्पर्धा की।

निर्वाचन समिति के अनुसार अधिवेशन में कुल ५२७ प्रतिनिधि उपस्थित थे।

जीपीएस स्पूफिंग: वैश्विक उड्डयन क्षेत्र में चुनौती बनता अदृश्य ‘युद्ध’

यूके के रक्षामंत्री के नेतृत्व वाले ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स का विमान कुछ दिन पहले एस्टोनिया पहुंचते ही एक असामान्य घटना का सामना करना पड़ा। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा परीक्षण किए गए उड़ान डेटा के अनुसार, वह विमान अचानक कुछ सेकंडों में ही लगभग ३०० किलोमीटर दूर रूसी क्षेत्र में पहुंच गया। विमान सेंट पीटर्सबर्ग के पास एक ताल के ऊपर मात्र ११ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ रहा था। हालांकि ये सभी विवरण वास्तविक नहीं थे। इस घटना का कारण “जीपीएस स्पूफिंग” नामक एक तरह की भ्रामक प्रणाली थी, जिसने विमान के नेविगेशन सिस्टम को भ्रमित कर दिया। जीपीएस सेटेलाइट से आने वाले सिग्नल्स को कई रेडियो सिग्नल्स नकल करके प्रसारित करते हैं, क्योंकि सेटेलाइट से पृथ्वी पर आने वाले संकेत कमजोर हो जाते हैं और जमीन पर स्थित ट्रांसमीटर अधिक शक्तिशाली सिग्नल भेजते हैं। इस प्रकार विमान के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह किया जाता है।

स्पूफिंग का उपयोग आमतौर पर सैनिक करते हैं। वे लंबी दूरी के मिसाइल और छोटे ड्रोन सहित जीपीएस नेविगेशन तकनीक वाले दुश्मन के हथियारों के लक्ष्य को कमजोर करने के लिए इस प्रकार की तकनीक अपनाते हैं। कई देशों की सेनाएं इस प्रकार के ट्रांसमीटर बनाकर उन्हें निश्चित स्थानों पर या वाहनों में स्थापित कर संचालित करती हैं। लेकिन युद्ध काल के इलेक्ट्रॉनिक जाल में कभी-कभी व्यावसायिक उड़ानें भी फंस जाती हैं। रॉयल एयर फोर्स के पायलटों ने हालिया घटना के बाद जीपीएस की बजाय कम सटीक प्रणाली का उपयोग कर विमान को मार्गदर्शन करना पड़ा, रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि विमान की सुरक्षा पर किसी प्रकार का खतरा नहीं था।

वास्तव में उस दिन उस क्षेत्र में प्रभावित होने वाला विमान केवल एक ही नहीं था। उड़ान सलाहकार कंपनी एसकेएआई डेटा सर्विस द्वारा बीबीसी को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, स्पूफिंग के कारण १०० से अधिक यात्री विमान गलत डेटा दिखा रहे थे। यह डेटा दिखाता है कि स्पूफिंग और जैमिंग की गतिविधियां कई सैन्य अभियानों और युद्ध क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हो रही हैं। जीपीएस में बाधाएं डालने वाले ये सिग्नल बाल्टिक क्षेत्र, खाड़ी, लाल सागर, भारत, पाकिस्तान और म्यांमार के आस-पास पाए गए हैं। २८ फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के साथ युद्ध शुरू करने के बाद से खाड़ी में भी विमान स्पूफिंग से जुड़ी समस्याओं की सूचना दे रहे हैं।

वीरगञ्जका मेयर राजेशमान सिंह पक्राउ – Online Khabar

वीरगञ्ज के मेयर राजेशमान सिंह गिरफ्तार

वीरगञ्ज उपमहानगरपालिका के मेयर राजेशमान सिंह पर्सा के ठोरी से गिरफ्तार किए गए हैं। मधेेश प्रदेश के डीआईजी गोविन्द थपलिया ने इस बारे में जानकारी दी है। १९ जेठ को, पर्सा जिला अदालत ने उन्हें लिखित दस्तावेज़ों में धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया था। ८ जेठ को मेयर सिंह के विरुद्ध जिला अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।

मेयर सिंह सहित अन्य तीन लोगों के खिलाफ स्थानीय लियाकत अली ने शिकायत दर्ज कराई थी। मेयर सिंह पर नकली दस्तावेज़ों के आधार पर किसी अन्य की बेटी को अपनी बेटी बनाकर नागरिकता दिलाने का आरोप है। इसी वजह से अदालत ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।

चार युवा संगठनों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से इस्तीफे की मांग की

चार राजनीतिक दलों के युवा संगठनों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा संसद में दिए गए संबोधन पर आपत्ति जताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। प्रधानमंत्री शाह ने संसद में कहा था कि भारत की सीमा को लेकर नेपाल ने भी अतिक्रमण किया है, जिसकी उन्हें प्रधानमंत्री बनने के बाद जानकारी हुई। राष्ट्रीय युवा संघ, वाईसीएल और अन्य दो संगठनों ने इस अभिव्यक्ति को राष्ट्रीयता और भौगोलिक अखंडता के खिलाफ बताया है।

१८ जेठ, काठमाडौं। चार राजनीतिक दलों के युवा संगठनों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। राष्ट्रीय युवा संघ नेपाल, वाईसीएल, युवा संघ नेपाल और नेपाल समाजवादी युवा संघ ने सोमवार को संयुक्त रूप से यह बयान जारी किया।

जारी बयान में प्रधानमंत्री शाह द्वारा संसद की बैठक में दी गई अभिव्यक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। साथ ही जनता से माफी मांगकर इस्तीफा देने का आग्रह किया गया है। ‘जनता के खिलाफ और राष्ट्रघाती गतिविधियाँ हम देशभक्त, राष्ट्रप्रेमी और जनजीवन के पक्षधर युवा के लिए असहनीय हैं। नेपाली जनता की सहनशीलता टूटने से पहले प्रधानमंत्री शाह से जनता के समक्ष माफी मांगने और इस्तीफा देने का आह्वान करते हैं,’ बयान में कहा गया है।

प्रधानमंत्री शाह ने संसद में कहा था कि भारत ही नहीं, नेपाल ने भी भारत की सीमा का अतिक्रमण किया है, यह उन्हें प्रधानमंत्री बनने के बाद पता चला। उनकी इस अभिव्यक्ति की आलोचना हो रही है। ‘प्रधानमंत्री की यह अभिव्यक्ति अत्यंत गैरजिम्मेदाराना है, राष्ट्रीयता, संप्रभुता और भौगोलिक अखंडता के विरुद्ध है और इतिहासिक तथ्यों के विपरीत है। प्रधानमंत्री शाह की इस राष्ट्रघाती अभिव्यक्ति की कड़ी निंदा की जाती है,’ बयान में कहा गया, ‘प्रधानमंत्री शाह की इस अभिव्यक्ति से यह शक उत्पन्न हुआ है कि कहीं नेपाली भूभाग भारत को सौंपने की साजिश तो नहीं है।’

संगठनों ने कहा कि पहले भी प्रधानमंत्री शाह और उनके दल रास्वपा के निर्णयों से पहले ‘मीडिया ट्रायल’ करने की प्रथा रही है और इस घटना को लेकर भी ऐसी शंका जाहिर की गई है। ‘अतीत में वे और उनकी पार्टी रास्वपा विभिन्न निर्णयों से पहले मीडिया ट्रायल करते थे। क्या यह घटना उसी सिलसिले का हिस्सा है, यह गंभीर प्रश्न है। भारत ने किसी भी क्षेत्र पर दावा नहीं किया है, तब भी प्रधानमंत्री द्वारा दी गई राष्ट्रघाती अभिव्यक्ति गंभीर और चिंताजनक है।’

गर्मी बढ्दै – Online Khabar

गर्मी बढ़ रही है, तराई-मधेश में तेज गर्मी के दिन आने की संभावना

१९ जेठ, काठमाडौं। वर्षा के कारण कुछ दिनों के लिए ठंडक महसूस करने वाले लोगों को अब पुनः गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। मौसमविद् के अनुसार आगामी कुछ दिनों में वर्षा की संभावना कम होने के कारण गर्मी बढ़ सकती है। मौसमविद् उज्ज्वल उपाध्याय के अनुसार मानसून का प्रवेश अभी कुछ दिन बाद होगा और पश्चिमी वायु का प्रभाव कमजोर होने से आगामी एक सप्ताह में गर्मी बढ़ेगी। गर्मी का अधिक प्रभाव तराई-मधेश के जिलों में देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘आगामी एक हफ्ता आसान नहीं होगा। अब एक सप्ताह में गर्मी बढ़ती जाएगी। तराई पुनः गर्म होने वाला है।’

मानसूनी बादल सोमवार दोपहर भारत के पश्चिमी घाट और केरल तक पहुंच गए, लेकिन बादलों की घनता और गति दोनों कमजोर होने के कारण यह प्रणाली नेपाल तक पहुंचने में कुछ दिन लगेंगे, ऐसा उनका अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक मानसून काफी कमजोर रहने की संभावना है। पिछले कुछ दिनों में विभिन्न मौसम प्रणालियों के कारण मौसम में बदलाव आया और पिछले तीन दिनों में कुछ स्थानों पर थोड़ी वर्षा हुई। वर्षा के चलते तापमान में कमी आई और ठंडक महसूस हुई, लेकिन आगामी दिनों में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है।

जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ के अनुसार, जेठ १९ को मधेश प्रदेश और कोशी प्रदेश के तराई क्षेत्रों में तेज गर्मी के दिन आने की संभावना है। विभाग के अनुसार, पिछले तीन दिनों के रिकॉर्ड के अनुसार नेपाल में अधिकतम तापमान ३७ डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं था। लेकिन आज से वर्षा कम होने के कारण तापमान पुनः बढ़ने की संभावना है और तराई के कुछ क्षेत्रों में तेज गर्मी आ सकती है, ऐसा मौसमविदों ने बताया है। मधेश प्रदेश के साथ-साथ कोशी, बागमती और गण्डकी प्रदेश के तराई क्षेत्रों में तेज गर्मी के दिन आने की संभावना विभाग के सोमवार शाम जारी बुलेटिन में उल्लेखित है।

राजविराज नगरपालिकाओं में लालपुर्जा की मांग को लेकर स्थानीय निवासियों का तालाबंदी

१८ जेठ, सप्तरी। जग्गाधनी पुर्जा (लालपुर्जा) की मांग को लेकर राजविराज नगरपालिकाओं में स्थानीय निवासियों ने तालाबंदी की है। सोमवार को संघर्ष समिति के नेतृत्व में लंबे समय से चल रहे आंदोलन के तहत नगरपालिकाओं के कार्यालय में तालाबंदी की गई है। कई बार आश्वासन देने के बावजूद अब तक लालपुर्जा प्रदान न किए जाने के कारण स्थानीय अव्यवस्थित और सुकुमवासी लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने दावा किया है कि वे नगरपालिकाओं की स्थापना से पहले से ही वहां निवास कर रहे हैं।

आंदोलन करने वाले पक्ष की एकमात्र मांग है कि हकभोग के आधार पर लालपुर्जा उपलब्ध कराया जाए। लगातार शान्तिपूर्ण संघर्ष के बावजूद सुनवाई न होने पर संघर्ष समिति के संयोजक खेलानंद दास ने बताया कि उन्हें तालाबंदी करने पर मजबूर होना पड़ा। उनका कहना है कि लालपुर्जा उपलब्ध करवाए जाने की सुनिश्चितता नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति ने ११ दिनों तक धरना और अन्य दबावकारी कार्यक्रम चलाए थे।

विटोरी जग्गा का राजस्व राजविराज नगरपालिका को जमा किए जाने के बावजूद लालपुर्जा वितरण में उपेक्षा किए जाने से आक्रोशित लोगों ने अब नापी कार्यालय में भी तालाबंदी करने की चेतावनी दी है। आंदोलनरत लोग प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह सरकार द्वारा सार्वजनिक जमीन खाली करने हेतु देशव्यापी आदेश जारी करने के बाद से चिंतित हैं। इसी कारण वे आंदोलनरत हैं। दूसरी ओर, बोदेबरसाइंन बाजार के स्थानीय लोगों ने भी यह कहते हुए कि जग्गे का राजस्व नगर पालिका में जमा करने के बावजूद लालपुर्जा नहीं मिला, जिला प्रशासन कार्यालय सप्तरी में वैशाख २९ को ज्ञापन पत्र सौंपा है।

निलम्बित हुनसक्छन् संसद्‌मा अभद्र व्यवहार गर्ने सांसद

संसद में अमर्यादित व्यवहार करने वाले सांसदों को निलंबित करने की संभावना

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा आधारित।

  • प्रतिनिधि सभा की बैठक में अमर्यादित व्यवहार करने वाले सांसदों की जांच के लिए संसद सचिवालय के सचिव प्रकाश अधिकारी के नेतृत्व में समिति गठित की गई है, जिसे ७ दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
  • समिति की रिपोर्ट के बाद दोषी सांसदों को प्रतिनिधि सभा के नियमावली के तहत सभापति अधिकतम १५ दिन तक निलंबित कर सकते हैं, यह कानूनी प्रावधान मौजूद है।
  • पहले भी संसद की बैठकों में अभद्र व्यवहार और भौतिक क्षति पहुँचाने वाले सांसदों को निलंबित और जुर्माना लगाने के उदाहरण पाए जाते हैं।

१७ जेठ, काठमांडू। रविवार को आयोजित प्रतिनिधि सभा की बैठक में अमर्यादित व्यवहार करने वाले सांसदों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है।

सभापति डोलप्रसाद अर्याल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि समिति का नेतृत्व संसद सचिवालय के सचिव प्रकाश अधिकारी कर रहे हैं। समिति को सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार कर सौंपना होगा।

समिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद प्रतिनिधि सभा नियमावली २०८३ के नियम ३३ की उप-धारा ४ के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है।

सभापति ने कहा कि उक्त नियम के अनुसार संसद में कुर्सी चलाना, अभद्र व्यवहार करना, वेल घेराव के दौरान मर्यादापालकों के साथ झगड़ा करना जैसे कार्य करने वाले सांसद निलंबित किए जा सकते हैं।

नियम ३३ के तहत सभापति के पास सुव्यवस्था कायम रखने के लिए विशेष अधिकार हैं।

इस उपनियम में कहा गया है कि “इस नियमावली में कहीं भी जो कुछ भी लिखा हो, किसी सदस्य द्वारा बैठक में आपत्तिजनक या ध्वंसात्मक व्यवहार करने या बैठक कक्ष में भौतिक नुकसान पहुंचाने की सूचना सभापति को पद समाप्ति के बाद भी मिले, तो वे उस सदस्य को अधिकतम १५ दिन के लिए निलंबित करने और हुए नुकसान की भरपाई के आदेश देने के अधिकारी होंगे।”

इसका मतलब यह है कि रविवार को प्रतिनिधि सभा में अमर्यादित व्यवहार करने वाले सांसदों की पहचान कर जांच समिति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी तो सभापति उन्हें १५ दिनों तक निलंबित कर सकते हैं।

हालांकि, सभापति को कार्रवाई करने से पहले संबंधित सदस्य को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा। यदि सदस्य संतोषजनक सफाई देते हैं या अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगते हैं, तो सभापति माफी दे सकते हैं और कार्रवाई वापस ले सकते हैं, जैसा कि नियम में प्रावधान है।

अमर्यादित व्यवहार करने वाले सांसदों पर जांच के लिए समिति गठित करने से पहले सभापति अर्याल ने संसद सचिवालय के कर्मचारियों से सलाह-मशविरा भी किया था।

विपक्षी दलों के सांसदों ने रविवार को बैठक में वेल घेराव किया था, जिसके दौरान नारेबाजी और सांसदों के बीच झगड़ा हुआ था।

प्रतिनिधि सभा की बैठक नियमावली पारित करने की प्रक्रिया में थी, विपक्षी दलों ने संशोधनों के लिए संसद समिति को भेजने की मांग की थी।

लेकिन सदन में द्विपक्षीय चर्चा समाप्त होने के कारण सभापति ने संशोधन प्रस्ताव को विरोध के बीच पास-फेल प्रक्रिया से आगे बढ़ाया था।

इस दौरान हुई धकेलाधकेल में कुछ मर्यादापालकों की बेंच टूट गई और कुछ को सामान्य चोटें आईं, यह जानकारी संसद सचिवालय स्रोत ने दी है।

कुछ सांसद भी घायल हुए हैं। कुछ सांसदों ने कुर्सियां उठाई थीं। इन घटनाओं में शामिल सांसदों के व्यवहार की जांच के लिए सभापति ने समिति गठित की है।

नियमावली में क्या कहा गया है?

सभापति का ध्यानाकर्षण करने के लिए उठना चाहिए और उनके नाम लिए जाने पर ही बोलना चाहिए, इसके अलावा सभापति के आचरण को छोड़कर अन्य मामलों में आलोचना नहीं करनी चाहिए।

सभा में अशिष्ट, अपमानजनक, आपत्तिजनक शब्द बोलना, जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर नुकसान पहुंचाने या असंसदीय भाषा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है।

ऐसे व्यवहार पर सभापति चेतावनी दे सकते हैं। नियमावली के नियम ३० के अनुसार अभद्र व्यवहार करने वाले सदस्य को चेतावनी देने का अधिकार सभापति के पास है, जिसे मिलने के बाद तुरंत आचरण सुधारना होता है।

अगर सदस्य सभापति के आदेश का पालन नहीं करते तो सभापति उन्हें बैठक कक्ष से बाहर निकालने का आदेश दे सकते हैं, जिसे मानना अनिवार्य है। ऐसे सदस्य बैठक के बाकी समय उपस्थित नहीं हो सकते।

सभापति के आदेश के बाद भी बैठक कक्ष छोड़ने से मना करने वाले सदस्यों को मर्यादापालक सहायता से बाहर निकाला जा सकता है। बैठक से निष्कासन के बाद वे तीन दिन तक किसी सभा या समिति की बैठक में भाग नहीं ले सकते।

निलंबन से संबंधित विस्तृत प्रावधान नियमावली के नियम ३२ में हैं, जो सभापति को सार्वजनिक रूप से विभिन्न कारणों से कार्रवाई करने का अधिकार देते हैं।

सभापति को निलंबन प्रस्ताव तुरंत बैठक में पेश करना होता है और इसमें संशोधन या स्थगन प्रस्ताव लाने की अनुमति नहीं है।

अगर प्रस्ताव पारित हो जाता है तो सदस्य १५ दिनों तक सभा और समिति की बैठकों में उपस्थित नहीं हो पाते।

कार्रवाई के उदाहरण

संघीय संसद सचिवालय के पूर्व सचिव सोमबहादुर थाप के अनुसार, नेपाल के संसद में सांसदों के अमर्यादित व्यवहार के कई उदाहरण हैं, लेकिन कार्रवाई कम ही हुई है।

उन्होंने कहा, “बहुदलीय व्यवस्था से पहले भी भीमबहादुर श्रेष्ठ, जागृत भेटवाल, द्रोणाचार्य सहित चार विधायक राष्ट्रीय पंचायत में निलंबित हुए थे।”

बहुदलीय व्यवस्था के बाद भी ऐसे घटनाएं होती रहीं। २०५३ के प्रतिनिधि सभा की बैठक में सभापति रामचन्द्र पौडेल ने नेपाल सद्भावना पार्टी के सांसद हृदयेश त्रिपाठी को पद छोड़ने को कहा था, लेकिन उन्होंने नहीं माना और रोस्ट्रम पर बने रहे।

सभापति ने चेतावनी दी, लेकिन न मानने पर मर्यादापालकों का उपयोग कर सदस्य को बैठक कक्ष से बाहर निकाल कर एक दिन के लिए निलंबित किया गया था।

पिछली प्रतिनिधि सभा में सांसद अमरेश कुमार सिंह ने आकस्मिक बोलने से रोक दिए जाने पर अपना कपड़ा खोल दिया था, जिससे विवाद हुआ।

सभापति देवराज घिमिरे ने उसे नियमावली के नियम २१ के अनुच्छेद ‘घ’ के उल्लंघन के कारण चेतावनी दी।

उस नियम के अनुसार सभा में अशिष्टता और अपमानजनक भाषा का प्रयोग वर्जित है। सिंह ने चेतावनी मिलने के बाद कपड़ा पहन कर बैठक छोड़ दी।

इसी तरह, दूसरी संविधान सभा के दौरान तत्कालीन नेकपा माओवादी के सांसदों ने जबरदस्ती संसद चलाते हुए तोड़फोड़ की थी।

२०६७ की व्यवस्थापिका सभा की बैठक में तत्कालीन अर्थ मंत्री सुरेंद्र पांडेय के बजट वक्तव्य के दौरान माओवादी सांसदों ने व्यवधान डाला और पेपर फाड़ दिए।

उस दिन की बैठक देर से शुरू हुई और बजट विवाद की वजह से लगभग सात लाख रुपये की आधिकारिक तोड़फोड़ हुई थी।

इस घटना की जांच के लिए सचिव मुकुंद शर्मा के नेतृत्व में समिति बनी, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली और कार्रवाई नहीं हुई।

एक अन्य उदाहरण में संविधान सभा सदस्य विश्वेन्द्र पासवान ने कुर्सी झाड़ फेंककर व्यवहार समस्या जताई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

वे बैठक से बाहर जाकर अनशन भी पर बैठे थे, और उन पर छेड़छाड़ की अफवाहें भी थीं।

हालांकि, कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई है।

२०६८ असार में स्थानीय विकास मंत्री उर्मिला अर्याल को जवाब देने रोस्ट्रम जाने पर चार सांसदों ने बाधा डाली, जिस पर सभापति सुवासचन्द्र ने मार्शल का उपयोग कर उन्हें बैठक से बाहर निकाला और सात दिन के लिए निलंबित किया।

कार्रवाई न होने के उदाहरण

कुछ मामलों में कार्रवाई होने के बाद भी अदालत में वह रद्द हुई है।

पहली संविधान सभा के सदस्य संजय साह ने बोलने से वंचित होने पर माइक तोड़ दिया था। २०६८ पुष में हुई व्यवस्थापिका सभा की बैठक में वे लंबे समय तक बोल नहीं पाए थे।

उस दिन की बैठक मनवीर सुनार हत्याकांड के विरोध में ठप थी। सभापति ने साह को १० दिन के लिए निलंबित किया और माइक तोड़ने की राशि वेतन से काटने का आदेश दिया।

हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने बिना कानूनी प्रक्रिया के जुर्माना लगाने को गलत ठहराया और संबंधित जताया गया जुर्माना वापस किया गया।

इसी तरह २०५० में राष्ट्रीय सभा में सांसद गोल्छे सार्की ने स्थानीय विकास मंत्री रामचन्द्र पौडेल को थप्पड़ मारा था।

उस घटना पर राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष बेनीबहादुर कार्की ने सार्की को सात दिन के लिए निलंबित किया था।

सार्की ने बाद में सार्वजनिक रूप से कहा कि वे उत्तेजित होकर थप्पड़ मार बैठे थे।

खोटाङ में प्रधानमंत्री बालेन के पुतले का दहन

१८ जेठ, खोटाङ। खोटाङ के विद्यार्थी संगठनों ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) का पुतला जलाया है। प्रधानमंत्री बालेन द्वारा रविवार को प्रतिनिधिसभा में ‘नेपाल ने भी भारत की सीमा में सेंध लगाई है’ जैसी विवादित टिप्पणी किए जाने के बाद सोमवार की शाम यहां के विद्यार्थी संगठनों ने विरोध स्वरूप उनका पुतला दहन किया। नेपाल विद्यार्थी संघ (नेविसंघ), अनेरास्ववियु, अखिल (क्रान्तिकारी) और अनेरास्ववियु ने जेठ १८ को शाम दिक्तेल में प्रधानमंत्री बालेन के पुतले का दहन किया।

विद्यार्थी संगठनों ने दिक्तेल के किरातचोक में प्रधानमंत्री बालेन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी भी की। विद्यार्थी नेताओं का कहना था कि प्रधानमंत्री की यह अभिव्यक्ति नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, सार्वभौमिकता और भौगोलिक अखंडता को कमजोर करने वाली है, इसलिए उनकी तत्काल राजीनामा हो। इससे पहले भी विद्यार्थी संगठनों ने रविवार दोपहर जिला प्रशासन कार्यालय में ज्ञापनपत्र सौंपते हुए नेपाल–भारत सीमा से जुड़ी प्रधानमंत्री बालेन की टिप्पणी को आपत्तिजनक, गैरजिम्मेदाराना और आत्मसमर्पणवादी करार दिया था।

इसी तरह, श्रम संस्कृति पार्टी खोटाङ ने भी प्रधानमंत्री बालेन के उक्त बयान के विरोध में प्रदर्शन किया। श्रम संस्कृति पार्टी ने सोमवार को दिक्तेल के रत्नपार्क में कुछ समय के लिए सांकेतिक नारेबाजी सहित विरोध प्रकट किया।

उदाउलान् नयाँ फुटबल शक्ति ? – Online Khabar

नया फुटबॉल शक्ति का उदय: 2026 विश्व कप में 48 देशों की भागीदारी

इस बार के विश्व कप फुटबॉल में 48 देश भाग ले रहे हैं, जिससे नए देशों को विश्व फुटबॉल जगत में स्थापित होने का मौका मिला है। 2026 के फीफा विश्व कप में टीमों की संख्या 48 कर देने से नए देशों को स्थापित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। एशियाई क्वोटा वृद्धि का लाभ उठाते हुए जॉर्डन और उजबेकिस्तान के अलावा छोटे देशों कुराकाओ और केप वरदे पहली बार विश्व कप में चुने गए हैं। अफ्रीकी राष्ट्र डीआर कांगो, हैती और इराक ने लगभग 40 से 52 वर्षों बाद विश्व कप फुटबॉल में वापसी का अवसर पाया है। 18 जेठ, काठमांडू।

1930 से शुरू हुए फीफा विश्व कप फुटबॉल में एशियाई देश जापान 68 वर्षों के बाद पहली बार चयनित हुआ। 1998 के संस्करण से विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 24 से बढ़ाकर 32 कर दी गई थी, तब जापान ने विश्व कप में प्रवेश पाया था। टीमों की संख्या बढ़ाने पर एशिया क्षेत्र के कोटे को 2 से 4 किया गया, जिसका लाभ जापान ने उठाया। जापान ने पिछले विश्व कप संस्करण में मजबूत मानी जाने वाली जर्मनी और स्पेन को हराकर विश्व फुटबॉल जगत को चकित कर दिया था।

शुरुआती 16 संस्करणों में केवल दो बार विश्व कप खेलने वाला पुर्तगाल, 2002 के बाद के संस्करणों में मजबूत टीम के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुका है। टीमों की संख्या बढ़ने से पुर्तगाल को भी फायदा मिला है। 1930 में हुए पहले फीफा विश्व कप में 13 देशों ने भाग लिया था। अब 23वें संस्करण तक पहुंचते-पहुंचते विश्व कप में भाग लेने वाली टीमों की संख्या 48 कर दी गई है। इससे विश्व कप की पहुंच तो बढ़ी है, साथ ही नए देशों को विश्व कप फुटबॉल में स्थापित होने का अवसर भी प्राप्त हुआ है।

अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में आयोजित होने जा रहे फीफा विश्व कप 2026 में टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है, जिससे 444 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले कुराकाओ का चयन सफल हुआ। अफ्रीकी राष्ट्र डीआर कांगो और हैती को भी 52 वर्षों बाद विश्व कप में वापसी का मौका मिला। इस बार टीमों की संख्या बढ़ने की वजह से एशियाई क्षेत्र से चयनित होने वाले कोटे में भी वृद्धि हुई है। जॉर्डन ने चयन खेल शुरू किए 40 वर्षों के बाद पहली बार विश्व कप में चयनित होने का गौरव पाया। इसी तरह, 444 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले छोटे देश कुराकाओ और केप वरदे पहली बार विश्व कप में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

इन देशों ने केवल विश्व कप खेलने का अवसर नहीं पाया है, बल्कि विश्व फुटबॉल में स्थापित होने का मौका भी हासिल किया है। विश्व कप में वे कुछ नए प्रतिद्वंदी और कुछ स्थापित टीमों के साथ खेलने का अवसर प्राप्त करेंगे। इससे विश्व कप में अपना प्रदर्शन दिखाते हुए इनके खिलाड़ी शीर्ष स्तर की लीग खेलने के अवसर भी पा सकते हैं। अधिक देशों के भाग लेने से विश्व कप के प्रति दर्शकों और समर्थकों का आकर्षण बढ़ेगा। इससे पर्यटन, टिकट बिक्री, प्रसारण अधिकार और प्रायोजन से भी अतिरिक्त आय बढ़ेगी।

हिमालयन बैंक और यूनियनपे के सहयोग से ‘आरएमबी कार्ड’ सेवा की शुरुआत

हिमालयन बैंक ने चीन भ्रमण करने वाले नेपाली लोगों के लिए यूनियनपे के सहयोग से चीनी मुद्रा में भुगतान करने योग्य आरएमबी कार्ड लॉन्च किया है। बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक शमशेर राणा और यूनियनपे के उपाध्यक्ष ज्वांग बेइ ने संयुक्त रूप से इस कार्ड सेवा का शुभारंभ किया है। इस कार्ड के माध्यम से चीन जाने वाले नेपाली आसानी से वहां चीनी मुद्रा में भुगतान कर सकेंगे। 18 जेठ, काठमांडू। हिमालयन बैंक ने यूनियनपे के साथ मिलकर आरएमबी कार्ड सेवा शुरू की है। बैंक और चीन के प्रमुख कार्ड ब्रांड यूनियनपे ने नेपाल में अपने स्थानीय ग्राहकों के लिए यह सेवा शुरू की है। नेपाली नागरिकों के लिए चीन यात्रा को सरल और सुलभ बनाने के लिए यह सेवा महत्वपूर्ण साबित होगी।

नक्साल, काठमांडू स्थित मेरियट होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में बैंक की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक शमशेर राणा और यूनियनपे इंटरनेशनल की ओर से उपाध्यक्ष ज्वांग बेइ ने नेपाल में पहली बार इस कार्ड सेवा का शुभारंभ किया। इस कार्ड के उपयोग से ग्राहक और सेवा प्राप्तकर्ता उत्तरी पड़ोसी देश चीन यात्रा के दौरान वहां के एटीएम, पोस, क्यूआर कोड और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए लेनदेन चीनी मुद्रा (CNY) में आसानी से कर सकेंगे। बाजार में उपलब्ध अन्य उपकरणों की तुलना में यह कार्ड मितव्ययी और सर्वमान्य होगा, बैंक ने कहा।

बैंक की विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘व्यक्तिगत और संस्थागत रूप से यात्रा कर रहे विद्यार्थी, व्यवसायी और पर्यटक, जो नेपाल राष्ट्र बैंक के विदेशी विनिमय विभाग द्वारा स्वीकृत सीमा तक की राशि यूनियनपे आरएमबी कार्ड में लोड करेंगे, वे यूनियनपे के नेटवर्क से जुड़े अलिपे प्लस, विचैट, निहाओ चाइना जैसे क्यूआर और अन्य माध्यमों के जरिए चीनी मुद्रा में भुगतान कर सकते हैं।’

तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह के पुतला दहन और इस्तीफे की मांग की

नेपाली कांग्रेस के भ्रातृ संगठन तरुण दल ने सोमवार को त्रिचन्द्र कॉलेज के सामने प्रधानमंत्री बालेन शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए उनका पुतला दहन किया है। संसद में प्रधानमंत्री शाह द्वारा दी गई उस अभिव्यक्ति के खिलाफ, जिसमें कहा गया था कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है, विभिन्न दलों के संगठनों ने व्यापक आपत्ति जताई है और आंदोलन जारी रखा है। विपक्षी दलों ने निर्णय लिया है कि जब तक प्रधानमंत्री शाह माफी नहीं मांग लेते, संसद की सहज कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

उसी दिन शाम को त्रिचन्द्र कॉलेज के सामने तरुण दल के छात्रों ने इकट्ठा होकर पुतला दहन किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री शाह से इस्तीफा देने की मांग की। शाह के संसद में दिए गए बयान के खिलाफ विभिन्न दलों के संगठनों ने आंदोलन शुरू किया है, और देश के अन्य हिस्सों में भी प्रधानमंत्री शाह के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं।

प्रधानमंत्री शाह ने रविवार को संसद की बैठक में संबोधन करते हुए दावा किया था कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है। इस अभिव्यक्ति के बाद व्यापक आलोचना और टिप्पणी हुई हैं। विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से बैठक कर यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रधानमंत्री माफी मांगें तब तक संसद की गतिविधियों को सहजता से आगे नहीं बढ़ने देना चाहिए।

तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रतिमा दहन किया (तस्वीरें)

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार किया गया।

  • नेपाली कांग्रेस के भ्रातृ संगठन तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से इस्तीफा की मांग करते हुए सोमवार को ट्रिचंद्र कॉलेज के सामने उनकी प्रतिमा दहन की।
  • संसद में प्रधानमंत्री शाह द्वारा दिए गए बयान पर, जिसमें कहा गया कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है, विभिन्न दलों के संगठनों ने आपत्ति जताई और आंदोलन जारी रखा।
  • विपक्षी दलों ने निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री शाह माफी नहीं माँगेंगे तब तक संसद की कार्यवाही सुचारु नहीं होने दी जाएगी।

18 जेठ, काठमांडू। नेपाली कांग्रेस के भ्रातृ संगठन तरुण दल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रतिमा दहन किया।

सोमवार शाम ट्रिचंद्र कॉलेज के सामने संगठन के छात्रों ने इकट्ठा होकर प्रतिमा दहन किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री शाह से इस्तीफा देने की भी मांग की है।

प्रधानमंत्री शाह के संसद में दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए विभिन्न दलों के संगठनों ने आंदोलन शुरू किया है।

देश के अन्य स्थानों पर भी प्रधानमंत्री शाह के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

प्रधानमंत्री शाह ने रविवार को संसद की बैठक में कहा था कि नेपाल ने भारत की सीमा का उल्लंघन किया है।

उनके बयान के बाद व्यापक आलोचना और टिप्पणियां हो रही हैं।

विपक्षी दलों ने संयुक्त बैठक कर तय किया है कि प्रधानमंत्री माफी मांगने तक संसद की कार्यवाही शांति से नहीं चलेगी।

संसद्‌मा विपक्षी एकतालाई सरकारकै निम्तो – Online Khabar

संसद में विपक्षी एकता बढ़ाने के लिए सरकार की पहल

१८ जेठ, काठमाडौं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बयान के खिलाफ विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है। सभी विपक्षी दलों के नेताओं की आज हुई संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक प्रधानमंत्री माफी नहीं मांगते और बयान वापस नहीं लेते, संसद का संचालन नहीं होगा। नेकपा के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने कहा, ‘सीमा अतिक्रमण संबंधी कल प्रधानमंत्री द्वारा संसद में दिया गया बयान राष्ट्रद्रोह माना गया है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री को संसद में देशवासियों के नाम माफी मांगनी चाहिए। इसलिए विपक्षी दलों ने संसद अवरुद्ध करने का निर्णय लिया है।’

आकस्मिक रूप से रविवार को संसद की बैठक में पहुंचे प्रधानमंत्री शाह ने सांसदों को जवाब देते हुए कहा था कि ‘नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है।’ इस बयान के खिलाफ सोमवार को विपक्षी सांसदों ने संसद की बैठक में विरोध किया। नेपाली कांग्रेस की सांसद वासना थापा ने नेपाल द्वारा भारत की जमीन अतिक्रमण किए जाने के तथ्य की खोज की थी और अन्य सांसदों ने भी उनका समर्थन किया था। इसके बाद विभिन्न तरफ़ से आपत्ति जताते हुए विपक्षी दलों ने सिंहदरबार में संयुक्त बैठक की। २१ फागुन के चुनाव के बाद यह विपक्षी दल कांग्रेस, एमाले, नेकपा, राप्रपा और श्रम संस्कृति के नेताओं की पहली बैठक थी।

संयुक्त बैठक का प्रभाव संघीय संसद में भी देखा गया, जहां संयुक्त विरोध के कारण संसद अवरुद्ध हो गया। राष्ट्रिय सभा में तो पूरा सदन ही संयुक्त विरोध की स्थिति में है। वहां रास्वपा के ना होने के बावजूद यह माहौल नजर आ रहा है। एमाले राष्ट्रीय सभा संसदीय दल के नेता प्रेमप्रसाद दंगाल ने कहा, ‘इतिहास में कभी किसी ने इस तरह का राष्ट्रद्रोही बयान नहीं दिया, जिसका कोई तथ्य समर्थन न करता हो। इसलिए हम सभी को एक होकर कदम उठाना चाहिए।’ राष्ट्रीय सभा में कांग्रेस, एमाले, नेकपा, जसपा और जनमोर्चा ने संयुक्त बैठक कर प्रधानमंत्री के बयान को सुधारने के लिए दबाव डालने का निर्णय लिया है।

हिमालय एयरलाइन्स首次启动काठमाडौं-सेन्जेन सीधा उड़ान सेवा

हिमालय एयरलाइन्स ने ४ जून २०२६ से काठमाडौं और चीन के सेन्जेन शहर के बीच सीधी उड़ान शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सेन्जेन बाओआन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सप्ताह में दो बार सीधी उड़ानें संचालित करेगी। ये उड़ानें प्रत्येक मंगलवार और गुरुवार को काठमाडौं से प्रस्थान कर बुधवार और शुक्रवार को वापस आएंगी।

नेपाल के निजी क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन हिमालय एयरलाइन्स ने काठमाडौं-सेन्जेन के बीच सीधा उड़ान संचालन का प्रस्ताव रखा है। इसे नेपाल की नागरिक उड्डयन इतिहास में महत्वपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया है। कंपनी अपार मांग को ध्यान में रखते हुए भविष्य में काठमाडौं-सेन्जेन-काठमाडौं मार्ग पर और उड़ानें बढ़ाने की योजना बना रही है, और फिलहाल सप्ताह में दो उड़ानें संचालित कर रही है।

हिमालय एयरलाइन्स के उपाध्यक्ष विजय श्रेष्ठ ने नई उड़ान शुरू होने पर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, ‘हिमालय एयरलाइन्स हमेशा चीन के नए गंतव्यों की खोज कर नियमित उड़ानें संचालित करता रहा है, इसलिए नए बाजार की पहचान में हमारा योगदान महत्वपूर्ण है।’ काठमाडौं-सेन्जेन-काठमाडौं मार्ग पर शुरू हुई यह उड़ान दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंध मजबूत करने, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने में सहायक होगी। इस रूट पर बुकिंग खुल चुकी है।

आइतबार विद्यालय सञ्चालन भएपछि शिक्षा मन्त्रालयद्वारा संघीय मामिला मन्त्रालयलाई सहयोगको अनुरोध

१८ जेठ, काठमाडौं । संघीय सरकारले निर्णय गरेबमोजिम देशभर आइतबार पनि विद्यालय सञ्चालन भएपछि शिक्षा मन्त्रालयले संघीय मामिला मन्त्रालयलाई सहयोगको आग्रह गरेको छ। शिक्षा तथा खेलकुद मन्त्रालयले शनिबार र आइतबार विद्यालय बन्द गराउन स्थानीय तहसँग समन्वय र सहजीकरणको लागि भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयलाई पत्र पठाएको छ।

संघीय मामिला मन्त्रालयले स्थानीय तहमा प्रमुख प्रशासकीय अधिकृत खटाउनेदेखि प्रदेश तथा स्थानीय सरकारसँग समन्वय गर्ने भूमिका निर्वाह गर्दछ। यसैले शिक्षा मन्त्रालयले जेठ ११ गते मन्त्रिस्तरीय निर्णयअनुसार संघीय मामिला मन्त्रालयलाई स्थानीय तहसँग समन्वय गर्न अनुरोधसहित परिपत्र जारी गरेको छ। उक्त पत्र हालसालै सार्वजनिक भएको छ।

पत्रको शीर्षक ‘विद्यालय सञ्चालनमा एकरूपता कायम गर्ने सम्बन्धमा’ राखिएको छ। पत्रमा उल्लिखित छ, ‘नेपाल सरकारको निर्णयअनुसार मिति २०८२/१२/२३ गतेदेखि लागू हुने गरी सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक निकाय र शैक्षिक संस्थाहरूमा शनिबार र आइतबार बिदा दिने निर्णयमा शैक्षिक संस्था पनि समावेश छन्। त्यसै अनुसार सम्पूर्ण स्थानीय तहलाई देशभरिका विद्यालयहरूमा उक्त निर्णय एकरूप रूपमा लागू गरी सार्वजनिक बिदा सुनिश्चित गर्ने समन्वय र सहजीकरण गर्न अनुरोध गर्दछौं।’

संघीय सरकारले हप्तामा दुई दिन विद्यालय बन्द गर्ने निर्णय गरेपछि पठनपाठनमा असर पर्ने र विद्यालयको शैक्षिक क्यालेन्डरमा प्रभाव पर्ने चिन्ता व्यक्त भइरहेका छन्। तर धेरै स्थानीय तहहरूले संघीय सरकारको निर्णय उल्लंघन गर्दै आइतबार पनि विद्यालय सञ्चालन गराइरहेका छन्।