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लेखक: space4knews

संसद्‌मा सभामुख र सांसदहरूलाई समान कुर्सी – Online Khabar

सभामुख एवं सांसदों के लिए संसद में समान स्तर की कुर्सी व्यवस्था

समाचार सारांश शैक्षणिक समीक्षा के बाद तैयार किया गया। सभामुख डोलप्रसाद अर्याल के सुझाव के अनुसार प्रतिनिधि सभा हॉल में सभामुख और सांसदों के लिए समान प्रकार की कुर्सी व्यवस्था की गई है। प्रतिनिधि सभा की सोमवार को हुई बैठक में 21 सदस्यीय कार्यव्यवस्था परामर्श समिति का गठन किया गया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद गणेश पराजुली की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति का गठन किया गया। 23 चैत्र, काठमांडू।

प्रतिनिधि सभा हॉल में सभामुख और सांसदों के लिए समान प्रकार की कुर्सियाँ रखी गई हैं। पहले सभामुख को विशेष प्रकार की कुर्सी दी जाती थी। इस बार भी सभामुख चुनाव से पहले सभामुख और सांसदों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार की कुर्सियाँ रखी गई थीं। लेकिन सभामुख डोलप्रसाद अर्याल के आने के बाद सभामुख और सांसदों के लिए समान प्रकार की कुर्सी व्यवस्था की गई है। संघीय संसद सचिवालय के सहसचिव एवं प्रवक्ता एकराम गिरी के अनुसार, ‘सभामुख ने समान कुर्सी व्यवस्था का आग्रह किया, इसलिए रंग में फर्क रखते हुए सभामुख और सांसदों के लिए समान कुर्सियाँ रखी गई हैं।’

सोमवार को हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में दो अलग-अलग समितियाँ गठित की गईं। 21 सदस्यीय कार्यव्यवस्था परामर्श समिति का गठन किया गया है। इस समिति में अचुतम लामिछाने, अप्सना बानु, आरेन राई, केपी खनाल, कामिनी चौधरी, क्रान्तिशिखा धिताल, खुश्बु ओली, गणेशसिंह ठगुन्ना, गुरुप्रसाद बराल, गंगालक्ष्मी अवाल, तपेश्वर यादव, देवराज पाठक, नरेन्द्रकुमार केरुङ, प्रकाशचन्द्र परियार, निशा डाँगी, बोधनारायण श्रेष्ठ, मीनाकुमारी यादव, युवराज दुलाल, राजन गौतम, डा. राम लामा और विपिनकुमार आचार्य सदस्य हैं। इसी तरह, सोमवार के प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति का भी गठन किया गया। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद गणेश पराजुली की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति के सदस्यों में डा. ओजश्वी शेरचन, ऐन महर, खुश्बु ओली, खगेन्द्र सुनार, गजलासमिम मिश्रानी, तपेश्वर यादव, ध्रुवराज राई, निशा डाँगी, निश्कल राई, वलावती शर्मा, मधु चौलागाईं, रेखाकुमारी यादव, यज्ञमणि न्यौपाने और सुलभ खरेल शामिल हैं। समिति की अवधि 14 दिन निर्धारित की गई है।

१४ नाउर और १० झारल का शिकार जारी

समाचार सारांश

  • ढोरपाटन शिकार अभयारण्य में फागुन–वैशाख के दूसरे शिकार मौसम में विदेशी शिकारी नाउर, झारल और बँदेल का शिकार कर रहे हैं।
  • इस वर्ष 14 नाउर, 10 झारल और 13 बँदेल के शिकार की अनुमति दी गई है, और विदेशी शिकारी प्रतिस्पर्धा के आधार पर अनुमति प्राप्त कर रहे हैं।
  • अभयारण्य की सुरक्षा नेपाली सेना २०७३ साल से कर रही है, और शिकारी आमतौर पर करीब 30 से 35 लाख खर्च करते हैं।

23 चैत, बागलुङ। बागलुङ के ढोरपाटन में इस समय दूसरा शिकार मौसम चल रहा है। इस दौरान विदेशी पर्यटक सक्रिय रूप से शिकार में लगे हुए हैं।

नेपाल के एकमात्र शिकार अभयारण्य ढोरपाटन में विदेशी उच्च पहाड़ी क्षेत्रों के शिकार ब्लॉकों में हैं। इस वर्ष 14 नाउर और 10 झारल के शिकार की अनुमति दी गई है, जिसका जानकारी ढोरपाटन शिकार अभयारण्य के रेंजर सागर सुवेदी ने दी है।

फागुन–वैशाख के दूसरे शिकार मौसम में कई शिकारी ढोरपाटन में शिकार में व्यस्त हैं, जबकि कुछ विदेशी शिकारी नेपाल आने की तैयारी कर रहे हैं।

रेंजर सुवेदी के अनुसार, इस वर्ष के दूसरे मौसम में 13 बँदेल के शिकार की अनुमति भी दी गई थी। ढोरपाटन अभयारण्य ने विभिन्न शिकार ब्लॉकों में वन्य प्राणी विभाग के अनुमति से शिकार की अनुमति प्रदान की है।

ग्लोबल सफारी प्रालि के माध्यम से आए अमेरिकी नागरिकों ने एक नाउर और एक झारल का शिकार कर वापस लौट गए हैं, जबकि हिमालयन सफारी नेपाल के जरिए आए अमेरिकी और डेनिश नागरिक शिकार में लगे हुए हैं, जैसा कि सुवेदी ने बताया।

विदेशी शिकारी नाउर और झारल के शिकार के लिए प्रतिस्पर्धा के जरिए राजस्व चुका कर अनुमति प्राप्त करते हैं। दूसरे मौसम के दौरान अभयारण्य के कर्मचारी और नेपाली सेना शिकार ब्लॉक में शिकारी के साथ सक्रिय रहते हैं।

दूसरे मौसम में हिमालयन वाइल्ड लाइफ आउटफिटर के माध्यम से डेनिश नागरिक को फागुने ब्लॉक में एक नाउर, एक झारल और एक बँदेल का शिकार करने की अनुमति मिली है।

साथ ही, ओपन नेपाल वाइल्ड लाइफ सफारी एंड ट्रेक प्रालि के माध्यम से अमेरिका, बेल्जियम और फ्रांस के नागरिकों को सुनदह और सेङ ब्लॉक में तीन नाउर, दो झारल और एक बँदेल के शिकार की अनुमति मिली है।

इसी प्रकार, नेपाल ट्रैवल एक्सपिडिशन प्रालि के माध्यम से घुस्तुङ ब्लॉक में तीन नाउर, तीन झारल और तीन बँदेल के शिकार के लिए रूसी, अफ्रीकी और फ्रांसीसी नागरिक नेपाल आने की तैयारी में हैं।

राष्ट्रीय निकुंज एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग के अनुसार, वर्ष का पहला शिकार मौसम अषाढ़–मंसिर और दूसरा शिकार मौसम फागुन–वैशाख होता है, जिसमें व्यवस्थित तरीके से दो चरणों में शिकार किया जाता है। विदेशी शिकारी सहित समूह को 15 दिनों में निर्धारित ब्लॉक में शिकार करना आवश्यक होता है।

जंगल में आवास करने वाले शिकारी अभयारण्य में प्रवेश के बाद केवल निर्धारित समय में ही शिकार कर सकते हैं। साहसिक यात्रा और रोमांचकारी शिकार अनुभव के लिए ढोरपाटन विदेशी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय गंतव्य बनता जा रहा है।

राष्ट्रीय निकुंज एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग हर मौसम में इलेक्ट्रॉनिक बोली के माध्यम से शिकार कोटा और राजस्व दर निर्धारित करता है।

ग्लोबल सफारी प्रालि के माध्यम से सुनदह और दोगाड़ी ब्लॉक में अमेरिकी और डेनिश नागरिकों को चार नाउर, दो झारल और चार बँदेल के शिकार की अनुमति मिली है।

हिमालयन सफारी नेपाल प्रालि के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को दो नाउर, एक झारल और दो बँदेल के शिकार की अनुमति मिली थी, जिसमें एक नाउर और एक झारल का शिकार हो चुका है। ट्रेक एंड डीलर्स प्रालि के जरिए स्पेनिश नागरिक को एक झारल, एक नाउर और एक बँदेल की अनुमति मिली है, जैसा कि सुवेदी ने बताया।

इस वर्ष के पहले शिकार मौसम में लगभग तीन करोड़ तीन लाख राजस्व संकलित हुआ है और दूसरे मौसम में शिकारी आने का सिलसिला जारी है, जिससे राजस्व संकलन हो रहा है।

शिकारी पिछले फागुन के दूसरे सप्ताह से बन्दोबस्ती सामग्री समेत नेपाल आना शुरू कर चुके हैं। विदेशी शिकारी अक्सर हेलीकॉप्टर के माध्यम से सीधे शिकार ब्लॉक पहुंचते हैं।

2044 साल में स्थापित यह शिकार अभयारण्य पूर्वी रुकुम, बागलुङ और म्याग्दी जिलों में फैला हुआ है, लेकिन इसका मुख्यालय बागलुङ के ढोरपाटन घाटी में स्थित है।

शिकार करते समय नेपाली सहयोगी और अभयारण्य के कर्मचारी भी विदेशी शिकारी के साथ कार्यरत होते हैं। विभाग हर वर्ष नाउर और झारल के शिकार कोटे का निर्धारण करता है।

नाउर और झारल के मूल्य, ब्लॉक रिजर्वेशन, लाइसेंस, हेलीकॉप्टर और अन्य बन्दोबस्ती सामग्री तैयार करने में एक व्यक्ति लगभग 30 से 35 लाख रुपये खर्च करता है।

शिकार का अवसर केवल विदेशी और धनाढ्य व्यक्तियों के लिए ही उपलब्ध है और नेपाली इस अवसर से वंचित हैं। अभयारण्य की सुरक्षा २०७३ साल से नेपाली सेना द्वारा की जा रही है।

ढोरपाटन में शिकार के बाद नाउर के साथ तस्वीरें लेते विदेशी पर्यटक। तस्वीर: ढोरपाटन शिकार अभयारण्य

राष्ट्रिय सभाको उपाध्यक्ष पदमा निर्वाचित हुईन् एमालेकी लिला भण्डारी (फोटोहरू सहित)

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा के बाद तैयार।

  • राष्ट्रिय सभा उपाध्यक्ष पद के लिए नेकपा एमाले की सांसद लिलाकुमारी भण्डारी सोमवार के बैठक में निर्विरोध निर्वाचित हुईं।
  • माघ ११ को सम्पन्न राष्ट्रिय सभा निर्वाचन में वह सुदूरपश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं।
  • राष्ट्रिय सभा के सदस्य उन्हें बधाई दे चुके हैं।

२३ चैत, काठमाडौं। राष्ट्रिय सभा के उपाध्यक्ष पद पर नेकपा एमाले की सांसद लिलाकुमारी भण्डारी निर्वाचित हुई हैं। सोमवार को आयोजित राष्ट्रिय सभा की बैठक में उन्हें निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया।

माघ ११ को सम्पन्न राष्ट्रिय सभा के चुनाव में वह सुदूरपश्चिम प्रदेश से निर्वाचित हुई थीं। राष्ट्रिय सभा के सदस्यों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

पाकिस्तान का प्रस्ताव: आज ही युद्धविराम की संभावना

२३ चैत, काठमांडू। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तीव्र संघर्ष को रोकने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने एक विशेष योजना पेश की है, जिसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ नाम दिया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, यदि यह योजना सफल होती है तो सोमवार से ही तत्काल युद्धविराम लागू होगा और विश्व के महत्वपूर्ण व्यावसायिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पुनः संचालित होगा। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुल्ला ने रविवार रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी भान्स, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची से बातचीत करने के बाद यह मसौदा तैयार किया है।

इस प्रस्तावित समझौते में दो चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में आज ही से तुरंत युद्धविराम लागू करने और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ खोलने पर सहमति बनी है। दूसरे चरण में अगले १५ से २० दिनों के भीतर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रत्यक्ष वार्ता कर दीर्घकालीन शांति समझौते को अंतिम रूप देने की योजना है। इस व्यापक समझौते में ईरान को परमाणु हथियार निर्माण नहीं करने का वचन देना होगा, जबकि इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने और रोके गए ईरानी संपत्तियों को मुक्त कराने की शर्त रखेगा।

ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे अमेरिका और इज़रायल से भविष्य में पुनः आक्रमण न होने की पूर्ण गारंटी के साथ दीर्घकालीन युद्धविराम चाहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई दिनों से युद्ध समाप्ति के लिए कड़ा दबाव डाला है, वहीं पाकिस्तान, चीन और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थकर्ताओं ने भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई है। अभी तक ईरान और अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों ने कहा है कि आज ही एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर होने की संभावना प्रबल है। छः सप्ताह से जारी इस युद्ध ने विश्व बाजार में तेल की कीमतों और सुरक्षा क्षेत्र में गंभीर संकट उत्पन्न किया है, जिससे इस कूटनीतिक पहल को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है।

पुरानी सवारी को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करने के लिए मानक बनाए जा रहे हैं, साझा यातायात का अनुभव ऐसा है

साझा यातायात की बस

तस्वीर स्रोत, SAJHA YATAYAT

तस्वीर का कैप्शन, साझा यातायात ने हाल ही में अपनी एक पुरानी बस को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित किया है

डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान करने के बारे में मंत्रिपरिषद् ने निर्णय लिया है, जिसके तहत भौतिक पूर्वाधार और यातायात मंत्रालय आवश्यक मानक तैयार करने की तैयारी में है, ऐसा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया है।

“परिवर्तन करना है लेकिन किस-किस वाहन को करना है और क्या-क्या बदलाव अनुमत होंगे, इसके लिए मानक आवश्यक हैं। इसके लिए हम यातायात व्यवस्था कार्यालय को निर्देश देंगे,” मंत्रालय के प्रवक्ता रामहरी पोखरेल ने कहा।

उनके अनुसार यह प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पालन करनी होगी, इसलिए फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि मानक पूरी तरह तैयार हो चुके हैं।

पहले के अंतरिम कानूनी प्रावधानों के तहत भी पेट्रोलियम से चलने वाले वाहन इलेक्ट्रिक में बदलने का प्रयास किया गया था।

पोखरेल ने कहा कि नए यातायात व्यवस्था अधिनियम में इस विषय को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

भैरहवा एयरपोर्टबारे भारतसँग हवाई रुटको कुरा गर्नुस् – Online Khabar

भैरहवा विमानस्थल के संबंध में भारत के साथ हवाई मार्ग की बातचीत करें

समाचार सारांश

  • पूर्वअर्थ मंत्री वर्षमान पुन ने प्रधानमंत्री बालेन शाह को भैरहवा अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल को तुरंत संचालन में लाने का सुझाव दिया।
  • पुन ने दांग के कोइलाबास–रोल्पा–रुकुम होते हुए डोल्पा से जोड़ने वाले शहीद मार्ग के निर्माण के लिए बजट व्यवस्था करने का आग्रह किया।
  • उन्होंने रोल्पा स्थित माडी बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना के काम को आगे बढ़ाने और गण्डकी आर्थिक त्रिभुज परियोजना को पुनः सक्रिय करने की मांग की।

३ चैत्र, काठमाडौँ। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के नेता एवं पूर्वअर्थ मंत्री वर्षमान पुन ने प्रधानमंत्री बालेन शाह को विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सुझाव दिए हैं।

प्रधानमंत्री शाह ने सोमवार को लुम्बिनी प्रदेश से निर्वाचित प्रतिनिधि सभा के सदस्यों से चर्चा की। इस चर्चा में शामिल पुन ने अपने निर्वाचित क्षेत्र रोल्पा और लुम्बिनी प्रदेश के वर्तमान विकास कार्यों तथा कुछ नई परियोजनाओं को प्राथमिकता देकर काम करने हेतु प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

पुन ने भैरहवा क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल को तुरंत संचालन में लाने पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालन के लिए भारत से हवाई मार्ग संबंधी कूटनीतिक वार्ता में देरी न करने का आग्रह किया।

“भैरहवा विमानस्थल में श्रम डेस्क स्थापित करके नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू की जानी चाहिए ताकि पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जा सके,” पुन ने कहा, “मैं सम्माननीय प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग के लिए भारत के साथ कूटनीतिक पहल आवश्यक है।”

उन्होंने दांग के कोइलाबास–रोल्पा–रुकुम मार्ग से डोल्पा को जोड़ने वाले शहीद मार्ग के निर्माण में तेजी लाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह सड़क उत्तर में पड़ोसी चीन की सीमा तक पहुंच प्रदान करती है और इसकी सामरिक महत्ता है। उन्होंने शहीद मार्ग के घोराही–होलेरी खंड का कालोपत्रण तथा रोल्पा के सुलीचौर से उवास तक के भाग के स्तरोन्नयन के लिए बजट आवंटन करने का अनुरोध किया।

पुन ने रोल्पा में स्थित माडी बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना के निर्माण को आगे बढ़ाने की भी सरकार से मांग की। रोल्पा नगरपालिकाओं १ और २ में माडी नदी को रोककर बहुउद्देश्यीय जलविद्युत आयोजन का निर्माण सरकारी स्वामित्व वाली हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी एंड इंवेस्टमेंट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड तथा चीन की पावर कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन के संयुक्त निवेश से कार्य प्रारंभ करने के तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, पर निर्माण कार्य रुका हुआ है।

उन्होंने कहा कि जब वे अर्थ मंत्री थे तब आर्थिक वर्ष ०८१/०८२ के बजट में शामिल गण्डकी आर्थिक त्रिभुज परियोजना को पुनः सक्रिय करना आवश्यक है। इस त्रिभुज परियोजना के तहत भरतपुर, बुटवल और पोखरा को तीन कोणों में रखकर निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में नमूना विकास अभियान शुरू किया जाए ताकि एक नया आर्थिक केंद्र विकसित हो सके, जो देश की समग्र अर्थव्यवस्था में ‘गेम चेंजर’ सिद्ध हो सकता है।

त्रिभुज परियोजना के अंतर्गत नारायणगढ–बुटवल खंड को निर्माण सामग्री तथा भारी उद्योग केंद्र, मुग्लिन–पोखरा खंड को कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग केंद्र, तथा पोखरा–बुटवल खंड को विद्युत उपकरण, जूता, वस्त्र, कार्पेट और घरेलू उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के उद्योग केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना थी। परन्तु १७ असार ०८१ को कांग्रेस और एमाले के बीच सत्ता समीकरण तथा सात बिंदु समझौते के बाद पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड नेतृत्व वाली सरकार को हटाकर बने केपी ओली नेतृत्व वाली सरकार ने बजट संशोधित कर इस परियोजना को रद्द कर दिया।

इसी तरह, पुन ने लुम्बिनी प्रदेश की उपजाऊ भूमि का सदुपयोग करते हुए सिंचाई, उर्वरक, बीज, आधुनिक कृषि उपकरण और बाजार प्रबंधन सहित एकीकृत विकास परियोजना लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने १६५ निर्वाचन क्षेत्रों में सांसदों की सिफारिश के आधार पर समानुपातिक वितरण से कुछ परियोजनाएं अलग करने की मांग की और पूर्व के समान व्यवस्था बनाए रखने का स्मरण भी कराया।

इवेंट आर्किटेक्चर में आरजी क्रिएशन्स का उदय

आरजी क्रिएशन्स ने नेपाली विवाह और भोज स्थलों को परंपरा और आधुनिकता के संयोजन में “अनुभव” सृजन करने वाली जगहों में परिवर्तित किया है। कंपनी की डिज़ाइन फिलॉसफ़ी सौंदर्य, कार्यक्षमता और सांस्कृतिक सामंजस्य पर आधारित है और इसने पाँच सितारा होटलों के बजाय बैंक्वेट को प्राथमिकता दी है। आरजी क्रिएशन्स ने नेपाल के प्रमुख शहरों में अपने सेवाओं का विस्तार करते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रवेश कर लिया है और पुराने पार्टी पैलेसों को रिनोवेट करके नया जीवन दिया है।

काठमांडू में, दो दशक पहले नेपाली विवाह या भोज का दृश्य आमतौर पर एक जैसा होता था – खुले मैदान या विद्यालय के प्रांगण में ज़मीन पर बैठे हुए, टपरी में भोजन की व्यवस्था। समय के साथ यह परिदृश्य धीरे-धीरे बदलता गया। कर्कटपाट से बने टेंट, रंगीन बत्तियों और कपड़ों की सजावट के साथ अस्थायी संरचनाओं ने कुछ समय के लिए “आधुनिकता” की अनुभूति दी। लेकिन पिछले पांच वर्षों में आए बदलाव गुणात्मक और व्यापक हैं। आज के विवाह, पार्टी या विशेष समारोह सिर्फ मिलन स्थल नहीं हैं, बल्कि वे “अनुभव” सृजन करने वाले स्थल बन चुके हैं।

आरजी क्रिएशन्स के कार्यकारी अध्यक्ष राम गिरी के अनुसार, परिवर्तन की शुरुआत एक सरल लेकिन गहरी प्रश्न से हुई – हमारी परंपराएँ इतनी समृद्ध हैं तो उत्सव स्थल क्यों सामान्य होने चाहिए? इसलिए कंपनी “भवन निर्माण” से आगे बढ़कर “अनुभव निर्माण” पर जोर दे रही है। गिरी कहते हैं, “पहले पार्टी पैलेस मतलब केवल बड़े हॉल को समझा जाता था जहां लोग इकट्ठा होते थे, हमने इसे सुंदर, भव्य, आकर्षक, सुरक्षित और सहज प्रबंधन योग्य पूर्ण अनुभव के संयोजन में रूपांतरित करने का प्रयास किया।”

आरजी क्रिएशन्स की डिज़ाइन फिलॉसफ़ी तीन मुख्य आधारों पर टिकी है – सौंदर्य, कार्यक्षमता और सांस्कृतिक सामंजस्य। कंपनी के बनाए गए स्थलों में शास्त्रीय भव्यता और नेपालीपन का सम्मिश्रण दिखाई देता है। गिरी के अनुसार, किसी भी स्थल की सफलता उसमें जोड़े जाने वाले नए कॉन्सेप्ट और कंटेंट पर निर्भर करती है। इसलिए कंपनी ने अपने इंजीनियरों को विदेश में प्रशिक्षण दिलवाकर नवीनतम ज्ञान और कौशल प्राप्त करने का इंतजाम किया है।

आरजी क्रिएशन्स परियोजना के पूरे चक्र (कॉन्सेप्ट विकास से लेकर डिज़ाइन, निर्माण और संचालन प्रबंधन तक) में एकीकृत सेवा प्रदान कर रहा है। कंपनी पुराने और “आउटडेटेड” पार्टी पैलेसों को आधुनिक स्वरूप में “रिनोवेट” कर नए जीवन दे रही है। इसने यह रास्ता दिखाया है कि नेपाली उत्सव अब केवल मनाने की घटनाएँ नहीं बल्कि “अनुभव” करने के माध्यम के रूप में स्थापित हो रहे हैं।

पर्सा के लेखापढ़ी व्यवसायियों ने धरपकड़ के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की

पर्सा के लेखापढ़ी व्यवसायियों ने सरकारी कार्यालयों में बिचौलियाओं के खिलाफ चल रही धरपकड़ के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। पोखरिया मालपोत कार्यालय से तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद व्यवसायियों ने अपना असंतोष जताते हुए आंदोलन का आगाज किया है। पर्सा में 121 भू-सेवा केंद्र और 400 से अधिक लेखापढ़ी व्यवसायी सक्रिय हैं और हड़ताल के कारण सेवाग्राही एवं सरकारी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

23 चैत्र, वीरगंज। सरकारी कार्यालयों में बिचौलियाओं पर हो रही धरपकड़ के विरोध में पर्सा के लेखापढ़ी व्यवसायियों ने जिले भर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है। नेपाल लेखापढ़ी कानूनी व्यवसायी एसोसिएशन पर्सा के आह्वान पर आज से मालपोत, नापी, भूमिसुधार, अदालत और जिला प्रशासन कार्यालयों में सेवा दे रहे लेखापढ़ी व्यवसायियों ने कार्य पूरी तरह ठप कर दिया है।

एसोसिएशन पर्सा के अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रसाद यादव के अनुसार, हाल के दिनों में बिचौलियाओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों के चलते हुई गिरफ्तारी और कारवाई के प्रति असंतोष प्रकट करते हुए यह आंदोलन शुरू किया गया है। विशेष रूप से पोखरिया मालपोत कार्यालय से तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद व्यवसायी और भी अधिक आक्रोशित हो गए हैं। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर संचालित भू-सेवा केंद्र और लेखापढ़ी व्यवसायियों के खिलाफ अन्यायपूर्ण कारवाई का आरोप लगाया है।

गिरफ्तार व्यक्तियों को तुरंत रिहा करने की मांग के साथ, व्यवसायियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों पर कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन के अनुसार, पर्सा जिले में वर्तमान में 121 भू-सेवा केंद्र और 400 से अधिक लेखापढ़ी व्यवसायी सक्रिय हैं। हड़ताल के कारण सेवाग्राही प्रभावित हो रहे हैं तथा सरकारी कार्यालयों का कार्य भी बाधित हो गया है।

प्रतिनिधिसभाको नयाँ नियमावली बनाउन मस्यौदा समिति गठन, सभापतिमा गणेश पराजुली

प्रतिनिधिसभाको नयाँ नियमावली तयार पार्न १५ सदस्यीय मस्यौदा समिति गठन, गणेश पराजुली सभापति चुनिएका

२३ चैत, काठमाडौं । प्रतिनिधिसभाको नयाँ नियमावली तयार गर्ने उद्देश्यले मस्यौदा समिति गठन गरिएको छ। सोमबार सम्पन्न प्रतिनिधिसभाको बैठकमा रास्वपाका सांसद कविन्द्र बुर्लाकोटीले प्रस्ताव प्रस्तुत गरेका थिए, जुन सभाले अनुमोदन गर्यो।

संसदमा प्रतिनिधित्व गर्ने सबै पार्टीका सांसदहरूलाई समेटेर १५ सदस्यीय समिति गठन गरिएको छ। समितिको सभापतिमा गणेश पराजुली चयन भएका छन्।

समितिका सदस्यहरूमा ओजस्वी शेरचन, खगेन्द्र सुनार, खुस्बु ओली, गजला समिम मिकरानी, तपेश्वर यादव, ध्रुवराज राई, निशा डाँगी, निश्कल राई, वलावती शर्मा, मधु चौलागाईं, यज्ञमणि न्यौपाने, रेखा कुमारी यादव र सुलभ खरेल रहेका छन्।

सरकार विदेशी और आंतरिक रोजगार के लिए ‘एकद्वार प्रणाली’ के तहत प्रशिक्षण देने की तैयारी में

सरकार आंतरिक और विदेशी रोजगार के लिए एक ही छत के नीचे प्रशिक्षण संचालन करने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान ने पाँच वर्षीय रणनीतिक योजना २०२६–३१ के अंतिम चरण में प्रवेश किया है। सातों प्रदेशों में व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर प्रशिक्षण प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत किया जाएगा। काठमांडू, २३ चैत्र। सरकार अब आंतरिक रोजगार के लिए ही नहीं बल्कि विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों के लिए भी एक छत के नीचे प्रशिक्षण देने का योजना बना रही है। इसके लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान पाँच वर्षों की रणनीति बना रहा है। अब तक आंतरिक रोजगार लक्षित प्रशिक्षण देते रहे संस्थान ने अब विदेशी रोजगार लक्षित कौशल आधारित प्रशिक्षण भी शुरू करने के लिए अपनी संरचना और कार्यक्षेत्र का विस्तार किया है।

दीपककुमार साह के श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री नियुक्त होने के बाद पहले निर्णय के तौर पर राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से दक्ष जनशक्ति निर्माण के लिए ‘रणनीतिक योजना २०२६–३१’ तैयार करना था। संस्थान के कार्यकारी निदेशक रमेशकुमार बखती के अनुसार यह रणनीतिक योजना फिलहाल अंतिम चरण में है और शीघ्र ही इसका अंतिम रूप दिया जाएगा। ‘अब तक स्वदेशी और आंतरिक रोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया गया, परन्तु अब धीरे-धीरे विदेशी रोजगार जाने वालों को भी प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है,’ बखती ने बताया।

वर्तमान में इटहरी, बुटवल, भैंसेपाटी सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रशिक्षण केंद्र ministry के अधीन स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहे थे। नई संरचना के अनुसार सातों प्रदेशों में एक-एक व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे और उन्हें सभी राष्ट्रीय संस्थान के अधीन लाया जाएगा। ‘राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान विकास समिति गठन आदेश २०८०’ के बाद संस्थान के कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ है। इसी संदर्भ में विदेशी रोजगार से संबंधित प्रशिक्षण शामिल करने के लिए नई रणनीतिक योजना आवश्यक हुई, इसलिए यह योजना तैयार की गई है। अब प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाओं को न केवल आंतरिक बल्कि विदेशी रोजगार के लिए आवश्यक पूर्वाधार भी विकसित करना होगा।

संस्थान ने बताया कि गंतव्य देशों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, प्रौद्योगिकी और कार्यप्रणाली के अनुसार प्रशिक्षण देना होगा, इसलिए मानक निर्माण किया जा रहा है। नई संरचना में स्थानांतरित होने के बाद संस्थान का कार्यक्षेत्र भी बढ़ा है। इसी के अनुरूप तकनीकी सहयोग के साथ नई रणनीतिक योजना तैयार की जाएगी। मंत्री साह के निर्णय के बाद आवश्यक संशोधनों के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। विदेश से लौटे कामगारों और संबंधित देशों की संस्थाओं के साथ समन्वय करके आवश्यक कौशल, अभ्यास और पूर्वाधार का अध्ययन कर मानक तैयार किए जाएंगे।

इसके लिए सरकार रोजगारदाता संघ, नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ आदि के साथ सहयोग कर प्रशिक्षण के विषय निर्धारित करने की रणनीति बना रही है। निजी क्षेत्र से यह ज्ञात किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में किस प्रकार की जनशक्ति की आवश्यकता है। तदनुसार पाठ्यक्रम तैयार कर प्रशिक्षण से लेकर रोजगार तक निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे प्रशिक्षण प्राप्त लोगों को सीधे रोजगार से जोड़ना आसान होगा, ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया है। फिलहाल कई निजी प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाएं हैं जो विदेशी रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों को प्रशिक्षण दे सकती हैं।

फिर भी विदेशी रोजगार लक्षित पूर्वाधार की अतिरिक्त आवश्यकता रहेगी। कोई भी आंतरिक रोजगार केंद्र विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को प्रशिक्षण देगा, लेकिन इसके लिए संबंधित गंतव्य देश की प्रथाओं, तकनीक और उपकरणों के अनुसार पूर्वाधार को विकसित करना होगा। संबंधित गंतव्य देशों की संस्थाओं के साथ समन्वय कर आवश्यक पूर्वाधार और मानकों के अनुसार प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। श्रम मंत्रालय के अधीन संचालित सभी कौशल आधारित प्रशिक्षण को ‘एकद्वार प्रणाली’ में लाने की तैयारी है। वर्तमान में संस्थान को ६ महीने तक कौशल आधारित प्रशिक्षण संचालित करने का अधिकार प्राप्त है और इसी सीमा में प्रशिक्षण का विस्तार किया जाएगा। विदेशी रोजगार जाने वाले श्रमिकों को विदेशी रोजगार बोर्ड के सचिवालय और विभिन्न संघ-प्रतिष्ठान भी प्रशिक्षण प्रदान करते रहे हैं। अब संस्थान के माध्यम से सभी प्रकार के प्रशिक्षण संचालित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। नई रणनीतिक योजना में कौशल-आधारित प्रशिक्षण के साथ-साथ स्किल टेस्टिंग, प्रमाणीकरण, उद्यमशीलता विकास और ‘ग्रीन स्किल’ को प्राथमिकता दी जाएगी। विश्व बाजार की आवश्यकताओं अनुसार जनशक्ति और प्रौद्योगिकी की तुलना में उच्च स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए गृह कार्य जोरों पर है। इस तरह समग्र प्रणाली को एकीकृत करके कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार के बीच संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से रणनीतिक योजना अंतिम चरण में है, संस्थान ने बताया।

निशा डाँगीले भनिन्: दलबीच प्रतिस्पर्धा भए पनि द्वन्द्व हुनु हुँदैन

राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीकी सांसद निशा डाँगीले प्रतिनिधि सभा बैठकमा दलहरूबीच प्रतिस्पर्धा भए पनि द्वन्द्व हुनु हुँदैन भनेर स्पष्ट पारेकी छन्। उनले भनिन्, “हामी यहाँ शासन गर्न होइन, सेवा गर्न आएका छौँ भन्ने भावनाले हरेक कदमलाई मार्गनिर्देशन गर्नुपर्नेछ।” २३ चैत, काठमाडौं।

सोमबारको प्रतिनिधि सभा बैठकलाई सम्बोधन गर्दै उनले राष्ट्रिय हितमा सहकार्य अनिवार्य रहेको र प्रतिस्पर्धा भने रहोस् तर द्वन्द्व हुनु हुँदैन भनीे बताइन्। उनले थपिन्, “विचारमा भिन्नता स्वाभाविक छ, तर राष्ट्रिय हितमा सहकार्य आवश्यक छ।”

सेयर बजारमा आतंकित पार्ने काम भयो, आत्तिनु पर्दैन – Online Khabar

सेयर बजारमा आतंकित बनाउने प्रयास भए पनि डराउनु पर्दैन: अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्ले

अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्लेले सेयर बजारलाई अनावश्यक आतंकित बनाउने प्रयास भइरहेको उल्लेख गर्दै लगानीकर्तालाई शान्त रहन अनुरोध गर्नुभएको छ। सरकारले अनैतिक क्रियाकलाप गर्नेहरूलाई मात्र कानुन अनुसार कारबाही गर्नेछ र सेयर बजारलाई डिजिटलाइजेसनको नमूना क्षेत्र बनाउने योजना रहेको बताउनुभएको छ। वाग्लेले मुलुकलाई ग्रे लिस्टबाट बाहिर निकाल्न प्राथमिकता दिइएको र सम्पत्ति शुद्धीकरण जस्ता विषयमा मात्र तथ्यमा आधारित अनुसन्धान अघि बढाइएको स्पष्ट पार्नुभयो। २३ चैत, काठमाडौं।

अर्थमन्त्री डा. स्वर्णिम वाग्लेले सेयर बजारलाई अनावश्यक आतंकित पार्ने काम भइरहेको स्पष्ट पार्नुभयो। आर्थिक पत्रकार समाज (सेजन) का पदाधिकारीहरूसँगको भेटमा वाग्लेले बजारमा अनावश्यक त्रास फैलाउने प्रयास भइरहेकाले नडराउन आग्रह गर्नुभयो। सरकारले लगानीकर्तामाथि कुनै दण्डात्मक कदम चाल्ने उद्देश्य नराखेको बताउँदै अनैतिक काम गर्नेहरूलाई मात्र कानुन अनुसार कारबाही हुने जानकारी दिनुभयो। “सेयर बजार नेपालका अन्य क्षेत्रको तुलना गर्दा बढी व्यवस्थित र पारदर्शी छ,” उहाँले भन्नुभयो, “पेपरलेस प्रणाली, बैंकमार्फत कारोबार, लाभांश सिधै खातामा पठाउने, कर प्रणाली स्पष्ट तथा किनबेच गर्नेहरूको पहिचान ट्र्याक गर्न सकिने भएकाले यो प्रणाली विश्वसनीय छ।”

सेयर बजारलाई सरकारले डिजिटलाइजेसनको नमूना क्षेत्रका रूपमा लिएको उल्लेख गर्दै, यदि कसैले इन्साइडर ट्रेडिङ, बजार म्यानिपुलेसन वा अन्य अनैतिक क्रियाकलाप गरेको पाइए कानुन अनुसार कारबाही गरिने स्पष्ट पारे। “हाल लगानीकर्ताले प्यानिक हुनु आवश्यक छैन, अघि बढेर सेयर बजार सुधारका लागि पनि काम हुनेछ,” उहाँले भन्नुभयो। नेप्से पुनर्संरचना प्रतिवेदनको अध्ययन गरेर सुधार प्रक्रिया अगाडि बढाइने बताउनुभयो। “राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टीको बाचा पत्रका बुँदा ३३ र ३४ कार्यान्वयन गर्न लागेका छौं, यसले सेयर बजारप्रतिको हाम्रो उदारता झल्काउँछ,” उहाँले उल्लेख गर्नुभयो। बजारमा सुनौलो दिन आउने विश्वास पनि व्यक्त गर्नुभयो। अहिले सरकारको प्राथमिकता मुलुकलाई ग्रे लिस्टबाट बाहिर निकाल्नु रहेको उहाँले बताए। “ग्रे लिस्टबाट देशलाई बाहिर निकाल्ने विषयमा केवल कागजमा मात्र कुरा गर्ने तर व्यवहारमा छैन भन्ने धारणा छ, तर हामी लागू गर्ने चरणमा पुगेका छौं,” उहाँले भन्नुभयो। सम्पत्ति शुद्धीकरण र वित्तीय अपराधमा आधारित प्रमाणका आधारमा मात्रै अनुसन्धान अघि बढाइएको स्पष्ट पार्नुभयो। “संस्था वा व्यक्ति चयन गरेर दुःख दिन हाम्रो कुनै इच्छा छैन। हामी खुला बजारमा आधारित अर्थनीति अपनाउँछौं जुन छाडा अर्थतन्त्र होइन,” उहाँले जोड दिनुभयो। कानूनी प्रक्रिया अदालतबाट हुने भएकाले कसैलाई लक्षित गरेर नभई कानुन अनुसार कारबाही गरिने उहाँको भनाइ छ।

तारागाउँ नेक्स्ट में ‘फर्म्स ऑफ एब्स्ट्रैक्शन’ प्रदर्शनी का शुभारंभ

काठमाडौं। काठमाडौं के बौद्ध स्थित तारागाउँ नेक्स्ट में नेपाली एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग कला को प्रदर्शित करते हुए ‘फर्म्स ऑफ एब्स्ट्रैक्शन’ नामक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। यह प्रदर्शनी गुरुवार से शुरू होकर सोमवार तक जारी रहेगी। सराफ फाउंडेशन फर हिमालयन ट्रेडिशन एंड कल्चर के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में नेपाल के 26 कलाकारों की 49 एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। तारागाउँ नेक्स्ट के निदेशक रोशन मिश्र ने बताया कि नेपाली एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग कला का गहरा संबंध नेपाली इतिहास और परंपराओं से है। उन्होंने कहा, “इतिहास और परंपरा से जुड़ी इस कला को हम सभी के सामने लाना आवश्यक है।” उन्होंने आगे कहा, “इस प्रकार की प्रदर्शनी अद्भुत कलाकारों को पहचान दिलाने और अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”
उन्होंने बताया कि युवाओं में भी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग काफी लोकप्रिय है, इसलिए इस तरह की प्रदर्शनी से ज्ञान और समझ बढ़ाने में मदद मिलती है। निर्देशक मिश्र ने इस प्रदर्शनी को अब तक की सबसे बड़ी और सर्वाधिक प्रतिभागिता वाली प्रदर्शनी बताया।
नेपाली एब्स्ट्रैक्ट कला की शुरुआत 1960 के दशक में लैनसिंह बांदेल ने की थी। पेरिस में आधुनिक कला का अवलोकन कर लौटे बांदेल ने रंग, बनावट और भावनाओं के माध्यम से नेपाल में एक नई कला प्रवाह स्थापित की। इसके बाद गेहेन्द्रमान अमात्य, लक्ष्मण श्रेष्ठ, उत्तम नेपाली, गोविन्द डंगोल, कृष्ण मानन्धर, किरण मानन्धर, लया मैनाली, शरद रंजीत जैसे कलाकारों ने इस कला को निरंतरता दी। प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों ने नेपाल के इतिहास, आध्यात्म, संस्कृति और प्रकृति को रंगों व कलात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। कई कलाकृतियों में ज्यामिति और वास्तुकला के प्रभाव भी दिखाई देते हैं। प्रदर्शनी ने स्वर्गीय लैनसिंह बांदेल, उत्तम नेपाली, बालकृष्ण सम, इन्द्र प्रधान, प्रशांत श्रेष्ठ समेत अमूर्त कला के क्षेत्र में योगदान देने वाले पुरानी पीढ़ी के कलाकारों को विशेष सम्मान से नवाज़ा है।
प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों में बिधाता केसी, नविन्द्रमाण राजभण्डारी, विजय महर्जन, एनबी गुरुङ, विनोद प्रधान, नेमबहादुर तामांग, चन्द्र श्रेष्ठ, प्रमिला बज्राचार्य, गोविन्द डंगोल, रमेश खनाल शामिल हैं। इसके अलावा जीवन राजोपाध्याय, रत्नकाजी शाक्य, किरण मानन्धर, रीता मानन्धर, केके कर्माचार्य, सागर मानन्धर, कृष्ण मानन्धर, संगीत श्रेष्ठ, लया मैनाली, शरद रंजीत, मदन चित्रकार, सुनिता राना, मुकेश मल्ल, सुष्मा राजभण्डारी, नबेन्द्र लिम्बू और विजय थापा भी इस प्रदर्शनी में प्रतिभागी हैं। आयोजकों और निदेशक मिश्र के अनुसार नेपाल में लगभग 65 वर्षों से एब्स्ट्रैक्ट कला का अभ्यास हो रहा है, लेकिन इस क्षेत्र में विशेष चर्चा कम हुई है और ध्यान भी कम मिला है।

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद युवराज दुलाल ने सरकार को समय के बेहतर उपयोग का सुझाव दिया

नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद युवराज दुलाल ने सरकार को समय का सदुपयोग करने और केवल दिखावा करके समय बर्बाद न करने का सुझाव दिया है। उन्होंने प्रतिनिधि सभा की बैठक में कहा, ‘सरकार को मैं कहना चाहता हूँ कि सरकार को कार्य में लगना चाहिए। लेकिन सरकार स्टंट करके समय व्यर्थ न करे।’ २० चैत, राजधानी काठमाडौं में उन्होंने बताया कि उत्पीड़ित वर्गों को अधिकार देने वाला संविधान लागू होने से समानता आएगी।

दुलाल ने कहा कि जब राज्य का समय परीक्षण और दिखावे में बर्बाद होता है तो नवयुवाओं की भावनाओं को संबोधित करना संभव नहीं रहता। उन्होंने कहा कि अतीत में राज्य द्वारा विभेदित वर्गों और समुदायों, खासकर दलित समुदाय से सरकार द्वारा माफी मांगना सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा, ‘उत्पीड़ित वर्गों को अधिकार देने वाला संविधान बना है और उसका सही क्रियान्वयन समाज में समानता लाएगा।’

सभापति के रूप में निर्वाचित डोलप्रसाद अर्याल को शुभकामना देते हुए उन्होंने तटस्थता बनाए रखने की अपेक्षा जताई। ‘यह बहुमत का अस्वाभाविक संचालन स्थल न हो,’ उन्होंने कहा। उनका कहना था कि जेनजी आंदोलन व्यवस्था के खिलाफ नहीं बल्कि स्थिति परिवर्तन के लिए था, इसलिए उसके अनुसार व्यवहार होना चाहिए।

ओली–लेखकको बन्दी प्रत्यक्षीकरण रिटमा सुनुवाइ जारी

ओली और लेखक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सर्वोच्च अदालत में सुनवाई जारी

नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और कांग्रेस नेता रमेश लेखक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई सर्वोच्च अदालत में जारी है। अदालत के न्यायाधीश विनोद शर्मा और सुनिलकुमार पोखरेल की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है। गत भाद्र २३ और २४ को जेनजी आन्दोलन जांच आयोग ने ओली और लेखक के खिलाफ जांच सिफारिश की थी।

आज भी सर्वोच्च अदालत में ओली और लेखक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई जारी है। रविवार को न्यायाधीशों की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई स्थगित की थी। आज पुनः उनकी पीठ में सुनवाई जारी है। जेनजी आन्दोलन की घटना की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की की अध्यक्षता में गठित आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के विरुद्ध जांच की सिफारिश की थी।

दोनो को गत चैत १४ को सुबह गिरफ्तार किया गया था। ओली के पक्ष से उनकी पत्नी राधिका शाक्य तथा लेखक के पक्ष से उनकी पत्नी यशोधा थापा ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।